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Chudai Kahani मैं उन्हें भइया बोलती हूँ
06-27-2017, 10:52 AM,
#1
Chudai Kahani मैं उन्हें भइया बोलती हूँ
मैं उन्हें भइया बोलती हूँ 


एक बार फिर मैं आपके सामने अपनी एक बहुत ही हसीन आपबीती लेकर उपस्थित हुई हूँ, आशा करती हूँ आपको पसंद आयेगी।
मेरे पापा के एक दोस्त हैं अनिल अग्रवाल ! पापा और अनिल अंकल एक ही कम्पनी में काम करते हैं, दोनों की काफी अच्छी दोस्ती है।
अनिल अंकल हमारे घर अक्सर आते रहते हैं।
एक दिन अनिल अंकल का पापा के पास फोन आया, कहा- यार मुझे और मेरी पत्नी को रिश्तेदारी में एक शादी में जाना है और मेरा बेटा भी काम के सिलसिले में बाहर गया है। हम शादी में जायेंगे तो पलक बहू घर में अकेली हो जाएगी, शादी में जाना भी जरूरी है और मेरी पोती बहुत छोटी है, तो हम पलक को अकेला नहीं छोड़ सकते। क्या तुम रोमा को कुछ दिन के लिए मेरी बहू के साथ हमारे घर में रहने के लिए भेज सकते हो?
तो पापा ने कहा- मैं रोमा से पूछ कर बताता हूँ।
फिर पापा ने मुझसे पूछा तो मैंने कहा- ठीक है, मैं चली जाऊँगी।
पापा ने अंकल को कह दिया- ठीक है, वो पलक के साथ रह लेगी !
तो अंकल ने कहा- हमें कल शाम में जाना है, मैं कल सुबह रोमा को लेने आ जाऊँगा।
उनका घर हमारे घर से काफी दूर है, मैंने अपनी तैयारी की जाने की और अगले दिन सुबह अंकल मुझे लेने के लिए आ गये। मैं तैयार हो रही थी, मम्मी ने उन्हें जलपान कराया फिर उन्होंने कहा- हम दोनों में तो एक हफ्ते के लिए जा रहे हैं पर मेरा बेटा तीन-चार दिन में घर वापस आ जायेगा तो वो रोमा को वापस छोड़ देगा तब तक रोमा पलक और उसकी बेटी के साथ रह लेगी।
पापा ने कहा- ठीक है यार, जब तक तुम दोनों नहीं आ जाते, रोमा वहाँ रह सकती है।
और फिर अंकल मुझे लेकर अपने घर आ गए।
उनके घर जाकर मैं उनकी बहू से मिली, वैसे तो मैं उनसे पहले भी मिल चुकी थी जब वो हमारे घर आई थी पर हमारी ज्यादा बात नहीं हो पाई थी।
फिर शाम को पाँच बजे अंकल और आँटी की ट्रेन थी तो वो चले गये, मैं उनके घर में थोड़ी चुप-चुप सी थी तो पलक भाभी ने मुझसे कहा- रोमा, तुम इतनी चुप क्यों हो? क्या तुम्हें यहाँ अच्छा नहीं लग रहा है?
मैंने कहा- नहीं नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है !
तो भाभी कहने लगी- रोमा, तुम इसे अपना ही घर समझो, किसी भी चीज की जरूरत हो तो बेझिझक मुझसे कहना ! तुम मुझे अपनी सखी-सहेली ही समझो।
भाभी की बेटी अभी नौ महीने की है, मैं उसके साथ खेलने लगी।
भाभी ने रात का खाना बनाया, हमने खाना खाया, फिर मैंने भाभी से कहा- मैं कहाँ पर सोऊँगी भाभी?
तो भाभी ने कहा- रोमा, तुम मेरे साथ मेरे ही कमरे में सो जाओ, तुम्हारे भईया तो है नहीं, तुम मेरे साथ सोओगी तो अच्छा रहेगा।
रात में भाभी और मैं कुछ बातें करने लगे। उनकी बेटी रोने लगी तो भाभी ने अपना ब्लाउज ऊपर करके एक उरोज को बाहर निकाल कर गुलाबी निप्पल को बेबी के मुँह में देकर उसे दूध पिलाने लगी।
मैं यह देख कर वहाँ से उठ कर जाने लगी तो भाभी ने कहा- कहाँ जा रही हो रोमा ! बैठी रहो ! इसमें क्या शरमाना !
मैं वहीं बैठी रही।
भाभी के स्तन काफी बड़े थे जो मुझे साफ साफ दिखाई दे रहे थे। मैंने भाभी से पूछा- भाभी, आपकी अरेंज मैरिज थी या लव मैरिज?
तो भाभी मुस्कुराने लगी कहा- अरेंज कम लव मैरिज थी।
फिर मैंने पूछा- भाभी, आप और भईया कहाँ मिले थे?
तो भाभी कहने लगी- हम कॉलेज में मिले थे !
काफी देर तक हम ऐसे ही बातें करते रहे, बात करते करते रात का एक बज गया था, मैंने भाभी से पूछा- भईया ने आपको प्रपोज कैसे किया था?
तो भाभी कहने लगी- रात बहुत हो गई है रोमा, हमें सोना चाहिए, अब कल बात करेंगे।
फिर सुबह जब मेरी नींद खुली तो भाभी बिस्तर पर नहीं थी। मैं उठ कर बाथरूम की तरफ गई पर बाथरूम अन्दर से बन्द था। भाभी को पता चल गया था कि मैं उठ गई हूँ तो उन्होंने अन्दर से ही कहा- रोमा, मैं अभी 5 मिनट में निकलती हूँ !
मैंने कहा- ठीक है।
फिर भाभी बाथरूम से निकली तो वो सिर्फ ब्रा-पेंटी में थी और वो ब्रा-पेंटी सफ़ेद रंग की पारदर्शी थी। भाभी तौलिये से अपने बालों को पौंछ रही थी।
मैं उन्हें देखती ही रही, उनके बड़े बड़े उरोज ब्रा में से छलक-झलक रहे थे और उनकी योनिस्थल पर हल्के हल्के बाल थे, जो मुझे उस पारदर्शी ब्रा पेंटी से दिखाई दे रहे थे। मैं उन्हें एकटक देखे जा रही थी।
फिर भाभी ने अलमारी से अपने कपड़े निकाले और उन्हें पहनते हुए भाभी ने मुझे कहा- जाओ रोमा, तुम भी जाकर नहा लो।
मैं अपने बैग से कपड़े निकलने लगी पर बैग में ब्रा और पेंटी दिखी नहीं तो मैं बैग में ही ढूंढने लगी।
तो भाभी ने मुझे देख कर पूछा- क्या ढूँढ रही हो रोमा?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं भाभी !
तो उन्होंने कहा- क्या हुआ, बताओ? तुम कुछ परेशान सी लग रही हो?
तो मैंने कहा- हाँ भाभी, लगता है मैं अपनी ब्रा-पेंटी घर ही भूल आई हूँ, वो बैग में नहीं है !
तो भाभी ने कहा- इसमें परेशान होने की क्या बात है, मेरे पास बहुत सारी हैं तुम वो ले लो !
तो मैंने कहा- भाभी, आपकी ब्रा-पेंटी मुझे कहाँ फिट आयेंगी, आप का साइज़ और मेरा साइज़ अलग अलग है।
तो भाभी ने कहा- मेरे पास तुम्हारे साइज़ की ब्रा-पेंटी भी हैं। जब मेरी नई नई शादी हुई थी तो मेरा साइज़ भी तुम्हारे साइज़ जितना ही था, तुम्हारे भईया जब भी बाहर जाते हैं, मेरे लिए ब्रा पेंटी लेकर ही आते हैं। रुको, मैं तुम्हें वो लाकर देती हूँ !
तब भाभी ने अलमारी खोली और उसमें से मुझे अपनी 4-5 ब्रा-पेंटी निकाल कर दी और कहा- ये लो रोमा, ये तुम रख लो ! अब
ये मेरे साइज़ की नहीं है, ये तुम्हारे काम आयेंगी।
मैं नहाने चली गई। जब मैं नहा कर बाहर आई तो भाभी कमरे में ही थी।
भाभी ने मुझे कहा- रोमा, दिखाओ तो तुम्हें ब्रा पेंटी ठीक आई या नहीं?
तो मैंने कहा- हाँ भाभी, ठीक साइज़ की हैं।
तो उन्होंने कहा- दिखाओ तो ! मुझ से क्या शरमा रही हो?
और उन्होंने मेरा तौलिया हटा दिया, फिर कहा- हाँ ठीक हैं ये !
और कहा- रोमा, मुझसे तुम शर्माया मत करो, मुझे अपनी दोस्त ही समझो !
तो मैंने कहा- ठीक है भाभी !
और वो कमरे से चली गई, मैंने अपने कपड़े पहने, फिर हमने नाश्ता किया।
मैंने फिर भाभी से पूछा- बताओ नाअ भाभी, आप लोग कैसे मिले थे?
तो भाभी ने कहा- मैंने बताया तो था कि हम कॉलेज में मिले थे और तुम्हारे भईया ने मुझे वहाँ प्रपोज किया, मुझे भी वो पसंद आये तो मैंने भी हाँ कर दी थी। फिर हम ऐसे ही मिलते रहे थे और पढ़ाई पूरी करने के बाद हमारी शादी हो गई।
और कहने लगी- शादी से पहले हमने लाइफ को खूब एन्जोय किया !
तो मैंने कहा- वो कैसे भाभी?
तो उन्होंने कहा- हम शादी से पहले खूब घूमते थे और मस्ती किया करते थे।
मैंने कहा- क्या क्या मस्ती करते थे आप?
तो उन्होंने कहा- हमने शादी के पहले भी बहुत चुदाई की है !
फिर भाभी ने मुझ से कहा- रोमा, तुमने कभी चुदाई की है?
तो मैंने कुछ नहीं कहा और मुस्कुराने लगी।
फिर भाभी ने कहा- बताओ रोमा? की है तुमने कभी चुदाई?
“की है !” मैंने भाभी से कहा- हाँ मैंने की है भाभी ! आप किसी को बताना मत !
उन्होंने ने कहा- ठीक है !
फिर भाभी ने कहा- कैसा लगा था तुम्हें?
तो मैंने कहा- बहुत अच्छा लगा था !
फिर भाभी ने कहा- चलो, मैं तुम्हें कुछ दिखाती हूँ !
हम कमरे में गए तो भाभी ने एक बैग निकाला, उसे खोला तो उसमें ढेर सारी सीडी थी !
मैंने पूछा- ये किसकी सीडी हैं?
तो भाभी ने कहा- चुदाई की सीडी हैं, तुम्हारे भईया की हैं हम कभी कभी साथ बैठ कर देखते हैं। और फिर जैसे जैसे उस सीडी में चुदाई होती है तुम्हारे भईया भी मुझे वैसे वैसे ही चोदते हैं। बहुत मजा आता है।
भाभी ने एक सीडी लेपटोप में लगा दी, भाभी और मैं उस सीडी में चल रही चुदाई को देखने लगे। चुदाई को देख कर मेरा मन भी चुदने का करने लगा और भाभी भी गर्म हो गई थी तो उन्होंने अपनी साड़ी उठाई और पेंटी के अन्दर हाथ डाल कर अपनी चूत में उंगली करने लगी, मैं उन्हें देख रही थी फिंगरिंग करते हुए !
फिर भाभी ने कहा- रोमा, क्या तुम्हारा मन नहीं कर रहा चुदने का?
मैंने कहा- भाभी कर तो रहा है !
तो उन्होंने मुझे कहा- तुम भी फिंगरिंग कर लो, तुम्हें अच्छा लगेगा !
और उन्होंने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया। मैं भी गर्म थी तो मैंने भी अपनी सलवार उतार दी।
फिर भाभी ने कहा- अब तुम भी करो रोमा !
तो मैं भी करने लगी।
भाभी ने कहा- रोमा, मैं तुम्हारी कुछ मदद करूँ क्या?
और फिर उन्होंने मेरा हाथ हटा दिया और मेरी चूत में अपनी उंगली डाल कर आगे पीछे करने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था कुछ ही देर बाद मैं झड़ गई।
फिर भाभी कहने लगी- रोमा, तुम्हारे भईया का लंड बहुत बड़ा और मोटा है, मुझे उससे चुदने में बहुत मजा आता है। वो 8-10 दिन से बाहर हैं तो मैं चुदाई की प्यासी हो गई हूँ, अब तो ऐसे लग रहा है कि वो जल्दी से आ जायें और मुझे चोदें ! और वो भी मुझे चोदने के लिए उतने ही बेताब होंगे जितना कि मैं उनसे चुदने के लिए बेताब हूँ ! देखना आते ही सबसे पहले वो मेरी चुदाई करेंगे !


अगली सुबह भईया का फ़ोन आया कि वो आज रात में घर आ रहे हैं तो भाभी की ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं था।
फिर मैंने भैया के उस बैग से एक दूसरी सीडी निकाली और उसे लेपटोप पर लगा कर देखने लगी और अपनी चूत में उंगली डाल कर हिलाने लगी।
भाभी ने कहा- रोमा, अब तुम्हें फिंगरिंग की नहीं किसी लंड की जरूरत है।
मैंने कहा- भाभी, अब वो मुझे कहाँ मिलेगा, इसलिए मैं ये कर रही हूँ।
तो भाभी ने कहा- रोमा, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकता हूँ।
मैंने पूचा- वो कैसे भाभी?
