bahan sex kahani दो भाई दो बहन
04-10-2019, 03:17 PM,
#1
Lightbulb bahan sex kahani दो भाई दो बहन
दो भाई दो बहन 

लेखक राज अग्रवाल

हिन्दी फ़ॉन्ट बाइ मी


राज अपने घर से कुछ दूरी पर बने तालाब के किनारे एक पेड़ की छाया

मे बैठा था. राज एक 21 वर्ष का गथीला नौजवान था. सिर पर

काले घूघराले बाल, चौड़ी बलिश्त छाती और मजबूत बाहें.

ये उसकी पसंदीदा जगह थी. उसे जब भी समय मिलता वो यहीं आकर

बैठता था. यहाँ का शांत वातावरण और एकांत उसे अछा लगता था.

राज ने आगे बढ़कर एक पत्थर को उठा लिया और हवा मे उछालने लगा

जैसे की उसका वजन नाप रहा हो. फिर उसकी निगाह आपने सामने रखे

कुछ पन्नो पर पड़ी, जिनपर सुंदर अक्षरों मे कुछ लिखा हुआ था.

काग़ज़ के पन्ने हवा मे फड़ फाडा रहे थे.

पत्थर के वजन से सन्तूस्त हो उसने वो पन्ने अपनी गोद मे रख लिए

और पत्थर को ठीक उनके बीचों बीच रख कर पन्नो को उस पत्थर से

लपेट दिया. फिर अपनी जेब से एक पतली सी रस्सी निकाल उसने उन पन्नो

को बाँध दिया.

वो अपनी जगह से उठा और तालाब के किनारे पर आकर उस पत्थर को

पानी के बीचों बीच फैंक दिया. पत्थर के फैंकते ही पानी जोरों से

चारों तरफ उछला और वो पत्थर तालाब की गहराइयों मे समाता चला

गया.

राज चुपचाप सोच रहा था कि ना जाने कितने ही ऐसे पन्ने इस तालाब

की गहराईओं मे दफ़न पड़े है. वैसे तो पानी का एक कतरा उन पर

लीखी लकीरो को मिटाने के लिए काफ़ी है पर अगर शब्द सिर्फ़

धुंधले पड़ गये तो वो पढ़ने के लिए काफ़ी होंगे. क्या उसे इन पन्नो

को जला देना चाहिए था जिसपर उसने अपनी कल्पना को एक कहानी की

शक्ल मे अंजाम दिया था.

तभी उसे तालाब के दूसरी तरफ़ से कुछ आवाज़ सुनाई दी. उसने अपनी

बेहन की आवाज़ को तुरंत पहचान लिया. वो तुरत उस पेड़ के पीछे

छिप गया जिससे आनेवाले की नज़र उस पर ना पड़ सके. जैसे ही उसने

अपनी बेहन को देखा जिसने एक सफेद रंग की शॉर्ट्स के उपर एक लाल

रंग का टॉप पहन रखा था उसकी आँखें बंद हो गयी. उसने पेड़ का

सहारा ले लिया और अपने ख़यालों मे खोया अपनी बेहन रोमा की प्यारी

हँसी सुनने लगा.

थोड़ी ही देर मे उसका लंड उसकी शॉर्ट मे तन कर खड़ा हो गया. दिल

मे ज़ज्बात का एक मीठा मीठा दर्द उमड़ने लगा. वो जानता था कि उसे

एक दिन अपनी बेहन को पाना है. रोमा रोज़ अपनी सहेलियों को घर लाकर

उसे चिढ़ाती थी. उसे उसकी इस हरकत पर प्यार आता था पर वो अपनी

बेहन से इससे कहीं ज़्यादा प्यार करता था. वो जानता था कि रोमा की

सब सहेलियाँ उसे लाइन मारती है पर उसकी सब सुंदर सहेलियाँ भी

उसे अपनी बेहन से अलग नही कर सकती थी.

राज का दायां हाथ उसके खड़े लंड पर आ गया. शॉर्ट्स के उपर से ही

वो अपने लंड के सूपदे को मसल्ने लगा. उसके मुँह से एक मादक कराह

निकली तो पेड़ पर बैठे कुछ पंछी उसकी बेहन की दिशा मे उड़ गये.

उसे तुरंत अपनी ग़लती का एहसास हुआ. उसने अपने आप को और पेड़ के

पीछे इस कदर छुपा लिया कि किसी की भी नज़र उस पर ना पड़ सके.

अपने एकांत से संतुष्ट हो उसने अपनी शॉर्ट्स की ज़िप खोली और अपने

खड़े लंड को खुली हवा मे आज़ाद कर दिया. अब वो अपनी आँखे बंद

अपने लंड को मसल्ने लगता है. खुली आँखों की जगह वो बंद

आखों से अपनी बेहन को और ज़्यादा अच्छे रूप मे देख रहा था.

उसने देखा कि उसकी बेहन नंगे पावं घास पर दौड़ रही है. राज अपनी

18 वर्षीया बेहन के पीछे दौड़ रहा है उसे पकड़ने के लिए और

आख़िर मे वो उसे पकड़ ही लेता है. दोनो घास पर गिर जाते है और

रोमा हंस पड़ती है.

थोड़ी देर बाद वो उसके मुलायम पंजो को मसल्ने लगता है. वो खुले

आसमान के नीचे घास पर लेटे उसकी उंगलियों को महसूस कर रही थी.

वो अपनी जादुई उंगलियों से उसकी पैरों की मालिश करने लगा तो वो

सिसक पड़ी और उसकी छोटे छोटे मम्मे टॉप के अंदर उछलने लगे.

उसने उसकी दाँयी टांग को उठा कर अपनी गोद मे रख लिया. इससे उसकी

जंघे थोड़ी फैल गयी और उसकी नज़र ठीक उसकी जांघों के बीच मे

पड़ी. पैर थोड़ा सा उठा हुआ होने की वजह से शॉर्ट्स के अंदर से सब

दीख रहा था. उसने देखा कि उसने काले रंग की पॅंटी पहन रखी

है और उसकी चूत की बारीक़ियाँ पॅंटी के बगल से दिख रही है.

राज अपनी कल्पना को किसी फिल्म की तरह अपने ख़यालों मे देख रहा

था, और उसका हाथ पूरी रफ़्तार से खुद के लंड पर चल रहा था.

अपनी कल्पना मे राज अपने हाथ उसके नाज़ुक पंजो को मसल्ते मसल्ते

उसके घूटनो तक ले आया और वहाँ की मालिश करने लगा. कितनी

सुंदर मुलायम त्वचा थी. घूटनो की मालिश करते करते भी उसकी

निगाह शॉर्ट्स मे दीखती काली पॅंटी पर टिकी हुई थी. घुटनो से आगे

बढ़ कर उसके हाथ अब जाँघो के अन्द्रुनि हिस्सों पर पहुँचे.

जैसे ही उसका हाथ जांघों से थोड़ा उपर पहुँचा उसका शरीर कांप

उठा. एक शांत रज़ामंदी पा उसके हाथ शॉर्ट्स के अंदर उसकी पॅंटी के

किनारे तक पहुँचे तो उसे लगा जैसे कि कोई गरम भाप पॅंटी के

अंदर से उठ रही है.

ये उसकी कल्पना थी. आखरी क्षण मे जब उसके लंड मे उबाल आने

लगा तो उसने यहाँ तक सोच डाला कि वो उसके पैरों के बीच बैठा

अपने लंड को उस छोटे से छेद मे घुसा रहा हो. उसका लंड उस छोटे

छेद की दीवारों को चीरता हुआ अंदर तक घुस रहा है.

तभी उसके लंड ने उबाल खाया और विर्य की एक लंबी पिचकारी सामने

के पत्रों पर गिरने लगी. वो जोरों से अपने लंड को मसल्ते हुए लंड

से आखरी बूँद तक पत्थरो पर फैंकने लगा. उसने अपनी आँखे

खोली और सामने गिरे वीर्य को देखने लगा.

************

"कहाँ है वो?" रोमा ने अपने आप से पूछा. वो और उसकी सहेली गीता

एक दूसरे का हाथ पकड़े तालाब के किनारे तक आ गये थे. उसने अभी

थोड़ी देर पहले उसे तालाब के किनारे बैठे एक पत्थर को तालाब मे

फैंकते देखा था, अब कहाँ चला गया.

"यार मे तो थक गयी हूँ" गीता ने शिकायत की. उसे पता था कि

उसकी कोई अदा कोई तरीका राज को अपनी तरफ आकर्षित करने मे कामयाब

नही हो पाएगी, "मेरी तो समझ मे नही आ रहा कि में क्या करूँ."

"आओ यहाँ तालाब के किनारे बैठते है." रोमा ने कहा.

तालाब के किनारे बैठते ही उसका ध्यान अपने 21 वर्षीया भाई राज पर

आ टिका. कितना अकेला अकेला रहता है वो. वो हमेशा अपनी सहेलियों

को घर लेकर आती जिससे उसका दिल बहल जाए. पर वो है कि अलग

अलग ही रहना पसंद करता है.

रोमा को पता था कि उसका भाई एक प्यारा और जज्बाती इंसान है. वो

अपने कॉलेज की आखरी साल मे थी और राज ग्रॅजुयेशन कर चुका था.

ग्रॅजुयेशन करने के बाद भी उसने अभी तक कोई गर्ल फ़्रेंड नही

बनाई थी. वो इसी उम्मीद से अपनी सहेलियों को घर लाती कि शायद

इनमे से कोई उसके भाई को भा जाए. पर ऐसा ना होने पर अब उसकी

सहेलियों ने भी आना छोड़ दिया था. गीता भी यही शिकायत कर

रही थी. रोमा को सब समझ मे आ रहा था और उसे अपने भाई पर

झुंझलाहट भी हो रही थी और उसकी इस अदा पर प्यार भी आता था.

"सिर्फ़ अपनी स्टुपिड किताब मे कुछ लिखता रहता है." रोमा ने शिकायत

करते हुए कहा.

"राज...और लिखता रहता है?" गीता ने आश्‍चर्या से पूछा.

"हाँ और क्या." रोमा ने कहा, "यही काम है जो वो दिन भर करता

रहता है. ग्रॅजुयेशन के बाद कितना बदल गया है वो. ऐसा लगता

है कि उसकी जिंदगी किसी जगह आकर ठहर गयी है. वो मुझे भी

हर समय नज़र अंदाज़ करता रहता है. समझ मे नही आता की उसे

परेशानी क्या है. "

"क्या लिखता रहता है वो अपनी किताब मे?" गीता ने पूछा.

रोमा ने अपने कंधे उचकते. हुए कहा, "मुझे पता नही. मेने कई

बार जानने की कोशिश कि लेकिन वो अपनी कीताब इस कदर छुपा कर

रखता है कि कुछ पता नही. जब वो लिखना ख़तम कर लेता है तो

उन पन्नो को किताब मे से फाड़ देता है. हज़ारों कहानियाँ लिखी होगी

उसने."

"हो सकता हो कि वो कहानियाँ ना हो, सिर्फ़ डायरी मेनटेन करता हो"

गीता ने कहा.

"हां हो सकता है," रोमा ने इतना कहा ही था कि उसने राज को पेड़ के

पीछे से बाहर आते देखा. पहली बार उसे एहसास हुआ कि वो पेड़ के

पीछे था, पर वो कर क्या रहा था? उसने सोचा.

"शैतान का नाम लो और शैतान हाज़िर है." गीता ने हंसते हुए

कहा, "तुम्हे पता है रोमा अगर ये तेरा भाई अगर मुझे रत्ती भर

भी लिफ्ट देता तो में पहले ही दिन उसे सेंचुरी बनाने का मौका दे

देती."

"चल छीनाल कहीं की." रोमा ने कहा, "अछा एक बात तो बता .

अब तक कितने बॅट्स्मन को बॅटिंग करने का मौका दिया है?"

"वैसे अभी तक तो छीनाल बनी नही हूँ." गीता ने कहा, "पर हां

तेरे भाई के लिए छीनाल बनने को भी तय्यार हूँ, मैं तो बस इतना

कहती हूँ कि मैं अपनी जान देती हूँ इसपर."

"हां ये तो है." रोमा ने अपने भाई की ओर देखते हुए कहा जो तालाब

के राउंड लगाते हुए उनकी तरफ ही आ रहा था.

क्रमशः.............
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गतान्क से आगे.............

रोमा के मन मे जलन सी जाग गयी ये सोच कर कि कितनी लड़कियाँ उसके

भाई पर जान छिड़कती है. उसकी आँखों मे हल्की सी नमी सी आ गयी.

दिल मे एक अजीब सा दर्द सा उठने लगा जो हमेशा किसी वक्त उसके

प्यार से भरा रहता था. अब वो उसपर ध्यान ही नही देता था.

रोमा ने देखा कि राज उनकी तरफ ही बढ़ रहा है. जलन के मारे उसने

गीता को देखा जो घास पर लेटी थी और अपने उठे हुए मम्मे दीखाने

की कोशिश कर रही थी. उसकी चुचियाँ किसी मधुमक्खी के छ्त्ते

की तरह उठी हुई थी जैसे की मक्खियो को न्योता दे रही हो. उसकी

समझ मे नही आ रहा था कि अगर राज ने उसकी तरफ ध्यान दिया और

कुछ कहा तो वो क्या करेगी.

किंतु राज ने ऐसा कुछ नही किया और उसकी बगल से गुज़ारते हुए उसके

सिर को ठप थपाते हुए सिर्फ़ इतना कहा, "अपनी जिंदगी को जीना

सीखो और मेरी जिंदगी मे दखल देना बंद करो."

राज की बात उसके दिल को चुब सी गयी किंतु दिल मे एक अजीब सी खुशी

भी जाग उठी. आज कितने महीनो बाद उसके भाई ने उससे बात की थी.

खुशी की एक हल्की लकीर उसके होठों पर आ गयी.

"में तो अपनी जिंदगी जी रही हूं लेकिन एक तुम हो जो अपनी जिंदगी

से भाग रहे हो..." रोमा ने अपनी खुशी को छुपाते हुए कहा.

