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Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
11-05-2017, 12:15 PM,
#11
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
raj sharma stories

मस्त घोड़ियाँ--5

गतान्क से आगे........................

संगीता- खड़ी होकर अभी पहन कर आती हू पापा और संगीता अंदर चली जाती है,

मनोहर- अपनी आँखो से अपनी बहू की गुदाज जवानी का रस पीते हुए, आओ बेटी मेरे पास आओ ज़रा देखु तुम्हारा

जीन्स का कपड़ा तो बहुत अच्छा है और जब संध्या पापा के पास जाती है तो मनोहर सीधे संध्या की मोटी गंद

को अपने हाथो से सहलाते हुए मस्त हो जाता है

मनोहर- संध्या के चुतडो को दबोच कर सहलाते हुए बेटी पहले से तुम्हारा शरीर काफ़ी फैल गया है अब

तो तुम बिल्कुल मम्मी की तरह नज़र आने लगी हो

संध्या- अपने ससुर का हाथ पकड़ कर अपने पेट पर रखते हुए, पापा यहाँ च्छू

कर देखिए अभी मेरा पेट तो

मम्मी जैसा ज़्यादा उठा हुआ नही है ना

मनोहर- अपनी बहू के गुदाज पेट को उसकी टीशर्ट उपर करके सहलाता हुआ उसे खींच कर अपनी गोद मे बैठा लेता

है और उसके गुदाज पेट को सहलाता हुआ उसके गालो को चूम कर अपने दूसरे हाथ से उसकी जाँघो को थोड़ा खोल कर

हल्के से जीन्स के उपर से उसकी चूत पर हाथ रख कर सहलाते हुए, बेटी जब तुम्हारे पेट मे बच्चा आ जाएगा

ना और तुम उसे जब पेदा कर लोगि तब तुम्हारा पेट भी मम्मी जैसा उठ जाएगा तब देखना तुम पूरी तरह खिल

जाओगी,

तभी संगीता एक टाइट जीन्स और टीशर्ट पहन कर बाहर आ जाती है और मनोहर अपनी बेटी की कसी जवानी

गुदाज जंघे देख कर एक दम से संध्या की चूत को अपने हाथ से दबा देता है

संगीता- मुस्कुराते हुए पिछे घूम कर अब देखो पापा मैं ज़्यादा मोटी हू या भाभी

मनोहर - अपने लंड को मसल्ते हुए संध्या तुम भी सामने जाकर खड़ी हो जाओ तब मैं देखता हू कि तुम दोनो

मे किसका फिगुर जीन्स मे ज़्यादा मस्त लगता है संध्या और संगीता दोनो अपने पापा को अपनी मोटी गंद दिखाते

हुए खड़ी हो जाती है और मनोहर दो-दो जवान घोड़ियो को अपनी और चूतड़ उठा कर मतकते देख मस्त हो जाता

है और उठ कर दोनो के भारी चूतादो को सहलाते हुए बेटी तुम दोनो के चूतड़ काफ़ी बड़े है पर संध्या

थोड़ा खेली खाई है तो उसके चूतड़ ज़्यादा फैले हुए लग रहे है,

संगीता अपने पापा के सीने पर हाथ मारते हुए, मतलब पापा हमारा फिगुर आपको अच्छा नही लगा

मनोहर- नही बेटी तुम्हारे चूतड़ बहुत सुंदर है पर थोड़ा और फैल जाएगे तो और फिर मस्त लगेगे

संध्या- अपने ससुर की ओर देख कर पापा आप संगीता के चूतादो को फैला दीजिए ना यह तो कब से मरी जा रही

है, मनोहर अपनी बेटी और बहू दोनो के भारी चूतादो को अपने हाथ से दबाते हुए, बेटी चूतड़ तो तुम दोनो

के फैलाने लायक है हम तो तुम दोनो के चूतादो को फैलाएगे क्यो कि हमारी नज़र मे हमारी बहू और बेटी

एक समान है और हम दोनो को बराबर प्यार करेगे और फिर मनोहर दोनो रंडियो को अपनी बाँहो मे भर कर

चिपका लेता है

मनोहर- तुम दोनो का फिगुर हम बहुत मस्त कर देगे पर तुम दोनो ने हमे वह नये कपड़े पहन कर नही

दिखाए जो कल तुम्हारी मम्मी लेकर आई है,

संगीता- पापा वो तो हमारे लिए पेंटी और ब्रा लेकर आई है

मनोहर- हाँ मैं उन्ही की बात कर रहा हू

संगीता- शरमाते हुए पर पापा मैं वह पेंटी और ब्रा पहन कर आपके सामने कैसे आऊ

मनोहर- अपनी बेटी के गालो पर अपनी जीभ फेरते हुए, अरे बेटी तू तो मेरी बेटी है और तुझे तो मैने नंगी अपनी

गोद मे खिलाया है फिर तू अपने पापा के सामने पेंटी पहन कर नही आ सकती क्या

संगीता- अच्छा ठीक है मैं तो पहन कर आ सकती हू पर भाभी तो आपकी बहू है ना वह कैसे आपके सामने

आएगी,

मनोहर- अरे क्यो नही आ सकती मैं भी तो उसके बाप जैसा हू और फिर तुम ही बताओ संध्या क्या तुमने कभी

अपने पापा मनोज के सामने पेंटी नही पहनी क्या

संध्या- संगीता पापा ठीक कह रहे है मुझे अपने पापा के सामने पेंटी पहनने मे कोई परेशानी नही है

पर पापा अभी घर का सारा काम पड़ा है देखो यहा झाड़ू पोच्छा भी करना है नही तो मम्मी आते ही चिल्लाने

लगेगी,

मनोहर-अच्छा एक काम करो पहले जाओ वह नई वाली ब्रा और पेंटी पहन कर आओ फिर मैं बताता हू क्या करना

है और फिर दोनो रंडिया रूम मे जाकर ब्रा और पेंटी पहन कर आ जाती है, मनोहर अपनी बेटी और बहू की

नंगी गुदाज जवानी को ब्रा और पेंटी मे देखता है तो उसके लंड से पानी की बूंदे बाहर आने लगती है वह,

संध्या जहाँ रेड कलर की ब्रा और पेंटी पहने थी संगीता वही पिंक कलर की ब्रा और पेंटी पहन कर अपने पापा

के सामने खड़ी थी,

मनोहर दोनो मस्तानी लोंदियो को अपने पास बुलाता है और दोनो रंडिया उसके बदन से लिपट

जाती है मनोहर उन दोनो के चूतादो पर उसकी पेंटी के उपर से सहलाता है और उसके बाद उन दोनो को प्यार से

चूमता हुआ, बेटी संगीता तू एक काम कर यहा झाड़ू मार दे और संध्या तू पोछा लगा ले तब तक मैं बैठ कर

पेपर पढ़ लेता हू उसके बाद भी अगर तुम्हराई मम्मी नही आई तो मैं तुम दोनो को अपना फिगुर बनाने के लिए

मदद करता हू,
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11-05-2017, 12:15 PM,
#12
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मनोहर सोफे पर आराम से बैठ गया और अपनी लूँगी से अपने तने हुए लंड को बाहर निकाल लिया उसके मोटे लंड

पर संध्या की जैसे ही नज़र पड़ी वह वही बैठ कर फर्श पर पोछा लगते हुए अपने ससुर का लंड देखने लगी

आज उसने पापा का लंड बहुत करीब से देखा था और उसकी चूत पूरी फूल गई थी, संध्या का मूह अपने ससुर की

तरफ था और उसके मसल मोटे-मोटे दूध उसकी ब्रा से आधे से ज़्यादा बाहर निकले हुए थे उसकी पेंटी उसकी फूली

हुई चूत की फांको मे फसि हुई थी और मनोहर अपने लंड को अपनी दोनो जाँघो के बीच दबाता हुआ अपनी बहू की

फूली चूत को उसकी पैंटी मे कसी देख रहे थे

तभी संध्या ने दूसरी और मूह करके पोछा लगाना शुरू कर

दिया और मनोहर अपनी बहू के भारी चूतादो को देख कर मस्त हो गया तभी संध्या वहाँ से थोड़ा उठी और

उसकी पेंटी उसकी गोरी और मस्त गंद की दरार मे फस गई और जब संध्या चलने लगी तो उसकी गंद बड़े मस्त अंदाज मे थिरक रही थी, तभी संध्या ने एक दम से अपनी गंद खुजलाते हुए फिर से पोछा करने बैठ गई और

मनोहर का लंड अपनी बहू के मस्ताने चूतादो को देख कर पागल हो गया,

दूसरी और संगीता झुकी हुई अपनी गंद अपने बाप की ओर करके झाड़ू मार रही थी और मनोहर अपनी बेटी की मासल

भरी हुई गंद और कसी हुई चुचिया जो ब्रा से छलक रही थी को देख कर मस्त हो रहा था, मनोहर ने गौर

किया कि उसकी बहू का पेट रोहित का लंड लेने से थोड़ा उठा हुआ नज़र आ रहा था जबकि उसकी बेटी संगीता का पेट अभीथोड़ा ही उभरा था, वही संगीता के चूतड़ बाहर की तरफ उठे हुए खूब कसे नज़र आ रहे थे और संध्या की

गंद थोड़ा चौड़ी नज़र आ रही थी, मनोहर दो-दो रंडियो की नंगी गंद देख कर अपने आपे से बाहर हो रहा

था,

संध्या और संगीता दोनो मंद-मंद मुस्कुराते हुए एक दूसरे को देख रही थी और कुछ ज़्यादा ही अपनी

गंद मटका -मटका कर काम कर रही थी,

तभी संगीता झाड़ू मारते-मारते अपने पापा के सोफे के पास पहुच कर नीचे बैठ जाती है और मनोहर अपनी बेटी