तो उन्होंने कहा- मैं तुम्हें अपने पति से चुदवा सकती हूँ !
मैंने चौंकते हुए कहा- यह क्या बोल रही हो भाभी आप? मैं ऐसा नहीं कर सकती ! वो आप के पति हैं, मैं उन्हें भइया बोलती हूँ।
तो भाभी ने कहा- तो क्या हुआ रोमा? मैं तुमको उनसे चुदने की परमिशन दे रही हूँ और वैसे भी काफी दिनों से वो बोल रहे थे कि उन्हें किसी और चूत का स्वाद चखना है। तो तुम ही उनको अपनी चूत का स्वाद चखा दो !
मैंने कुछ भी नहीं कहा, मैं चुप ही रही तो फिर भाभी ने कहा- अच्छा तुम आज रात हमारी चुदाई देख लो, फिर अच्छा लगे तो तुम भी अपनी चुदाई करवा लेना।
और कहने लगी- रोमा, जब तुम उनका लंड एक बार देख लोगी तो तुम खुद को रोक नहीं आओगी और उनसे चुदाई करवा ही लोगी।
फिर भाभी औरमैं रात के खाने की तैयारी करने लगे। रात के 8 बज चुके था पर भईया अभी तक नहीं आये थे तो भाभी ने उन्हें फोन लगाया और पूछा कि वो कहाँ पर हैं, घर कब तक पहुँचेंगे।
तो उन्होंने कहा- 10 बज जायेंगे घर आते तक !
फिर मैंने कहा- चलो भाभी, हम खाना खा लेते हैं।
भाभी ने कहा- ठीक है !
और हम खाना खाने बैठ गए। खाना खाकर कमरे में जा कर हम दोनों टी वी देखने लगे। थोड़ी देर बाद दरवाजे की घंटी तो भाभी झट से उठी और दरवाजा खोलने गई। मैं भी उठ कर कमरे से बाहर आई तो मैंने देखा, भाभी ने जैसे ही दरवाजा खोला, भैया उन पर टूट पड़े, उन्होंने भाभी को अपने गले से लगा लिया और उन्हें चूमने लगे। कभी वो भाभी के गाल और गर्दन को चूमते तो कभी उनके होठों को !
भाभी भैया को कहने लगी- रुक जाओ, इतनी जल्दी क्या है, मैं कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ !
तो भईया ने कहा- नहीं, मुझसे नहीं रुका जायेगा !
फिर भईया ने अचानक मेरी तरफ देखा कि मैं उन्हें देख रही हूँ तो वो भाभी से अलग हो गए। वो अन्दर आये और अपना
सामान रख कर मुझे कहा- अरे रोमा, तुम अभी तक सोई नहीं !
तो भाभी ने झट से कहा- नहीं, वो मेरे साथ आप के आने का इन्तजार कर रही थी।
फिर भाभी ने भैया को कहा- जाओ, आप जाकर फ्रेश हो जाओ, मैं खाना लगाती हूँ !
मैं भी कमरे में आकार टीवी देखने लगी तब भईया भी उसी कमरे में आए और फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चले गए।
तभी भईया ने आवाज लगाई- अरे, जरा मेरा तौलिया तो देना !
तब भाभी आई और मुझे कहा- रोमा, जरा उन्हें तौलिया दे देना, मेरे हाथ गन्दे हैं।


मैं तौलिया लेकर बाथरूम की तरफ गई और दरवाजा खटखटाया तो भईया ने कहा- दरवाजा खुला है !
तो मैंने दरवाजे को थोड़ा से खोला और कहा- यह आपका तौलिया !
तो भईया ने हाथ बड़ा कर तौलिया लिया और मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर खींचने लगे।
मैंने कहा- भईया, यह आपका तौलिया !
तो उन्होंने मेरा हाथ छोड़ दिया और दरवाजा बंद कर लिया। यह बात मैंने भाभी को आकर बताई तो भाभी हँसी और कहने लगी- रोमा, शायद उन्होंने समझा होगा कि मैं हूँ इसलिए उन्होंने तुम्हारा हाथ पकड़ कर अन्दर खींचा होगा। वो अक्सर ऐसा ही करते हैं, तौलिया लेकर बाथरूम नहीं जाते और फिर मुझे कहते हैं कि तौलिया दो और जब मैं उन्हें तौलिया देने जाती हूँ तो मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर खींच लेते हैं।
फिर भईया जब फ्रेश होकर बाहर आये वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगे। मैं भी मुस्कुराने लगी तो भाभी ने उनसे कहा- मेरे लिए क्या ले कर आये हो?
तो भईया ने कहा- वही जो हमेशा लाता हूँ ! बैग में है।
भाभी ने भईया को खाना परोसा और कहा- मैं जाकर देखती हूँ !
भाभी ने कहा- चलो रोमा !
मैं उनके साथ चली गई। भाभी ने बैग खोली तो उसमें एक बॉक्स था, भाभी ने भईया को आवाज देकर पूछा- बॉक्स में ही है क्या?
तो भईया ने कहा- हाँ बॉक्स में ही है !
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Reply
06-27-2017, 10:52 AM,
#2
RE: Chudai Kahani मैं उन्हें भइया बोलती हूँ
भाभी ने जल्दी से उस बॉक्स को खोला तो उसमें से गुलाबी ब्रा पेंटी का सेट था। भाभी ने वो मुझे भी दिखाया तो मैंने कहा- भाभी, ये तो उसी ब्रा और पेंटी के जैसे हैं जो आपने मुझे दी थी, और जो मैंने अभी पहन भी रखी हैं।
भाभी ने कहा- मुझे दिखाओ रोमा !
और उन्होंने मेरी कुर्ती को ऊपर कर दी और देखने लगी, कहने लगी- हाँ रोमा, ये तो एक जैसी ही हैं।
भाभी ने कहा- कोई बात नहीं !
और फिर भाभी ने भईया से पूछा- आपका खाना हो गया क्या?
तो उन्होंने कहा- हो ही गया है।
फिर भाभी ने कहा- मैं इसे पहन कर देख लूँ क्या?
भईया ने कहा- हाँ पहन लो, ये भी कोई पूछने की बात है?
फिर भईया कमरे में आये और भाभी से पूछा- पसंद तो आई ना?
तो भाभी ने कहा- हाँ बहुत अच्छी है !
फिर भईया ने अपनी बेटी को उठा कर कमरे से बाहर चले गए और उसके साथ खेलने लगे।
भाभी ने अपनी साड़ी उतार दी और मुझसे भी कहा- रोमा अब तुम भी कपड़े बदल लो !
मैं कपड़े बदलने बाथरूम में जाने लगी तो भाभी ने टोका- कहाँ जा रही हो?
तो मैंने कहा- कपड़े बदलने बाथरूम में जा रही हूँ !
तो भाभी ने कहा- तुम यहीं बदल लो, मुझे जाना है बाथरूम !
और फिर भाभी ने जल्दी से अपना पेटीकोट, ब्लाउज, ब्रा-पेंटी को उतार उस नई ब्रा पेंटी को पहना और बाथरूम में चली गई।
मैंने अपने कपड़े उतारे और अपने बैग से नाईटी निकालने लगी, तभी अचानक भईया ने आकर पीछे से मेरे बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगे और मेरी गर्दन पर चुम्बनों की बौछार कर दी। अचानक हुए इस हमले से मैं घबरा गई, मैंने कहा- भईया, ये क्या कर रहे हो आप?
तो भईया ने मेरा मुँह घुमाया और मुझे देख कर दूर हट गये और कहा- रोमा तुम? पलक कहाँ है?
मैं वैसे ही खड़ी थी ब्रा और पेंटी में, मैंने कहा- भाभी बाथरूम में हैं !
तो भईया ने कहा- मुझे माफ़ कर देना रोमा, मैंने सोचा पलक है।
और कहा- मैंने जो पलक के लिए लाया था वो तुमने कैसे पहन लिया? इसलिए मुझे गलतफहमी हो गई और मुझे लगा कि तुम ही पलक हो।
उधर भाभी बाथरूम से निकल कर आई और कहा- मैं यहाँ हूँ !
भईया ने भाभी की तरफ देख और कहा- तुम दोनों ने एक सी ब्रा-पेंटी कैसे पहनी हैं। मैं तो इस ब्रा-पेंटी का एक ही सेट लाया था तो ये दो जोड़ी कैसे हो गई। तुम दोनों ने एक सी ब्रा-पेंटी पहनी है।
तो भाभी ने कहा- आप एक बार पहले भी यही ब्रा पेंटी का सेट लाए थे मेरे लिए, जब हमारी शादी हुई थी, जो अब मुझे छोटी हो गई है तो मैंने रोमा को दे दी है और इत्तेफाक से रोमा वही पहने है।
भईया मुझे देख कर मुस्कुराने लगे, मैं भी मुस्कुराई और अपनी नाईटी पहन कर कमरे के बाहर जाने लगी तो भैया ने भाभी का हाथ पकड़ कर उन्हें अपने सीने से लगा लिया और उन्हें चूमने लगे।
तब भाभी ने कहा- अभी रुको, बेटी को सुला तो लेने दो !
फिर भाभी भईया से छुट कर बाहर आई तो मैंने भाभी से कहा- भाभी, आज मैं कहाँ सोऊँ?
तो भाभी ने कहा- हमारे ही कमरे में सो जाओ !
तो मैंने कहा- नहीं भाभी, भईया बहुत दिन बाद आये हैं।
और मैंने भाभी से इसे ही मजाक करते हुए कहा- आज तो भैया आप को छोड़ने वाले नहीं हैं, कैसे उतावले हो रहे हैं, मेरे सामने ही चूमा चाटी कर रहे हैं।
तो फिर भाभी ने कहा- हाँ, ये तो आज मुझे चोदे बिना छोड़ेंगे नहीं, तुम बगल वाले कमरे में सो जाओ !
और फिर भाभी ने भी मुझसे कहा- वैसे भी तुम्हें भी आज नींद कहाँ आयेगी !
मैं मुस्कुराने लगी तो भाभी ने कहा- सच सच बताना रोमा, तुम्हारा भी मन कर रहा है ना चुदने का?
तो मैंने कहा- हाँ भाभी, जिस तरह भैया आपके साथ चूमा चाटी कर रहे थे और मुझे भी उन्होंने जिस तरह पीछे से आकर पकड़ कर मेरे चूचों को मसल दिया, मुझे बहुत अच्छा लगा !
तो भाभी कहने लगी- तो कर लो ना इनके साथ सेक्स ! बहुत अच्छी चुदाई करते हैं तुम्हारे भईया ! इनसे चुदते हुए मुझे तो ऐसा लगता है कि मैं स्वर्ग में हूँ !
तो मैंने कहा- नहीं भाभी, आप जाइये, भईया आपकी राह देख रहे हैं, वो बहुत उताबले हो रहे हैं !
फिर भाभी बोली- मैं अपनी बेटी को सुला देती हूँ ! रोमा प्लीज, तुम इसे आज इसे अपने पास सुलाए रखना, क्योंकि जब ये मेरे साथ सेक्स करते है तो बहुत बुरी तरीके से करते हैं और उस हड़बड़ी में यह उठ जाती है, फिर इसे सुलाने में सारा मज़ा खराब हो जाता है।
फ़िर आगे बोली- मैं इसे सुलाती हूँ, जब सो जाएगी तो मैं तुम्हें आवाज दे दूंगी, तुम इसे ले जाना !
मैंने कहा- ठीक है भाभी, मैं ले जाऊँगी !
भाभी अपने कमरे में चली गई, मुझे नींद तो आ नहीं रही थी तो मैं उत्तेजनावश उनके कमरे के पास आ गई।
मुझे कुछ सुनाई दिया, भाभी भईया से कह रही थी- तुम रोमा की चुदाई करना चाहते हो? तुम उसे जिस तरह पीछे से आकर पकड़ कर उसके बूब्स दबा रहे थे, उसे बहुत अच्छा लग रहा था, जब उसने मुझे बताया, तो मैंने उससे पूछ लिया कि क्या वो सेक्स करना चाहती है तो उसने चुदने की इच्छा जताई !
भैया ने कहा- हाँ पलक, मैं भी रोमा को चोदना चाहता हूँ, मुझे उसकी चूत का स्वाद चखना है।
यह सुन कर जब मैं उनके कमरे में झांकने लगी तो भाभी सिर्फ पेंटी में थी, उन्होंने ब्रा उतार दी थी और बेटी को दूध पिला रही थी।
और भैया को भी ! भाभी का एक निप्पल उनकी बेटी के मुँह में था और दूसरा भैया के मुँह में ! वो दोनों को दूध पिला रही थी और कह रही थी- छोड़ो, बेटी के हिस्से का दूध भी तुम पी लोगे क्या?
भईया ने भाभी से कहा- अब यह सो गई है, तुम इसे रोमा को दे दो, अब तो मुझ से रहा नहीं जा रहा है।
भाभी ने मुझे आवाज दी और कहा- रोमा इसे ले जाओ।
मैं उनके कमरे में गई, भैया अभी भी भाभी के निप्पल को मुँह में लिए चूस रहे थे !