राज ने एक राहत की सांस ली. वो हमेशा से डरता था कि अगर वो रोमा

के ज़्यादा करीब रहेगा तो एक दिन उसकी बेहन उसके मन की भावनाओ को

पहचान लेगी. जबसे उसकी कल्पनाओ मे वो आने लगी थी उसने उसके करीब

रहना छोड़ दिया था. एक यही तरीका था उसके पास से अपने ज़ज्बात और

अपनी भावनाओ को छिपाने का. वो अपनी बेहन को बहोत प्यार करता था

और उससे दूर रह कर ही वो एक बड़े भाई का फ़र्ज़ निभा सकता था.

"तुम सच कहती हो रोमा, वो अपनी जिंदगी से भाग ही रहा है." राज

के व्यवहार को देख गीता को एक बार फिर दुख पहुँचा था. उसने

कितना प्रयत्न किया था कि वो राज को आकर्षित कर सके किंतु वो

सफल नही हो पा रही थी.

"रोमा में अब चलती हू सोमवार को सुबह कॉलेज मे मिलेंगे." गीता

इतना कहकर वहाँ से चली गयी.

रोमा ने पलट कर अपने भाई की ओर देखा. राज उसकी नज़रों से ओझल

हो चुका था लेकिन वो अब भी उसके ख़यालों मे बसा हुआ था. उसे लगा

कि वो घूम कर उसके पास आ गया है और उसकी बगल मे घास पर

बैठ गया हो. वो उससे उसके दोस्त, उसकी कॉलेज लाइफ के बारे मे पूछ

रहा है.

उसकी कल्पना मे आया कि अचानक उसका बाँया हाथ उसके दाएँ हाथ से

टकरा गया और उसके बदन मे जैसे बिजली का करेंट दौड़ गया हो.

उसके मन मे आया कि वो उसे सब कुछ बता दे कि किस तरह उसकी कमी

उसके जीवन को खोखला कर रही है, उसे अपना वही पुराना भाई

चाहिए जो पहले था.

* * * * * * * * *

"रोमा ज़रा ये कचरा तो बाहर फैंक देना." उसकी मम्मी ने कहा.

"पर मम्मी ये तो राज का काम है ना." रोमा ने कहा.

"राज घर पर नही है, और तुम घर पर हो इसलिए मुझसे ज़्यादा

बहस मत करो और जाकर कचरा फैंक कर आओ." उसकी मम्मी ने थोड़ा

गुस्सा दिखाते हुए कहा.

बेमन से रोमा ने कचरे की थैली बस्टबिन से बाहर निकाली और बगल

मे रख दी. फिर एक फ्रेश नई थैली डस्ट बिन मे लगा दी तभी उसका

ध्यान कचरे की थैली से बाहर झाँकती एक कीताब पर पड़ी.

उत्स्सूकता वश उसने वो कीताब उठा ली और बगल की अलमारी मे छिपा

दी.

रोमा कचरे की थैली घर से बाहर फैंक कर वापस आई और वो

कीताब अलमारी से निकाल अपने कमरे मे आ गयी. कमरे का दरवाज़ा अंदर

से बंद कर वो कीताब खोल देखने लगी. उसने देखा कि कीताब के

पन्ने कोरे थे और उनपर कुछ भी नही लिखा था.

उसका दिल मायूशी मे डूब गया. उसे लगा था कि वो राज की कहानी का

राज आज जान जाएगी तभी उसने देखा कि पन्नो पर लिखाई के कुछ

अक्षर दिख रहे है.

वो दौड़ कर अपने कॉलेज बॅग से पेन्सिल निकाल कर ले आई और उन

पन्नो पर घिसने लगी. थोड़ी ही देर मे लीखाई के अक्षर उभर कर

सॉफ हो गये.

कीताब पर लीखे शब्दों को पढ़ वो चौंक गयी. क्या राज यही सब

अपनी कहानी मे लीखता रहता है.

...."मेने उससे कह दिया कि मैं उससे प्यार करता हूँ. वो मुस्कुरा

कर मेरी तरफ देखती है. मैं हल्के से उसकी चुचि को छूता हूँ

और वो सिसक पड़ती है. में और ज़ोर से दबाता हूँ. उसे आछा

लगता है.

......अब में उसकी दोनो चुचियों को दबाता हूँ. अब वो गरमाने

लगती है. में जानता हूँ वो मुझे पाना चाहती है........"

"कौन है ये लड़की...?" रोमा मन ही मन बदबूदा उठती है. कोई

कल्पनायक लड़की है या हक़ीकत मे कोई है...."

रोमा कीताब को अपनी छाती से लगाए पलंग पर लेट जाती है. वो

सोचने लगती है कि वो लड़की कौन हो सकती है. अचानक उसे लगता

है कि वो लड़की खुद ही है. अपनी ही कल्पना मे खोए वो अपने अक्स

को उन कोरे पन्नो मे ढूँदने की कोशिश करती है.

"ओह्ह्ह्ह राज में तुमसे कितना प्यार करती हूँ." वो कह उठती है, उसे

लगता है कि राज उसकी बगल मे ही लेटा हुआ है.

अपना प्यार खुद पर जाहिर कर उसे लगा कि उसके दिल से बोझ उत्तर

गया. जिन भावनाओ को वो छुपाते आई थी आज वो रंग दीखाने लगी

थी. उसके हाथ खुद बा खुद उसकी चुचियों पर जा पहुँचे और

वो उन्हे मसल्ने लगती है. उत्तेजना और प्यार की मादकता मे उसके

निपल तन कर खड़े जो जाते है. कामुकता की आग मे उसका बदन

ऐंठने लगता है.

दरवाज़े पर थपथपाहट सुन उसका ध्यान भंग होता है. फिर जैसे

वो दरवाज़े को खुलता देखती है झट से अपना हाथ अपनी चुचियों से

खींच लेती है.

राज ने अर्ध खुले दरवाज़े से अंदर झाँका. उसने देखा कि रोमा का लाल

रंग का टॉप थोड़ा उपर को खिसका हुआ था और उसकी चुचियों की

गोलियाँ साफ दिखाई दे रही थी साथ ही उसके खड़े निपल भी उसकी

नज़र से बच नही सके. इस नज़ारे को देख उसका लंड उसकी शॉर्ट मे

फिर एक बार तन कर खड़ा हो गया.

रोमा ने उसकी नज़रों का पीछा किया तो उसने देखा कि राज उसकी

चुचियों को ही घूर रहा था. उसने झट से अपने टॉप को नीचे किया

पर ऐसा करने से उसके निपल और तने हुए देखाई देने लगे. शर्म

और हया के मारे उसका चेहरा लाल हो गया.

"तुम मेरी जगह पर कचरा फैंक कर आई उसके लिए तुम्हे थॅंक्स

कहने आया था." राज ने कहा.

"कोई बात नही." वो चाहती थी कि राज जल्दी से जल्दी यहाँ से चला

जाए.

राज कुछ और कहना चाहता था लेकिन जब उसने देखा कि रोमा शर्मा

रही है तो उसके मन को पढ़ते हुए वो चुपचाप वहाँ से चला गया.

रोमा अपने चेहरे को अपने हाथों से धक अपने आपको कोसने

लगी, "बेवकूफ़ लड़की आज कितने महीनो बाद उसने तुमसे इस तरह

प्यार से बात की और तुम हो कि उसे भगा दिया. तुम्हे बिस्तर पर उठ

कर बैठ जाना था और उसे कमरे मे आने के लिए कहती. बेवकूफ़

बेवकूफ़."

जैसे ही वो बिस्तर पर से उठने लगी उसकी नज़र राज की किताब और

पेन्सिल पर पड़ी, "हे भागन काश उसने ये सब ना देखा हो."

रोमा सोच मे पड़ गयी कि हे भगवान उसने ये क्या किया. अगर राज ने

वो कीताब देख ली होगी तो एक बार फिर उसने राज को खो दिया है. वो

अपनी रुलाई को रोक ना पाई, उसकी आँखों से तार तार आँसू बहने लगे.

* * * * *

राज का ध्यान अपनी बेहन पर से हटाए नही हट रहा था. जब वो

बाहर से आया तो मम्मी ने उससे कहा था कि वो जाकर रोमा का

धन्यवाद करे क्यों कि उसका काम रोमा ने किया था.

मम्मी की अग्या मान वो उसके कमरे मे गया था और उसने उसे थॅंक्स

कहा था. जब उसने रोमा को बिस्तर पर लेटे देखा तो उसे वो किसी

अप्सरा से कम नही लगी थी. जिस तरह से वो लेटी थी और उसके टॉप मे

उपर को उठी हुई उसकी चुचियाँ और उसके खड़े निपल दीख रहे

थे वो ठीक किसी काम देवी की तरह लग रही थी.

उसके दिल मे तो आया कि उन कुछ लम्हो मे वो अपने दिल की बात रोमा को

बता दे लेकिन दिल की बात ज़ुबान तक आ नही पाई. उसकी समझ मे

नही आया कि वो अपने ज़ज्बात किस तरह अपनी सग़ी बेहन को बताए. वो

अपनी बातों को शब्दों मे ढाल नही पाया. उसे पता था कि थोड़े

दिनो मे रोमा कॉलेज चली जाएग्गी और शायद उसे फिर मौका ना मिले

उसे बताने का.

राज अपने कमरे मे आ गया, वो चाहता तो सीधे रोमा के कमरे मे

जाता और उसे सब कुछ बता देता पर उसमे शायद इतनी हिम्मत नही

थी कि वो उसे बता पाए.

उसे उमीद थी कि रात के खाने पर रोमा से उसकी मुलाकात होगी. पर

रोमा थी कि उसका कहीं पता नही था. राज ने खाना ख़त्म ही किया

था कि उसका सबसे प्यारा दोस्त जय अपनी बेहन रिया के साथ आ

पहुँचा. रिया बगल के सहर के कॉलेज मे पढ़ती थी. जय राज की

ही उमर का था और दोनो ने ग्रॅडुटाशॉन साथ साथ पूरा किया था.

क्रमशः.............
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04-10-2019, 03:17 PM,
#3
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गतान्क से आगे.............

रिया जय से दो साल बड़ी थी. बचपन के दोस्त होने की वजह से दोनो

का एक दूसरे का घर आना जाना था. जबसे रिया जवान हुई थी राज के

मन मे उसके लिए कुछ था पर रिया था कि उसे अपनी उमर से बड़े

लड़कों से ही फ़ुर्सत नही थी. पर आज वो कुछ अलग ही लग रही थी.

उसने एक चंचल मुस्कान से राज से हाथ मिलाया और उसके गालों पर एक

चुम्मा दे दिया जैसे की बरसों के पुराने दोस्त हो.

रिया आज बहोत ही सेक्सी लग रही थी. उसने एक काले रंग की टाइट

जीन्स पहन रखी थी और साथ ही एक गुलाबी रंग का स्लीव्ले टॉप.

जीन्स इतनी टाइट थी कि उसके चूतड़ की गलाईयों दीख रही थी और

टॉप के उपर से उसकी नुकीली चुचियों बाहर को उछल रही थी.

राज जय और रिया के साथ तालाब के किनारे चल पड़ा. बरसों से वहाँ

एक अलाव बनाया गया था जहाँ रात को लोग उसमे लकड़ियाँ जला पार्टी

मनाते थे. आज की रात भी कुछ ऐसा ही प्रोग्राम था तीनो का.

रोमा को घर के पीछे कुछ आवाज़े सुनाई दी. सूरज डूब चुका था

और अंधेरा होने लगा था. उसने कमरे की लाइट जलाई और खिड़की पर

लगे पर्दों को हटाकर बाहर देखा. जब उसकी आँखे अंधेरे मे

देखने को अभ्यस्त हो गयी तो उसे अपने भाई राज के साथ जय और एक

लड़की को तालाब की ओर जाते देखा. उसके दिल मे फिर से जलन जाग

उठी. मन तो किया कि दौड़ कर उनके साथ शामिल हो जाए. पहले तो

मा मना कर दिया करती थी पर अब वो 18 की हो चुकी थी पर अपनी

शरम की वजह से वो ऐसा ना कर सकी.

रोमा ने खिड़की को थोड़ा खोल दिया जिससे वो उनपर नज़र रख सके .

उसने देखा कि जब राज ने उस अलाव मे जो लकड़ियाँ पड़ी हुई थी उन्हे

जला दिया और फिर कुछ लकड़ियाँ ढूँदने को जाने लगा तो उस लड़की

ने उसका हाथ पकड़ा और उसके साथ चल पड़ी. जिस तरह से उस लड़की ने

राज का हाथ पकड़ा था उसे देख रोमा को फिर जलन होने लगी.

राज ने जब अपने हाथों मे रिया के हाथ को महसूस किया तो वो चौंक

पड़ा. दोनो हाथ मे हाथ डाले इस तरह चल रहे थे जैसे की दो

प्रेमी चाँदनी रात मे सैर को निकले हो. रिया के बदले हुए व्यवहार

से राज को आश्चर्या हो रहा था.

"कितनी सुन्दर जगह है." रिया ने रुकते हुए सामने दिखाई देती

पहाड़ियों पर नज़र डालते हुए कहा. "कितनी शांति और एकांत है

यहाँ पर है...ना."

जब रिया ने अपना सिर उसके कंधे पर रखा तो उसके बदन से उठती

महक ने राज के लंड मे फिर सरसरी भर दी.

"पीछले कई सालों से तुम मुझे नज़र अंदाज़ कर रही हो, और आज

अचानक ऐसे बिहेव कर रही हो जैसे कि मेरी प्रेमिका हो?" राज ने

पूछा.

"यही तो हम लड़कियों की ख़ासियत है, जिसे हम पसंद करते है उसे

नज़र अंदाज़ करते हैं," रिया ने जवाब दिया, "और सब लड़के हमे

परेशान करते है चिढ़ाते है कभी हमारे बाल खींच कर या

फिर दूसरे तरीके से, जो तुम कभी नही करते थे. यही वजह है

कि में तुम्हे हमेशा से पसंद करती आई हूँ."

रिया की बात सुनकर राज सोच मे पड़ गया. वो भी तो रोमा को नज़र

अंदाज़ करता है और रोमा भी उससे दूर दूर रहती है, तो क्या रिया

के अनुसार हम दोनो एक दूसरे को पसंद करते है.