के मस्त बड़े-बड़े रसीले दूध को ब्रा मे कस देख कर मस्त हो जाता है

संगीता- पापा पेर उपर करो ज़रा सोफे के नीचे झाड़ू मार दू और फिर मनोहर ने जैसे ही पेर उपर उठाए

संगीता को अपने पापा का मोटा लंड नज़र आ गया जो पूरी तरह तना हुआ था और उसके नीचे उसके पापा के मस्त

गोते झूल रहे थे संगीता ने एक हाथ से सोफे के नीचे झाड़ू मारते हुए दूसरे हाथ से अपने पापा के मस्त गोटू

को पकड़ कर उनके लंड के टोपे पर अपना मूह झुका दिया और अपने पापा का लंड मूह मे भर कर चूस्ते हुए

झाड़ू देने लगी,

अपने पापा के लंड का मस्त टोपा चूस कर संगीता मस्त हो रही थी तभी संध्या ने उसे देख

लिया और अपनी मोटी गंद मतकाते हुए उनकी और आने लगी, मनोहर ने सामने देखा तो वह मस्त हो गया उसकी

बहू उसकी और मस्ताने अंदाज मे चल कर आ रही थी और उसकी चूत उसकी पेंटी के अंदर बहुत फूली हुई नज़र आ

रही थी,

संध्या- ने संगीता को उठाते हुए चलो ननद रानी अगर तुमने झाड़ू मार दी हो तो मैं भी सोफे के नीचे पोछा

लगा देती हू और फिर संगीता वहाँ से खड़ी हो गई और संध्या नीचे बैठ कर अपने ससुर के लंड को अपने मूह

मे भर लेती है और जब अपने गीले हाथो से मनोहर के गोटे सहलाती है तो मनोहर मस्त होकर संध्या की

मोटी चुचियो को कस कर मसल देता है,

तभी संगीता नीचे बैठ कर अपने पापा के गोटू को चूसने लगती है और संध्या अपने ससुर के लंड के टोपे को

चूसने लगती है और मनोहर दोनो रंडियो के एक-एक दूध को कस कर अपने हाथो से दबाता रहता है उसे अपनी

बेटी और बहू के दूध को एक साथ मसल्ने मे बड़ा मज़ा आ रहा था, उधर संगीता और संध्या अपने पापा की

एक-एक गोटियो को अपने हाथो से सहलाते हुए उनके लंड के फूले हुए सूपदे को अपनी जीभ निकाल कर एक साथ

चाटने लगती है और बीच-बीच मे उनकी जीभ एक दूसरे से जब टकराती है तो दोनो एक दूसरे की जीभ को चूसने

लगती है,

दोनो घोड़िया उकड़ू बैठी थी और अपने पापा का लंड चाट रही थी और जैसे ही उनकी जीभ आपस मे टकराई

दोनो ने एक दूसरे की जीभ चूस्ते हुए एक दूसरे की चूत मे हाथ डाल कर पेंटी के उपर से एक दूसरे की चूत

सहलाने लगी,

संगीता- ओह पापा क्या मस्त लंड है आपका, कितना मोटा है बिल्कुल डंडे की तरह तना हुआ है,

संध्या- पापा आपकी बहू ज़्यादा अच्छा चूस रही है या बेटी

मनोहर- तुम दोनो की रसीली जीभ बहुत मस्त है पर टेस्ट किसका कैसा है यह तो मुझे तुम्हारी जीभ चूसने

पर ही पता चलेगा, तभी दोनो रंडिया खड़ी होकर अपने पापा के आस पास बैट जाती है और एक साथ दोनो अपनी

जीभ निकाल कर अपने पापा को पिलाने लगती है, मनोहर उन दोनो की हर्कतो से पागल हो जाता है और दोनो की जीभ

अपने मूह मे भर कर पागलो की तरह चूमने लगता है,

संध्या-पापा आपको कैसा लगा हमारी जीभ का टेस्ट

मनोहर- दोनो के मोटे-मोटे दूध को उनकी ब्रा के उपर से कस कर मसलता हुआ, मेरी बेटियो बहुत रसीली हो तुम

दोनो और तुम्हारी जीभ भी बहुत रसीली है

संध्या-संगीता को देख कर मुस्कुराते हुए पापा अभी आपने मेरा और अपनी बेटी संगीता का असली रस तो पिया ही

नही है,

जब आपकी दोनो बेटियाँ एक साथ आपको अपना रस पिलाएगी तब आप कहेगे कि वाकई मेरी दोनो बेटियाँ बड़ी

रसीली है,

मनोहर- संगीता के होंठो को चूम कर संध्या की ओर देखता है और उसके गोरे गालो को खिचते हुए, तो फिर

बेटी देर किस बात की है,

संध्या- पापा अभी मम्मी सब्जिया लेने गई है और वह आती ही होगी और वैसे भी संगीता चाहती है कि जब आप

अपनी दोनो बेटियो का रस एक साथ पिए तब समय की कोई पाबंदी ना हो इसलिए अभी का समय ठीक नही है

मनोहर- पर बेटी तब तक मैं कैसे रह पाउन्गा,

तभी बाहर से कोई डोर बेल बजाता है और संगीता और संध्या दोनो दौड़ कर अपने रूम की ओर भाग जाती है और

मनोहर उन दोनो को पेंटी मे दौड़ता देख कर उनकी गुदाज गंद का दीवाना हो जाता है और उठ कर गेट खोलने

चल देता है,

रात के 10 बज रहे थे और संध्या और रोहित एक दूसरे के होंठो को किस कर रहे थे और संध्या अपनी जीभ बार-बार रोहित को दिखाती और रोहित लपक कर संध्या की जीभ पीने की कोशिश करता,

रोहित- जानेमन तुम बहुत तड़पाती हो

संध्या- रोहित का लंड मसल्ते हुए, पर तड़पाने के बाद सुख भी तो बहुत देती हू ना, अब आज ही देख लो कैसा मज़ा दिलवाया मैने तुम्हे जब संगीता को तुमसे चुदवा दिया,

क्रमशः......................
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11-05-2017, 12:16 PM,
#13
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मस्त घोड़ियाँ--6

गतान्क से आगे........................

रोहित- संध्या के होंठो को चूम कर हाँ वो तो है डार्लिंग पर अब आगे का क्या प्लान है,

संध्या- खिड़की से बाहर बैठक की ओर धीरे से देखती है और उसे मम्मी और पापा बैठे हुए दिखाई देते है जो बिल्कुल करीब बैठ कर कॉफी की चुस्किया ले रहे थे,

संध्या- लगता है संगीता अपने रूम मे है, इनका रूम कुछ ऐसा था कि संगीता के रूम से ही उसके मम्मी-पापा का रूम सटा हुआ था और उसके मम्मी-पापा के रूम के पास मे बुआ का कमरा था, संध्या के रूम से पूरे बैठक का नज़ारा और मम्मी पापा और बुआ के रूम के अंदर आने जाने वाला साफ नज़र आता था लेकिन संगीता का रूम थोड़ा साइड मे था,

संध्या- रोहित अभी थोड़ा वेट करना पड़ेगा मम्मी पापा सामने ही बैठे है जब वह अपने रूम मे चले जाएगे तब हम दोनो संगीता के रूम मे चलेगे,

रोहित- ठीक है

संध्या- रोहित एक बात कहु

रोहित- हाँ बोलो जानेमन क्या बात है

संध्या- केवल एक दिन के लिए मुझे अपने मम्मी पापा के पास घुमाने ले चलो ना मैं बहुत दिनो से उनसे नही मिली हू मुझे बहुत याद आ रही है,

रोहित- वो तो ठीक है लेकिन तुम मुझे क्यो ले जा रही हो, तुम अकेली भी तो जा सकती हो

संध्या- अरे वो बात नही है, बल्कि मम्मी का कल फोन आया था और वह खुद कह रही थी कि दामाद जी को साथ लेती आना बहुत दिनो से उनसे मिली नही हू, अब क्या है ना रोहित मेरा कोई भाई भी नही है इसलिए उनका भी दिल मिलने के लिए करता होगा,

रोहित- यार वो तो ठीक है पर तुम वहाँ जाकर अपनी मम्मी के साथ रम जाओगी और मुझे तुम्हारे पापा को बेकार मे झेलना पड़ेगा मैं तो बोर हो जाउन्गा,

संध्या- अरे नही रोहित तुमने कभी उनसे खुल कर बात नही की इसलिए तुम्हे ऐसा लगता है, जबकि तुम्हे पता नही है, मेरे मम्मी और पापा दोनो बहुत अड्वान्स है, और पापा तो ठीक ही है वह तो पीने के बाद शुरू होते है पर मम्मी से तुम ज़्यादा खुल कर बात करोगे तो उनकी बाते सुन कर हैरान रह जाओगे, तुम नही जानते मैं तो अपनी मम्मी से सभी बाते शेर कर लेती हू,

रोहित- मुस्कुराते हुए और अपने पापा मनोज से

संध्या- मेरे पापा तो मेरी जान है मैं उनसे बहुत प्यार करती हू पर सबसे उन्होने तुम्हारे जैसा पति मुझे दिया है तब से मैं उनसे और भी प्यार करने लगी हू,

रोहित- और तुम्हारी मम्मी गीता उनसे प्यार नही करती

संध्या- मेरी मम्मी तो मेरी सहेली है, वह तो मेरी हमराज़ है और तुम नही जानते वह तुम्हे भी बहुत चाहती है, जब तुम उनसे खुल कर बात करोगे तब तुम्हे पता चलेगा कि वह कितने मस्त लोग है,

रोहित- खेर जिसकी बीबी इतनी मस्त हो उसके मम्मी पापा तो मस्त होंगे ही, ठीक है हम कल या परसो तुम्हारे घर भी चलते है ओके