मुझे भाभी ने कहा- देख रही हो रोमा, इन्हें बिलकुल सब्र नहीं हो रहा है !


फिर मैंने जैसे ही उनकी बेटी को भाभी की गोद से उठाया, भईया ने भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनके दूसरे चूचे को हाथ से दबाने लगे। मैं उनकी बेटी को लेकर कमरे से बाहर आई, उसे दूसरे कमरे में लाकर सुलाया और फिर जल्दी से भईया और भाभी के कमरे के पास पहुँची, उनके कमरे में झांकने लगी।
भैया अभी भी भाभी के दुग्धकलश चूस रहे थे, इधर मेरी हालत भी अब ख़राब हो रही थी, मैं अपनी पेंटी के अन्दर हाथ डाल कर अपनी चूत को सहलाने लगी, फ़िर भईया भाभी की रति क्रिया देखने लगी।
फिर भईया ने अपने होंठों को भाभी के होंठों पर रखा और चूसने लगे। कुछ देर होंठों को चूसने के बाद भईया भाभी के बदन को
चूमते हुए नीचे आने लगे, कभी वो चूचियाँ चूसते तो कभी पेट की नाभि को और दोनों हाथों से बूब्स को जोर जोर से दबा रहे थे तो भाभी कहने लगी- थोड़ा धीरे करो !
तो भैया ने कहा- आज कुछ धीरे नहीं करुँगा।
और भैया फिर उरोजों को दबाने लगे, भाभी के मुँह से आअह्ह्ह्ह्ह् ह्ह आआअ ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह आअह्ह्ह की आवाजें निकल रही थी जो बड़ी ही मोहक उत्तेजक लग रही थी।
फिर भईया नाभि को चूमते हुए पेंटी के ऊपर से ही भाभी की चूत को चूमने लगे और भाभी के उरोजो को मथे जा रहे थे। अब भैया ने अपनी टीशर्ट और लोअर उतारी और फिर से चूत को पेंटी के ऊपर से ही चूमने लगे।
भाभी ने कहा- ऊपर से क्यूँ चूम रहे हो, पैंटी हटा कर अन्दर फ़ुद्दी चूमो !
तो भईया ने पेंटी को चूत से थोड़ा बगल में किया, उनकी चूत पर अपना मुँह रख कर चूत को चूसने लगे।
भाभी की आआह्ह्ह आअह्ह आअह्ह की आवाजें अब और तेज को गई थी, अब भाभी भैया से कह रही थी- जोर जोर चूसो ! खा जाओ मेरी चूत को !
उनके मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी, पूरा कमरा उनकी आवाज से गूंज रहा था।
फिर भईया ने कहा- साली, अभी कह रही थी कि धीरे धीरे करो, और अब कह रही है जोर जोर से करो ! क्यूँ अब मजा आने लगा लगता है?
भाभी कहने लगी- हाँ, बहुत मजा आर हा है ! तुम बात मत करो, चूसो, मेरी चूत को खा जाओ !
अब भैया ने अपनी जीभ चूत के अन्दर डाल दी थी, भाभी आह्ह्ह आऐईईईइ आअह्ह करते हुए चिल्ला उठी।
अब भईया उठे और अपनी अंडरवीयर उतार कर अपने लंड को भाभी के मुँह में दे दिया। भाभी लण्ड चूसने लगी। फिर उन्होंने भईया को बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ कर लंड को चूसने लगी।
कुछ देर लंड चूसने के बाद भईया ने भाभी को बिस्तर पर लिटाया और उनके मुँह को बिस्तर से नीचे लटका दिया और खुद बिस्तर के नीचे खड़े हो गये और लण्ड को भाभी के मुँह में डाल कर उनके मुँह की चुदाई करने लगे और दोनों हाथों से पलक के वक्ष उभारों को मसलने लगे।
मेरी हालत अब और ख़राब हो गई थी, मैंने चूत में उंगली डाल ली थी और उसे अन्दर बाहर हिला रही थी।
कुछ देर मुँह की चुदाई के बाद भईया अब बिस्तर पर लेटे और भाभी को अपने ऊपर लिया, उनका मुँह लंड की तरफ और भाभी की चूत भैया के मुँह की तरफ थी अब भाभी भैया का लौड़ा चूस रही थी और भईया भाभी की फ़ुद्दी को चूस रहे थे।
लगभग 5-7 मिनट की चुसाई के बाद भाभी ने कहा- मुझसे सब्र नहीं हो रहा है, मुझे चोदो !
भईया ने भाभी को सीधा किया, उनके दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधे पर रख लिया। अब उन्होंने लण्ड को चूत के ऊपर रखा और लंड से योनि को सहलाने लगे।
भाभी कहने लगी- इतना तड़पा क्यूँ रहे हो? लण्ड डालो चूत के अन्दर और चोदो !
तो भैया ने कहा- इतनी जल्दी क्या है डार्लिंग ! अभी तो पूरी रात पड़ी है, आज तो पूरी रात चोदूँगा तुझे !
भाभी कहने लगी- प्लीज़ ! ऐसे तड़पाओ मत ! चोदो मुझे !
तो भईया ने लंड को अन्दर सरकाना शुरू किया पर लंड अन्दर नहीं जा रहा था तो भईया भाभी से कहने लगे- डार्लिंग, तुम्हारी चूत तो बहुत टाईट हो गई है, लंड अन्दर ही नहीं जा रहा है?
फिर भईया ने एक जोरदार झटके के साथ लंड को आधा चूत के अन्दर घुसा दिया और भाभी के मुँह से एक जोरदार चीख निकली। भईया थोड़ा रुके फिर एक और झटके के साथ उन्होंने पूरा लण्ड भाभी की चूत में डाल दिया, उन्होंने भाभी को धीरे धीरे चोदना शुरू किया, भाभी मस्त हुए जा रही थी और चुदाई का पूरा आनन्द ले रही थी, उन के मुँह से लगातार आह आअह्ह ऊउह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह्ह की आवाजें निकल रही थी।


भैया ने अपनी स्पीड को थोड़ा बढ़ा दिया और उनकी चुदाई करने लगे, भाभी कहने लगी- चोदो बलमा चोदो ! आज जम कर चोदो मुझे ! भैया ने अपनी स्पीड को और बढ़ा दिया। अब भाभी की फ़ुद्दी ने पानी छोड़ दिया था पर भईया भाभी को चोदे जा रहे थे, चूत में से फच फच की आवाज निकल रही थी।
इतनी चुदाई के बाद भाभी दो बार झड़ चुकी थी। फिर भैया ने चूत में से लण्ड निकाल को बिस्तर पर लेट गए। अब भाभी उनके ऊपर चढ़ी और लण्ड को अपनी चूत के अन्दर लेती हुई लंड पर बैठ गई।
भैया ने अपने हाथों से उनके दोनों बूब्स को पकड़ा और भाभी ने लंड पर उछलना चालू कर दिया। भैया भी नीचे से धक्के लगा रहे थे। फिर अचानक भैया उठे और भाभी को नीचे बिस्तर पर पटका और उनके दोनों पैरों को फैला दिया और लण्ड को चूत में डाल कर धक्के लगाने लगे और बोलने लगे- साली आज बहुत दिन बाद चोदने को मिली है तू ! आज तो तेरी चूत को फाड़ डालूँगा !
पूरा कमरा भाभी की सिसकारियों से गूंज रहा था।
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06-27-2017, 10:52 AM,
#3
RE: Chudai Kahani मैं उन्हें भइया बोलती हूँ
करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद भैया के मुँह से भी आअह आअह्ह आअह्ह्ह की आवाज निकलने लगी और उन्होंने अपना गर्म गर्म वीर्य भाभी की गर्भ-गुहा में छोड़ दिया।
इस चुदाई के बाद भैया थक कर भाभी के पास ही लेट गए और भाभी उठ कर उनके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चाट कर साफ करने लगी।
इधर मेरी चूत भी पानी छोड़ चुकी थी, मैं अपने कमरे में चली गई। इतने में ही भाभी की बेटी जग गई और रोने लगी तो मैं उसे उठा कर सुलाने की कोशिश करने लगी।


शायद भाभी को उसके रोने की आवाज सुन गई थी तो उन्होंने मुझे आवाज लगा कर कहा- रोमा, उसे मेरे पास ले आओ।
मैं उठी और उनकी बेटी को लेकर उनके कमरे में गई तो भैया कमरे में नहीं थे और भाभी नंगी ही बिस्तर पर बैठी थी।
मैंने उनकी बेटी को उन्हें दिया, भाभी उसे दूध पिलाने लगी, मैंने भाभी से पूछा- कैसी रही आपकी चुदाई? हो गई या अभी बाकी है?
तो भाभी ने बताया- हाँ, हो गई है, अभी वो बाथरूम में हैं, आएँगे तो हम फिर से करेंगे !
फिर भाभी ने कहा- रोमा, तुम भी अपनी रगड़ाई करवा लो ना इनसे !
तो मैंने कहा- भाभी, पहले आप तो चुद लो जी भर के ! मेरी तो बाद की बात है !
यह बात भईया पीछे खड़े सुन रहे थे तो भैया ने आकर मुझे फिर पीछे से पकड़ लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगे, उनका लण्ड मेरे चूतड़ों की दरार में घुस रहा था।
मैंने थोड़ा विरोध करना चाहा पर कर न सकी और वो मेरे चूचों को जोर जोर से मसल रहे थे। फिर उन्होंने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरे होंठों को चूमने लगे। मैं तो पहले से ही अन्तर्वासना की अग्नि में झुलस रही थी तो मैं भी भईया का साथ देने लगी और उन के होंठों को चूमने लगी।
भाभी बिस्तर पर बैठी अपनी बेटी को दूध पिला रही थी। फिर भैया ने मेरी नाइटी उतार दी और मेरा हाथ उनकी छाती से होता हुआ उनके लंड की तरफ जाने लगा, मैं उनके लंड को अपने हाथ से सहलाने लगी। अब भईया ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मुझे बिस्तर पर लिटा कर मेरे उरोज चूसने लगे।
मैं भी मस्त हुई जा रही थी, मैं अपने दोनों हाथों से उनके सर को पकड़ कर अपने वक्ष में दबाने लगी और भईया जोर जोर से मेरे चुचूक चूसे जा रहे थे। फिर वो चूमते-चाटते नीचे आने लगे, मेरी नाभि को चूमने लगे और दोनों हाथों से मेरे स्तन दबाने लगे।
अब भैया ने अपना हाथ मेरी चूत पर रख दिया और उसे सहलाने लगे, फिर मेरी पेंटी को उतार दिया और कहा- रोमा, तुम्हारी चूत तो बहुत ही सुन्दर है !
अब उन्होंने अपने होंठों को मेरी चूत के ऊपर रख दिया और चूत को चूसने लगे। मैं सिहर उठी और मेरे मुँह से जोर से आअह्ह्ह की आवाज निकली। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
भाभी जो वहीं बैठी अपनी बेटी को दूध पिला रही थी, उन्होंने कहा- कैसा लगा रोमा?
मैं कुछ न बोल सकी, बस आहें भरे जा रही थी। भैया मेरी चूत को बुरी तरह चूसे जा रहे थे। मेरी चूत गीली हो चुकी थी तो भईया कहने लगे- रोमा, तुम्हारी चूत का स्वाद बहुत अच्छा है।
काफी देर तक चूत चूसने के बाद वो उठे और मेरे ऊपर आकर अपने लंड को मेरे दोनों बूब्स के बीच में रख और मुझ से कहा- रोमा, तुम अपने बूब्स को बगल से बीच में दबाओ ताकि मेरा लण्ड तुम्हारे बूब्स के बीच में फंस जाये।
मैंने वैसा ही किया। अब उनका लण्ड मेरी वक्ष घाटी में फंस चुका था और भैया मेरे बूब्स की चुदाई करने लगे। ऐसा करते हुए जब उनका लण्ड आगे आता तो वो मेरे होंठों को छू जाता। यह मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैं अपनी जीभ निकाल कर लन्ड के अग्र भाग का स्वाद चख रही थी।
थोड़ी देर बूब्स चुदाई के बाद भैया ने लण्ड को मेरे मुँह पर रख दिया और कहा- लो रोमा, अब चूसो इसे, बहुर बेसबरी हुई जा रही हो इसके लिए !
मैंने भी देर न करते हुए उनके लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं उनके लण्ड को किसी लॉलीपॉप के तरह चूस रही थी। भईया अपने हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर अपने लंड पर दबाने लगे जिससे उनका लण्ड मेरे गले तक जा रहा था। वो लंड से मेरे मुँह की चुदाई करने लगे तो भैया के मुँह से भी अह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह की आवाज आने लगी और उन्होंने अपना गर्मागर्म वीर्य मेरे मुँह में ही छोड़ दिया।
वो ढीले होकर बिस्तर पर लेट गए और मुझ से लिपट कर मेरे होंठों को चूमने लगे। अब भाभी उठी और अपनी बेटी को वहीं रखे पालने में सुला कर हमारे पास आकर भैया के लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी भैया का लंड फिर से खड़ा होने लगा। अब भैया बिस्तर पर सीधे लेट गए और मुझे अपनी छाती पर बिठा लिया और मेरी चूत को अपने मुँह के पास रख कर चूसने लगे और भाभी भैया का लण्ड चूसे जा रही थी।
मेरे मुख से बेतहाशा आअह आअह्ह्ह ओह्ह की सिसकारियाँ निकल रही थी, मैंने भईया से कहा- मैं झड़ने वाली हूँ !