"किस सोच मे खो गये राज?" रिया उसके सिर को ठप थपाते हुए

बोली. "अगर तुम्हे नही दीखाई दे रहा है तो में साफ शब्दों मे

कह रही हूँ कि आज की रात में अपने आपको तुम्हारे हवाले कर रही

हूँ, आया समझ मे बुद्धू."

राज को विश्वास नही हो रहा था कि बरसों से जिसके पीछे वो पड़ा

था आज खुद वो अपने आपको उसे सोन्प रही थी ये उस्केलिये किसी

तोहफे से कम नही था.

"हां में समझ रहा हूँ." राज हंसते हुए कहा.

रिया राज के साथ चिपक कर खड़ी हो गयी, "ये अलाव की आग बुझने

मे कितना वक़्त लगेगा?"

"ज़्यादा से ज़्यादा 15-20 मिनिट." राज ने जवाब दिया.

"तो फिर एक काम करते हैं, हम पकड़ा पकड़ी खेलते है, अगर आग

बुझने से पहले तुमने मुझे पकड़ लिया तो में तुम्हारी.' रिया ने

चंचल मुस्कान के साथ कहा.

उसकी समझ मे नही आ रहा था कि वो क्या खेल उसके साथ खेलना

चाहती है. रिया जैसे ही पहाड़ो की तरफ भागी राज भी उसके पीछे

भागा. किंतु थोड़ी ही देर मे उसने उसे पकड़ लिया.

जैसे ही उसने उसे पकड़ना चाहा वो लड़खड़ा कर नीचे गिर

पड़ी, "पागल हो गये हो क्या."

"में तुम्हारे बाल खींचना चाहता था जैसे तुमने कहा कि मेने

पहले कभी नही खींचे." राज ने हंसते हुए कहा.

"हां... लेकिन इसका ये मतलब नही कि हर लड़की को ये हरकत पसंद

आती है." रिया ने कहा.

रिया ने उसके पॅंट के बकल को पकड़ा और उसे अपने उपर खींच लिया.

राज को रिया किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी. रिया को वो बचपन

से जानता था और वो उसे हमेशा से अछी लगती आई थी आज वही जज़्बा

फिर उसके दिल मे उमड़ आया. वो गहरी नज़रों से रिया को देख रहा

था.

"राज..... मुझे प्यार करो ना....." रिया ने अपना चेहरा उसकी चौड़ी

छाती मे छुपाते हुए कहा.

राज ने अपनी नज़रें उसकी नज़रों से मिलाई उसने देखा कि उसकी आँखों

मे मादकता छाई हुई थी. उसने उसके स्लीवलेशस ब्लाउस के उपर से उसकी

चुचियों को पकड़ा जिन्हे वो बरसों से महसूस करना चाहता था. उसके

लंड मे लहू की धारा तेज हो गयी. वो धीरे धीरे उसकी मुलायम

लेकिन कठोर चुचियों को दबाने लगा.

उन्माद की मस्ती मे रिया ने अपनी आँखे बंद कर ली. उसके हाथ राज की

पीठ पर जाकड़ गये. राज उसके निपल को अपनी उंगलियों से भींच

रहा था. उत्तेजना के मारे उसका लंड पॅंट के बाहर आने को फाड़ फाडा

रहा था. राज ने उसके टॉप को नीचे से पकड़ा और उसके सिर के उपर

कर उतार दिया.

रिया ने अपना हाथ राज के जाँघो के बीच रखा और पॅंट के उपर से

उसके लंड को सहलाने लगी. उसके लंड को मसल मसल वो उसे चिढ़ाने

लगी. फिर उसने उसकी पॅंट के बकल को खोला और बटन खोल उसकी

पॅंट को ढीला कर दिया. फिर उसने उसकी अंडरवेर की एलास्टिक मे अपनी

उंगली फसा उसे थोड़ा नीचे कर दिया. राज का लंड उछल को बाहर आ

गया.

उसके खड़े लंड को देख रिया की आँखो मे चमक सी आ गयी, "काश

तुमने मेरे बाल बहोत साल पहले खींचे होते." वो उसके लंड की

चमड़ी को उपर नीचे करने लगी. "अगर तुमने ऐसा पहले किया होता

तो पता नही में कितनी बार इस प्यारे लंड का स्वाद चख चुकी होती."

"हां मुझे भी ऐसा ही लग रहा है." कहकर राज उसकी चुचियों को

मसल्ने लगा.

रिया ने राज को खिसका कर अपने बगल मे लिटा दिया और फिर उसके

उप्पर झुक कर उसके लंड को अपनी मुट्ही मे ले मसल्ने लगी. फिर

उसने झुक कर उसके सूपदे को अपने मुँह मे ले लिया. पहले तो वो अपनी

जीब से सूपदे को चाट्ती रही फिर अपने मुँह को पूरा खोल लंड को

अंदर लेने लगी. लंड उसके गले तक आ गया था.

रिया को पता था कि समय कम है इसलिए वो जोरों से उसके लंड को

चूसने लगी. उसे लगा कि राज का लंड उसके मुँह मे और बड़ा होता जा

रहा है. वो अपनी ज़ुबान उसके लंड पर फिराते जोरों से चूसने लगी.

फिर उसने अपना मुँह हटाया और घास पर पीठ के बल लेट गयी.

रिया का मुँह लंड पर हटते देख राज उसकी पॅंट के बटन को खोलने

लगा. उसकी जींस को उसने नीचे खिसका उत्तर दिया. फिर उसने उसकी

पॅंटी को भी उतार दिया. रिया ने अपनी जाँघो को थोड़ा फैला दिया.

"मुझे विश्वास नही हो रहा कि हम सही मे ये सब कर रहे है."

राज ने थोड़ी अस्चर्य भरी आवाज़ मे कहा.

"काश हमने पहले ये सब किया होता." रिया ने उसकी नज़रों से नज़रों

मिलाते हुए कहा, "मुझे चोदोगे ना अपने इस प्यारे लंड से......."

राज उसकी जाँघो के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी चूत पर

घिसने लगा. जैसे ही लंड ने चूत को छुआ वो सिसक पड़ी और आहें

भरने लगी.

राज ने उसकी चूत की पंखुरियों को थोड़ा फैलाया और अपने लंड को

धीरे से उसकी चूत के अंदर घुसा दिया.

"ऑश राज कितन आछा लग रहा है तुम्हारा लंड मुझे अपनी चूत मे

ओह......."

राज ने अपना सूपड़ा ही उसकी चूत मे घुसाया था, वो सूपदे को

इधर उधर घूमा रहा था.

"रुक्क्क क्यों गये राज्ज्ज..... डालो ना पूरा लंड मेरी चूत मे......

मुझे पूरा लंड चाहिए अपनी चूत. मे डालो ना राज मत तड़पाव

मुझे.....प्लीज़......" रिया सिसक पड़ी.

राज ने उसके कंधे पकड़े और एक ज़ोर का धक्का मार अपने लंड को उसकी

चूत मे पेल दिया. रिया ने भी अपनी टाँगे उसकी कमर से जाकड़ ली और

नीचे से चूतड़ उठा उसके लंड को अपनी चूत के अंदर ले लिया.

थोड़ी ही देर मे उनकी कमर लय मे हिल रही थी. राज उसे चोद रहा

था.

क्रमशः.............
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04-10-2019, 03:18 PM,
#4
RE: bahan sex kahani दो भाई दो बहन
4

गतान्क से आगे.............

रिया की चूत की मांसपेशियों ने राज के लंड को जाकड़ लिया और चूत

की गर्मी ने राज को और उत्तेजित कर दिया था. वो उछल उछल कर

धक्के लगा रहा था, "तुम्हारी चूत तो ग़ज़ब की है रिया..... काश

मेने इसे पहले चोदा होता."

"मेरी चुचियों से खेलो राज निपल को मुँह मे लेकर चूसो....."

रिया गहरी सांस लेती हुई बोली.

राज ने अपनी गर्दन झुकाई और उसके कठोर निपल को अपने दन्तो मे ले

काट डाला.

"ऑश मेने चूसने को कहा था काटने को नही दर्द होता है

ना......"

अपने लंड के जोरदार धक्के मारते हुए वो जोरों से उसकी चुचियों को

मसल्ने और चूसने लगा.

"ऑश राज मैं गयी तुम्हे क्या चुदाई करते हो बस थोड़ा और ज़ोर

से ......ऑश हाआँ ऐसे और ज़ोर से मेरा छूटने वाला है..." रिया

नीचे से अपनी कमर उछालते हुए बोली.

राज अब लंबे और ज़ोर के धक्कों से उसे चोदने लगा. रिया का शरीर

हर धक्के से उसके नीचे दहल जाता. उसकी चूत से बहता पानी

उसकी जाँघो तक आ गया था. जैसे जैसे उसकी चूत छूटने के

करीब आती उसका शरीर और कांप जाता. ज़मीन पर लेटे होने वजह से

उसकी पीठ दर्द कर रही थी. पर चुदाई की मस्ती के आगे पीठ के

दर्द का कहाँ होश था.

वो जोरों से अपनी कमर नीचे से उछल रही थी. अपनी चूत की

मांसपेशियों से उसके लंड को और जाकड़ वो सिसक रही थी.

'हाआँ राअज चूओड़ो में तो गयी....... ओह हां ज़ोर से अंदर तक

पेलूऊऊओ ऑश गयी......"

अपनी टाँगो को और कमर मे कस उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. राज ने

भी उसकी चुचियों को ज़ोर से भींचा और ज़ोर का धक्का मार अपना

पानी छोड़ दिया. पसीने से लत पथ वो उसके शरीर पर गिर सा पड़ा.

"मुझे उठने दो राज नीचे की खुरदरी ज़मीन मेरी पीठ पर घाव

कर देगी." रिया ने राज को अपने उपर से अलग करते हुए कहा.

राज उसके उपर से खड़ा हुआ और उसने रिया का हाथ पकड़ उसे भी खड़ा

कर दिया. खड़े होते ही रिया की नज़रे राज के लंड पर पड़ी. चाँद की

रोशनी मे लंड पर चमकती वीर्य की बूंदे देख वो मन्त्र मुग्ध हो

गयी. वो उसकी टाँगे के बीच बैठ गयी और उसके लंड पर अपनी जीभ

घूमा उन बूँदो को चाटने लगी.

राज का लंड एक बार फिर तनने लगा था. उसने पास के ही पेड़ की तनी

को पकड़ लिया. रिया अब उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूस रही थी.

वो मुट्ठी से उसके लंड को मसल्ते हुए उसके सूपदे को और जोरो से

चूसने लगी.

राज ने अपनी एक टांग उठा कर रिया के कंधे पर रख दी और उसके

चेहरे को और अपनी जाँघो के करीब कर लिया. रिया ने भी अपने दोनो

हाथों से उसके चूतड़ को पकड़ और जोरों से उसके लंड को चूसने

लगी.

राज भी उसके सिर को पकड़ उसके मुँह को चोदने लगा. थोड़ी ही देर

मे उसका लंड पिचकारी पर पिचकारी छोड़ रहा था जिसे रिया पिए जा

रही थी. कुछ वीर्य उसके होठों के किनारे से बहता हुआ नीचे गिर

रहा था. जब उसने राज के लंड की आखरी बूँद भी निचोड़ कर पी

ली तो उसने उसके लंड को अपने मुँह से निकाल दिया.

"देखा आज तक तुम क्या मिस करते आए." अपनी जीभ से बहते वीर्य

को चाटते हुए रिया बोली.

"अच्छा होगा अगर हम कपड़े पहन कुछ लकड़ियाँ ढूंड लें." राज ने

रिया को याद दिलाया.

दोनो समय पर ही अलाव के पास पहुँच गये. आग बुझने को ही थी.

जय सन्कित नज़रों से दोनो को देख रहा था लेकिन उसने कुछ कहा

नही. राज ने कुछ चुनी हुई लकड़ियाँ आग मे डाली और उन्हे हवा दे

जलाने लगा.

"मैं ज़रा घर मे जाकर बाथरूम होकर आती हूँ." अपने हाथों की

लकड़ियों को ज़मीन पर रखती हुई वो बोली.

रिया पहले भी कई बार राज के घर मे आ चुकी थी. पर जब उसका

टकराव पहली बार रोमा से हुआ तो वो तुरंत उससे पहचान गयी.

"कैसी हो रोमा?" रिया ने पूछा.

"हाई." रोमा ने कहा, किंतु उसके चेहरे के भावों को देख रिया समझ

गयी कि रोमा ने उसे पहचाना नही है.

"में रिया हूँ, जय की बड़ी बेहन," रिया ने अपना परिचय दिया. में

सिर्फ़ दो दिन की छुट्टी मे कॉलेज से घर आई हूँ. मैं पास के

शहर मे पढ़ती हूँ. "क्या बात है तुम हम सब के साथ बाहर नही

आई?"

रोमा की समझ मे नही आया कि वो क्या जवाब दे. करीब करीब एक

अंजान इंसान को वो कैसे बताए कि वो अपने भाई के प्यार मे पागल

है. कैसे कहे कि आज उसने खुद अपना मज़ाक बनाया था अपने भाई के

सामने और अब वो उससे नज़रें भी नही मिला पा रही है. "मुझे नही

मालूम." बस इतना ही कह पाई वो.

"तुम दो मिनिट यहीं रूको में बाथरूम जाकर आती हू फिर हुम्म

साथ साथ तालाब तक चलेंगे." रिया ने कहा.

रोमा को नही मालूम था कि रिया क्या सोच रही थी. रिया को रोमा काफ़ी

पसंद आई थी ठीक किसी गुड्डिया की तरह. रिया एक खुले विचारों

की लड़की थी और जहाँ तक सेक्स का सवाल था उसका उसूल था जो दिल को

भाए उस के साथ करो ना भाए तो ना करो.

बाथरूम से निकल जब वो रोमा के कमरे के बगल से निकली तो

पूछा, "तय्यार हो."

कमरे से कोई आवाज़ ना आने पर रिया ने अंदर झाँक कर देखा तो पाया

कि रोमा पलंग पर लेती थी और छत को घूर रही थी. वो चल कर

पलंग के करीब आई और उस लड़की के जवान शरीर को निहारने लगी.