संध्या- उसका गाल चूमते हुए ओके और फिर संध्या जब बाहर झाँक कर देखती है तो उसे सोफे पर कोई दिखाई नही देता है और वह रोहित का हाथ पकड़ कर उसके साथ संगीता के रूम मे पहुच जाती है,

संगीता जैसे ही दोनो को अपने रूम मे देखती है मुस्कुरा देती है

संध्या- क्या बात है ननद रानी हमारा ही इंतजार था क्या

संगीता- भाभी मैं तो कब से आप दोनो का इंतजार कर रही थी

संध्या-अच्छा सुन तेरे भैया तुझे पूरी नंगी देखना चाहते है चल जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दे

संगीता- मुस्कुराते हुए अपने भैया की ओर देखती है और रोहित संगीता को अपने सीने से लगा कर उसके रसीले होंठो को चूस लेता है,

संध्या- संगीता की स्कर्ट उपर करके उसकी पेंटी नीचे सरका देती है और रोहित को कहती है

संध्या- देखो रोहित संगीता के चूतड़ कितने मोटे हो गये है,

संगीता- हस्ते हुए भाभी आपसे से तो छ्होटे ही है,

रोहित- संगीता ज़रा अपने चूतड़ पूरे नंगे करके मुझे दिखा ना और फिर संगीता वही अपनी स्कर्ट और पेंटी पूरी उतार कर अपने भारी चुतडो को अपने भैया को दिखाने लगती है,

संध्या- अरे पगली ऐसे नही पहले तू पलंग पर चढ़ कर खड़ी हो जा उसके बाद अपने हाथो से अपनी मोटी गंद फैला कर अपने भैया को दिखा ताकि वह आराम से तेरी गंद का छेद चाट सके,

संगीता अपनी भाभी को मुस्कुरकर देखती हुई पलंग पर चढ़ जाती है और जब अपने दोनो चुतडो के पाटो को फैला कर अपने भैया को दिखाती है तो रोहित अपनी जवान बहन के गोल मटोल चूतड़ उसकी गुदा और गुदा के नीचे पाव रोटी जैसी फूली गुलाबी चूत को देख कर सीधे अपना मूह अपनी बहन की गंद मे भर कर एक ज़ोर से चुम्मा ले लेता है और संगीता हाय भाभी करके रह जाती है,

संगीता- पलट कर भाभी तुम भी नंगी हो जाओ ना मुझे अकेले शरम आती है

संध्या- उसकी बात सुन कर अपने सारे कपड़े खोल कर एक दम से पूरी नंगी होकर संगीता से चिपक जाती है और रोहित दोनो रंडियो को चूमने और सहलाने लगता है,

संध्या- अरे पहले हम तुम्हारे मम्मी पापा के रूम मे झाँक कर तो देखे क्या चल रहा है

मनोहर- मंजू अब तुम जल्दी से नंगी होती हो कि नही

मंजू-मनोहर को धकेल कर हस्ते हुए नही होंगी जब तक तुम मुझे यह नही कहते कि तुम्हारा लंड अपनी बहन रुक्मणी की मस्त गंद को चोदने के लिए बार-बार खड़ा हो जाता है,

मनोहर-हस्ते हुए मंजू के दूध दबा कर मेरी रानी जब तुम सब जानती हो तो मेरे मूह से क्यो सुनना चाहती हो

मंजू- मुझे तुम्हारे मूह से सुनना है नही तो आज मैं इस तगड़े लंड को ऐसे ही अपने हाथो से दबोच-दबोच कर इसका सारा रस निचोड़ दूँगी,

मनोहर- अच्छा बाबा मैं खुद अपने मूह से कहता हू जाओ मेरी प्यारी बहन रुक्मणी को बुला लाओ आज मैं उसकी खूब तबीयत से गंद मारना चाहता हू और तुम अपने हाथो से अपने पति के लंड पर तेल लगा कर अपनी ननद की मोटी गंद मे डालना,

संगीता- हाय भाभी मम्मी और पापा तो आज बुआ की गंद लगता है तबीयत से मारेंगे, पापा का लंड कितना जोरो से तना हुआ है

रोहित- संगीता की गंद मे उंगली डाल कर मसल्ते हुए, मेरी रानी जब कोई भाई अपनी बहन की नंगी गंद को याद करता है ना तो ऐसे ही लंड पूरे ताव मे आ जाता है

संध्या- संगीता की चूत सहलाते हुए और मेरी ननद रानी जब कोई बेटी अपने बाप का ऐसा टॅना हुआ लंड देखती है तो उसकी चूत से ऐसे ही पानी बहने लगता है मुझे लगता है तुम्हारा दिल कर रहा होगा कि तुम अभी जाकर पापा के मोटे लंड पर अपनी चूत फैला कर बैठ जाओ,

संगीता- अरे भाभी मन तो आपका भी यही कर रहा है ना

तभी रोहित ने दोनो को चुप रहने का इशारा करते हुए सामने देखने को कहा उन दोनो जैसे ही सामने देखा दरवाजे से रुक्मणी अंदर आती है और रुक्मणी को देख कर मंजू कहती है

मंजू- लो आप तो यू ही मरे जा रहे थे अपनी बहन के लिए वो खुद ही हाजिर हो गई

रुक्मणी- क्या बात है भाभी क्या बाते चल रही है,

मंजू- अरे कुछ नही आ तू मेरे पास बैठ जा और फिर एक साइड मे रुक्मणी जाकर बैठ जाती है,

मनोहर का लंड अपनी लूँगी मे उठा हुआ था और रुक्मणी की नज़र अपने भैया के मस्त औजार पर टिकी हुई थी, मंजू यह बात भली भाती जानती थी उसे बस शुरू करने की देरी थी,

मंजू- अरे रुक्मणी तेरे भैया नाराज़ है कहते है तुम मेरी बात नही मनती हो

रुक्मणी- पर आपने भैया की कोन सी बात नही मानी

मनु- अरे वही तो, ये मुझसे कह रहे है कि जो पेंटी तुम खरीद कर लाई हो उसे एक बार रुक्मणी को पहना कर दिखाओ,

रुक्मणी- का चेहरा लाल हो चुका था और उसने कहा भाभी क्यो आप मज़ाक करती हो

मनोहर- खड़ा होकर नही रुक्मणी, मंजू ठीक कह रही है, मैं देखना चाहता हू वह पेंटी तुम पर कैसे फिट बैठती है, जाओ और अभी उस पेंटी को पहन कर आओ, तुम जानती हो ना बचपन मे भी जब तुम हमारा कहना नही मानती थी तो हम तुम्हे क्या सज़ा देते थे,

रुक्मणी- भैया ऐसी सज़ा ना देना तुम बहुत ज़ोर से मारने लगते हो,

मंजू - हाँ मैं भी जानती हू तेरे भैया तुझे बेड पर उल्टा लेटा कर तेरे चूतादो पर थप्पड़ मार -मार कर लाल कर देते है, अब बोलो तुम्हे अपने इन भारी भरकम चूतादो पर अपने भैया के थप्पड़ थाने है या ब्रा और पेंटी पहन कर यहाँ आना है,

रुक्मणी- शरमाते हुए, भैया वह ब्रा और पेंटी तो मैने अभी पहन रखी है

मनोहर का लंड उसकी बात सुनकर झटका देने लगता है,

मनोहर- तो फिर अपने कपड़े उतार कर दिखाओ तुम कैसी लग रही हो

रुक्मणी अपने भैया की बात सुन कर अपनी भाभी की ओर देखने लगी तब मंजू ने मुस्कुराते हुए रुक्मणी के पिछे जाकर उसके ब्लौज की डोर को पिछे से खोल दिया, डोर के खुलते ही उसके तने हुए चुचो ने बड़ा सा आकर ले लिया और मस्त फैल गये, मंजू ने बुआ के दूध को अपने हाथो मे भर कर दबाते हुए कहा

मंजू - क्यो ननद रानी तुम तो कह रही थी कि तुमने ब्रा पहन रखी है तो फिर यह क्या है

रुक्मणी- शरमाते हुए भाभी ब्रा छ्होटी पड़ गई पेंटी तो मैं जबरन फसा कर आई हू मेरी मोटी गंद तो उसमे भी नही समा पा रही है और मेरी चूत की दोनो फांके एक-एक तरफ से बाहर निकली हुई है और पेंटी बीच मे फसि हुई है,

उसका इतना कहना था कि मंजू आगे आकर उसका नाडा खिच देती है और रुक्मणी सिवाय एक छ्होटी सी पेंटी पहने अपना मस्त हुस्न दिखला कर रोहित और उसके बाप दोनो के लंड को तडपा रही थी,

संध्या ऐसे क्षणो के लिए हमेशा तैयार रहती है और वह रोहित के लंड को पकड़ कर मसल्ने लगती है रोहित भी अपने आगे संगीता को करके उसके मोटे-मोटे बोबो को कस-कस कर मसल्ने लगता है, कभी-कभी रोहित अपनी बहन संध्या की ठोस चुचियो को इस कदर कस कर दबा देता है कि संगीता की चूत से पानी बहने लगता है,

उधर जब रोहित इन दोनो रंडियो से अपना ध्यान हटा कर जब सामने देखता है तब संध्या और संगीता दोनो रोहित से कस कर चिपक जाती है, सामने मंजू नई ब्रा और पॅंटी मे खड़ी थी उसकी गुदाज जंघे भारी चूतड़ देख कर रोहित का लंड झटके मारने लगा, रोहित देख रहा था कि कैसे उसकी मम्मी की पॅंटी का वह भाग फूला हुआ था जहाँ चूत होती है, संध्या ने रोहित का लंड पकड़ लिया और उसको सहलाते हुए कहने लगी, रोहित क्या दिल कर रहा है, क्या मम्मी अच्छी लग रही है,