तो वो और जोर जोर से चूत को चूसने लगे फिर मैं उनके मुँह पर ही झड़ गई।
फिर भैया ने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया, लण्ड को भाभी के मुँह से निकाल कर मेरे पैरों को फैला दिया और लण्ड को मेरी चूत पर रख दिया और लंड से ही मेरी चूत को सहलाने लगे।
मैं बोली- भैया, अब मुझ से सब्र नहीं हो रहा है !
तो उन्होंने लण्ड को चूत के अन्दर डालना शुरू किया। उन्होंने एक ही झटके में अपना आधा लण्ड मेरी चूत में सरका दिया। मैं जोर से चील्लाई- आआईईईईईइ !
और कहा- भाभी, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
तो भाभी ने भैया को कहा- थोड़ा धीरे करो इसे !
और मुझसे कहा- रोमा, थोड़ा सा दर्द होगा, इसे सहन कर लो, फिर बाद में नहीं होगा, तुम्हें बहुत मजा आयेगा !
भैया थोड़ी देर वैसे ही लण्ड को मेरी चूत में फ़ंसाये मेरे ऊपर ही लेट गए। फिर थोड़ी देर बाद जब मेरा दर्द कुछ कम हो गया हो उन्होंने एक और झटका मारा पर उनका लण्ड अभी तक पूरा अन्दर नहीं गया था, पर मेरा दर्द कम हो गया था तो उन्होंने और दो तीन झटके मारे तो उनका लण्ड पूरा चूत के अन्दर चला गया।
मेरी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया जिसकी चिकनाई से अब भैया का लण्ड आसानी से अन्दर बाहर होने लगा था और मुझे अब मजा आने लगा था। अब भैया ने मेरी ठकाठक चुदाई करनी चालू की, वो मुझे चोदे जा रहे थे और मैं आहें भरे जा रही थी। अब
मुझे चुदाई का और ज्यादा मजा आने लगा, मैं कहने लगी- और जोर से चोदो।
तो भैया ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। फिर उन्होंने मेरे पैरों को उठा कर अपने कंधे पर रखा और भाभी उठ कर उनके होंठों को चूमने लगी। इधर भईया मेरी चुदाई कर रहे थे और भाभी उनके होंठों को चूम रही थी। इस चुदाई के दौरान मेरी चूत दो बार पानी छोड़ चुकी थी; फिर भैया ने भाभी को अपने से अलग किया और मेरी चुदाई की स्पीड और तेज कर दी। 4-5 मिनट की चुदाई के बाद भैया कहने लगे- मैं झड़ने वाला हूँ !
तो भाभी ने कहा- रोमा की चूत में मत झड़ना ! नहीं तो दिक्कत हो जाएगी !
तो फिर उन्होंने लण्ड को चूत से निकाला, उनकी पिचकारी छुट गई, मेरे भईया के लौड़े से निकली मलाई मेरे बदन पर आकर गिरी। भाभी ने जल्दी से उनके लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं बिस्तर में ही लेटी थी और बहुत थक चुकी थी, मेरा सारा बदन दर्द कर रहा था।
मैं उठ कर जाने लगी तो भाभी बोली- कहाँ जा रही है?
मैंने कहा- बाथरूम में?
वो बोली- क्यों?
“इसे साफ़ करने !” मैंने अपने बदन पर पड़े वीर्य की तरफ़ इशारा किया।
“अरे, यह तो मेरा है, आ मेरे पास, मैं साफ़ करती हूँ !” पलक भाभी बोली और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने पास खींच कर मेरे बदन पर गिरे भईया के वीर्य को चाट कर साफ़ कर दिया।


कुछ ही देर बाद बाहर कमरे से आवाजें आने लगी- जोर से चोदो मेरे राजा, जरा जोर जोर चोदो !
मैं बाथरूम से बाहर निकली तो देखा कि अब भैया भाभी की चुदाई कर रहे थे। मैं उनके पास जा कर बैठ गई तो भाभी ने कहा- रोमा, कैसा लगा चुदाई करवा कर? कैसा चोदते हैं ये?
तो मैंने कहा- भाभी, मुझे तो बहुत मजा आया ! भैया बहुत मजेदार चुदाई करते हैं।
मैंने कहा- भाभी, आप बहुत लकी हो जो आपको इतनी अच्छी चुदाई करने वाला पति मिला है।
फिर भैया ने कहा- रोमा, मुझे भी तुमको चोद कर मजा आ गया !
भाभी कहने लगी- और चुदाई करवाना चाहोगी क्या रोमा?
मैंने हाँ कर दी। उस रात भैया ने भाभी और मेरी चार बार चुदाई की। इसी तरह चुदाई करते करते हमें 5 बज चुके थे और हम तीनों वैसे ही नंगे एक दूसरे से लिपट कर सो गये।
फिर सुबह 9 बजे के लगभग मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि भाभी बिस्तर पर नहीं थी और भैया मुझसे लिपटे हुए सो रहे थे।
मैंने भैया को अपने से दूर किया और अपने कपड़े ढूंढने लगी। मुझे मेरे कपड़े नहीं मिल रहे थे तो मैंने वहीं पर रखा भाभी का गाऊन ही पहन लिया और भाभी को आवाज लगाई- भाभी, कहाँ हैं आप?
तो भाभी की आवाज आई- रोमा, मैं किचन में हूँ।
मैं रसोई में गई तो देखा कि भाभी ने कोई भी कपड़ा नहीं पहना था, वो पूरी तरह नंगी थी। मैंने भाभी से कहा- भाभी, मुझे कमरे में मेरे कपड़े नहीं मिल रहे थे तो मैंने आपका यह गाउन पहन लिया।
फिर मैंने कहा- भाभी आपने कपड़े क्यूँ नहीं पहने?
तो भाभी के कहा- रोमा, अभी जब तुम्हारे भैया उठेंगे न, तो वो मेरी एक बार फिर से चुदाई करेंगे ! तो मुझे फिर कपड़े उतारने पड़ते ! इसलिए मैंने कपड़े पहने ही नहीं !
फिर भाभी ने कहा- रोमा तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाती हूँ !
मैंने कहा- हाँ ठीक है !
और मैं वही किचन में डायनिंग टेबल पर बैठ गई, फिर भाभी ने मुझे कॉफी बना कर दी और हम वहीं डायनिंग टेबल पर ही बैठ कर
बात करने लगे। भाभी मुझसे कहने लगी- रोमा, रात में कैसा लगा? सब ठीक रहा न ! तुम्हें अच्छा तो लगा न?
मैंने कहा- हाँ भाभी, बहुत मजा आया था !
तभी भैया की आवाज आई- पलक, कहाँ हो?
तो भाभी ने कहा- मैं यहाँ किचन में हूँ।
तब भैया रसोई में आए तो भैया ने भी कपड़े नहीं पहने थे, वो भी नंगे थे, मेरी नजर उनके लंड के तरफ गई जो छोटा सा सिकुड़ा हुआ नीचे लटक रहा था, उनके चलने से दाएं बाएं हिल भी रहा था।
भैया आकर डायनिंग टेबल की कुर्सी पर बैठ गए और कहा- पलक, चाय तो पिलाओ यार !
तो भाभी ने कहा- दूध तो खत्म हो गया है, मैंने और रोमा ने अभी अभी कॉफी पी ली है।
तब भैया भाभी पर गुस्सा करने लगे- तुम्हें पता है न कि मुझे सुबह सुबह चाय पीने की आदत है?
तो भाभी ने कहा- थोड़ी देर रुक जाओ ना, दूध वाला आता ही होगा, फिर बना दूंगी चाय, तब तक आप मेरा दूध पी लो !
और भाभी भैया की गोद में बैठ गई और अपने एक स्तन को भैया के मुँह में डाल दिया और कहने लगी कि इनमें बहुत सारा दूध भर गया है, तो ये भारी हो गए हैं, तुम ही दूध पीकर कुछ कम कर दो !
तब भैया भाभी के चूचे को चूस कर उससे दूध पीने लगे, भाभी उनके बालों में हाथ फिराते हुए उनके सिर को अपने वक्ष में दबाती जा रही थी।


अब भैया ने अपने एक हाथ से भाभी के दूसरे उभार को दबाते हुए हाथ को नीचे लाए और उनकी चूत पर रख कर चूत को सहलाने लगे। भाभी मस्त हुए जा रही थी। फिर भैया ने अपने हाथ की दो उंगलियाँ भाभी की चूत में डाल दी। तब भाभी के मुँह से एक जोर की आआहह्ह्ह निकली और फिर भैया उंगली को चूत में आगे-पीछे करने लगे और भाभी आहें भर रही थी।
फिर बाहर दरवाजे की घंटी बजी और आवाज आई- दूध वाला !
तो भाभी ने मुझसे कहा- रोमा जाओ जाकर दूध ले लो ! मैंने कपड़े नहीं पहने हैं और तुम्हारे भैया दूध पी रहे हैं तो मैं नहीं जा सकती,
तुमने कपड़े पहने हैं तो तुम जाकर दूध ले लो !
तो मैं उठ कर दूध लेने चली गई। मैंने दूध वाले से दूध लिया और रसोई में आकर दूध को गर्म करने के लिए गैस पर रख दिया।
तो फिर भाभी ने भैया को अपने से अलग किया और कहा- बस करो, कुछ दूध मिनी के लिए भी रहने दो। सारा दूध तुम ही पी लोगे तो मैं मिनी को क्या पिलाऊँगी, मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूँ, तुम चाय पी लो।
मिनी उनकी बेटी का नाम है।
और भाभी चाय बनाने लगी, तब उनकी बेटी की रोने की आवाज आने लगी तो भाभी ने मुझसे कहा- रोमा तुम चाय बना दो, मैं मिनी को दूध पिला कर आती हूँ, उसे भूख लगी होगी।
भाभी चली गई और मैं चाय बनाने लगी। मैं चाय बना रही थी कि भैया मेरे पास आए और मुझे पीछे से ही अपने आप से चिपका लिया और मेरी कमर में हाथ डाल कर मेरी गर्दन को चूमने लगे। मुझे उनका लंड मेरे नितम्बों के बीच की दरार में महसूस हो रहा था जो कुछ हद तक खड़ा हो चुका था पर पूरा खड़ा नहीं हुआ था।
वो एहसास मुझे बहुत अच्छा लग रहा था पर मैंने भैया से कहा- छोड़ो मुझे, अभी चाय तो बना लेने दो !
मैंने उन्हें चाय बना कर दी और वो डायनिंग टेबल पर बैठ कर चाय पीने लगे, फिर मैं नाश्ते की लिए ब्रेड पर जैम लगाने लगी, तभी भैया ने अपनी चाय खत्म की और फिर से आकर मुझ से चिपक गए, कहने लगे- रोमा, तुमने यह गाउन क्यूँ पहना है? देखो मैंने और पलक ने कपड़े नहीं पहने हैं तो तुम भी उतार दो इसे ! हम तीनों घर में अकेले हैं।
और भैया ने मेरा गाउन उतार दिया। भैया ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मुझे अपने सीने से लगा कर मेरे होंठों को चूमने लगे, मेरा हाथ उनकी पीठ से होता हुआ उनके नितम्बों पर आ गया और फिर मैं अपने हाथ को सामने लाकर उनके लंड को पकड़ कर सहलाने लगी।
भैया मेरे होटों को चूसे जा रहे थे और मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी। फिर मैं उनके होंठों को चूमते हुए उनकी छाती के निप्पल को चूमने लगी और धीरे धीरे नीचे आकर मैंने भैया के लंड को अपने मुँह में ले लिया।
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06-27-2017, 10:52 AM,
#4
RE: Chudai Kahani मैं उन्हें भइया बोलती हूँ
कुछ देर मैंने भैया का लंड चूसा, फिर भैया ने मुझे उठाया और डायनिंग टेबल पर मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे पूरे शरीर को चूमने लगे, फिर उन्होंने मेरी चूत को डायनिंग टेबल के किनारे पर किया और खुद मेज से नीचे उतर कर मेरी चूत को चूसने लगे। भैया पूरे जोश में आ चुके थे, वो पागलों की तरह मेरी चूत को चूसे जा रहे थे, मैं आ आअह्ह अहह उइ उइ उइ करके सिसकारियाँ लेने लगी और कहने लगी- भैया, थोड़ा धीरे धीरे चूसिये, मुझे दर्द हो रहा है !
तो भैया कहने लगे- दर्द में तो मजा आयेगा रोमा मेरी जान !
फिर भाभी रसोई में आ गई, मैंने भाभी से कहा- भाभी, भैया को कहो न कि वो थोड़ा धीरे धीरे करें। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
भैया ने भाभी से कहा- पलक, जरा जैम की बोतल में से थोड़ा सा जैम तो निकाल कर दो, इस ब्रेड पर लगाना है !