रिया खास तौर पर रोमा की छोटी और गोल गोल चुचियों की ओर

आकर्षित हो गयी थी. उसका दिल तो चाहा कि आगे बढ़ कर उन

चुचियों को छुए और प्यार करे. उसके दिल ने कहा कि अगर रोमा

खुले विचारों की हुई तो ज़रूर एक रात उसके साथ प्यार करेगी.

"क्या बात है बहोत ज़्यादा टेन्स लग रही हो?" रिया ने प्यार से रोमा

से पूछा.

"ऐसा कुछ नही है जो में तुम्हे समझा सकूँ." रोमा ने जवाब दिया.

रिया के अनुभव ने उसे बता दिया कि रोमा किसी के प्रेम मे पागल है.

प्यार का कोई इलाज़ नही होता, ये वो दर्द है जो सिर्फ़ सहा जाता है

पर किसी के साथ बाँटा नही जाता.

"चलो उठो." रिया ने उसकी बाँह पकड़ कर उसे उठाते हुए कहा, "जय

अपने साथ वाइन और खाने के लिए बहोत सारी चीज़ें लाया है, और

हां एक बात मुझे ना सुनना पसंद नही है. अगर दिल मे तकलीफ़

है तो एक ही इलाज़ है अपनी सुध बूध खो बैठो समझी."

रिया के काफ़ी समझने पर रोमा बिस्तर से उठी और रिया के साथ बाहर

आ गयी. दोनो लड़कियाँ धीरे धीरे चलते हुए उस अलाव के पास आ

गयी. चलते चलते रिया का बदन कई बार रोमा के बदन से टकराया.

हर टकराव के बाद रिया के बदन मे झूर झुरी सी दौड़ जाती. उसने

रोमा की उंगलियों को अपनी उंगलियों मे फँसाया और उसका हाथ थामे

चलने लगी. रोमा को भी उसके हाथ का स्पर्श अच्छा लगा. थोड़ी ही देर

मे वो दो सहेलियों की तरह बातें कर रही थी.

राज जैसे ही अलाव मे लकड़ियाँ डाल कर घूमा तो उसने देखा कि रोमा

बियर का एक कॅन खोल उसमे से घूँट ले रही थी. रोमा को वाहा देख वो

थोड़ा सा नर्वस सा हो गया, रोमा कभी उसकी पार्टियों मे शामिल

नही होती थी.

रिया ने राज के चेहरे पर उसके भाव पढ़ लिए, उसने इशारे से उसे

बताया कि वो रोमा को वहाँ लेकर आई है.

"राज ये लो." कहकर जय ने एक सिग्रेट और लाइटर राज की ओर बढ़ा

दिया.

राज ने सिगरेतटे लेते लेते एक सरसरी सी निगाह रोमा पर डाली और

फिर अपना ध्यान रिया पर केंद्रित कर दिया. वो सिग्रेट से हल्के

हल्के काश लेकर रिया को ही देख रहा था. सिग्रेट पीते ही राज

समझ गया कि सिग्रेट मे नशीली दवाई मिली है, पर ना जाने क्यों

आज उसे ये सिग्रेट पीकर सकुन मिल रहा था.

जय ने एक दूसरी सिग्रेट जलाई और रिया को पकड़ा दी.

"तयार हो?" रिया ने रोमा से पूछा.

रिया के सवाल से रोमा चौंक पड़ी, "किस बात के लिए?"

रिया के चेहरे को देख रोमा समझ कि उसकी नई दोस्त उसके साथ कोई

शरारत करना चाहती है.

"सिर्फ़ मेरे पास रहना" रिया ने रोमा से कहा.

रिया ने सिग्रेट के लंबे लंबे काश ले अपनी छातियों को सिग्र्ट्ट

के धुआँ से भर ली. फिर रोमा पर झुकते हुए उसने अपने होंठ रोमा

के होठों पर रख दिए. रोमा ने जैसे ही अपने होंठ थोड़े से खोले

रिया ने सारा धुआँ उसके मुँह मे छोड़ दिया. फिर थोड़ी देर बाद रिया

अपनी जीब उसके मुँह मे डाल उसकी जीब को चुलबुलाने लगी.

क्रमशः.............
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04-10-2019, 03:18 PM,
#5
RE: bahan sex kahani दो भाई दो बहन
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गतान्क से आगे.............

रोमा की साँसे रुकने लगी थी, उसने अपने मुँह से धुआँ को बाहर

फैंका और खाँसते खाँसते ताज़ा हवा अंदर लेने लगी.

इसी तरह सिग्रेट के कई दौर चले. हर बार रिया यही क्रिया

दोहराने लगी. और हर बार उसका चूँबन पहले से कहीं लंबा होता

था. थोड़े ही देर मे चारों को थोड़ा थोड़ा नशा होने लगा.

अब चारों आपस मे हँसी मज़ाक कर रहे थे. जब भी रोमा ने राज की

ओर देखा तो उसने उसे ही घूरते पाया. जब राज ने उसकी ओर देख कर

मुस्कुराया तो मन खुशी से उछल पड़ा उसे लगा कि राज ने उसे माफ़

कर दिया है.

कुछ घंटे बाद सभी ने घर जाने की सोची. राज और जय सामान उठा

जय की गाड़ी की और बढ़ गये. रोमा और रिया उन दोनो के पीछे

पीछे चलने लगी. रिया ने राज और रोमा को गले लगाते हुए विदा ली

और जय के साथ गाड़ी मे बैठ चली गयी.

"आज तो बहोत मज़ा आया है...ना." रोमा ने कहा.

"हां आया तो...." राज ने धीरे से कहा.

शर्म और लाज की एक भारी दीवार थी दोनो के बीच. दोनो नही

चाहते थे कि रात जल्दी ख़त्म हो. पर पहला कदम कौन बढ़ाएगा

यही ख़याल था दोनो के मन मे. दोनो घर के दरवाज़े पर पहुँचे

और दोनो ही घर का दरवाज़ा खोलने बढ़े तो दोनो के हाथ टकरा गये.

"मुझे माफ़ कर देना राज...." रोमा ने अपना हाथ पीछे खींचते हुए

कहा, "और हां पिछली सभी बातो के लिए भी." ना जाने किस

भावना मे रोमा कह उठी.

राज के ज़ज्बात फिर जाग उठे. "में तुमसे बहोत प्यार करता हूँ

रोमा."

राज की बात सुनकर उसकी आँखो मे आँसू आ गये, अपने चेहरे को अपने

कंधे पर झुका उसने मुस्कुरा कर कहा, "सच राज.... में भी तुमसे

बहोत प्यार करती हूँ."

प्यार की लौ मे दोनो एक दूसरे की ओर बढ़े और उनके होंठ आपस मे

एक हो गये. दोनो के बदन एक अंजानी खुशी मे काँप रहे थे. रोमा

के होठों को थोड़ी देर चूमने के बाद राज उससे अलग हुआ तो दोनो एक

दूसरे को देखने लगे. एक अंजानी खुशी दोनो के मन मे समाई हुई

थी.

रोमा खुशी मे अपने नीचले होठों को दांतो से चबा ज़मीन की ओर

देख रही थी, ज़मीन की ओर देखते हुए उसकी निगाह राज की जाँघो पर

गयी तो उसने देखा कि वहाँ एक तंबू सा बना हुआ था. उसका खड़ा

लंड यही कह रहा था कि वो भी उसे उतना ही पाना चाहता है जितना

कि वो उसे पाना चाहती थी.

राज ने रोमा की तोड़ी पकड़ उसके चेहरे को उठाया, रोमा ने अपनी

आँखे बंद कर ली और राज ने अपने होंठ उसकी होंठो पर रख दिए.

उसके होठों को चूस्ते चूस्ते उसने अपनी जीभ रोमा के मुँह मे डाल

दी. रोमा ने भी अपना मुँह खोला और अपनी जीभ राज की जीभ से मिला

दी.

"म्‍म्म्मम कब से तरश रही थी में इस समय के लिए' सोचते हुए रोमा

राज की जीब को जोरों से चूसने लगी. ना जाने कितनी देर तक दो प्रेमी

ऐसे ही एक दूसरे को चूमते रहे.

राज ने रोमा को चूमते हुए जोरों से अपनी बाहों मे भींच लिया. उसकी

नाज़ुक चुचियों उसकी छाती मे धँस गयी. राज ने अपने हाथ रोमा के

चूतदो पर रखे और ज़ोर से उसे अपनी बाहों मे भीच लिया. रोमा

ने भी उसकी पीठ पर अपनी पंजों की पकड़ को कसते हुए अपने शरीर

को उसके शरीर से चिपका दिया. उसकी चूत राज के खड़े लंड से टकरा

रही थी.

ना जाने कितनी बार और कितने रूप मे दोनो ये सपना देखा था और आज

वो सपना पूरा हो रहा था एक अलग ही अंदाज़ मे.

"में कब्से तरस रही थी तुम्हारी इन मजबूत बाहों मे आने के

लिए." रोमा राज को चूमते हुए फुसफुसाते हुए बोली.

"तुम नही जानती रोमा मेने भी कितनी रातें तुम्हारे ही सपने

देखते हुए बिताई है." राज उसे जोरों से भींचते हुए बोला, "क्या

में तुम्हे छू सकता हूँ?"

"हाँ राज मुझे छुओ मुझे मस्लो मुझे प्यार करो, कब से तरस रही

हूँ में तुम्हारे प्यार के लिए." रोमा अपने प्यार का इज़हार करते हुए

बोली.

राज ने अपना हाथ उसके टॉप के नीचे से अंदर डाला और उसकी मुलायम

चुचि को पकड़ लिया. उसने उसके खड़े निपल को अपनी उंगली और

अंगूठे मे लिया और धीरे धीरे मसल्ने लगा.

जैसे ही राज उसकी चुचि की घुंडी को मसलता रोमा काम विभूर हो

उसे जोरों से चूम लेती. अपनी जीब को उसके मुँह चारों ओर घूमाति,

उसके नाख़ून उसकी पीठ पर गढ़ जाते.

रोमा को महसूस होता कि राज का खड़ा लंड उसकी चूत को कपड़ों के

उपर से टटोल रहा. वो अपनी जाँघो को और उसकी जाँघो से सटा देती.

राज ने अब अपना दूसरा हाथ भी उसकी दूसरी चुचि पर रख दिया.

उसकी दोनो चुचियों को पकड़ अपनी ओर खींचते हुए वो उन्हे मसल्ने

लगा. रोमा के मुँह से हल्की सी सिसकारी फूटने लगी. उसकी चूत

उत्तेजना मे गीली हो चुकी थी.

"ऑश राअज........." रोमा से अब सहन नही हो रहा था. उसकी चूत

मे आग लगी हुई थी. उसने अपने काँपते हाथ राज की जीन्स के बटन की

और बढ़े और खोलने लगे. फिर उसने उसकी ज़िप को नीचे खिसकाया और

उसकी अंडरवेर मे हाथ डाल अपना हाथ राज के गरम लंड पर रख दिया.

"ओह........" लंड की गरमाहट पा उसकी चूत और सुलग उठी.

"ऑश राज कितना अच्छा लग रहा है." कहकर वो अपनी उंगलियाँ राज के

लंड पर उपर से नीचे फिराने लगी. उसे महसूस हुआ कि राज का लंड

और तनता जा रहा है साथ ही और लंबा भी हो रहा था. उसकी मोटाई

को मापते हुए उसने अपनी हथेली लंड के चारों ओर जाकड़ ली. फिर

नीचे की ओर करते हुए उसकी गोलियाँ से खेलने लगी. कभी एक गोलाई

को ले भींचती तो कभी दूसरी को.

राज के हाथ उसकी चुचियों से होते हुए उसकी शॉर्ट्स के बटन पर

पहुँचे. उसने बटन को खोला और फिर ज़िप को नीचे किया. उसने अपने

हाथ उसकी पॅंटी के एल्सास्तिक मे फँसा शॉर्ट और पॅंटी को नीचे

खिसका दिया.

रोमा ने अपनी शॉर्ट और पॅंटी अपने पैरों से अलग कर निकाल दी. राज

अब उसकी गांद को अपने हाथों मे भर मसल रहा था फिर वह अपनी

हथेली को उसकी चूत पर रख दबाने लगा.

"ओह राआआअज ओह आआआः." रोमा सिसकते हुए उसके लंड

को और जोरों से भींचने लगी.

राज ने अपनी उंगलियों से उसकी चूत को खोला और अपनी दो उंगलियाँ

उसकी चूत मे घुसा दी. चूत गीली होने से उसकी उंगलियाँ आसानी से

अंदर चली गयी. रोमा का शरीर कांप उठा. जैसे ही राज की उंगलियों

ने उसकी चूत के अन्दुर्नि हिस्सों को सहलाया वो सिहर उठी.

"ओह राज अब नही राआहा जाता.......प्लीज़ अपने लंड को मेरी

चूत मे डाआआआळ दो.....प्लीज़ राज."

"सहियीई में रोमम्म्माआ...." राज उसकी चूत को और जोरों से

भींचते हुए बोला. उसे विश्वास नही हो रहा था कि आज एक साथ

उसके सारे सपने पूरे हो रहे थे.

रोमा ने राज की जीन्स और उसकी अंडरावीयर को नीचे खिसका दिया और

उसके लंड को आज़ाद कर दिया. राज का लंड अब उसकी नंगी चूत को छू

रहा था.

राज ने अपने लंड को पकड़ा और अपनी बेहन की मुलायम और गीली चूत

पर रगड़ने लगा.

लंड और चूत के संगम ने रोमा के तन मन मे हलचल मचा दी..."

ऑश राआाज ओह......."

खड़े खड़े राज का लंड रोमा की चूत मे नही घुस सकता था फिर

भी राज अपने लंड को रोमा की चूत पर घिसते हुए उसकी जाँघो मे

अंदर करता और फिर बाहर खींचता. लंड का चूत के उपर घिसरण

से रोमा की चूत और पानी छोड़ने लगी थी.