रोहित- मेरी रानी देखो तो सही मेरी मम्मी का फिगुर कितना मस्त है इतनी उमर मे भी उनकी गंद और उनकी मोटी जाँघो का भराव देखो, इतनी मस्त होगी किसी की मम्मी,

संध्या- रोहित के कान मे अपना मूह लगा कर कहते हुए, मेरे राजा तुमसे ज़्यादा मस्त फिगुर तो मेरी मम्मी का है, तुमने अगर उसे नंगी देखा होता तो ऐसी बात नही करते,

रोहित- क्या सचमुच तुम्हारी मम्मी का जिस्म मेरी मम्मी के जिस्म से ज़्यादा मस्त है,

संध्या- मुस्कुराते हुए, नही तो क्या मैं मज़ाक कर रही हू,

संध्या रोहित के करीब आकर उसके गालो को चूमती हुई उसके लंड को कस कर दबा लेती है और उसके कान मे कहती है रोहित मेरी मम्मी को चोदोगे,

रोहित कस के संध्या के दूध को दबा कर उसके होंठो को चूम लेता है

रोहित का लंड संध्या की बाते और सामने का नज़ारा देख कर पूरी तरह गरम हो चुका था,

मनोहर- मंजू ज़रा रुक्मणी को पीछे तो घूमाओ मैं देखना चाहता हू कि इसकी पेंटी ने इसकी गंद पूरी धक रखी है या उसके चूतड़ बाहर ही नज़र आ रहे है

मम्मी ने झट से बुआ के नंगे उठे हुए पेट पर हाथ फेरते हुए अपने पति मनोहर की तरफ देखा और पुछा, क्यो जी अगर तुम्हारी मा भी रुक्मणी जैसी गदराई होती तो उसकी गंद भी तुम ऐसे ही मारने के लिए तड़प्ते,

पापा अपने लंड को मसल्ते हुए मम्मी की पेंटी मे फूली उनकी चूत को अपने हाथो मे भर कर मसल्ते हुए कहते है मेरी रानी अगर मेरी मा तेरे जैसी या रुक्मणी जैसी माल होती तो मैं उसको नंगी करके तबीयत से उसकी मस्त गंद मारता और तू भी ऐसी नंगी मत घुमा कर नही तो तेरा बेटा रोहित किसी दिन तेरी गंद मे अपना लंड ज़रूर गढ़ा देगा,

संगीता- क्या बात है भैया पापा तो आपके लिए अभी से मम्मी की गंद को सहला रहे है, मम्मी पर तो तुम्हारा खूब चढ़ने का मन हो रहा होगा ना,

संध्या- अरे ननद रानी मेरा रोहित तो अपनी मम्मी मंजू और अपनी बहन संगीता को एक साथ पूरी नंगी करके चोदने के फिराक मे है, और देखना जब रोहित मम्मी की मस्त गंद चोदेगा तब तेरी मम्मी मस्त घोड़ी की तरह अपनी गंद उठा-उठा कर मरवाएगी,

क्रमशः......................
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11-05-2017, 12:16 PM,
#14
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मस्त घोड़ियाँ--7

गतान्क से आगे........................

रुक्मणी- अरे भैया तुम नही जानते रोहित तो वैसे भी अपनी मम्मी की गंद जहाँ भी देख लेता है उसके पिछे अपना लंड लिए घूमने लगता है, वह बहुत छुप-छुप कर अपनी मम्मी की मोटी गंद को देखता रहता है लगता है बेटा अपनी मा की मोटी गंद का दीवाना हो गया है,

पापा- मम्मी को झुका कर उनकी पेंटी को खींच कर उसके पूरे गोरे-गोरे चूतादो को पूरा नंगा करके एक जोरदार थप्पड़ मम्मी की गोरी गंद मे मारते है और रोहित

अपनी मम्मी की भारी गंद पर पड़ने वाले थप्पड़ से मस्त हो जाता है,

पापा- क्यो री रंडी मेरे बेटे को तड़पाती है कल से तू उसे मेरे सामने ही पूरा प्यार देगी, और फिर पापा एक थप्पड़ और मम्मी की गोरी गंद पर मार कर उनकी मस्त गंद को लाल करते हुए बोल अपने बेटे को उसके बाप के सामने प्यार करेगी या नही,

मम्मी- कराहते हुए हाँ मेरे स्वामी कल से मैं अपने बेटे को अपनी गोद मे बैठा कर भरपूर प्यार करूँगी

मनोहर- मम्मी की मोटी जाँघो को पकड़ कर तीन चार थप्पड़ ज़ोर-ज़ोर से मारते हुए, कुतिया तू उसे अपनी गोद मे नही बैठाएगी बल्कि तू उसकी गोद मे बैठेगी,

मम्मी- पर मेरे स्वामी क्या रोहित अपनी मम्मी को अपनी गोद मे चढ़ा लेगा

पापा- अरे रंडी वह तो तुझे अपने लंड पर भी बैठा लेगा आख़िर बेटा किसका है, और फिर मनोहर बुआ की ओर देख कर, तू छीनाल वहाँ क्यो खड़ी है चल अपनी गंद उठा कर इस बेड पर झुक जा आज मैं तेरी भी तबीयत से गंद मारता हू,

संध्या- रोहित देख रहे हो पापा का लंड बुआ और मम्मी की गुदाज गंद देख कर कैसे मस्त तना हुआ है,

रोहित- संगीता और संध्या की चूत मे उंगली डाल कर कस कर दबाता हुआ, मेरी दोनो रंडिया पापा के लंड के लिए बिल्कुल मरी जा रही है, पापा का लंड जब तुम दोनो अपनी चूत मे लोगि तो ऐसा बड़ा सा छल्ला बन जाएगा तुम्हारी चूत मे की तुम दोनो पानी-पानी हो जाओगी,

संगीता- हस्ते हुए क्यो भाभी जब भैया मम्मी या बुआ जैसी गदराई घोड़ियो से पूरे नंगे होकर चिपकेगे तब उनका तो मूत ही निकल जाएगा, और फिर संगीता रोहित के लंड को पकड़ कर मसल्ते हुए

देखो भाभी भैया का लंड अपनी मम्मी की मोटी गंद और उठी हुई चूत देख कर कैसे तना हुआ है और फिर संगीता अपने भैया के लंड को अपने हाथो से पकड़ कर पिछे से अपनी चूत मे भिड़ा लेती है और रोहित जब देखता है कि उसके पापा उसकी मम्मी और बुआ दोनो को बेड पर घोड़ी बना कर झुका चुके है और मम्मी की गुदा को अपनी उंगलियो से सहलाते हुए अपनी जीभ निकाल कर बुआ के भारी चूतादो की खाई को चाटते हुए उसकी चूत की फांको को अपनी जीभ से दबोच लेते है और बुआ आह भैया कह कर सिसकी लेती है तब रोहित अपने लंड का एक तगड़ा धक्का अपनी बहन संगीता की चूत मे मार देता है,

उधर मनोहर पूरी तरह ताव मे आ चुका था और वह कभी अपनी बहन रुक्मणी की गंद और चूत की फांके फैला कर चाटने लगता है कभी अपनी बीबी मंजू की चूत को सूंघने लगता है बीच-बीच मे पापा जब मम्मी और बुआ की गंद मे थप्पड़ मारते है तो पूरे कमरे मे मस्त आवाज़ गुजती है और रोहित संध्या की गंद को दबा-दबा कर सहलाते हुए अपनी बहन संगीता की चूत को पिछे से ठोकने लगता है,

संगीता चुद्ते हुए पूरी मस्त हो रही थी और रोहित अपने मूह से उसके गालो को चूमते हुए अपने लंड को पेले जा रहा था और संध्या ने संगीता के बोबो को अपने हाथ मे पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया था रोहित संगीता को चोद्ते हुए उसके कान उसके गालो और उसके होंठो को चूस रहा था और संध्या की मोटी गंद मे अपनी उंगली पेल रहा था,

संगीता आह भैया तुम कितना अच्छा चोद्ते हो मुझसे थोड़ी गंदी बाते भी करो ना मुझे बहुत मज़ा आता है, भाभी बोलो ना भैया को कि मेरी चूत मारते हुए मुझसे खूब गंदी बाते करे,

रोहित- किसके बारे मे सुनना चाहती है मेरी रानी बहना

संगीता- भैया मुझे तो अपनी मम्मी सबसे बड़ी रंडी नज़र आती है उसी की बात करो ना

संध्या- संगीता तू ही कुछ बोल ना अपनी मम्मी के बारे मे फिर देखना तेरे मूह से अपनी मम्मी की बाते सुन कर तेरे भैया कितना मस्त चोद्ते है तुझे, मुझे तो जब भी तेरे भैया का लंड पूरी तबीयत से लेना होता है मैं उनसे उनकी रंडी मम्मी की बाते शुरू कर देती हू, और फिर क्या तेरे भैया कई बार तो मुझे अपनी मम्मी बना कर ही चोद्ते है, संगीता ठीक है भाभी मैं मम्मी की बात करती हू फिर आप मुझसे पापा की बाते करेगी

संध्या- संगीता की मोटी चुचियो को दबाते हुए, मेरी ननद रानी तू फिकर क्यो करती है अबकी बार जब हम दोनो पापा के सामने नंगी जाएगी तो मैं खुद पापा से कह दूँगी कि पापा अपनी बेटी संगीता को अपने इस मोटे लंड से खूब रगड़-रगड़ कर चोदो,

संगीता- भाभी मम्मी भी पापा का लंड खूब रगड़-रगड़ कर लेती है ना

संध्या- हाँ संगीता तेरी मम्मी बड़े मस्त-मस्त लन्द ले चुकी होगी,

संगीता - आह ओह भैया ओर ज़ोर से, भाभी मम्मी 45 साल के आस पास होगी ना

संध्या- हाँ लगभग, और तू नही जानती संगीता जब औरते इस उमर मे आती है तो उन्हे सबसे प्यारा अपने बेटे का लंड ही लगता है, तू देखना संगीता अपने पति के लिए उसकी मम्मी की गंद मे खुद अपने हाथो से फैलवँगी और फिर उनका प्यारा बेटा अपनी मम्मी की मोटी गंद मे मेरे सामने ही अपना लॅंड डालेगे,