फिर भैया ने मेरी चूत पर जैम लगा दिया और फिर से उसे चूसने लगे। उधर भाभी भी डायनिंग टेबल के नीचे घुटनों के बल बैठ कर
भैया का लंड चूसने लगी। काफी देर तक भैया मेरी चूत को चूसते रहे और भाभी भैया का लंड चूसती रही। मेरे मुँह से तो लगातार आआह्ह्ह ईइआअ आआअह्ह की सीत्कारें ही निकल रही थी।
भाभी ने लंड को जब अपने मुँह से बाहर निकाला तो भैया ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और भाभी से कहा- चलो डार्लिंग, बेडरूम में चलते हैं।
और हम तीनों बेडरूम में आ गये। भईया ने मुझे बेड पर लिटा दिया, भाभी भी बेड पर बैठ गई और भैया फिर से मेरी चूत को चाटने लगे। भाभी ने एक हाथ मेरे वक्ष पर रखा और दबाने लगी और दूसरे हाथ को उन्होंने मेरी चूत के पास लेजा कर चूत सहलाने लगी, भैया भी चूत को चुसे जा रहे थे। मेरी सिसकारियाँ और तेज हो गई, मुझे और मजा आने लगा था। मेरे मुँह से लगातार आ आह्ह्ह्ह्ह ओआअह्ह आआम्म म्मम्म की आवाजें निकल रही थी। अब भैया को चुदाई की जल्दी थी, उन्होंने चूत पर से मुँह हटाया और मेरे पैरों को फैला दिया। मैं उनके सामने अपनी चूत खोले लेटी हुई थी, भैया मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए और अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर लगा दिया, भाभी मेरे चूचे दबा रही थी और चूत को ऊपर से सहला रही थी, मैं तो पागल हुए जा रही थी और मचल रही थी। अब भैया ने लंड का सुपारा मेरी चूत पर टिका कर एक झटका मारा तो उनका लंड मेरी चूत में थोड़ा सा अन्दर चला गया और मेरे मुँह से एक जोर की चीख निकली।
भाभी कहने लगी- रोमा, मजा तो आ रहा है ना?
तब मैंने कहा- हाँ भाभी, बहुत मजा आ रहा है !
फिर भैया ने एक और जोर का झटका मार कर पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। भैया मेरी चुदाई करने लगे और भाभी जो मेरे बूब्स दबा रही थी, उन्होंने अब मेरे बूब्स को अपने मुँह में ले लिया और उनको चूसने लगी।
इधर भैया जोर जोर से धक्के लगा कर मेरी चुदाई कर रहे थे और मेरी आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। 5 मिनट की चुदाई के बाद भाभी अपनी चूत को हाथों से फैलाते हुए खड़ी हुई और चूत को भैया के मुँह पर लगा दिया।
मैं जान गई थी कि अब भाभी को भी लंड अपनी चूत के अन्दर लेना है। इस 5 मिनट तक हुई एकधार चुदाई से मैं थक चुकी थी और मेरा पानी भी निकल चुका था।
तो भैया ने लंड को मेरी चूत से बाहर निकाल कर भाभी को बेड पर लिटा दिया और एक झटके में ही उनका लंड भाभी की चूत में चल गया क्यूँकि यह लंड और चूत तो जोर के ही मित्र हैं। अब भैया भाभी को चोदने लगे और मैं भाभी की बगल में ही लेटी हुई थी तो मैंने भी भाभी के बूब्स को दबाना शुरु किया। उनके बूब्स बड़े थे, मैं बूब्स को दबा रही थी तो उनमें से दूध निकल रहा था।
भाभी ने कहा- रोमा, जोर से दबाओ इन्हें ! मुझे इनमें बहुत दर्द हो रहा है। तुम दबा रही हो तो मुझे अच्छा लग रहा है।
तो मैं भी उनके बूब्स को और जोर-जोर से दबाने लगी और भैया भाभी की जोरदार चुदाई कर रहे थे, भाभी की अब चीखें निकल रही थी, उनकी आवाजों से साफ पता चल रहा था कि वो अब क्लाइमेक्स के बिल्कुल करीब पहुँच चुकी हैं और उधर भैया की भी हालत खराब थी, उन्हें भी चरम सुख के समय किसी को जोर से भींचने की इच्छा हो रही थी तो उन्होंने मुझे पकड़ कर भाभी के बूब्स के ऊपर बैठा दिया, मेरे बाल पकड़ कर मुझे आगे झुका दिया और मेरे कूल्हे ऊँचे कर दिए। मेरी यह स्थिति बहुत ही उत्तेजक और शर्मनाक हो गयी थी पर मैं उन दोनों का चरम सुख बिगाड़ना नहीं चाहती थी इसलिए जैसे भैया ने चाहा, मैंने वैसे ही अपने चूतड़ उन्हें सौंप दिए।
भैया मेरे कूल्हों पर चांटे मारने लगे और उन्हें चूमने लगे।
फिर जब भैया और भाभी एक साथ डिस्चार्ज हुए तो भाभी ने मेरी चूत अपने मुँह में ले ली और भैया ने मेरे चूतड़ नौंच डाले और फिर हम तीनों ही एक दूसरे पर निढाल होकर पड़ गए और काफी देर तक ऐसे ही नंगे पड़े रहे।
वो पूरी रात और सुबह मेरे लिए कमाल सेक्स और क़यामत की रही, हम तीनों ने बेशर्मी की सारी सीमाएँ लांघ दी।
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06-27-2017, 10:52 AM,
#5
RE: Chudai Kahani मैं उन्हें भइया बोलती हूँ
रात की चुदाई के बाद हम सुबह देर से सो कर उठे, 10 बज चुके थे। उठने के बाद हम तीनों फ्रेश हुए और साथ में नाश्ता किया तो लगभग 12 बज चुके थे।
तभी घर के दरवाजे की घंटी बजी तो भाभी ने मुझे कहा- रोमा, जरा जाकर देखो तो, कौन आया है।
मैंने दरवाजा खोला तो बाहर भैया की ही उम्र का एक आदमी खड़ा था, मैंने उनसे पूछा- किससे मिलना है?
तो उन्होंने कहा- मुझे गौरव अग्रवाल जी से मिलना है।
तब मैंने भैया को आवाज लगाई- भैया कोई आपसे मिलने आए हैं।
भैया ने कहा- रोमा, तुम उन्हें अन्दर बुलाओ, मैं अभी आता हूँ।
मैंने उनको अन्दर बुला कर बिठाया और मै अंदर चली गई। तब भैया बाहर हॉल में आए और उन्हें देखते ही कहा- अरे प्रदीप? तू यहाँ कैसे? बहुत दिन बाद मिल रहा है।
वो भैया के दोस्त थे।
प्रदीप- यार, मैं यहाँ काम के सिलसिले में आया हूँ तो सोचा तुझसे मिल लूँ इसलिए आ गया, और आज शाम की मीटिंग है।
भैया- चल अच्छा है, अब आया है तो यहीं रुकना। शाम को किस टाइम मीटिंग है?
प्रदीप- 5 बजे।
भैया- अभी तो बहुत टाइम है, तू फ्रेश हो जा और फिर खाना खाकर जाना मीटिंग के लिए।
तभी भाभी बाहर आई, प्रदीप ने भाभी को नमस्कार किया। तभी प्रदीप ने भैया से कहा- भाभी से तो मैं मिल चुका हूँ ! पर ये मोहतरमा कौन हैं?
उन्होंने मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा।
तब भैया ने बताया कि यह मेरे अंकल की बेटी रोमा है। मैं भी अभी घर से बाहर था तो यह पलक से साथ रह रही थी, मैं भी तो कल ही लौटा हूँ।
तब भाभी ने कहा- मैं कुछ नाश्ता लेकर आती हूँ !
मैं और भाभी रसोई में आ गये, हम सबने थोड़ा नाश्ता किया, फिर प्रदीप ने भैया से कहा- यार मेरी कार बाहर खड़ी है, उसे कहाँ पार्क करना है?
तो भैया ने कहा- तू कार की चाबी मुझे दे, में कार को पार्क कर देता हूँ।
भैया ने प्रदीप का सामान गेस्टरूम में रखा और उनसे कहा- तुम आराम से फ्रेश हो जाओ, फिर हम खाना खाते हैं।
मेरा समान भी उसी रूम में था, मैं और भाभी दोपहर के खाने की तैयारी करने लगे। मैंने भाभी से कहा- भाभी, मेरा समान भी उसी रूम में है जिस रूम में प्रदीप है और पूरा समान बिखरा है, मेरे कपड़े पूरे खुले पड़े हैं।
तब भाभी ने कहा- तुम जाओ और कपड़ों को समेट कर अपने बैग में भर कर मेरे रूम में लाकर रख दो।
मैं गेस्ट रूम में गई, जैसे ही मैंने गेस्ट रूम का दरवाजा खोला, मैंने देखा कि प्रदीप सिर्फ अन्डरवीयर में खड़े थे, मेरे दरवाजा खोलने से उनको कुछ आवाज हुई तो वो मेरी तरफ मुड़े तो उनके हाथ में मेरी ब्रा थी। प्रदीप ने जैसे ही मुझे देखा तो ब्रा को वहीं नीचे फेंक दिया और मेरी तरफ आकर कहा- रोमा तुम?
तो मैंने कहा- मैं अपना सामान लेने आई हूँ।
तो उन्होंने कहा- यह तुम्हारा सामान है।
मैंने हाँ में अपना सर हिलाया और अपने कपड़े उठाने लगी। मैं चोर नजरों से उनकी तरफ देख रही थी क्यूंकि वो सिर्फ अन्डरवीयर में थे और उनकी अन्डरवीयर में लंड का उभार काफी बड़ा लग रहा था।
मैं जानबूझ कर धीरे धीरे कपड़े उठा रही थी और चोर नजरों से उनकी तरफ देख रही थी।
फिर प्रदीप ने कहा- रोमा, तुम अपने कपड़े उठा लो, मैं नहा कर आता हूँ।
मैंने अपने सारे कपड़े समेट लिए, मेरा मन बार बार प्रदीप को देखने को कर रहा था। तब मुझे याद आया कि मेरी एक ब्रा-पेंटी बाथरूम में ही है, तो मैंने सोचा कि अगर मैं वो प्रदीप से मांगूगी तो उसे बाथरूम का दरवाजा खोलना पड़ेगा जिससे मैं उसे देख सकती हूँ।
मैं बाथरूम के पास गई और कहा- प्रदीप जी, मेरे कुछ कपड़े अन्दर हैं, क्या आप मुझे वो दे दोगे?
तो प्रदीप ने कहा- रोमा तुम्हारे यहाँ कोई कपड़े नहीं हैं।
तो मैंने कहा- आप ध्यान से देखो, होंगे !
मैंने कहा- मेरी ब्रा-पेंटी है अन्दर, वो मुझे दे दो।
तो प्रदीप ने कहा- हाँ वो हैं।
और उसने बाथरूम का दरवाजा खोला और मुझे ब्रा पेंटी दी। दरवाजा खुलते ही मैंने उसकी ओर देखा तो उसने अभी भी अंडरवीयर पहनी हुई थी जो पानी से गीली हो चुकी ही और उसकेशरीर से चिपक गई थी तो उसके लंड का उभार मुझे और भी आकर्षक लग रहा था।
मेरी नजरें उस पर से हट नहीं रही थी। फिर मैंने उसके हाथ से ब्रा-पेन्टी ली और उसे अपने बैग में रख कर रूम से बाहर आकर भाभी के रूम में अपना बैग रख दिया और किचन में आकर खाना बनाने में भाभी की मदद करने लग गई।
बातों ही बातों में मैंने भाभी को बताया- भाभी जब मैं गेस्टरूम में गई तो प्रदीप सिर्फ अन्डरवीयर में खड़े थे और उनके हाथ में मेरी ब्रा थी, उन्होंने मुझे देख कर ब्रा को नीचे फेंक दिया, शायद मेरे अचानक वहाँ जाने से वो घबरा गए थे तो उन्होंने ब्रा को नीचे फेंक दिया था और फिर वो बाथरूम में चले गये पर भाभी, मैं उन्हें सिर्फ अंडरवीयर में देख कर उनकी तरफ आकर्षित हो गई थी, वो मुझे बहुत अच्छे लग रहे थे, उनका लंड उनकी अंडरवीयर में काफी बड़ा लग रहा था।
तब भाभी ने मुझे ऐसे ही कहा- क्यूँ रोमा, प्रदीप से भी चुदाई करवाने का मन कर रहा है क्या?
तो मैंने भाभी से कहा- क्या भाभी, आप भी कुछ भी बोल रही हो? कल ही तो मैंने भैया के साथ चुदाई की थी।
तभी भाभी ने कहा- रोमा अगर तुम्हारा मन प्रदीप से भी चुदवाने का कर रहा हो तो बता दो, मैं तुम्हारे भैया को कह दूँगी तो वो उसे प्रदीप से कह देंगे ! वैसे भी वो प्रदीप भी कम नहीं है, जहाँ लड़की देखी नहीं कि उसे चोदने के सपने देखने लगता है। तुम्हारे भैया ने मुझे बताया है उसके बारे में ! मुझे तो लगता है कि शायद वो तुम्हें चोदने का सपना देख ही रहा होगा इसलिए वो रूम में सिर्फ अंडरवीयर में था और तुम्हारी ब्रा उसके हाथ में थी।
फिर भाभी और मेरी ऐसे ही बातें होती रही। खाना बन चुका था तो भाभी ने मुझे कहा- रोमा तुम इसे डाइनिंग टेबल पर लगाओ, मैं अभी आती हूँ !