"ऑश राज अब मत तडपाओ ना नही रहा जाता प्लीज़ घुसा दो नाअ में

मर जाउन्गि." रोमा गिड़गिदा रही थी. राज उसे बाहों मे लिए लिए घर

के अंदर आया और दरवाज़े को बंद कर दिया. फिर उसे पॅसेज की

खिड़की के पास लेजाकार उसके हाथ उसपर टीका दिए. फिर उसे खिड़की

पर पीठ के बल लिटाते हुए उसकी टाँगो को उठाया और अपने कंधो

पर रख लिया.

रोमा ने अपने सिर को खिड़की मे लगे शीशे पर टीका दिया और अपनी

कमर को थोड़ा उपर उठा कर राज का लंड लेने के लिए तय्यार हो गयी.

राज ने पहले तो अपने लंड को उसकी चूत पर थोड़ा घिसा जिससे लंड

गीला हो जाए फिर उसकी चूत की पंखुरियों को थोड़ा फैला अपने

लंड को धीरे से उसकी चूत के अंदर घुसा दिया.

"ओह राज कितना अच्छा लग रहा है...." रोमा सिसक पड़ी.

"तुम ठीक तो हो ना रोमा?" राज ने पूछा.

'म्‍म्म्ममम रूको मत."

राज ने एक धक्का मारा और उसका लंड रोमा की कुँवारी चूत को चीरता

हुआ अंदर घुस गया. राज ने एक ज़ोर का धक्का मारा तो वो रोमा की

कुँवारी झिल्ली को फाड़ता हुआ और अंदर तक घुस गया.

क्रमशः.............
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04-10-2019, 03:18 PM,
#6
RE: bahan sex kahani दो भाई दो बहन
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गतान्क से आगे.............

'ओह राज हाआआं ओह" दर्द और खुशी के मिश्रित आँसू उसकी

आँखों से बह उसकी गालों तक आ गये. राज ने अपने लोहे जैसे लंड को

और ज़ोर लगाया तो उसका लंड और अंदर तक चीरते हुआ सीधे रोमा

की चूत की गहराई तक पहुँच गया. रोमा की चूत की दीवारों ने

राज के लंड को जगह देते हुए अपनी पकड़ मे जाकड़ लिया.

राज भी उत्तेजना की लौ मे बह चला था. रोमा की चूत किसी भट्टी

से कम नही थी. उसकी चूत की गर्मी और चूत की पकड़ उसके लंड को

तनती जा रही थी.

राज अपनी प्यारी बेहन रोमा को प्यार कर रहा था ना कि रिया की तरह

उसे चोद रहा था. आज दो जवान दिल दो जिस्म एक जान हो रहे थे.

दिलों के साथ साथ जिस्मों का भी संगम हो रहा था. दोनो एक दूसरे

को जिस्म और जान से प्यार कर रहे थे. राज के हर धक्के पर रोमा

प्यार मे सिसक उठती और उसकी चूत राज के लंड को और अंदर तक ले

लेती.

दोनो के इस प्यार भरे लम्हो को शब्दों मे नही लिखा जा सकता

सिर्फ़ एहसास किया जा सकता था. जब राज का लंड उसकी चूत के

गहराइयों को छूता तो उसकी आखें और खुशी से उबल पड़ती. आज

जिंदगी मे पहली बार किसी मर्द के लंड को उसने अपनी चूत मे लिया

था वो भी अपने प्यार का. आज वो दिन था जिसका उसने बरसों से

इंतेज़ार किया था. अपनी आँखों से बहे नमकीन आँसुओं को अपनी जीभ

से चाटते हुए वो राज के धक्कों का साथ देने लगाई. अपनी कमर को

उसके हर धक्के के साथ मिलाने लगी.

राज के लंड की नसे तनने लगी थी और गोलियों मे उबाल उठ रहा था.

उसे अब अपने आपको रोकना मुश्किल हो रहा था. उसने अपनी जान अपनी

बेहन की आँखों मे झाँका.

"बस करीब हूँ राज." वो धीरे से फुसफुसाया

राज और जोरों से धक्के मारने लगा. हर धक्का पहले धक्के से ज़्यादा

प्यार भरा होता. रोमा का शरीर आकड़ा और उसकी चूत जैसे किसी लावे

की तरह फट पड़ी. पानी दर पानी छोड़ने लगी. उसकी सिसकारियाँ अब

हल्की सूबकी मे बदल गयी. खुशी और उत्तेजना मे उसके शरीर को

जाकड़ लिया. प्रेम का रस चूत से बहता हुआ खिड़की के नीचे

ज़मीन पर टपक रहा था.

राज का भी छूटने वाला था. रोमा की कमर को पकड़ वो और जोरों से

धक्के लगा रहा था. वो अपने लंड को बाहर खींचता और जब सिर्फ़

सूपड़ा अंदर रह जाता तो ज़ोर से उसे फिर चूत की गहराइयों तक पेल

देता.

"हाआँ राज ऐसे ही अंदर तक पेलूऊओ.....ओह राज छोड़ दो अपना पानी

मेरी चूत मे ..... में तुम्हारे वीर्य की धार को महसूस करना

चाहती हूँ..... आज नहला दो मेरी चूत को भर दो इसे अपने पानी

से."

राज ने एक और धक्का मारा और उसका वीर्य उसकी गोलैईयों से होता हुआ

उसकी नसों को और तनाता हुआ निकल पड़ा. लंड से ऐसी पिचकारी

छूटी की राज ने खुशी के मारे रोमा को और कस कर पकड़ लिया. अपने

लंड को तब तक अंदर घुसाए रखा जब तक उसकी गोलैईयों मे एक भी

बूँद बाकी नही बची थी.

राज प्यार से अपनी बेहन की आँखों मे देख रहा था, "आइ लव यू

रोमा.' उसने उसे चूमते हुए खा.

"आइ लव यू टू राज." रोमा धीरे से सूबक पड़ी. खुशी से उसकी आँखे

नम थी.

* * * * * * * *

अपने बड़े भाई के साथ बीताए पलों ने रोमा की आँखो से उसकी नींद

उड़ा दी थी. राज के साथ हुई चुदाई ने उसके सपने को पूरा कर दिया

था.

अब जबकि वो प्रेमी बन चुके थे वो राज को बहोत मिस कर रही थी.

वो उसके पास रहना चाहती थी उससे प्यार करना चाहती थी. आज की

रात वो उसकी बाहों मे सोना चाहती थी, उसके शरीर से उठती गर्मी

का एहसास करना चाहती थी.

घर काफ़ी घंटो से शांत था. उसके मा कब की सो चुकी थी और

शायद राज भी. वो धीरे से अपने बिस्तर से उठी और बिना आवाज़ किए

अपने कमरे के दरवाज़े तक आई.

धड़कते दिल से उसने दरवाज़ा खोला और बाहर का जयजा लिया. फिर

धीमी चाल से वो राज के कमरे के दरवाज़े के पास आई. नॉब पर

हाथ रख उसने उसे घूमाया तो पाया कि दरवाज़ा खुला हुआ था अगर

बंद होता तो शायद उसका दिल टूट जाता. धीरे से अंदर आकर उसने

दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया.

एक बार राज के कमरे मे आने के बाद उसने अपना नाइट गाउन उत्तर दिया.

वो नही चाहती थी कि उसके और राज के बीच कोई भी चीज़ आए. रोमा

को राज के कमरे की स्थिति पता थी इसलिए उसे लाइट की ज़रूरत

नही पड़ी. धीमे से वो राज के पलंग के पास आई और धीरे से

चादर उठा बिस्तर मे घुस गयी.

राज उसकी बाई तरफ मुँह किए लेटा था. वो उसकी तरफ पीठ कर के

लेट गयी और अपनी पीठ को उसके शरीर से रगड़ने लगी. उसने राज के

हाथ को उठा अपनी चुचियों पर रख लिया. राज की गर्म सांसो

की भाँप उसके कंधो को छू रही थी और उसकी बैठती छाती उसकी

पीठ से टकरा रही थी. राज से चिपक कर सोने मे उसे अच्छा लग

रहा था और ना जाने कब उसे नींद आ गयी.

अपनी गर्दन पर गरम होठों का स्पर्श पा रोमा की आँख खुल गयी.

रात अभी भी बाकी थी. राज उसकी गर्दन पर अपने होंठ रखे उसे

चूम रहा था. राज ने अपनी ज़ुबान उसकी गर्दन पर घुमाई तो वो

कसमसा उठी.

"लगता है कि मैं अकेला ही नही जाग रहा." राज ने उसकी गर्दन पर

अपनी साँसों की गरम भाँप छोड़ते हुए कहा.

"मेने सोचा था कि तुम्हारे बिस्तर मे तुम्हारे पास घुस कर तुम्हे

चौंका दूँगी." रोमा ने कहा.

राज ने अपना हाथ नीचे किया और रोमा की एक टांग उठा कर अपनी टांग

पर रख ली फिर अपना हाथ उसकी जांघों के अन्द्रुनि हिस्सों पर

फिराने लगा.

"लगता है गीली हो रही हो." राज अपनी बेहन को चिढ़ाते हुए

बोला.

"हां और किसी का बड़ा और मोटा होता जा रहा है." रोमा ने

राज के लंड को अपने चूतदों पर महसूस किया तो बोली, "क्या तुम्हे

रिया मुझसे ज़्यादा पसंद है?"

"रिया मुझे पसंद है." राज ने कहा, "लेकिन में प्यार तुमसे करता

हूँ."

"सच......." रोमा ने प्रश्न किया. राज का कहना उसे बहोत अच्छा

लगा लेकिन फिर भी वो बोली, "तुम इतने दिनो से मुझे नज़र अंदाज़

करते आ रहे थे और आज ये कह रहे हो तो मुझे विश्वास नही हो

रहा."

राज ने आगे से उसकी चूत पर हाथ फिराया और अपनी बीच वाली उंगली

से चूत के अन्द्रुनि हिस्सों को कुरेदने लगा. रोमा का बदन काँप रहा

था, उसने उसकी गर्दन पर अपनी नाक रगड़ते हुए अपनी उंगली उसकी

गीली हुई चूत मे घूसा दी.

वो रोमा की हालत समझ सकता था. "में तुमसे प्यार करता हूँ

रोमा" उसने उसे दिलासा देते हुए कहा, "रिया से कहीं ज़्यादा पर एक

बात तो है वो है बड़ी गरम."

"बड़े हरामी हो तुम." रोमा उसकी छाती पर अपनी कोहनी मार अपना गुस्सा

जताया, "बेहतर है कि तुम उसे ही अपने बिस्तर मे बुला लो."

राज ने अपनी बेहन को ज़ोर से बाहों मे भर लिया, "ऐसा हो नही सकता,

माना वो बिस्तर मे अच्छी है पर तुमसे अच्छी नही. और फिर तुम

शैतानी के मूड मे भी तो हो."

"किस तरह की शैतानी के लिए?" रोमा ने पूछा.

"पहले ये बताओ तुम गुस्सा तो नही हो ना?" राज ने कहा.

"हां बिल्कुल गुस्सा नही हूँ." रोमा ने कहा. वो सोचने लगी पता नही

कि राज के दिल मे क्या है और वो किस शैतानी के बात कर रहा है.

राज ने रोमा को अपनी और खिसकाया और उसे कंधो से पकड़ नीचे

खिसका दिया. जब उसने राज के लंड का स्पर्श अपने चेहरे पर पाया तो

वो समझ गयी कि राज क्या चाहता है.

राज ने रोमा के गरम मुँह को अपने लंड पर महसूस किया. रोमा पहले

तो हिचकिचाई पर शायद उसके जज्बातों ने उसकी हिम्मत बढ़ा दी.

पहले तो उसने उसके लंड के सूपदे को चूमा और फिर धीरे धीरे

लंड को और अपने मुँह मे ले चूसने लगी.

राज ने अपने हाथ रोमा के सिर के पीछे रख दिए. वो सोचने लगा कि

किस तरह आज उसने रिया के मुँह को चोदा था. उसे अपने आप पर

अचंभा हुआ कि जब वो रिया को चोद रहा था तो रोमा उसके ख़यालों

मे थी और अब जब वो रोमा को चोद रहा है तो रिया उसके ख़यालों मे

आ रही है. राज को लगा कि रिया और रोमा दोनो उसके दिल के हिस्से

है पर रोमा का हक़ ज़्यादा है.

क्रमशः.............
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04-10-2019, 03:18 PM,
#7
RE: bahan sex kahani दो भाई दो बहन
7

गतान्क से आगे.............

रोमा अब उसके लंड को पूरा अपने गले तक लेकर चूस रही थी, "ऑश

रोमा ऐसी हीईिइ चूऊसो." राज की नसों का तनाव बढ़ने लगा. वो

रोमा के चेहरे को पकड़ जोरों से अपने लंड को उसके मुँह के अंदर

बाहर करने लगा. रोमा के मुँह के थूक से उसकी पूरी जंघे गीली हो

गयी थी.

"रोमा अपनी ज़ुबान को मेरे लंड पर उपर से नीचे तक फिराओ." राज ने

कहा.

रोमा ने उसके लंड को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया, "तुम हर वक़्त

क्या लिखते रहते हो." उसने इस तरह पूछा की जैसे उसे कुछ मालूम

ही नही हो.

रोमा ने पहले उसकी गोलियों को मुँह मे लेकर चूसा फिर अपनी ज़ुबान

को उसके लंड के नीचे से उपर तक फिराने लगी. एक अजीब सी गुदगुदी

राज के शरीर और लंड मे पैदा हो गयी. वो सोचने लगा कि रोमा को

क्या कहे, अगर उसे सचाई का पता चल गया तो वो क्या सोचेगी.

"कुछ नही सिर्फ़ मेरे ख़याल जिन्हे में एक कहानी का रूप दे देता

हूँ" उसने सच को छुपाते हुए कहा. कल्पना अपने आप मे ख़याल ही तो

है.

रोमा अपनी ज़ुबान फिराते हुए उपर की ओर आई और उसके सिर्फ़ सूपदे को

अपने मुँह मे ले चूसने लगी. फिर अपनी ज़ुबान नीचे की ओर कर

चाटते हुए उपर को आई और फिर सूपदे को चूसने लगी. गाढ़ा वीर्य

उसके लंड से निकलने लगा. वो उसे चाट गयी स्वाद ज़रूर खारा सा था

लेकिन उसे अच्छा लग रहा था. अपने भाई को खुशी देने मे उसे मज़ा

आ रहा था.