पापा ने मम्मी और बुआ की चूत और गंद का बड़ा सा छेद चाट-चाट कर पूरा लाल कर दिया था, मम्मी और बुआ दोनो मस्ती मे झुकी हुई अपने चुतडो को हिला रही थी उनके भारी चूतड़ हमारे इतने करीब नज़र आ रहे थे कि रोहित का दिल कर रहा था कि अभी अपना मूह अपनी बुआ और मम्मी की फूली हुई चूत की फांको मे डाल दू और उनके नंगे मोटे-मोटे दूध को खूब सहलाऊ और दबौउ,

पापा बेड पर पेर झूला कर बैठ गये और मम्मी और बुआ दोनो सीधी होकर उनके लंड को वही झुक कर चाटने लगी, एक बार बुआ पापा के लन्द के टोपे को अपने मूह से पीती और दूसरी बार मम्मी पापा के लंड के टोपे को अपने मूह से भर कर पीने लगती, कभी मम्मी उनके टोपे को चाट्ती और कभी बुआ,

पापा अपना हाथ लंबा करके दोनो की मस्त चिकनी भोसदियो को अपनी उंगली से खुरेद-खुरेद कर सहला रहे थे और बीच-बीच मे दोनो रंडियो के मोटे-मोटे दूध को दबा रहे थे,

तभी मम्मी और बुआ कुतिया की तरह अपनी जीभ निकाल कर पापा के लंड के टोपे को चूसने के लिए लड़ने लगी,

कभी बुआ अपनी जीभ से चाट लेती और कभी मम्मी अपनी जीभ से उनका लंड चाटने लगती तभी बुआ और मम्मी की जीभ एक बार मिल गई और फिर क्या था बुआ ने अपना मूह खोल कर मम्मी की जीभ अपने मूह मे भर कर चूसने लगी, तभी मम्मी ने बुआ की एक चुचि को कस कर दबाते हुए बुआ की जीभ को अपने मूह मे भर लिया,

पापा दोनो मदरजात रंडियो की मस्ती देख कर मस्त होने लगे और हम सब भी उस नज़ारे को बड़ी दिलचस्पी से देख रहे थे,

पापा उठ कर एक तरफ जाकर कुर्सी पर बैठ गये और अपने लंड को मसल्ने लगे और मम्मी और बुआ दोनो रंडियो के भारी भरकम जिस्म पूरे बाद पर मस्ताने लगे दोनो ने एक दूसरे को पागलो की तरह चूसना शुरू कर दिया और दोनो बाद पर लेट कर गुत्थम गुत्थ हो गई, कभी मम्मी अपनी मोटी गंद उठा कर बुआ के उपर चढ़ जाती और उनकी चुचिया दबाते हुए उनके होंठ चूसने लगती और कभी बुआ मम्मी के उपर चढ़ कर उनकी गंद को अपनी चूत से दबाते हुए उसके होंठो को पीने लगती,

तभी मम्मी बुआ को बॅड पर चित लेता कर उसकी दोनो मोटी और गुदाज जाँघो को उपर तक उठा कर मम्मी अपने घुटनो पर झुक कर अपने भारी चूतड़ उठा कर बुआ की रसीली फूली हुई बुर को खूब फैला कर चाटने लगती है,

मम्मी की उठी हुई गंद को देख कर संगीता आह भैया करती हुई कहती है, भैया देखो मम्मी का मस्त भोसड़ा कितना फूला हुआ नज़र आ रहा है और उनकी चूत की फांके कैसी फैल कर अपना गुलाबी रस से भीगा छेद दिखा रही है,

रोहित संगीता की चूत को तबीयत से ठोकने लगता है उधर पापा जाकर मम्मी की मोटी गंद को फैला कर अपनी जीभ उनकी चूत के छेद मे डाल देते है और मम्मी के गदराए चुतडो को अपने हाथो से कस-कस कर दबाते हुए उनकी रसीली चूत के छेद को चूसने लगते है,

अपनी मम्मी की मोटी गंद को इस तरह चाटते देख रोहित अपनी बहन की चूत को खूब कस-कस कर ठोकने लगता है और तभी पापा अपने लंड को पकड़ कर पिछे से मम्मी की मस्त चूत मे एक ही झटके मे पेल देते है,

मम्मी सीसियाते हुए अपने पूरे मूह मे बुआ की रसीली चूत को भर कर चाटने लगती है,

पापा मम्मी की गंद दबा-दबा कर खूब कस-कस कर उनकी चूत मार रहे थे और पूरे कमरे मे ठप-ठप की आवाज़ गूँज रही थी, इधर रोहित ने संगीता की चूत मे एक करारा धक्का अपनी मम्मी की चूत देखते हुए मार दिया और उसका लंड उसकी बहन के गर्भाशय से टकरा गया और संगीता की चूत से ढेर सारा पानी बहता हुआ उसकी गुदाज मोटी जाँघो तक पहुच गया,

रोहित सतसट अपनी बहन को चोदे जा रहा था तभी संगीता ने अपने भैया का लंड पकड़ कर निकाल लिया और उसे बैठ कर चूसने लगी, संध्या भी नीचे बैठ कर संगीता की चूत मे अपनी दो उंगलिया डालने लगी तब संगीता ने अपने भैया का लंड पकड़ कर अपनी भाभी को झुका कर उसकी फूली चूत मे पेल दिया और रोहित अब अपनी मस्त बीबी की फैली हुई गंद को दबोच-दबोच कर उसकी चूत कूटने लगा,

इधर मनोहर अपने तगड़े लंड से मंजू की चूत मार-मार कर जब लाल कर देता है तब मंजू सीधे रुक्मणी के पेट के उपर लेट जाती है और अपनी चूत रुक्मणी की चूत से रगड़ाती हुई ढेर सारा पानी छ्चोड़ने लगती है मनोहर का लंड पूरा चिकना हो कर विकराल नज़र आने लगा था जिसे देख कर संध्या अपनी गंद के तगड़े झटके रोहित के लंड पर मारने लग जाती है, तभी मनोहर अपना लंड मंजू की चूत से बाहर निकाल कर नीचे नज़र आ रही रुक्मणी की मस्त भोसड़ी मे पेल देता है

और रुक्मणी अपनी भाभी मंजू के बोबे दबोचते हुए हाय भैया मर गई रे कितना कड़ा लंड है तुम्हारा, मनोहर मंजू की गंद पर लेट कर अपनी बहन रुक्मणी की चूत मे गहरे धक्के मारने लगता है, इधर संध्या थापा-ठप अपनी गंद अपने पति के लंड पर मार रही थी उधर मनोहर अपने मोटे डंडे से आज अपनी बहन रुक्मणी की गुदाज चूत चोद रहे थे,

तभी पापा उठे और उन्होने मम्मी को हाथ पकड़ कर उठा दिया और फिर बुआ को बेड पर घोड़ी बना दिया बुआ की 42 साइज़ की भारी गंद पूरी खुल कर हमारे सामने आ गई अब पापा ने मम्मी की ओर इशारा किया और मम्मी अलमारी से तेल निकाल कर ले आई पापा ने अपने हाथ मे खूब सारा तेल निकाल कर बुआ की चूत से लेकर गंद तक मलना चालू कर दिया उधर मम्मी ने अपने हाथ मे तेल निकाल कर पापा के पूरे लंड और उनके अंदको मे लगाने लगी,

जब बुआ की गंद पूरी तेल मे तर हो गई तब मम्मी ने पापा के लॅंड को पकड़ कर बुआ की गंद के च्छेद से लगाने लगे, बुआ कीगंद थोड़ी उँची थी तब पापा ने बुआ की गंद मे कस कर थप्पड़ मारा और बुआ ने अपनी गंद हिलाते हुए थोड़ा झुका लिया अब मम्मी ने पापा के लंड को बुआ की गुदा को फैला कर उसमे सेट कर दिया और नीचे झुक कर अपने दोनो हाथो से बुआ की भारी गुदाज जाँघो को सहलाते हुए पापा की ओर मुस्कुराकर इशारा किया और पापा ने एक करारा धक्का बुआ की कसी हुई गंद मे मार दिया,

रुक्मणी- ओह भैया मर गई भैया निकाल लो बहुत मोटा है भैया आह मे मर जाउन्गि, तभी मम्मी बोली चुप कर कुतिया इतनी मोटी गंद को देख कर तो तेरा बेटा भी यहाँ होता तो तेरी गंद ठोके बिना ना रह पाता, फिर अब तो तेरी गंद को तेरे अपने भैया चोद रहे है,

मंजू- मारो मनोहर अपनी बहन की गंद खूब कस-कस कर मारो रंडी की गंद आज फाड़ दो,

बुआ- अरे मेरी रंडी भाभी तू चिंता मत कर तेरी मोटी गंद को तेरे बेटे रोहित से ना चुदवाया तो कहना आह आह ओह भैया आह मर गई रे,

पापा लगातार बुआ की गंद मे अपने लंड को जड़ तक ठोक रहे थे वह बिल्कुल भी रहम नही कर रहे थे और उनके भारी गोटे बुआ की फूली हुई चूत पर ठोकर मार रहे थे, पापा ने अपनी स्पीड बहुत तेज कर दी और सतसट बुआ की गंद को ठोकने लगे,

बुआ हाय भैया हाय भैया कहती हुई अपने चूतड़ मटका रही थी और पापा उनकी गंद मे अपना लंड जड़ तक ठोक रहे थे,

संध्या- हाय रोहित बहुत मज़ा आ रहा है ऐसा लग रहा है पापा मेरी ही गंद मार रहे है, और चोदो रोहित अपनी रंडी बीबी को और चोदो, तुम बहुत मज़ा दे रहे हो रोहित मैं भी तुम्हे खूब मज़ा दूँगी, आज से मैं तुम्हे अपनी मम्मी की भी चूत और गंद मारने का पर्मिट तुम्हे देती हू बोलो रोहित अपनी बीबी की मम्मी को चोदोगे, बोलो रोहित

रोहित- संध्या की गंद को मसल्ते हुए हाँ मेरी रानी मैं तुम्हे और तुम्हारी मम्मी दोनो को पूरी नंगी करके खूब कस-कस कर चोदुन्गा, पर संध्या जब मैं तुम्हारी मम्मी को चोदुन्गा तब तुम्हारे पापा को ऐतराज हुआ तो फिर,

संध्या- अरे नही मेरे राजा जब तुम मेरी मम्मी को पूरी नंगी करके चोदोगे ना तब मैं अपने पपाजी के मोटे लंड पर बैठ जाउन्गि और फिर मेरे पापा तुम्हारी बीबी को चोदेन्गे और तुम उनकी बीबी को चोद लेना.