और भाभी अपने रूम में चली गई, मैं डाइनिंग टेबल पर खाना लगाने लगी। खाना लगाने के बाद जब मैं भाभी के रूम में जाने लगी तो मैंने भैया और भाभी को बात करते सुना, भाभी भैया से कह रही थी- रोमा जब गेस्ट रूम में अपने कपड़े समेटने के लिए गई थी न, तो प्रदीप वहाँ सिर्फ अंडरवीयर में था और उसके हाथ में रोमा की ब्रा थी, यह बात मुझे रोमा ने बताई, और वो कह रही थी कि उसका लंड अंडरवीयर में काफी बड़ा लग रहा था और रोमा को वो बहुत आकर्षित लग रहा था, और जब मैंने रोमा से पूचा कि क्या तुम उससे चुदना चाहती हो तो उसने मुस्कुरा कर बात को टाल दिया, मुझे तो लगता है कि प्रदीप भी कहीं रोमा को चोदने की फ़िराक में तो नहीं है?
तो भैया ने कहा- हाँ हो सकता है !
फिर मैं रूम के अंदर गई और भैया भाभी को कहा- चलो, मैंने टेबल पर खाना लगा दिया है !
तो भैया ने कहा- चलो, मैं प्रदीप को बुला लाता हूँ !
भैया चले गए और हम भी किचन में आ गए।
मैंने भाभी से कहा- भाभी, आपको यह बात भैया को बताने की क्या जरुरत थी? मैंने आपकी बातें सुन ली हैं !
तभी भैया और प्रदीप भी आ गए। हमने खाना खाया, खाना खाने के बाद प्रदीप और भैया तो हॉल में जा कर टीवी देखने लगे और इधर भाभी और मैं टेबल को साफ करने लगे। उसके हम दोनों रूम में चले गए, वहाँ भाभी ने फिर मुझसे कहा- रोमा, तुम्हें प्रदीप अच्छा लगा न?
तो मैंने बात को पलटते हुए कहा- भाभी मैं अभी आती हूँ।
मैं जब रूम से बाहर आई तो मैंने हॉल में प्रदीप और भैया की फिर बातें सुनी।


भैया प्रदीप को कह रहे थे कि ‘यार, तुम रोमा की ब्रा को हाथ में लेकर क्या कर रहे थे?’
तो उसने चौंकते हुए कहा- यार, यह तुझे किस ने बताया?
तो भैया ने कहा- यार रोमा ने पलक को बताया तो पलक ने मुझे बताया है।
प्रदीप ने कहा- यह बात भाभी को भी पता चल गई यार ! मैंने कुछ नहीं किया, बस ब्रा को हाथ में किया था, पर जब रोमा वहाँ आ गई तो मैं उसे नीचे रख कर बाथरूम में नहाने के लिए चला गया था। उसके बाद रोमा ही मेरे पास आई थी और बाथरूम के दरवाजे को खटखटा कर मुझ से कहा कि ‘प्रदीप जी, मेरे कुछ कपड़े अंदर हैं, वो मुझे दे दो’ तो मैंने कहा कि ‘यहाँ कोई कपड़े नहीं हैं’ तो उसने ही कहा था कि मेरी ब्रा-पेन्टी अंदर है, वो दे दो !’ तो मैंने बस वही उसे दी थी।
तब भैया ने उसे कहा- यार उसने तुझे अंडरवीयर में देखा तो वो तेरी तरफ आकर्षित हो गई थी। उसे तू अंडरवीयर में बहुत अच्छा लग रहा था। यार, जब मैं घर आया था तो उसने मेरे साथ भी चुदाई की थी।
तभी प्रदीप ने कहा- यार, मैं भी उसे चोदना चाहता हूँ, मैं जब से आया हूँ, उसी के बारे में सोच रहा हूँ, वो बहुत सेक्सी है यार ! तू ही मेरी कुछ मदद कर ना ! मैं उसे चोदना चाहता हूँ।
तो भैया ने कहा- कैसे यार? तेरी तो अभी दो घंटे बाद मीटिंग है और आज शाम को वो अपने घर चली जायेगी।
प्रदीप कहने लगा- यार आज कैसे भी कर, उसे यहाँ रोक ले, मैं उसे आज रात को चोदना चाहता हूँ !
तब भैया ने कहा- यार तू एक काम कर ! अभी जब तू मीटिंग में जाने के लिए तैयार होगा न, तो मैं रोमा को कैसे भी करके तेरे पास भेज दूँगा, तू कमरे में बिना कपड़ों के रहना, कैसे भी करके रोमा को अपनी और आकर्षित करना। अगर वो तेरी ओर आकर्षित हो गई तो वो पक्का तेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो जायेगी और आज रात को यहीं रुक भी जायेगी।
तब प्रदीप ने कहा- हाँ ठीक है यार ! मैं कुछ करूँगा, तू एक बार रोमा को कमरे में भेज देना यार ! मैं अब जाकर मीटिंग के लिए तैयार होता हूँ।
मैंने उन दोनों की ये सारी बातें सुनी तो मेरे मन में कुछ गुदगुदी सी होने लगी थी और मैं वापस भाभी के कमरे में आ गई।
तभी भैया आए और उन्होंने अपनी अलमारी को खोला और उस में से कुछ टाई निकली और मुझे कहा- रोमा, ये टाई तुम जाकर प्रदीप को दे दो, उसे जरुरत है।
तब मैंने भैया से कहा- मुझे पता है भैया कि आप मुझे वहाँ क्यूँ भेज रहे हो !
और मैंने भैया के हाथ से टाई ली और गेस्टरूम में जाने लगी। मैंने जब गेस्टरूम का दरवाजा खोला तो प्रदीप वहाँ फिर से सिर्फ अंडरवीयर में ही खड़ा था।
मैंने उससे कहा- ये कुछ टाई भैया ने दी है आपको देने के लिए ! और जब मैंने उसके अंडरवीयर की तरफ देखा तो उसका लंड मुझे पहले से भी ज्यादा बड़ा लग रहा था। वो शायद कुछ खड़ा हो गया था।
उसने मेरे हाथ से टाई ले ली। जब मैं वापस आने के लिए मुड़ी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी तरफ खींच लिया और कहा- रोमा, तुम मुझे बहुत सेक्सी लगती हो।
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06-27-2017, 10:52 AM,
#6
RE: Chudai Kahani मैं उन्हें भइया बोलती हूँ
मुझे उसकी बांहों में आकर बहुत अच्छा लगा। फिर उसने मेरे एक हाथ को अपने एक हाथ से पकड़ा और मेरे हाथ को अपने अंडरवीयर
पर रख कर लंड को मेरे हाथ से दबाने लगा।
मैं तो बेसुध सी हो गई थी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। फिर उसने अंडरवीयर को नीचे करके अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया और अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ कर लंड को सहलाने लगा।
उसका गर्म लंड मेरे हाथ में आते ही मेरे अंदर एक झनझनाहट सी महसूस हुई और उसने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया और उन्हें चूसने लगा। मेरी साँसें तेज हो गई और मैं पागल सी होने लगी। मैंने अब अपने आप को उसके हवाले कर दिया।
फिर उसने मुझसे कहा- रोमा, मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ। 
तब मुझे होश आया और मैंने अपने आपको उसकी बांहों से किसी तरह छुड़ाया और उससे कहा- अभी आप जाइये, आपको मीटिंग के लिए देर हो रही है। देखो 4 बज गए हैं।
उसने फिर मुझसे पूछा- रोमा मेरे साथ सेक्स करोगी क्या?
तो मैंने मन में सोचा कि घर जाने से पहले एक बार और सेक्स कर लेती हूँ तो मैंने अपना सर हाँ में हिला दिया और रूम से बाहर आई। फिर जब मैं भाभी के रूम में गई तो उधर भैया भाभी की चुदाई का प्रोग्राम चल रहा था, भैया भाभी को चोद रहे थे।
भाभी ने मुझसे कहा- रोमा तुम मिनी को बाहर ले जाओ, हम अभी आते हैं।
मिनी भाभी की बेटी का नाम है मैंने अपनी पुरानी कहानी में बताया भी था शायद !
तो मैं मिनी को लेकर हॉल में आ गई और टीवी देखने लगी। कुछ ही देर में भैया-भाभी भी अपना चुदाई का प्रोग्राम ख़त्म करके हॉल में आ गये, फिर प्रदीप भी आया और उसने कहा- मैं मीटिंग के लिए जा रहा हूँ, आने में थोड़ी देर हो जायेगी।
उसने अपनी कार निकली और वो चला गया।
प्रदीप के जाने के बाद भैया ने मुझसे कहा- रोमा, तुम्हें प्रदीप को टाई देने में इतनी देर कैसे हो गई थी? क्या हुआ रूम में?
तो मैंने भैया से कहा- भैया, मुझे पता है कि आपने मुझे प्रदीप को टाई देने के लिए क्यूँ भेजा था, मैंने आपकी और प्रदीप की सारी बातें सुन ली थी कि आपने उसे क्या क्या कहा था।
तो भैया भाभी ने मुझसे पूछा- तो क्या हुआ रोमा, तुम आज यहीं रुक रही हो ना?
फिर तो मैंने हाँ कही और वो सारी बात बताई जो प्रदीप ने मेरे साथ रूम में की थी। फिर भैया भाभी को कहा- मैंने सोचा कि घर जाने से पहले प्रदीप के साथ एक बार सेक्स कर ही लेती हूँ क्यूँ कि उसने मुझे रूम में बहुत गर्म कर दिया था।
ऐसे ही बातों के बाद भैया मार्किट सब्जी लाने के लिए चले गये तो भाभी और मैं टीवी देखने लगी।
भैया मार्किट से सब्जी लाए तो भाभी और मैं रात के खाने कि तैयारी में लग गए।
रात के करीब 9 बजे प्रदीप आया, उसने मुझे देखा तो उसके चेहरे की खुशी साफ दिख रही थी।
भैया ने प्रदीप से कहा- जाओ प्रदीप, तुम जा कर फ्रेश हो आओ, खाना तैयार है ! खाने के बाद तुम बताना कि तुम्हारी मीटिंग कैसी रही। खाने के बाद भैया और प्रदीप फिर हॉल में चले गए और टीवी देखने लगे। इधर भाभी और मैं भी रूम में चले गये। रूम में जाकर भाभी ने मुझे एक नाइटी निकाल कर दी और कहा- लो रोमा, तुम इसे पहन लो !
तो मैंने अपने कपड़े उतारे और वो नाइटी पहन ली। भाभी ने भी एक नाइटी पहन ली और हम फिर बाहर हॉल में ही आकर बैठ गए।
11 बज चुके थे, कुछ देर बाद अब प्रदीप से सब्र नहीं हो रहा था तो उसने भैया के कान में कुछ कहा तो भैया ने…
भाभी से कहा- चलो पलक, अब हमें सोना चाहिए !
तो वो दोनों वहाँ से अपने कमरे में चले गये। मुझे थोड़ा डर लग रहा था तो मैं भी उठ कर किचन में जाकर पानी पीने लगी।
तभी प्रदीप भी वहाँ आ गया और उसने मुझे पकड़ लिया और मेरी गर्दन पर चुम्बन करने लगा और कहने लगा- रोमा, अब तो तुम इस
नाइटी में पहले से भी ज्यादा सुन्दर लग रही हो।
तभी वहां भाभी आ गई तो उसने मुझे छोड़ दिया।
भाभी ने फ्रिज से पानी की बोतल निकाली और चली गई।
तो प्रदीप ने मुझे फिर से पकड़ लिया और कहने लगा- चलो ना रोमा, रूम में चलते हैं।
उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और रूम में लाकर मुझे बेड पर बैठा दिया, फिर उसने मेरे हाथों को अपने हाथों में लिया और उन्हें चूम लिया।
अब उसने मेरे हाथों को अपने कंधों पर रखा और मुझे मुझे अपनी तरफ खींच लिया तो मैं आसानी से उसके ऊपर जा गिरी।
प्रदीप ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रखा और उन्हें चूसने लगा। मेरी साँसें अब गर्म होने लगी थी और वो मेरे होंठों को चूसे जा रहा था। फिर उसने मेरे निचले होंठ को अपने दोनों होंठों के बीच लिया और चूसने लगा, उसके हाथों की अंगुलियाँ मेरे बालों में उलझी हुई थी। उसने मेरी जीभ को अपने मुँह में लिया और बहुत ही सुन्दर ढंग से चूस रहा था।
उसके हाथ अब मेरी पीठ पर घूमते हुए कमर से होते हुए नीचे जाने लगे और फिर उसने अपने हाथ मेरी नाइटी के अंदर डाल दिए और नाइटी को उठाने लगे तो मैंने भी अपने चूतड़ उठा कर नाइटी उतरने में उसकी मदद की।
उसने नाइटी उतर कर अलग कर दिया अब धीमे धीमे उसके हाथ मेरे वक्ष की गोलाइयों के नजदीक तक पहुँच गए, उसके हाथ मेरी ब्रा पर महसूस हो रहे थे। इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना जारी रखा उसकी हरकतें मुझे बहुत ही ज्यादा उत्तेजित कर रही थी, अब मैंने भी अपने हाथ उसकी कमर पर रख कर उसकी टी-शर्ट ऊपर करके निकाल दी। इस बीच मुझे महसूस हुआ कि उसका लंड खड़ा हो गया है जो उसके लोअर को फाड़कर बाहर आने को तैयार था। मैं उसके सख्त हो चुके लंड को लोअर के ऊपर से ही रगड़ रही थी। फिर मैंने उसके लोअर को पूरा नीचे सरका दिया तो उसने भी उसे अपने पैरों से निकाल कर अलग कर दिया। अब मैं अंडरवीयर के ऊपर से ही प्रदीप के लंड को पकड़ कर सहलाने लगी और वो मेरे होंठों को चूमने लगा।
कुछ ही देर बाद उसने मुझे बेड पर से उठा कर नीचे बिठा दिया और मेरे सामने आकर अपनी अंडरवेअर को भी उतार कर फेंक दिया और अपने लण्ड को मेरे लबों पर टिका दिया। वो बहुत गर्म था, उसका यह सब करना मुझे और उत्तेजित कर रहा था।
उसने कहा- रोमा, चूसो इसे !