"क्या लड़कियों के बारे मे लिखते हो?" रोमा ने एक बार फिर राज से

पूछा.

"तुम ये सब क्यों जानना चाहती हो?" राज ने पलट कर प्रश्न किया.

"क्या तुम ये लिखते हो कि लड़कियाँ तुम्हारा लंड कैसे चूस्ति है और

तुम उनकी चूत को कैसे चोद्ते हो?" उसने फिर पूछा. ये सब गंदी

गंदी बातें रोमा के शरीर मे और आग लगा रही थी, उसे मज़ा भी

आ रहा था.

रोमा ने फिर उसके लंड को अपने मुँह मे लिया और अपने गले तक ले

लिया. उसका दिल तो कर रहा था कि इतने लंबे लंड को वो पूरा का पूरा

अपने मुँह मे ले किंतु वो ले नही पाई उसकी साँसे रुक गयी. उसने

वापस लंड को बाहर कर उसके सूपदे को चूसने लगी.

"क्या तुम मेरे बारे मे लिखते हो?" वो एक बार फिर उसे पूछने लगी. वो

चाट्ती थी कि भले ही वो झूट बोले लेकिन बोले कि वो उसी के बारे

मे लिखता है कि किस तरह वो उसके शरीर को प्यार करता है और वो

किस तरह उसकी चुदाई करता है.

राज को लगा कि आज तक जो बातें उसने छुपाने की कोशिश की थी अब

वो छुपी नही रह गयी थी इसलिए उसने कहा, "हाँ में हम दोनो के

बारे मे लिखता हूँ. मैं लिखता हूँ जो हम आज कर रहे है,

मुझे तो ऐसा ही था कि हम हज़ारों साल मे भी ये सब नही कर

पाएँगे जो हम कर रहे है."

राज की बातें सुन रोमा मन ही मन उछल पड़ी. इसका मतलब उन

कहानियों मे वो में थी जिनके बारे मे राज लिखता है.उसका उत्तेजित

शरीर खुशी के मारे झूम उठा. वो राज के लंड को और जोरों से

चूसने लगी वो उसके रस की एक एक बूँद पीना चाहती थी.

रोमा के इस बदले व्यवहार को देख राज चौंक उठा, "ऑश रोमा ये क्या

कर रही हो डार्लिंग तुम्हारे दाँत लग रहे है.... थोड़ा धीरे

धीरे चूसो ना ऑश."

पर रोमा थी कि वो सुन ही नही र्है थी, मुट्ठी मे उसके लंड को

मसल्ते हुए जोरों से उसे चूस रही थी. राज ने उसके सिर को पकड़ा

और अपने वीर्य की धार उसके मुँह मे छोड़ दी. रोमा जल्दी जल्दी उसके

वीर्य को निगलने लगी. उसका वीर्य की आखरी बूँद निगलने के बाद भी

वो उसके लंड को चाट्ती रही.

"मुझे तो बहोत मज़ा आया लेकिन ऐसा लगता है कि तुम्हे मेरा

लंड चूसने मे मुझसे ज़्यादा मज़ा आया." राज ने कहा.

रोमा ने अपना चेहरा चादर के नीचे से निकाला और उसके बगल मे

लेटते हुए कहा, "ये तो शैतानी थी पर अब मेरी चूत मे आग लगी

हुई है."

"में भी कभी कभी शैतान हो जाता हूँ." कहकर राज उसकी टाँगो के

बीच आ गया.

रोमा ने अपने प्यारे भाई के लिए अपनी टाँगे फैला दी. जब राज ने

अपना मुँह उसकी चूत पर रखा तो सिसक पड़ी. राज उसकी चूत मे अपनी

उंगली के साथ अपनी जीएब दल उसे चाट रहा था तो कभी उसकी छूट

को मुँह मे भर चूसने लगता.

"हाआँ राअज इसी तरह ऑश कितना अछा लग रहा है.." रोमा मादकता

मे चिल्लाने लगी, "हाआँ राज इसी तरह चूसो ऑश थोडा नीचे को

चॅटो नाअ हाँ भर लो मुँह मे ऑश थोडा काटो ना....."

राज अपनी जीभ को पूरा फैलाते हुए उसकी चूत को उपर से नीचे तक

चाटने लगा साथ ही वो उंगलियों को अंदर बाहर कर रहा हा.

"ऑश ऑश हाआँ आईसीईइ ही." रोमा सिसक रही थी . वो छूटने के

कगार पर पहुँच चुकी थी.

राज की फुदक्ति जीब अजीब सा मज़ा दे रही थी रोमा को. वो और जोरों

से अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा. रोमा का शरीर आकड़ा और उसने

अपनी कमर उठा अपनी चूत को राज के मुँह पर और दबा पानी छोड़

दिया.

राज पूरी चूत को मुँह मे भर उसके रस को पीने लगा. आक्खिर एक एक

बूँद चूसने के बाद वो निढाल हो उसके बगल मे लेट गया.

रोमा ने अपनी एक टांग उठा कर राज के उपर रखते हुए कहा, "राज

मुझे पर एक कहानी लिखो, एक दम गंदी तुम्हारे जो दिल चाहे लिखो,

में तुम्हारा हर सपना हर ख़याल पूरा करूँगी."

"ज़रूर लीखूंगा रोमा....." कहकर राज ने उसे अपनी बाहों मे भर

लिया.

दोनो अंधेरे मे एक दूसरे की उखड़ी सांसो की आवाज़ो को महसूस कर रहे

थे. आज वो खुस था कि अब उसे काग़ज़ पर लिख कर अपने ख़यालों को

तालाब की गहेराइयों मे नही फैंकने पड़ेगा, कोई तो है जिसके साथ वो

उन ख़यालों को बाँट सकता है. तो भाई लोगो कैसी लगी ये कहानी

ज़रूर लिखना आपका दोस्त राज शर्मा
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04-10-2019, 03:19 PM,
#8
RE: bahan sex kahani दो भाई दो बहन
8

रोमा ने अपनी एक टांग उठा कर राज के उपर रखते हुए कहा, "राज

मुझे पर एक कहानी लिखो, एक दम गंदी तुम्हारे जो दिल चाहे लिखो,

मेने तुम्हारा हर सपना हर ख़याल पूरा करूँगी."

"ज़रूर लीखूंगा रोमा....." कहकर राज ने उसे अपनी बाहों मे भर

लिया.

दोनो अंधेरे मे एक दूसरे की उखड़ी सांसो की आवाज़ को महसूस कर रहे

थे. आज वो खुस था कि अब उसे काग़ज़ पर लिख कर अपने ख़यालों को

तलब की गहेराइयों मे नही फैंकना पड़ेगा, कोई तो है जिसके साथ वो

उन ख़यालों को बाँट सकता है.

अब आगे की कहानी.................................

जय अपनी बड़ी बेहन रिया को गाड़ी की ड्राइवर सीट पर बैठते देख

रहा था. रिया आज ब्लॅक जीन्स और टॉप मे काफ़ी सुंदर लग रही थी.

उसके बगल मे पॅसेंजर सीट पर बैठते हुए उसने एक सरसरी निगाह

रिया पर डाली. उसकी स्लीवेलेस्स टॉप के बगल से उसकी चुचियों का

कटाव दिखाई दे रहा था. उसकी भारी भारी चुचियों का उभार देख

उसके दिल मे हलचल होने लगी.

"आज तो मज़ा आ गया." रिया ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा.

"हां मज़ा तो आया," जय ने कहा.

रिया ने गाड़ी राज के घर से बाहर निकाल अपने गहर की ओर बढ़ा दी.

थोड़ी देर गाड़ी मे बिल्कुल शांति छाई रही. कोई किसी से कुछ नही

कह रहा था. जय रिया की चुचियों को घूरे जा रहा था जो उसके

शरीर के साथ साथ हिल रही थी.

रिया जानती थी कि जय उसकी चुचियों को घूर रहा है पर उसने

कुछ कहा नही. उसे ये अहसास था कि आज राज के साथ जाकर उसने जय

को एक दम अकेला छोड़ दिया था शायद वो उसी बात को लेकर नाराज़

था.

"तुम और राज कहाँ गायब हो गये थे?" आख़िर मे जय ने अपनी बेहन

से पूछ ही लिया, वैसे तो वो जानता था लेकिन फिर भी वो रिया के मुँह से

सुनना चाहता था.

"हम दोनो अलाव के लिए लकड़ियाँ ढूँढने गये थे." रिया ने अपने

कंधे उचकाते हुए कहा.

"नही तुमने उससे ज़्यादा कुछ किया था," जय अपनी बात पर ज़ोर देता

हुआ बोला, "क्या हुआ वहाँ पर?"

"तुम मेरे भाई हो और भाई बनकर रहो, बाप बनने की कोशिस मत

करो. तुम्हे इससे कोई मतलब नही होना चाहिए कि मेने क्या

किया.....समझे तुम. हम दोनो एक दूसरे के साथ दो चार बार क्या सो

लिए तुम तो मुझे अपनी जागीर समझने लग गये..... मेरे और भी

कई बॉयफ्रेंड है मालूम है ना तुम्हे." रिया ने उसे डाँटते हुए कहा.

"हां....मुझे मालूम है." जय ने शिकायत करते हुए कहा, "लेकिन

राज मेरा सबसे अच्छा दोस्त है... फिर उसके साथ क्यों?"

"पता नही बस हो गया जैसे तुम्हारे और मेरे बीच पहली बार हुआ

था." रिया इससे ज़्यादा कुछ नही कह पाई. "आख़िर तुम्हारी परेशानी

क्या है?"

"आज की रात से पहले तुम पूरे हफ्ते मुझे नज़र अंदाज़ करती आई

और आज तुम राज के साथ चली गयी." जय ने अपनी परेशानी

बताई, "सुबह तुम फिर कॉलेज के लिए चली जाओगी, तुम्हे मालूम है

में तुम्हे कितना मिस कर रहा हूँ. मैने तो सोचा था कि आज की रात

हम साथ साथ रहेंगे."

रिया की समझ मे आ रहा था कि जय क्या कहना चाहता है, "मैं

माफी चाहती हूँ छोटे भैया, और में भी तुम्हे मिस कर रही थी.

लेकिन जिंदगी हमारी सोच के अनुसार तो नही चलती हमे जिंदगी के

अनुसार चलना पड़ता है."

"अब ये छोटे भैया बुलाना बंद करो समझी में कोई अब भी छोटा

बच्चा नही हूँ." जे गुस्से मे बिफर पड़ा.

"ठीक है जाई. बताओ में क्या करूँ, जिससे तुम्हे खुशी मिल सके."

रिया ने कहा.

"अभी भी मेरे पास कुछ सिग्रेट और बियर के टीन पड़े है, हम फिर

से तालाब किनारे जाकर अपनी अलग पार्टी मना सकते हैं फिर देखो

क्या होता है." जय ने कहा.

"देखो क्या होता है?" रिया ने अपने आप से पूछा. उसे पता है कि क्या

होने वाला है जो होना है वो तो उसकी पॅंटी के अंदर छुपा हुआ है.

"अगर तुम्हारा दिल चलने का है तो गाड़ी यहाँ से दाईं तरफ मोड़

लो." जय ने कहा.

"मुझे पता है कि वहाँ कैसे पहुँचा जाता है, हां एक बात और

आज की रात अच्छी तरह बिहेव करना ये रात हमारे बीच आखरी रात

होगी. दूसरी बात ये बात बात पर जलना छोड़ो और अपने लिए कोई

अछी सी गिर्ल्फ्रेंड ढूंड लो जिसे तुम जब चाहे चोद सको हर बार

अपनी बेहन के भरोसे मत रहो समझे." रिया ने लगभग उसे समझाते

हुए कहा.

रिया की बात सुनकर उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया. उसने रिया के

बालों को पकड़ा और मरोड़ने लगा.

जय की इस हरकत से रिया के हाथो से गाड़ी का बॅलेन्स बिगड़ गया,

बड़ी मुश्किल से उसने गाड़ी को संभाला.

"लगता है तुम्हे फिर से मार खाने का शौक उठा है, जब जब ऐसी

बात करोगी फिर से बेल्ट की फटकार पड़ेगी." जय उसके बालों को

मरोदते हुए बोला.

रिया को अहसास हुआ कि वो कुछ ज़रूरत से ज़्यादा ही जय को बोल गयी

थी. इसलिए उसने कुछ नही कहा और अपने नीचले दांतो को चबाते

हुए गाड़ी तालाब के किनारे रोक दी. उसने एंजिन बंद कर दिया और

लाइट भी बुझा दी. अब गाड़ी मे पूरी तरह अंधेरा था, कुछ था तो

उनकी सांसो की हल्की हल्की आवाज़.

"जय.... चलो सिग्रेट जलाओ जिससे थोड़ा नशा हो जाए..." रिया

बात को संभालने के हिसाब से बोली, किंतु जय तो कुछ और ही चाहता

था... उसने रिया की बात को अनसुना कर दिया.

"नही आज तो पहले तुम्हे तुम्हारी बातों के लिए सज़ा मिलेगी." जय ने

कहा.

जय को अपने पिताजी के बरसों पहले कही हुई बात याद आ गयी. एक

दिन जब वो खाने के टेबल पर बैठे थे तो उसके पिता ने उसके कान

मे फुसफुसाते हुए कहा था, "बेटा कभी भी जिंदगी मे किसी औरत को

अपने पर हावी मत होने देना. ये मर्दों का काम है कि औरत को उसकी

औकात बताए, औरत की जागह हमेशा पैरों मे रहती है और

रहेगी."

वैसे जे बचपन मे बहोत नरम दिल का था लेकिन उसके बाप की इस

बात ने उसे गुस्से वाला बना दिया था. लेकिन उसके पिता भी ज़्यादा दिन

उनके साथ नही रह पाए थे, उसकी मा से झगड़ा कर चले गये

कभी वापस ना आने के लिए.