क्रमशः......................
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Reply
11-05-2017, 12:16 PM,
#15
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मस्त घोड़ियाँ--8

गतान्क से आगे........................

संगीता- अपनी चूत मसल्ते हुए, भाभी आप दोनो की बातो से मेरी चूत बहुत पानी छ्चोड़ रही है, भैया एक बार मुझे भी अपनी मम्मी समझ कर चोदोगे,

रोहित- अपनी बहन संगीता के ठोस दूध को अपने मूह मे भर कर चूसने लगता है और संध्या कहती है ले संगीता तेरे भैया तुझे अपनी मम्मी समझ कर तेरे मस्त चुचो को पी रहे है, संगीता अपने दूध को अपने हाथो से दबा-दबा कर अपने भैया के मूह मे डालती हुई कहती है ले बेटा रोहित अपनी मम्मी के दूध पी ले फिर तेरी मम्मी तुझे अपनी चूत खोल कर भी पिलाएगी,

दोनो ही कमरो मे चुदाई का मस्त महॉल था और औरत और मर्द के जनाना अंगो से उठती गंध ने पूरे महॉल को नशिला कर दिया था, पापा अपने मोटे लंड को अपनी बहन की गंद मे दल-दल कर उसे मस्त कर देते है बुआ ज़ोर-ज़ोर से अपनी गंद पीछे की ओर मारती हुई खूब सीसीयाने लगती है, तभी बुआ मम्मी की जाँघो को पकड़ कर अपने मूह की ओर खिच लेती है और मम्मी की पाव रोटी की तरह फुल्ली चूत को चाटते हुए अपने भैया का लंड अपनी गंद मे गहराई तक लेने लगती है, इधर संध्या भी संगीता की चूत मे दो उंगलिया डाल कर हिलाने लगती है,

तभी रोहित एक करारा धक्का संध्या की चूत मे मार देता है और संध्या पापा के लंड को देखती हुई ओह पापा कह कर झड़ने लगती है उधर बुआ की गंद मे जब पापा एक तगड़ा झटका जड़ तक मार देते है तो बुआ मस्त होकर मम्मी की चूत के छेद मे अपनी जीभ डाल देती है, मम्मी अपनी चूत का पानी बुआ को चटाते हुए झाड़ जाती है और बुआ पापा के लंड से निकले पानी को अपनी मोटी गंद मे पूरा निचोड़ लेती है,

संध्या और संगीता रोहित के लंड का पानी एक साथ चाटने लगती है और चाट-चाट कर रोहित के लंड को पूरा चमका देती है,

उस चुदाई के बाद पापा बुआ और मम्मी को लेकर बॅड पर लेट कर दोनो रंडियो को अपनी बाँहो से चिपका कर लेट जाते है और इधर तीनो थक जाने के कारण बॅड पर जाकर चिपक कर लेट जाते है, रोहित अपनी बहन और बीबी को चूमता रहता है और संध्या और संगीता बारी-बारी से रोहित के लंड और गोटू से खेलती रहती है,,

सुबह-सुबह मनोहर अपने ऑफीस जा चुका था और रोहित और संगीता और उसकी मम्मी मंजू बैठक रूम मे

बैठक कर चाइ पी रही थी, और दूसरी और बुआ जाकर संध्या के रूम मे संध्या से बाते करने लगी और संध्या

अपने रूम की सफाई करती हुई बुआ से बाते कर रही थी,

बुआ- बड़े गौर से संध्या के उठे हुए चुतडो को देख कर बोली, बहू रानी जब तुम यहाँ आई थी तब एक दुबली

पतली और लंबी सी लोंड़िया लगती थी और अब तुमने अपने इन भारी चुतडो को कभी गौर से देखा है कितने फैल

गये है, ल्गता है रोहित दिन भर तुम्हारे चुतडो मे ही अपना मूह घुसाए रहता है,

संध्या- मुस्कुराते हुए, बुआ जी मेरे चूतड़ आपकी मोटी और गुदाज गंद से तो छ्होटे ही है,पर आप कभी नही

बताती कि आपकी गंद इतनी चौड़ी कैसे हुई है

बुआ- बहू मैं तो खाते पीते घर की हू इसलिए मेरी गंद बहुत मोटी हो गई है,

संध्या- नही बुआ जी खिलाई पिलाई तो हमारे पापा ने भी हमारी खूब अच्छे ढंग से की है पर हमारे चूतड़

तो इतने नही बढ़े,

बुआ- बेटी कुछ औरतो पर उनके बाप की खिलाई पिलाई का असर नही होता है अब देखना जब तुम अपने ससुर का माल

खओगि तब देखना तुम्हारे चुतडो का साइज़ मेरे जैसा हो जाएगा, पहले तेरी सास मंजू की गंद भी इतनी मोटी नही

थी फिर भैया ने जब उन्हे अपना माल खिलाया अब तुम खुद ही देख रही हो की तुम्हारी सास की गंद कितनी गुदाज और

ठोकने लायक हो रही है,

बुआ- अच्छा बहू तेरे पापा तुझे बहुत प्यार करते है क्या,

संध्या- मुस्कुराते हुए, बुआ मैं तो आज भी जब पापा के पास जाती हू तो वह मुझे अपनी गोद मे बैठा कर

मुझे खूब प्यार करते है,

बुआ- हाय राम तू इतनी बड़ी घोड़ी है उसके बाद भी तेरे पापा तुझे अपनी गोद मे चढ़ा लेते है,

संध्या- हस्ते हुए क्यो मैं तो फिर भी छ्होटी हू आप तो 40 पार कर रही है और आज भी अपने भारी चुतडो के

साथ अपने भैया की गोद मे बैठ जाती हो,

बुआ- सकपकाते हुए तूने कब देख लिया मुझे भैया की गोद मे बैठे हुए,

संध्या- मुस्कुराते हुए मैने तो वह भी देखा था जो आपने भैया के पास बैठ कर अपने हाथ मे पकड़

रखा था और उसे बड़े प्यार से सहला रही थी,

बुआ- चुप कर रंडी तूने कैसे देख लिया मुझे तो यकीन नही हो रहा है,

संध्या- बुआ इसमे तुम्हारी कोई ग़लती नही है तुम्हारे चूतड़ है ही इतने भारी की कोई भी देखे उसका लंड खड़ा

हो जाए, यहा तक कि रोहित तो आपके बेटे जैसा है ना

बुआ- हाँ वह मेरा बेटा ही है

संध्या- आपका रोहित भी आपके भारी चुतडो को देख-देख कर बहुत मस्त हो जाता है,

बुआ- मूह फाडे हुए क्या, क्या रोहित ने मेरे बारे मे तुझसे कुछ कहा है

संध्या- बुआ वह तो आपको चोदने के लिए तड़प रहा है, कहता है एक बार बुआ को पूरी नंगी करके अपने सीने से

चिपका ले तो उसका ख्वाब पूरा हो जाए,

बुआ- मंद-मंद मुस्कुराते हुए चल झूठी कही की, मुझे बुध्धु बना रही है,

संध्या- आप की कसम बुआ मैं झूठ नही बोल रही हू और उनका लंड भी पापा के लंड के जैसा ही दिखता है बिल्कुल

टू कॉपी नज़र आता है, कल रात को ही जब वह मुझे चोद रहे थे तो जानती हो उनके मूह से क्या शब्द निकल रहे

थे, हाय बुआ कितनी टाइट गंद है तुम्हारी कितनी फूली चूत है तुम्हारी, जब मैने कहा रोहित मैं संध्या हू तब

उन्होने कहा, मेरी रानी आज तुम मुझे बुआ की तरह नज़र आ रही हो कुछ देर के लिए यह समझ लो कि तुम मेरी

बुआ हो,

रुक्मणी की चूत संध्या की बात सुन कर गीली हो जाती है और वह अपनी चुस्त सलवार पहने पिछे की ओर दीवार से

टिक कर अपने दोनो पेरो के घुटनो को मोड हुए बैठी रहती है उसकी जाँघो की जड़ो मे जहाँ उसकी फूली हुई चूत

का उभार उसकी सलवार से साफ नज़र आ रहा था वह हिस्सा पूरा गीला हो चुका था और संध्या की नज़र जैसे ही बुआ

की फूली हुई सलवार पर पड़ी तो संध्या ने एक दम से बुआ की बुर को उसकी सलवार के उपर से दबोच लिया,

बुआ- एक दम से अपनी जाँघो को मिलाते हुए, हाय दैया बहू क्या कर रही है पागल हो गई है क्या,