तो मैंने उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। वो लंड को मेरे मुँह में ही आगे पीछे करने लगा मानो मुँह की ही चुदाई कर रहा हो।
कुछ देर बाद उसने मुझे वापस बेड पर बैठा दिया और अपने हाथों को मेरी पीठ पर लाकर मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। अब मेरे वक्ष की दोनों गोलाइयाँ उसके सामने बिल्कुल आजाद होकर झूलने लगी, वो मेरी चूचियाँ अपने हाथों में लेकर दबाने लगा। मेरे चेहरे पर बेचैनी थी। उसने मेरे एक निप्पल को अपनी अंगुलियों में लेकर मसला तो मेरे मुँह से एक आह्ह की आवाज निकली।
फिर उसने झुककर मेरे दूसरे निप्पल को अपने मुख में ले लिया और उसे अपनी जीभ से सहलाने लगा, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, में सिसकारियाँ लेने लगी।
अब प्रदीप ने अपना एक हाथ निप्पल पर से हटा कर पेरे पेट से सरकते हुए पेन्टी के ऊपर रख दिया और मेरी चूत को पेन्टी के ऊपर से ही सहलाने लगा।
कुछ ही देर बाद उसने अपना मुँह भी मेरे निप्पल पर से हटा कर मेरी चूत की तरफ आकर एक ही झटके में मेरी पेन्टी को मेरी जाँघों से सरका कर अलग फेंक दिया और अपने हाथ की अंगुली को मेरी चूत के अंदर डाल दिया और अंदर-बाहर करने लगा।
फिर मुझे बेड के किनारे लाकर खुद बेड के नीचे बैठ गया और अपना मुँह मेरी चूत पर रख कर जीभ से उसे चाटने लगा। मेरी बेसबरी अब बढ़ती जा रही थी तो मैंने उसके बालो को पकड़कर उसके सर को अपनी चूत पर दबाया। जैसे जैसे उसकी जीभ अपना काम कर रही थी, में और भी उत्तेजित होती जा रही थी, कुछ देर उसकी जीभ से मेरी चूत की चुदाई के बाद उसने मेरे दोनों पैरों को फैलाया, मेरी चूत उसके सामने थी तो उसने एक पल की भी देरी किये बिना अपने लंड को मेरी चूत पर रखा और उसके अंदर डालने लगा।
उसका लंड काफी मोटा था जो आसानी से अंदर नहीं जा रहा था और मुझे बहुत दर्द हो रहा था। तो उसने वहाँ मेज पर रखी बॉडी लोशन की बोतल से थोड़ी क्रीम अपने लंड और मेरी चूत पर लगाई, फिर लंड को मेरी चूत पर रख कर लंड को अंदर डालने की कोशिश की तो लंड थोडा सा अंदर चला गया और मेरी चीख निकल गई।
वो थोड़ा रुका और फिर एक और जोर का झटका मारा तो उसका पूरा लंड मेरी चूत में जा चुका था। मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मैं दर्द के मारे तड़प रही थी। कुछ देर बाद जब मेरा दर्द कम हो गया तो प्रदीप ने लंड को आगे पीछे करना शुरु किया और मुझे चोदने लगा। फिर एक दूसरे को धक्के देने का सिलसिला चालू हो गया, हम दोनों की चोदन-गति बढ़ती जा रही थी, मेरे पैर हवा में खुले हुए थे जिससे प्रदीप को लंड चूत के अंदर तक डालने में आसानी हो रही थी।
अब उसका लंड तेजी से चूत के अंदर-बाहर हो रहा था, एक जबर्दस्त घर्षण उसके लंड से मेरी चूत की दीवारों पर उत्पन्न हो रहा था। हम दोनों आनन्द की एक दूसरी दुनिया में तैर रहे थे। मेरी चूत से गर्म पानी निकलने लगा जो लुब्रीकेंट का काम कर रहा था।
हम दोनों अपनी चरम सीमा के नजदीक पहुँच रहे थे, इस चुदाई से फच्च फच्च की आवाज आने लगी थी, हमारे अंदर एक जबर्दस्त तूफान उबाल मार रहा था, हम दोनों के अंदर एक लावा भभक रहा था जो हमारी चुदाई के अन्तिम पलों में फ़ूट पड़ा, हम दोनों के शरीर शांत हो गए और थोड़ी देर तक एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे।
यह मस्ती का दौर रात में फिर दो बार और चला !
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06-27-2017, 10:53 AM,
#7
RE: Chudai Kahani मैं उन्हें भइया बोलती हूँ
उस चुदाई के बाद अगली सुबह प्रदीप ने ही अपनी कार मैं मुझे मेरे घर छोड़ा और जाते जाते उसने मुझे से मेरा मोबाइल नंबर लिया और वो चला गया। मैं भी घर आ गई।
उसके बाद प्रदीप अक्सर मुझे फ़ोन करने लगा और मैं घंटो घर में छुप कर उस से बातें करने लगी। कभी-कभी जब घर में कोई नहीं होता था तो मैं प्रदीप के साथ फ़ोन सेक्स भी किया करती थी। मुझे उससे बातें करना बहुत अच्छा लगता था। प्रदीप हमेशा मुझे कहता कि रोमा मुझे तुम से फिर से मिलना हैं, पर मैं हर बार उसे मिलने से मना कर देती थी।
एक दिन तो प्रदीप बहुत ज़िद करने लगा कि उसे मुझे से मिलना ही है। मैंने फिर उसे मना कि पर वो नहीं माना और कहने लगा कि कल वो आ रहा है और मैं उस से मिलूँ नहीं तो वो मेरे घर ही आ जाएगा।
मुझे उसकी ज़िद के आगे झुकना पड़ा और मैंने कहा- हाँ मैं कल तुम से मिलूंगी।
पर मैंने उसे यह साफ-साफ कह दिया कि मैं तुमसे आखिरी बार मिल रही हूँ। इसके बाद मैं तुमसे नहीं मिलूँगी और तुम मुझे मिलने के लिए मजबूर नहीं करोगे।
प्रदीप ने कहा- ठीक है।
मैंने कहा- मुझे प्रोमिस करो।
प्रदीप ने मुझसे वादा किया और फिर हमने अगले दिन मिलने का समय तय किया। प्रदीप ने मुझे कहा कि वो कल शाम 4 बजे मेरे ही घर के पास मेरा इन्तजार करेगा।
मैंने कहा- ठीक है, कल मिलते हैं।
अगले दिन मैं तैयार हुई और घर में मम्मी को कहा- मम्मी आज मेरी एक फ्रेंड का बर्थ-डे है। मैं उसके बर्थ-डे पार्टी में जा रही हूँ। आने मैं थोड़ी देर हो जाएगी !
तो मम्मी ने मुझे परमीशन दे दी, मैं घर से निकल गई और प्रदीप को फ़ोन किया कि वो कहाँ है?
उसने कहा कि वो मेरे घर के राईट साइड में जो चौराहा है, वो वहीं खड़ा है। मैं जल्दी जल्दी वहाँ पहुँची। प्रदीप की कार चौराहे के थोड़े साइड में खड़ी थी और प्रदीप भी कार के बाहर मेरा इन्तजार करते हुए खड़ा था। मैं जाकर उससे मिली, फिर हमारी थोड़ी बात हुई।
उसके बाद प्रदीप ने कहा- चलो रोमा कार में बैठो, हम कहीं लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं।
मैं कार में बैठ गई। प्रदीप ने भी कार स्टार्ट की और वो कार चलाने लगा।
प्रदीप मुझ से रोमांटिक बातें किए जा रहा था। कुछ ही समय बाद हमारी कार सिटी के बाहर आ गई थी।
मैंने प्रदीप से कहा- प्लीज़ प्रदीप, बताओ तो कि हम कहाँ जा रहे हैं?
प्रदीप कहने लगा- रोमा हम वहीं जा रहे हैं जहाँ कोई आता-जाता नहीं।
अब हमारी कार क्योंकि सिटी से बाहर आ गई थी, इसलिए अब प्रदीप की मस्ती चालू हो गई थी। उसका एक हाथ कार के स्टेयरिंग से हट कर मेरे सीने के ऊपर आ गया और वो बूब्स को दबाने लगा।
मैंने उसके हाथ हटाया और कहा- प्लीज़, तुम कार ठीक से चलाओ।
पर प्रदीप नहीं मान रहा था। कभी वो बूब्स को दबाता तो कभी मेरी जींस के ऊपर से ही मेरी चूत को सहलाता। 
मैं बार-बार उसका हाथ हटाते जा रही थी पर वो नहीं मान रहा था। उसने कार चलाते-चलाते ही अपनी पैन्ट की ज़िप खोली, और लंड को बाहर निकाल कर मेरा एक हाथ पकड़ कर मेरे हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया।
प्रदीप का लंड मेरे हाथ में आते ही मेरे अंदर भी कुछ गर्मी सी आ गई और मैं उसका लंड सहलाने लगी।
प्रदीप ने अब कार को हाइवे से उतार कर एक कच्चे रास्ते पर डाल दिया जो जंगल के अंदर जा रहा था।
मैंने प्रदीप से पूछा- ये तुम कार को कहाँ ले जा रहे हो?
प्रदीप ने कहा- तुम चुपचाप बैठी रहो। हाइवे पर कार खड़ी करना ठीक नहीं होता। इसलिए हम कच्चे रास्ते से जंगल के अंदर जा रहे हैं। मैंने यह जगह देखी हुई है, बहुत अच्छी जगह है, यहाँ कोई आता-जाता नहीं है। यहाँ जंगल के अंदर ही एक छोटा सा झरना है। यह बहुत सुन्दर जगह है। तुम्हें पसंद आएगी।
मैं चुपचाप बैठी प्रदीप के लंड को सहला रही थी।
जंगल के अंदर कुछ दूर जाकर प्रदीप ने एक जगह कार को खड़ी किया और मुझे कहा- उतरो मैं तुम्हें ये जगह दिखाता हूँ।
मैं कार से उतरी तो देखा कि वहाँ पर एक छोटा सा झरना था। झरने से पानी नीचे गिर रहा था। नजारा बहुत सुन्दर लग रहा था। हमें वहाँ पहुँचने में लगभग आधा घंटा लगा था। उस टाइम 4:30 हो गए थे।
प्रदीप ने कहा- देखा रोमा, मैंने कहा था न, यह जगह बहुत सुन्दर है।
मैं उस झरने को देख रही थी कि तभी प्रदीप मेरे पास आया और मुझे अपनी बाँहों में ले लिया। मैंने भी उसे अपनी बाँहों में ले लिया।
वो मेरी गर्दन को चूमने लगा। फ़िर उसने मुझे कार से टिका कर मेरी गर्दन को पकड़ कर अपने होंठों को मेरी होंठों पर रख कर उन्हें चूमने लगा। मैं भी उसका साथ दे रही थी।
अब उसके हाथ गर्दन से खिसक कर नीचे आने लगे थे। उसने अपने दोनों हाथों को मेरी कमर तक ले आया और मेरी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाल कर टी-शर्ट को ऊपर उठाने लगा।
उसने टी-शर्ट को मेरे बूब्स तक उठाया और बूब्स को दबाने लगा और साथ ही लगातार वो मेरे होंठो को भी चूमते जा रहा था।
कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे को इसी तरह चूमते रहे। उसके बाद प्रदीप ने मेरी टी-शर्ट और ब्रा दोनों उतार दी और कार का पिछला गेट खोल कर मुझे उसने कार की पिछली सीट पर लिटा दिया।
उसने अपनी शर्ट उतार दी फिर वो मेरे ऊपर आ गया। मेरे एक बूब्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को एक हाथ से दबाने लगा।
मेरे मुँह से अब कामुक आवाजें निकलने लगीं मैं जोर-जोर से ‘आह हह आआ अह ह’ करने लगी।
उसने मेरे दोनों मम्मों को अपने हाथों में पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगा।
उसने मुझसे पूछा- कैसा लग रहा है तुम्हें रोमा?