"आज तुमने अपनी हद की हर सीमा को पार कर दिया है और में तुम्हे

बता के रहूँगा कि तुम्हारी सही जगह क्या है." जय ने फिर गुस्से मे

कहा.

रिया का दिल घबरा गया, उसे जय के शब्दों मे अपने बाप की छवि

नज़र आने लगी. उसे पता था क़ि जय को कैसे रोकना चाहिए पर उसने

किया कुछ नही क्योंकि यही तो उनके खेल का हिस्सा था.

जय ने गाड़ी के स्टर्रिंग व्हील को इस कदर उठा दिया कि वो उनके बीच

से थोड़ा हट जाए. फिर उसने रिया की टाँगो से पकड़ उसे सीट पर पेट

के बल लिटा दिया.

उसने अपना हाथ रिया के नीचे कर उसकी जीन्स के बटन खोले और ज़िप

को नीचे कर उसकी जीन्स के साथ साथ उसकी पॅंटी को भी नीचे

खिसका दिया. जब उसके चूतड़ पूरी तरह नंगे हो गये तो उसे रिया

की दर्द सी भरी कराहें सुनाई देने लगी.

जय ने अपने पॅंट की बेल्ट खोल कर निकाल ली. फिर उसे दोहरा कर रिया

को सज़ा देने के लिए तैयार हो गया.

"प्लीस जय ऐसा मत करो...." रिया गिड़गिदते हुए बोली, "देखो तुम जो

कहोगे में करने को तैयार हूँ, क्यों ना हम पार्टी मनाए और मस्ती

करें."

"हम मस्ती ही तो कर रहे है," जय ने उसे याद दिलाते हुए कहा.

"हां कर तो रहे है," रिया ने धीरे से कहा, वो अपने आप को कोसने

लगी कि क्यों पूरे हफ्ते भर वो जय को नज़र अंदाज़ करती रही अगर

पहले ही उस पर ध्यान दिया होता तो कम से कम आज की रात इस मार

से तो बच जाती.

रिया को अपने आप पर इस तरह गाड़ी के अंदर अपने चूतड़ नंगे किए

लेटने मे शरम आ रही थी. उसे अपने आप पर गुस्सा भी आ रहा था

कि क्यों वो अपने भाई को इस तरह उस पर ज़्यादती करने दे रही थी.

क्यों उसने शुरू से जय को नही रोका जब उसने पहली बार उसे छुआ था.

उसे लग रहा था कि दिन पर दिन जय ठीक उसके बाप की तरह ही होता

जा

रहा है, ठीक वही गुस्सा वही चिड़चिड़ा पन.

तभी जय का दायां हाथ उठा और एक हवा के झोके की तरहा उसके

चूतदों पर आया. बेल्ट के बकल की आवाज़ जोरों से गूँजी और उसके

शरीर मे एक दर्द की लहर सी दौड़ गयी. रिया ने दर्द के मारे अपने

दाँत गाड़ी की सीट मे गढ़ा दिए और दर्द से कराहने लगी. पर जय ने

फिर दूसरा वॉर किया और रिया हल्के से चीख पड़ी. वो रिया को सांस

भी लेने नही दे रहा था.

"बस जय बहोट हो गया...." रिया ने अपने भाई से कहा.

पर जय था की उसे मारता गया, रिया की आँखों से आँसू निकल रहे

थे. आख़िर जय ने तक कर बेल्ट खिड़की के बाहर फैंक दी. गुस्से मे

जय गाड़ी के बाहर आ गया उसकी खुली पंत उसके पैरों मे जेया गिरी.

"तुम बहोत गंदी हो रिया,,,,,,बहोत गंदी...." जय ने गुस्से मे

लगभग चीखते हुए कहा.

"अब क्या हुआ ये तो बताओ?" वो ज़ोर से जवाब देते बोली. वो अपनी जगह

से उठी और गाड़ी के बाहर आते हुए बोली. उसने अपनी जीन्स और पॅंटी

वापस उपर चढ़ ली और अपने सूजे हुए चूतदों को छुपा लिया.

जय फिर से एक बार उसे मारने के लिए दौड़ा, जैसे कि उसे झप्पड़ मार

देगा, रिया ने अपने आपको झुक कर बचा लिया.

"जय तुम पिताजी नही हो जो उनकी जगह लेने की कोशिश कर रहे

हो..... ना जाने तुम ऐसे क्यों बिहेव कर रहे हो मेरी तो कुछ समझ

मे नही आ रहा." रिया ने कहा.

जय ने पलट कर रिया के पीछे देखा. चाँद की रोशनी ठीक उसके

चेहरे पर पड़ रही थी जिससे उसका सुंदर चेहरा जगमगा रहा था.

उसका सुंदर चेहरे को देख उसका गुस्सा ठंडा पड़ता गया. जय उसकी

और बढ़ा तो रिया अपने आपको उससे बचाने के लिए पीछे की ओर

खिसकी लेकिन वो गाड़ी के बॉनेट से टकरा उसपर लगभग लुढ़क सी

गयी.

उसके सूजे हुए चूतड़ गाड़ी की ठंडी बॉडी से टकराए तो दर्द के मारे

उसके मुँह से कराह निकल गयी.

"क्यों कि में तुमसे प्यार करता हूँ." उसने फुसफुसाते हुए कहा और

अपने होंठ रिया के होठों पर रख उन्हे चूसने लगा.

जय ने जो कुछ किया था उससे रिया को जय से नफ़रत होने लगी थी

लेकिन उसके होठों का स्पर्श अपने होठों पर पाकर उसका दिल पिघल

गया. जय ने उसके मुँह को खोल अपनी जीभ उसके मुँह मे घुसाने की

कोशिश की तो रिया ने अपना मुँह खोल दिया और उसकी जीभ से अपनी

जीब मिला दी.

"ओह जय......." रिया जय से लिपट गयी और जोरों से उसकी जीब

और होठों को चूसने लगी. उत्तेजना गुस्से पर हावी हो गयी थी.

जैसे ही जय ने उसकी जीन्स और पॅंटी को खिसका कर नीचे किया रिया

ने पाऔ मे पहनी सॅंडल को पैरों से दूर छितका कर फैंक दिया.

रिय ने गाड़ी के बॉनेट पर लेटे हुए अपने पैर फैला दिए. चूत से

रिस्ते पानी की बूंदे उसकी काली झांतो पर चाँद की रोशनी मे किसी

ऑश की बूँद की तरह चमक रही थी.

"मेरे भाई प्लीज़ मुझे प्यार करो ना....." रिया मादकता की लौ मे

बहती हुई बोली, "मुझे तुम्हारे लंड को अपनी चूत मे महसूस करना

है जे."

"रिया जिस तरह तुम रोमा को देख रही थी ना मेने देखा था," जय

अपनी पॅंट के बटन खोलता हुआ बोला, "में जानता हूँ कि तुम भी

उसकी चूत का स्वाद उतना ही चखना चाहती हो जितना की में."

"हां.... जय बहोत इच्छा है उसकी चूत को चूसने की....बड़ी

प्यारी चूत होगी उसकी..." रिया ने कहा.

"अगली बार हम दोनो उसकी चूत का स्वाद साथ साथ चखेंगे." जय ने

कहा.

जय ने अपने खड़े लंड को अपने अंडरवेर से आज़ाद किया. रिया ने

निगाहें झुका कर अपने भाई के लंड को देखा और गाड़ी के बॉनेट पर

अच्छी तरह लेट गयी और अपनी टाँगो को और फैला दिया. जय अपनी

बेहन की टाँगो के बीच आया और अपने लंड को उसकी चूत पर घिसने

लगा. फिर उसकी चूत को अपनी उंगलियों से थोड़ा फैला उसने अपना लंड

अंदर घुसा दिया.

क्रमशः..................
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04-10-2019, 03:19 PM,
#9
RE: bahan sex kahani दो भाई दो बहन
9

गतान्क से आगे.......

जैसे ही जय का लंड उसकी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर

घुसा रिया सिसक पड़ी..

." ओह जय ओह." रिया ने अपनी टांगे उसकी कमर इर्द गिर्द लपेट

उसे और अपने करीब करते हुए कहा. " ऑश जय चोदो मुझे अपने इस

घोड़े जैसे लंड से ऑश हां ज़ोर ज़ोर से चोदो."

जय अपने लंड को उसकी चूत की और गहराइयों तक पेलने लगा.

रिया शायद उसके प्यार को समझ नही पाएगी. आज जो कुछ उसने राज

के साथ किया वो गुस्सा तो काफूर हो चुका था, उसे पता था कि रिया

कभी उसकी नही हो सकेगी हमेशा और कई होंगे उसके लिए.

यही सब सोचते हुए वो अपने लंड को और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत के

अंदर बाहर करने लगा. जय उछल उछल कर धक्के मार रहा था.

उसने उसकी जाँघो को पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

"हाआँ जय..... ऑश ऑश हाां ऐसे हिी चूओड़ो ऑश हाआँ बहोट

अच्छा लग रहा हाऐी."

शायद जय के दिल मे अभी भी थोड़ा गुस्सा बाकी था, वो ज़ोर ज़ोर से

रिया की चूत मे लंड पेलने लगा. हर धक्के पर रिया का शरीर कांप

उठता. रिया की चुचियाँ उसके टॉप के अंदर काफ़ी फूल गयी थी और

उसके तने निपल जैसे बाहर को निकल रहे थे.

रिया ने अपनी टाँगे उसकी कमर मे लपेट ली और अपने होंठ उसके होंठो

पर रख बोली, "ऑश जय कितना आअच लग रहा हाआँ ऐसे ही अपने

लंड को मेरी चूओत मे अंदर तक घुसा डोओओओओओ ऑश हाआँ ज़ोर से."

"तुम मुझे छोड़ कर तो नही चली जाओगी ना? जय ने रिया से पूछा.

"अगर मुझे इसी तरह हमेशा चोदते रहे तो नही जाउन्गी," रिया ने

अपनी टाँगो को उसकी कमर से निकाल उसके कंधों पर रखते हुए कहा.

"अपने टॉप को उपर खिँचो में तुम्हारी ये मदमस्त चुचियों देखना

चाहता हूँ." जे ने कहा.

एक शैतानी मुस्कुराहट आ गयी रिया के चेहरे पर. उसने अपने टॉप को

उपर खींच अपनी चुचियाँ नंगी कर दी.

जय उसकी भरी हुई चुचियों को देखने लगा. उसके निपल तन कर

खड़े थे. जब भी वो ज़ोर का धक्का मारता तो उसकी चुचियाँ उछल

पड़ती. कितना सुन्दर बदन था उसकी बेहन का. उसकी चूत जब उसके

लंड को अपनी माँस पेशियाओं मे जकड़ती तो वो पागलों की तरह और ज़ोर

के धक्के लगाने लगता.

रिया ने अपनी दो उंगलियाँ अपने मुँह मे ली चूसने लगी, जब उसकी

उंगलियाँ उसके थूक से पूरी तरह गीली हो गयी तो उसने वो थूक अपने

निपल के चारों और मल दिया, इससे उसके निपल और तन कर चाँद की

रोशनी मे चमकने लगे. रिया किसी छीनाल की तरह अपने भाई को

रिझाने मे लगी थी.

'हाआँ इसीसी तरह करो ऑश." जय और ज़ोर के धक्के मारते हुए

बोला, "तब तक करती रहो जब तक कि तुम्हारा छूट नही जाता."

रिया ने देखा कि उसकी ये अदा उसके भाई को पसंद आ रही थी, अब जय

और जोरों से उसकी चूत मे लंड डाल रहा था. किसी घोड़े की तरह

उछल उछल कर वो धक्के मार रहा था.

रिया को लगने लगा कि उसकी चूत मे जैसे भूचाल आ गया हो और वो

उबल पड़ने को तैयार है. वो अपनी कमर और आगे को कर जय के लंड

को अंदर तक ले रही थी.

जय की साँसे तेज हो गयी थी. वो ज़ोर लगाकर अपनी बेहन को प्यार से

चोद रहा था. आज के पहले कभी उसने उसकी चूत को इतना गरम नही

पाया था. जैसे ही वो अपना लंड रिया की चूत मे घुसाता उसके

ख़यालों मे रोमा आ जाती. जितना वो रिया को चोद्ता उतनी ही चाह रोमा

को चोदने की बढ़ती जा रही थी.

रिया अपने भाई से अलग नही थी. जय के हर धक्के पर उसे राज की

याद आ रही थी. ओह्ह्ह क्या चुदाई की थी उसने आज उसकी. राज के

ख़यालों मे खो वो और ज़ोर से कमर आगे कर जय के लंड को अपनी

चूत मे ले लेती.

अचानक रिया का शरीर कंपा और उसकी चूत किसी लावे की तरह फट

पड़ी. जैसे कोई नदी का बाँध खोल किया जाता है उसी तरह उसकी

चूत पानी छोड़ने लगी.

थोड़ी देर बाद जब उसका शरीर थोड़ा शांत हुआ तो जय ने उसे पेट के

बल गाड़ी के बोनेट पर सुला दिया. उसे लगा कि जय अब पीछे से उसकी

चूत मे लंड डाल अपना पानी छोड़ देगा. लेकिन जय था कि उसके मन मे

तो कुछ और ही था, वो अपने गीले और तने लंड को रिया की गंद के

छेद पर घिसने लगा.

"ये तुम क्या कर रहे हो जय?" रिया ने चौंकते हुए पूछा.

"मुझे पता है में क्या कर रहा हूँ." जय ने अपने लंड को और

घिसते हुए कहा.

"लेकिन जय मेने पहले ऐसा कभी नही किया है." रिया ने कहा.

"टेन्षन मत लो सब अच्छा होगा." जे ने गंद के छेद को फैलाते हुए

कहा.

रिया के मुँह से कराह निकल पड़ी जब जय का लंड उसकी गंद के छेद

के अंदर घुसा. जैसे जैसे लंड गंद के छेद मे घुसता गया उसकी

कराहतें सूबकियों मे बदल गयी.

"ओह मर गयी......" रिया कराह रही थी.

जय अपने लंड को और अंदर तक घुसाते हुए धक्का मारने लगा.