संध्या- बुआ जी आपने सलवार के अंदर पॅंटी नही पहनी है ना,

बुआ- हाँ बहू तभी तो मेरी सलवार वहाँ से गीली हो गई,

संध्या- बुआ की फूली हुई चूत को दबाती हुई बुआ तुम जानती हो रोहित को तुम्हारी उमर की औरतो की फूली हुई चूत

बहुत अच्छी लगती है, और तुम्हारी चूत को देखो यह इतनी गुदाज पाव रोटी की तरह फुल्ली है कि सच बुआ रोहित अगर

इस समय तुम्हारी इस फुल्ली बुर को देख ले तो अपना मोटा लंड एक धक्के मे ही तुम्हारी बच्चेदनि से भिड़ा दे,

संध्या की बातो से बुआ की चूत से और भी पानी आने लगता है, संध्या बुआ की चूत को सहलाते हुए जब अपनी उंगली

उसकी बुर के उपर हल्के से दबाती है तो अचानक बुआ की सलवार की सिलाई वहाँ से उधाड़ जाती है जहाँ पर उसकी मस्त

चूत फूली हुई नज़र आ रही थी,

संध्या बहुत खुराफाती तो थी ही उसने जब देखा कि बुआ की सलवार थोड़ी सी उसकी चूत के यहाँ से फटी है तो

संध्या ने बुआ से चिपकते हुए कहा बुआ तुम्हारी चूत का साइज़ बराबर रोहित के लंड के लायक है और फिर

संध्या धीरे से बुआ की सलवार की सिलाई को और भी उधेड़ देती है, तभी संध्या अपनी एक उंगली बुआ की मस्त बुर के

गुलाबी छेद मे एक दम से पेल देती है और बुआ आह संध्या क्या कर रही है, बुआ संध्या के उंगली डालने से

मस्त हो जाती है और संध्या आराम से बुआ की दोनो जाँघो को फैला कर उसकी सलवार उसकी चूत के पास से अच्छे

से फाड़ कर ऐसी कर देती है की बुआ की पूरी खुली हुई गुलाबी चूत और उसका छेद साफ नज़र आ रहा था,

संध्या बुआ की चूत मे अपनी तीन उंगलिया डाल कर आगे पिच्चे करती हुई बोलो ना बुआ कैसा लग रहा है

बुआ- बहुत अच्छा लग रहा है बेटी आह सी आह

संध्या- बुआ रोहित का मोटा लंड चुसोगी,

बुआ- आह पर कैसे बेटी वह क्या चूसने देगा

संध्या- तुम एक बार हाँ तो कहो बुआ उसे तो तुम्हे चोदना भी पड़ेगा और जब वह तुम्हे नंगी करके चोदेगा

तब देखना तुम्हे पूरी मस्त कर देगा,

बुआ- लेकिन कैसे बेटी

संध्या बुआ की चूत से अपनी उंगली निकाल कर उसे कान मे कुछ समझाती है

बुआ- नही संध्या कही रोहित कुछ ग़लत समझ लेगा तो

संध्या- अरे भाई जब मैं खुद आपके साथ हू तो आप फिकर क्यो कर रही हो उसके बाद संध्या बाहर चली जाती है

और रुक्मणी वही दीवार से पीठ लगाए अपने दोनो पेरो को लंबा करके एक के उपर एक टांग रख कर बैठी रहती

है,

संध्या बाहर जाकर देखती है तो उसकी सास और संगीता कही जाने के लिए तैयार थी संध्या ने पुछा तो मंजू

ने कहा बेटा मेरा भाई बहुत दिनो बाद आ रहा है इसलिए हम उसे स्टेशन लेने जा रहे है तुम लोग खाना खा

लेना हमे थोड़ी देर हो जाएगी,

उनके जाने के बाद संध्या रोहित के पास आकर चलो कमरे मे आज तुम्हे बुआ की चूत

का मज़ा दिल्वाति हू बस

डरना मत और हिम्मत करके आज बुआ को चोदना है मोका बड़ा अच्छा है मैं बाहर का गेट लगा कर आती हू

रोहित अपने रूम मे आकर बुआ के पेरो की तरफ बैठने लगता है और बुआ एक दम से अपने पेर सिकोड कर अपने पेरो

के दोनो घुटने मोड़ लेती है वह जैसे ही घुटने मोड़ती है उसकी फूली हुई चूत एक दम से खुल कर उसकी फटी सलवार

से साफ दिखने लगती है और रोहित अपनी बुआ की मस्तानी चूत को अपने इतने करीब से देख कर एक दम से मस्त हो जाता

है,

बुआ जब रोहित के चेहरे की तरफ देखती है तो वह समझ जाती है कि रोहित ने उसका मस्त भोसड़ा देख लिया है,

बुआ- किसी जनम्जात रंडी की तरह मुस्कुरा कर क्या हुआ रोहित मम्मी कहाँ गई

रोहित- बुआ वो मेरे मामा है ना चंदू वह आ रहे है इसलिए मम्मी उन्ही को लेने गई है

बुआ- मैने सुना है तेरे मामा से तेरी बहुत बनती है,

संध्या- चाइ देते हुए अरे बुआ जी वो क्या है ना रोहित के मामा रोहित से 7 साल बड़े है पर कुछ बाते इन दोनो की

इतनी मिलती है कि यह साथ रहते-रहते दोस्त की तरह बन गये अब इन्हे देखिए ये अपने मामा से अपनी सभी बाते

शेर कर लेते है और इनके मामा भी इन्हे हर बात बता देते है,

बुआ- हस्ते हुए बहू कुछ बाते ऐसी भी होती है जो कोई किसी को नही बताता है,

संध्या- हस्ते हुए बुआ जी हम भी तो नही जानते थे कि आप पापा से इतना प्यार करती है,

बुआ- मुझसे तेरे पापा ही नही तेरा पति भी बहुत प्यार करता है, क्यो रोहित

रोहित- बुआ मेरी तो दो-दो मम्मी है एक मम्मी और दूसरी आप

संध्या- हस्ते हुए, रोहित पापा की भी तो दो-दो बिबिया है,

बुआ-मुस्कुराते हुए तुम दोनो बहुत बदमाश हो अपनी बुआ के मज़े ले रहे हो

संध्या- अरे नही बुआ हम आपके मज़े नही ले रहे है बल्कि हम दोनो तो आपके बच्चे है और आपको पूरा

मज़ा देना चाहते है क्यो रोहित चलो बुआ को तुम अपनी मम्मी समझते हो ना तो उनके पेरो को थोडा दबाओ जैसे

अपनी मम्मी के पेरो को दबाते हो और फिर संध्या भी बुआ की एक टांग पकड़ कर दबाने लगती है,

बुआ- अरे नही बेटा रहने दे

रोहित- अरे तो क्या हुआ बुआ आप मेरी मम्मी समान है तो क्या मैं आपके पैर नही दबा सकता और फिर एक तरफ

संध्या और दूसरी और रोहित बुआ की एक-एक टांग पकड़ कर उसे फोल्ड करके दबाने लगते है,

क्रमशः......................
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11-05-2017, 12:17 PM,
#16
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मस्त घोड़ियाँ--9

गतान्क से आगे........................

रोहित की नज़रे बुआ की

मस्त फूली हुई चूत पर थी जो फटी सलवार से पूरी तरह बाहर आ चुकी थी, संध्या बुआ की मोटी जाँघो को मसल्ते

हुए उसके पैरो को और चौड़ा कर रही थी और बुआ अपनी आँखे बंद किए मंद-मंद मुस्कुरा रही थी,

रोहित ने बुआ की मोटी और गुदाज जाँघो को अपने हाथो मे भर रखा था और बुआ की पाव रोटी की तरह फूली हुई

चूत देख कर सोच रहा था कि उसकी मम्मी मंजू की चूत कैसी होगी, मंजू का नंगा बदन भी पूरा बुआ के

नंगे बदन की तरह ही है तब तो मम्मी की बुर भी इसी तरह फूली हुई होना चाहिए,

अपनी मम्मी की चूत को

इतना करीब से अगर देखना हो जाए तो उसका मज़ा ही कुछ और होता है,

रोहित अपनी बुआ की बुर देख कर अपनी मम्मी की यादो मे खोया हुआ था और संध्या रोहित की स्थिति को भाँप गई

थी और ऐसे मोके पर वह रोहित को और भी उत्तेजित करके अपने पति को ज़्यादा मज़ा दिलाने की कोशिश करती है,

संध्या- बुआ मम्मी तो आप से उमर मे बड़ी है ना पर दिखती वो बिल्कुल आप की उमर की है आप दोनो जब पापा

के साथ खड़ी होती हो तो दोनो उनकी बिबिया लगती हो,

बुआ- अरे बहू तेरी मम्मी मंजू का बदन थोड़ा कसा हुआ है और कुछ नही पर पेट तो उनका मुझसे भी ज़्यादा

बाहर निकला हुआ है,

संध्या- बुआ की जाँघो को उपर तक भिचते हुए, पर बुआ जी लगता तो वही पेट सुंदर है ना, मेरा कहने का

मतलब है कि जब औरत 40 पर करने लगे तो उसका पेट जितना उठ कर उभरेगा वह उतनी ही मस्त नज़र आएगी,

और एक बात और भी है बुआ जिन औरतो का पेट उठा हो और गहरी नाभि पेटिकोट और साडी के बाहर दिख रही हो ऐसी

औरतो के पिछे मर्द बहुत भागते है,

बुआ- अरे बहू मर्दो का क्या है कैसी भी दे दो वह तो मा चुदवा ही लेगे ना,

संध्या-हस्ते हुए बुआ अब गरम हो गई हो तो उतार दो ये सलवार कुर्ता और हो जाओ पूरी नंगी,