मैंने अपनी आँखें मूँद कर धीरे से कहा- अच्छा लग रहा है, प्रदीप और जोर-जोर से चूसो इन्हें।
वो फिर मेरे उरोजों को चूसने लगा और मैं लगातार उस से बोले जा रही थी, “और जोर-जोर से चूसो, प्रदीप बहुत मजा आ रहा है।”
मेरे ऊपर एक नशा सा छा रहा था और मैंने प्रदीप को अपने दोनों हाथों से जकड लिया। अब प्रदीप ने अपने आप को मेरी बाँहों से छुड़ाया और मेरी जींस के बटन खोल कर मेरी जींस को उतारने लगा।
उसने मेरी जींस को पूरी उतार कर आगे की सीट पर रख दी और कहा- रोमा तुम तो आज इस पैन्टी में बहुत सेक्सी लग रही हो।
मैंने उस दिन काले रंग की पारदर्शी पैन्टी पहनी थी। उसने अपना हाथ मेरी चूत पर रखा और उसे पैन्टी के ऊपर से ही सहलाने लगा।
उसने मेरी जाँघ के पास से पैन्टी को खींच कर अलग किया, जिससे मेरी चूत उसे दिखने लगी।
प्रदीप ने कहा- रोमा तुम्हारे ये चूत के बाल भी बहुत सेक्सी लग रहे हैं।
उसने अपनी एक उंगली मेरी चूत के अंदर डाल दी तो मेरे मुँह से एक सीत्कार ‘अह्ह ह्ह्ह’ निकली फिर उसने अपना मुँह मेरी चूत के ऊपर रखा और चूत को चूसने लगा।
मैंने उत्तेजना के मारे उसके सर के बाल पकड़ लिए, उसके सर को अपनी दोनों जाँघों के बीच चूत पर दबाने लगी और जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगी।
प्रदीप अपनी जुबान को मेरी चूत के छेद में डालने लगा और मेरी चूत से खेलने लगा।
मैं बहुत उत्तेजक हो गई थी और प्रदीप को कह रही थी, “प्रदीप चूसो मेरी चूत को, खा जाओ उसे।”
प्रदीप अब और जोर-जोर से मेरी चूत को चूसने लगा और मैं भी उसके सर को चूत पर दबाने लगी कुछ देर कि चूत चुसाई के बाद प्रदीप कार के बाहर निकला और अपनी पैन्ट और अंडरवेयर उतार कर कार की आगे की सीट पर रख दिए।
प्रदीप ने मुझे भी खींच कर कार के बाहर किया और कार से एक कुशन को निकल कर कार का गेट लगा दिया और खुद कार के गेट से चिपक कर खड़ा हो गया।


उसने मुझे वो कुशन दिया और कहा- लो इसे अपने घुटनों के नीचे रख कर नीचे बैठ कर मेरा लंड चूसो।
मैंने वैसा ही किया। मैंने कुशन को नीचे रख कर और उस पर अपने घुटने टेक कर खड़ी हुई और प्रदीप के लण्ड को अपने हाथों से सहलाने लगी। प्रदीप ने अपना एक हाथ मेरे सर में बालों के अंदर किया और मेरे सर को पीछे से आगे धकेल कर अपने लंड को मेरे मुँह में डाल दिया।
अब मैं उसके लंड को चूसने लगी और प्रदीप झटके मारने लगा। जैसे वो मेरे मुँह की ही चुदाई कर रहा हो।
10 मिनट तक प्रदीप यूँ ही मेरे मुँह की चुदाई करता रहा और मैं भी बड़े मजे से उसका लंड चूसती रही।
फिर प्रदीप ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और कार के बोनट पर बैठा दिया और फिर से मेरी जाँघ के पास से पैन्टी को खींच कर अलग किया और चूत को चूसने लगा।
फिर उसने अचानक अपने मुँह को मेरी चूत पर से हटाया और मेरी चूत के ऊपर अपना लंड रख कर लंड से चूत को सहलाने लगा और मेरी पैन्टी को चूत पर से खींच कर और साइड में कर दिया।
मैंने उसे कहा- पैन्टी उतार दो, फिर अच्छे से कर सकोगे तुम।
तो उस ने मना कर दिया और कहा- नहीं मुझे ऐसे में ही मजा आ रहा है।
प्रदीप बस अपने लंड से मेरी चूत को सहला रहा था। वो चूत में लंड नहीं डाल रहा था। वो मुझे तड़पा रहा था।
मुझे कार का बोनट गर्म लगने लगने लगा तो मैंने प्रदीप से कहा- प्रदीप मुझे बोनट गर्म लग रहा है। चलो कार के अंदर ही चलते हैं।
तो उसने कहा- ठीक है।
और उसने मुझे फिर से अपनी गोद में उठा कर मुझे कार कि पिछली सीट पर लिटा दिया और वो भी कार के अंदर आ गया।
मेरा एक पैर सीट के नीचे था और दूसरे पैर को प्रदीप ने उठा कर अपने कन्धे के ऊपर रख लिया।
प्रदीप ने भी अपने एक पैर सीट के नीचे रखा और पैर को घुटने के पास ले मोड़ लिया। फिर प्रदीप ने मुझे अपनी तरफ खींचा और अपने लंड को मेरी चूत पर टिकाया और लंड को जोर से चूत के अंदर धकेला, जिससे मेरे मुँह से के चीख निकली और प्रदीप का आधा लंड मेरी चूत के अंदर चला गया। प्रदीप ने मेरे स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें दबाने लगा।
मेरे मुँह से सिस्कारियाँ निकलने लगी- आआह ऊऊह ह्ह्ह आ आआ आआह !
प्रदीप ने बचा हुआ अपना आधा लंड भी एक और झटके में चूत के अंदर डाल दिया।
मैंने कहा- कमीने थोड़ा धीरे कर, मुझे दर्द हो रहा है।
प्रदीप ने कहा- साली, थोड़ा दर्द हो होगा ही न। अभी कुछ देर में तू खुद ही कहेगी, जोर-जोर से करो।
तो मैंने कहा- कमीने जब मैं जोर से करने का बोलूँ तो जोर से भी कर लेना, पर अभी तो थोड़ा धीरे कर !
तब प्रदीप ने कहा- साली बहुत कमीनी है तू, चल अब तू भी अपनी गांड उछाल कर मेरा साथ दे।
प्रदीप जोर-जोर से मुझे चोदने लगा और मैंने भी अपनी कमर उछाल-उछाल कर उसका साथ देने लगी। अब मुझे चुदने में मजा आने लगा था, मैं उसे कहने लगी- और जोर-जोर से चोदो प्रदीप !
प्रदीप तो उसने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और कहने लगा- ले साली ले ! और ले, आज तुझे खूब चोदूँगा।
लगभग दस मिनट तक प्रदीप मुझे यूँ ही धकाधक चोदता रहा, फिर वो कहने लगा- रोमा, मेरा निकलने वाला है।
तो मैंने कहा- तुम चूत के अंदर नहीं छोड़ देना !
उसने अपना लंड जल्दी से चूत से निकाला और अपना सारा वीर्य मेरी चूत के ऊपर छोड़ दिया, जिससे कि मेरी चूत और पैन्टी गन्दी हो गई थी।
उसके वीर्य की कुछ बूँदें मेरे स्तनों तक भी आईं। अब तक प्रदीप में जो जोश भरा था वो थोड़ा कम हो गया, ढीला हो कर मेरे ऊपर ही लेट गया, मेरे होंठो को चूमने लगा।
कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद प्रदीप मुझ पर से हटा तो मैंने उसे कहा- देखो तुमने यह क्या किया, मुझे पूरा गन्दा कर दिया और खुद भी हो गए ! अब इसे कौन साफ करेगा?
प्रदीप ने कहा- तुम चिन्ता मत करो, मैं ये सब साफ कर दूँगा। देखो इस झरने का पानी अपने किस काम आएगा?
उसने मुझे कार से बाहर निकाल कर अपनी गोद में उठाया। फिर झरने के पास लेकर गया झरने से जो पानी बह रहा था, वो सिर्फ पैरों के टखने तक ही था।
प्रदीप ने मुझे ले जाकर एक चौड़े पत्थर के ऊपर लिटा दिया और पहले मेरी पैन्टी को उतार कर उसे धोने लगा फिर पैन्टी को अलग एक पत्थर पर रख दिया और अपने हाथों से पानी ले कर मेरी चूत के ऊपर जो उसका वीर्य था, उसे साफ करने लगा। उसने मेरा सारा बदन पानी से गीला कर दिया था।
मैंने उससे कहा- तुम भी तो अपने आप को साफ कर लो।
‘तुम साफ कर दो रोमा ! मैंने तुम्हें साफ किया है, तुम मुझे साफ कर दो।”
मैंने कहा- ठीक है, अब तुम यहाँ लेट जाओ।
उसके पत्थर पर लेटने के बाद मैंने भी उसका सारा बदन साफ किया।
मैंने कहा- प्रदीप मुझे ठण्ड लग रही है और देखो, अँधेरा भी हो रहा है। अब हमें यहाँ से चलना चाहिए।
तब वो कहने लगा तुम्हारी ठण्ड को मैं अभी दूर कर दूँगा। मेरा हाथ पकड़ कर उसने खींचा और अपने ऊपर मुझे लिटा लिया और मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया- इससे तुम्हारी ठण्ड दूर हो जाएगी।
कुछ देर मैं और प्रदीप वहाँ ऐसे ही लेटे रहे।
प्रदीप ने कहा- रोमा तुम मेरा थोड़ा सा लंड चूसो, इससे तुम्हारी ठण्ड और दूर हो जाएगी।
मैंने प्रदीप की छाती को चूमते हुए नीचे उसके लंड के पास आई, प्रदीप का लंड छोटा था, वो खड़ा नहीं था। मैंने उसके लंड को अपने हाथ में लिया और अपने मुँह में लेने लगी तो उस का लंड अब खड़ा होने लगा। मैं लंड को अपने मुँह में भर कर चूसने लगी।
प्रदीप के लंड को एक मिनट भी नहीं लगा और उसका लंड एकदम खड़ा हो गया। मैं जोर-जोर से उसका लंड चूसने लगी, मुझे काफी मजा आने लगा लंड चूसने में।
5 मिनट लंड चुसवाने के बाद प्रदीप ने कहा- रोमा, मैं तुम्हें एक बार और चोदना चाहता हूँ। पता नहीं तुम फिर कब मिलोगी?
मैंने प्रदीप को पत्थर पर से उठने को कहा और खुद उस पत्थर पर लेट गई और प्रदीप से कहा- लो आज जो करना है, कर लो।
तो उसने थोड़ी सी भी देर ना करते हुए मेरे दोनों पैरों को उठा कर अपने दोनों कन्धों पर रख लिए और अपने लंड को चूत के ऊपर रख कर एक जोर का झटका मारा जिससे उसका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत के अंदर चला गया।
मैं एक बार फिर जोर से चिल्लाई- कमीने, थोड़ा धीरे डाल !
पर वो अब मेरी नहीं सुन रहा था, वो मुझे चोदने में लगा हुआ था, जोर-जोर से लंड मेरी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था।
मैं ‘आआह ऊउह आअह’ करते हुए सिसकारियाँ लेने लगी।
मैं बहुत गर्म हो गई थी, जिससे मेरा निकलने वाला था।
मैंने बताया कि मेरा निकलने वाला है, तो उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया और अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया, ‘आह आअह उह’ करते हुए मैं झड़ गई।
प्रदीप मेरा वो सारा पानी पीने लगा। उसने चाट-चाट कर मेरी चूत को साफ किया और फिर उसने मेरे पैरों को फैला कर अपना लंड मेरी चूत रख कर उसे अंदर डाला और फिर से मेरी चुदाई करने लगा।
मैं फिर से गर्म हो गई, वो मुझे ऐसे ही चोदता रहा। कुछ देर बाद हम दोनों एक साथ झड़े और प्रदीप ने मुझे फिर से अपनी बाँहो में भर लिया और मुझे चूमने लगा।
हम दोनों उठे और हमने झरने में नहाया। वहाँ से जब जाने लगे तो मैंने पत्थर पर से अपनी पैन्टी उठाई।
वो अभी गीली थी, तब मैंने प्रदीप से कहा- देखो, ये तुमने क्या किया था। मेरी पैन्टी गीली हो चुकी है। अब मैं क्या पहनूँगी?
प्रदीप हँस कर बोला- मुझे पता था ऐसा कुछ होगा इसलिए मैंने इसका इंतजाम पहले से ही कर रखा था। जब मैं आ रहा था, तब ही मैंने मार्किट से तुम्हारे लिए एक ब्रा और पैन्टी खरीदी थी, चलो, कार में रखी है। मैं ही तुम्हें आज अपने हाथ से वो ब्रा और पैन्टी पहना देता हूँ।
हम कार के पास आए तो प्रदीप ने कार से वो ब्रा पैन्टी निकाली और मुझे पहनाई। फिर मैंने अपने कपड़े पहने और प्रदीप ने भी अपने कपड़े पहने और हम वहाँ से निकल पड़े।
प्रदीप और मैंने सिटी के बाहर ही एक ढाबे में खाना खाया। फिर प्रदीप ने मुझे घर छोड़ दिया और वो चला गया।
तो यह थी दोस्तो, मेरी आज की कहानी उस कार में और जंगल के बीच झरने के पास मुझे चुदने में अपना ही एक अलग मजा आया। उम्मीद करती हूँ, आप सभी को मेरी कहानी पसंद आई होगी। आपको यह कहानी कैसी लगी, आप मुझे बताइयेगा जरूर !
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