थोड़ी ही देर मे उसके लंड ने रिया की गंद को अपने वीर्य से भर

दिया. जब उसके लंड से वीर्य का एक एक कतरा भी निकल गया तो उसने

अपने लंड को बाहर निकाल लिया.

"ये सब क्या था?" रिया ने गुस्से मे जय से पूछा.

"ओह्ह... रिया अब ये मत कहना कि तुम्हे मज़ा नही आया." जय ने कहा.

"अगर मुझे पहले से मालूम होता कि तुम मेरी गंद मरोगे तो शायद

बात अलग होती." रिया ने कहा. "अगली बार करने से पहले मुझसे पूछ

लेना ये नही कि जो तुम्हारे मन मे आए तुम करोगे. पूरी रात खराब

कर के रख दी."

"मुझे माफ़ करदो रिया...." जय ने माफी माँगी, "चलो घर चलते

हैं."

"हां यही ठीक रहेगा." रिया अपने कपड़े दुरुस्त करते हुए बोली.

रोमा अपनी सहेली गीता के साथ बस के पीछे की सीट पर बैठी थी.

बस करीब करीब खाली थी. आज गुरुवार था हफ्ते की छुट्टियाँ आने

वाली थी. दोनो ये सोच रही थी कि इस शनिवार और रविवार को क्या

किया जाए.

"अगर तुम कहो तो शनिवार को में थोड़ी देर के लिए आ सकती हूँ."

गीता ने रोमा से कहा.

गीता की बात सुनकर रोमा को अस्चर्य हुआ. उसने तो यही समझ लिया

था कि पीछले दिनो गीता के साथ जो कुछ हुआ था उससे गीता उसके

भाई मे दिलचस्पी छोड़ लेगी. और अब तो वो राज को बिल्कुल भी गीता

मे इंटेरेस्ट नही लेने दे सकती थी. जो कुछ भी उन दोनो के बीच हुआ

था उसके बाद राज सिर्फ़ उसका था सिर्फ़ उसका.

"हाँ देखते है," रोमा ने उसे टालते हुए कहा, "लेकिन राज कह रहा

था कि शायद उस दिन हम जय और रिया के घर जाएँ."

जब घर नज़दीक आ गया तो रोमा की आँखें राज को ढूँढने लगी. राज

को कहीं भी ना पाकर उसका दिल डूबने लगा. उसके दिल चाह रहा था

कि राज उसके पास होता तो वो उसका हाथ पकड़ तालाब किनारे टहलने

जाती. कितना अच्छा लगता है राज का हाथ पकड़ने मे. कितने दिन बीत

गये थे उसे और राज को साथ साथ मे.

"में तुम्हे बाद मे फोन करती हूँ गीता." रोमा ने कहा.

"ठीक है रोमा, राज को मेरा प्यार देना," गीता ने कहा और दोनो

सहेलियाँ हँसने लगी.

अपने कॉलेज की बॅग को बगल दबाए रोमा घर मे घुसी और सीधे

अपने कमरे की ओर बढ़ गयी. अपनी बॅग को टेबल पर रख कर जैसे ही

वो बिस्तर की तरफ मूडी उसने देखा कि एक बुक पड़ी थी. जिस पर कुछ

लीखा हुआ था.

"ओह्ह्ह राज..... तुम मेरे लिए लिख रहे थे. " रोमा ने उस किताब को

उठाया और सीने से लगा झूम गयी. रोम ने मन ही मन राज को माफ़

कर दिया की उसने तीन दिन से उसकी तरफ देखा भी नही था.

रोमा कमरे का दरवाज़ा बंद कर घूमते हुए बिस्तर के नज़दीक आई

और पेट के बल लेट गयी. पीछे से उसने अपनी संडाल उतार कर फैंक

दी. फिर उसने अपनी जीन्स के बटन खोल ढीला कर दिया शायद कोई

ज़रूरत पड़ जाए. उसने काँपते हाथों से उस किताब को खोला.... राज

ने कहानी को कोई नाम नही दिया था.

.......... में कितना अकेला हूँ इसलिए तुम्हे ढूंड रहा हूँ.

तुम्हारे बेडरूम मे देखा तो तुम वहाँ भी नही थी. तभी मुझे

बाहर से म्यूज़िक की आवाज़ सुनाई देती है, में तुम्हारे बेडरूम की

खिड़की पर आता हूँ और देखता हूँ कि तुम एक चादर पर अपनी रेड

बिकनी पहने तालाब के किनारे लेटी हो. तुमने अपने कानो पर इयरफोन

लगा अपने पोर्टबल सीडी प्लेयर जो मेने तुम्हे दिया था शायद कोई

गाना सुन रही थी........
Reply
04-10-2019, 03:19 PM,
#10
RE: bahan sex kahani दो भाई दो बहन
........ में चुप चाप वहाँ खड़ा तुम्हे निहारता रहा, तुम दीख ही

इतनी सुंदर रही थी. उस लाल बिकनी मे जकड़ी तुम्हारी अमरूद सी

चुचियों को देख मेरे मुँह मे पानी आ गया. तुम्हारे तने निपल

मुझे दिखाई दे रहे थे और मेरा लंड तनता जा रहा था. बिना

कुछ सोचे में अपने लंड को पॅंट के उपर से मसल्ने लगा........

..........तुम्हारा सपाट पेट मुझे बहोत ही अच्छा लग रहा था. उस

बिकनी मे सिमटी तुम्हारी चूत का तो जवाब ही नही था. में तुम्हारी

चुचियों को घूर रहा था. शायद तुमने मुझे देख लिया था क्योंकि

तभी तुम्हारी निगाह खिड़की की ओर पड़ी थी. धूप तेज थी इसलिए तुम

अपनी आँखों पर हाथ रख मुझे देखती हो. में तुम्हे देखते हुए

अपना लंड मसल रहा था. ........

....... तुमने हाथ मे एक तेल की बॉटल पकड़ रखी थी और मुझे

मदद के लिए हाथ के इशारे से बुलाती हो. में तुम्हारी तरफ आने

के लिए दौड़ पड़ता हूँ. मुझे आता देख तुम तुम पेट के बल लेट जाती

हो और अपनी बिकनी के बटन खोल देती हो. में तुम्हारे बगल मे

बैठ जाता हूँ और तेल को अपने पंजों मे लेता हूँ. मेरे हाथ

तुम्हारे शरीर पर तेल मलने लगते हैं. पहले में तुम्हारे कंधों

पर तेल लगता हूँ फिर नीचे होते हुए तुम्हाई बिकिनी के किनारे तक

पहुँचता हूँ........

इतना सब पढ़ कर रोमा के दिल की धड़कने तेज हो गयी थी, वो कीताब

को नीचे रख देती है. उन शब्दों ने एक मीठा मीठा प्यार सा

भर दिया था उसके शरीर मे, उत्तेजना मे शरीर काँपने लगा था.

उसने अपने ब्लाउस को जीन्स से बाहर निकाल उसके बटन ढीले कर

दिए. फिर एक हाथ से अपनी ब्रा को अपनी चुचियों पर से अलग कर वो

अपनी चुचि को हौले हौले मसल्ने लगती है. उसके निपल तुरंत ही

तन कर खड़े हो जाते हैं.

वो अपनी आँखे बंद कर उन शब्दों को हक़ीकत मे बदलते देखने

लगती है. उत्तेजना और गरमाहट से उसका बदन भर रहा था. उसका

मन तो कर रहा था कि वो अपना हाथ अपनी चूत पर रख उसे रगडे

और मसले पर वो कीताब को और आगे पढ़ना चाहती थी. अपने दिल के

जज्बातों को रोक उसने अपना हाथ ब्लाउस से बाहर निकाला और कीताब को

एक बार फिर उठा लिया.

........में तुम्हे घूमा कर पीठ के बल लीटा देता हूँ, तुम अपने

बिकिनी को अपनी चुचियों के और उपर कर लेती हो. फिर में तुम्हारे

नाज़ुक पावं पर मालिश करने लगता हूँ. ओह्ह्ह मुझे तुम्हारे ये छोटे

और नाज़ुक पंजे कितने आचे लगते है. फिर मेरे हाथ तुम्हारे

घूटने से होते हुए तुम्हारी जाँघो पर पहुँचते है. जैसे ही मेरी

उंगलियाँ तुम्हारी चूत के नज़दीक पहुँचती है तुम्हारा पूरा शरीर

काँपने लगता है. जब तुम्हे लग रहा होगा कि अब में तुम्हे वहाँ

चूऊँगा तभी में फिर तुम्हारे पैरों और पंजो की मालिश करने

लगता हूँ..........

........ में देखता हूँ कि तुम्हारी जांघों के बीच बिकिनी के उपर

से एक धब्बा सा दिखाई दे रहा है और वो बढ़ता ही जा रहा है.

में तुम्हारे पंजों मे गुदगुदी करता हूँ तो तुम खिलखिला उठती हो

और अपने पावं थोड़ा फैला देती हो. फिर में तुम्हारी जांघों के

अन्द्रुनि हिस्से पर तेल लगाने लगता हूँ. जब मेरी उंगली तुम्हारी चूत

पर पहुँचती है तो तुम्हारा शरीर मे एक अकड़न सी पैदा होती है

और में अपनी एक उंगली तुम्हारी चूत मे घुसा देता हूँ..........

......... तुम मुझसे गिड़गिडती हो की में तुम्हारी बिकिनी उतार दूं

लेकिन में तुम्हारी जांघों पर बैठ जाता हूँ और बहोत सारा तेल

तुम्हारी चुचियों पर उंड़ेल देता हूँ. फिर मेरे हाथ तुम्हारी

चुचियों और निपल को मलने लगते है.........

रोमा को अपने दरवाज़े पर थोड़ी आहट सुनाई देती है और देखती है

कि दरवाज़ा धीरे धीरे खुल रहा है, वो चोंक उठती है और

अपने कपड़े दुरुस्त करने की सोचती ही है कि उसे राज का चेहरा नज़र

आता है. वो राहत की साँस लेने लगती है.

वो देखती है की राज कमर पर सिर्फ़ एक सफेद टवल लपेटे मुस्कुराते

हुए कमरे मे दाखिल हो रहा है. उसकी इस तरह से कमरे मे दाखिल

होने पर वो हैरान थी

"ये क्या कर रहे हो? कहीं तुम पागल तो नही हो गये हो?" वो धीरे

से फुसफुसाते हुए कहती है. उसे डर था कि कहीं उनकी मम्मी को

उनके इस रिश्ते के बारे मे पता ना चल जाए.

"इतना घबरा क्यों रही हो? क्या तुम्हे डर लग रहा है?" उसने उसे

चिढ़ाते हुए कहा और लापरवाही से अपना टवल खोल ज़मीन पर फैंक

दिया.

"क्या तुम्हे डर नही लगता?" रोमा ने पलट कर पूछा.

रोमा से रहा नही गया, वो उसके सुन्दर लंड को देखने लगी, जो इस

समय छोटा और मुरझाया हुआ था, लेकिन उसे पता था कि जब वो

टंकार खड़ा और मोटा होगा तो किसी घोड़े के लंड से कम नही लगेगा.

उसके लंड की गोलियाँ एक घने जंगल की तरह झांतों से घिरी हुई

थी. उसकी टाँगे पतली थी लेकिन किसी खिलाड़ी की टाँगों की तरह

मजबूत थी.

वो घूम कर पीठ के बल लेट जाती है, जिससे उसके खुले बटन से

ब्लाउस खुल जाता है और उसकी सफेद ब्रा दिखाई देने लगती है. ब्रा

से चलकती एक चुचि और तना हुआ निपल राज को और आकर्षित करता

है. फिर उसकी नज़र अपनी कीताब पर पड़ती है जो उसने उसी के लिए

छोड़ी थी.

"तो तुमने कहानी पढ़ ही ली....."

"हां में इसे ही पढ़ रही थी...." रोमा ने जवाब दिया.

"तुम्हारे आधे कपड़े खुले हुए है," उसके बदन को निहारते हुए राज

उसके करीब आकर उसके बगल मे लेट जाता है, "क्या तुम अपने आप से

खेल रही थी?"

राज की बात सुन कर उसे शरम आ जाती है लेकिन अब अपने भाई के

साथ गंदी गंदी बातें करने मे उसे भी मज़ा आता था.

"हां खेल तो रही थी... लेकिन में पहले इसे पढ़ना चाहती थी....

मुझे विश्वास नही हो रहा है कि तुमने ये सब मेरे लिए लिखा

है... अपनी इस बेहन के लिए जो तन मन से तुम्हे प्यार करती है...

तुम्हारी पूजा करती है."

राज उसके गोरे चिकने बदन को निहारने लगता है.." मुझे हमेशा से

यही डर लगा रहता था कि अगर तुम्हे ये पता चलेगा कि में तुम्हे

कितना प्यार करता हूँ तो तुम क्या सोचोगी. अगर में तुम्हे खो देता

तो शायद में मर ही जाता."

"और ये बात हमेशा याद रखना राज...." रोमा उसकी छाती पर हाथ

फैर्ते हुए बोली.

"तुम कहना क्या चाहती हो?" राज ने पूछा.

रोमा के मन मे तुरंत गीता का ख़याल आया जो उसके भाई के पीछे

पड़ी थी, फिर वहाँ रिया भी तो थी. रोमा जानती थी कि उसे अपने

भाई पर विश्वास करना होगा, फिर उनके बढ़ते प्यार और रिश्ते ने

उसके मन से डर को निकाल फैंका.

"कुछ नही ये लड़कियों की बातें है जो तुम नही समझोगे." रोमा ने

कहा.

राज की नज़र एक बार फिर कीताब पर पड़ी, "कहाँ तक पढ़ चुकी हो

अब तक?"

"बहुत ज़्यादा और अछी तरह जान गयी हूँ कि में तुम्हे बहोत प्यार

करती हूँ," कहकर वो उसके आँखों मे झाँकने लगी.

राज झुककर उसकी खुली चुचियों को चूमने लगा. पहले उसने चुचि

को नीचे से चूमते हुए अपनी जीब चुचि की पूरी गोलाईयों पर

घूमाते हुए उसके निपल को मुँह मे ले चूसने लगा.

क्रमशः..................
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