बुआ- तेरा मरद बैठा है तेरे सामने तू क्यो नंगी नही हो जाती है,

संध्या- ठीक है तुम कहती हो तो मैं ही नंगी हो जाती हू और फिर संध्या ने अपने एक-एक कपड़े उतारने चालू कर

दिए, बुआ मूह फाडे संध्या की ओर देख रही थी,

और अंत मे संध्या ने अपनी गुलाबी पैंटी को दूसरी ओर मूह करके अपनी गुदाज गंद दिखाते हुए उतार दिया,

रोहित अपनी जगह पर बैठा अपनी मस्तानी बीबी के नंगे बदन को देखते हुए बुआ जी की जाँघो की जड़ो को सहला

रहा था,

बुआ जी का गला सूखने लगा था और उसकी चूत से पानी आना शुरू हो रहा था,

संध्या अपनी चिकनी फूली बुर को दिखाती हुई बुआ के पास आ जाती है और बुआ की जाँघो को चौड़ा करके बुआ की चूत

मे हाथ मारते हुए अरे बुआ जी तुम्हारी तो चूत दिख रही है,

संध्या का इतना कहना था कि रोहित ने बोला कहाँ है चूत और अपना मूह बुआ की चूत से लगा दिया बुआ रोहित का मूह

अपनी धधकति भोसड़ी पर लगने से तड़प उठी और अपने ही हाथो से अपने दोनो मोटे-मोटे दूध को पकड़ कर

मसना चालू कर दिया,

रोहित ने बुआ की चूत को चाटते हुए अपने हाथ से सलवार मे थोड़ी और ताक़त लगा कर बुआ की सलवार को और फाड़

दिया और बुआ की पाव रोटी जैसी चूत और उसकी गहरे भूरे रंग के बड़े से गंद के छेद को बाहर ले आया,

संध्या ने जब पूरे आकार मे बुआ की मस्त चूत को देखा तो उसने अपने हाथो से रुक्मणी की चूत को और फैला

लिया और रोहित की ओर इशारा करते हुए उसे चाटने को कहा,

रोहित ने अपनी जीभ निकाल कर बुआ जी की चूत को चाटना शुरू कर दिया बुआ जी हाय रोहित बेटे क्या कर रहा है,

रोहित- कुछ नही बुआ बस थोड़ा सा रस पी रहा हू

बुआ- बेटा मत पी प्लीज़ मत पी,

संध्या- अरे बुआ पी लेने दो ना मम्मी पिलाएगी और ना तुम पिलाओगे तो बेचारे किसका पिएगे,

बुआ- हाय तो क्या मैं ही बची हू संगीता का पी ले और तेरा तो पीता ही होगा बुआ ने संध्या की ओर देख कर कहा

संध्या- बुआ रोहित ने संगीता की भी पी ली है अब उसका मन तुम्हारी पीने का है,

रोहित - अरे चुप रहो संध्या बुआ ने मुझे मना ही कहाँ किया है और तुम बेकार मे बहस कर रही हो

रोहित- मुस्कुराते हुए बुआ को देख कर, क्यो बुआ नही किया ना मना, और फिर रोहित अपने मूह को बुआ की चूत से

भिड़ा देता है,

संध्या बुआ के मूह के पास उकड़ू बैठी थी और उसकी दो फांको मे बटी मस्त चूत बुआ के मूह के बिल्कुल करीब थी

बुआ अब अपने आप को ना रोक सकी और उसने अपने मूह को संध्या की मस्तानी चूत से लगा दिया,

बुआ की इस हरकत से संध्या थोड़ा चौकी और फिर बुआ को देख कर रोहित को देख मुस्कुराने लगी,

रोहित ने अब अपना लंड बाहर निकाल लिया और उधर बुआ चूत चाटने मे मस्त थी तभी रोहित ने खूब सारा थूक बुआ

की मस्त चूत मे लगाया और अपने लंड के टोपे को बुआ की चूत मे सेट करके उसकी मोटी जाँघो को अपने हाथो मे

थाम लेता है और संध्या की ओर देखता है तो संध्या कहती है रोहित तुम्हारी मम्मी की चूत भी बुआ की चूत

जैसी मस्त फूली हुई है,

रोहित का इतना सुनना था कि उसने एक कस के धक्का बुआ की चूत मे मार दिया और तभी

संध्या ने अपनी पूरी चूत उठा कर बुआ के मूह पर रख दी, बुआ की आवाज़ जो रोहित के धक्के से निकलने वाली थी

वह वही के वही दब कर संध्या की चूत मे समा गई,

संध्या ने बुआ के मूह मे अपनी चूत को अच्छी तरह रगड़ा तब तक रोहित रफ़्तार पकड़ चुका था, बुआ की

मखमली चूत मे रोहित का लंड सतसट अंदर बाहर हो रहा था,

रोहित को तभी अपने पापा की याद आ गई और

उसने बुआ की गोरी गंद मे ज़ोर से थप्पड़ मारते हुए उसकी चूत मे लंड पेलने लगा,

रोहित के थप्पड़ मारने से बुआ की मोटी गंद पूरी लाल नज़र आ रही थी और ऐसी लाल गंद चोदने मे रोहित को बड़ा

मज़ा आ रहा था रोहित जितना तेज अपने लंड का धक्का बुआ की चूत मे मारता बुआ भी उतनी तेज़ी से संध्या बहू की

चूत को अपने मूह मे भर लेती थी,

अब रोहित की स्पीड पूरे जोश मे आ चुकी थी और वह बुआ को सतसट चोद रहा था बुआ ज़ोर-ज़ोर से कहने लगी हाय

बेटे चोद बेटे चोद अपनी मम्मी की चूत खूब कस के मार बेटे, उधर बुआ की चूत मे ठोकर पड़ रहे थे इधर

संध्या ने बुआ के बड़े-बड़े दूध को मथना चालू कर दिया संध्या कभी बुआ के दूध के निप्पल को काटने

लगती और कभी उसके दूह दबोच कर चूसने लगती थी, तभी रोहित ने बुआ के भारी चूतादो को कस कर भिचते

हुए 8-10 धक्के ऐसे मारे कि बुआ का पानी निकल गया और वह रोहित और संध्या से बुरी तरह चिपक कर हफने

लगी,

रोहित ने अपना लंड बुआ की चूत के अंदर तक फसा रखा था और बुआ उसके लंड को अपनी चूत की गहराई मे

दबोचे हाफ़ रही थी, संध्या धीरे-धीरे बुआ के दूध दबा-दबा कर सहला रही थी,

कुच्छ देर बाद संध्या ने बुआ को उठाते हुए कहा

संध्या- बुआ जी मस्ती आई या और लेना है, आज तो रोहित का लंड ले कर आपकी चूत मस्त हो गई होगी,

बुआ- मुस्कुराते हुए, सच बहू बड़ा मस्त लंड पाया है तूने, अगर तेरी मम्मी मंजू ऐसा लंड ले लेगी तो वह

तो अपने बेटे के लंड की दीवानी बन जाएगी,

तभी कॉल बेल की आवाज़ सुन कर रोहित गेट खोलने जाता है और अपनी मम्मी और बहन के साथ अपने मामा अजय को

देख कर अरे मामा क्या बात है बड़े दिनो बाद आए हो,

अजय- मुस्कुराते हुए, अरे रोहित अब क्या बोलू यार तू तो जानता है मैं काम धंधे के चक्कर मे कभी आ ही

नही पाता हू,

रोहित चलो मामा चाइ पी लो फिर मैं तुम्हे घुमा कर लाता हू और फिर रोहित अपने मामा को चाइ पिलाने के बाद

घुमाने ले कर चला जाता है,

अजय- यार रोहित आज तो दारू चखने का मन हो रहा है

रोहित- तो मामा श्री चखो ना किसने मना किया है, पर मैं तुम्हारी आदत जानता हू तुम्हे दारू के बाद चोदे

बिना मज़ा भी तो नही आता है,

अजय- हाँ यार रोहित जब तक कोई मस्त चूत मारने को नही मिल जाती दारू का मज़ा आधूरा ही रहता है,

रोहित- पर मामा तुम इतने चुदासे हो तो मामी को तो रोज ही चोद्ते होंगे अब कैसी दिखती है मामी

अजय- अरे अब क्या बताऊ दोस्त तेरी मामी बिल्कुल तेरी मम्मी मंजू जैसी है, जैसे उरोज और नितंब तेरी मम्मी

मंजू के है बिल्कुल ऐसे ही,

रोहित- लगता है मामा तुम मेरी मम्मी के बारे मे मुझसे बात करने मे असहज महसूस कर रहे हो तभी तो

उरोज और नितंब जैसे शब्द यूज़ कर रहे हो

अजय- मुस्कुराता हुआ अरे नही रे वो भी मेरी बहन है और तेरी मम्मी है पर

रोहित पर क्या मामा जब तुम मामी की मस्तानी चूत का वर्णन मेरे सामने कई बार कर चुके हो तो फिर मेरी

मम्मी के बारे मे बात करने मे काहे की झिझक

अजय- मुझे लगा तुझे कुच्छ आच्छा ना फील हो इसलिए,

रोहित- खेर क्या मामी पूरी मम्मी जैसी ही गदरा गई है,

अजय- अरे तेरी मामी की मोटी गंद बिल्कुल तेरी मम्मी की तरह ही दिखाई देती है और उसके दूध भी मंजू दीदी की

तरह ही लगते है, और जंघे भी तेरी मम्मी जैसी मोटी और गुदाज है,

अजय- अच्छा रोहित संगीता भी खूब कसी कसाई है अभी जब हम आ रहे थे तो वह हमारे आगे -आगे चल रही

थी तब मैने उसकी जीन्स मे से उसकी मोटी गंद को देखा तो सच मानो मेरा लंड खड़ा हो गया तभी तेरी

मम्मी ने मुझे अपने लंड को अड्जस्ट करते देख लिया और मुझे मुस्कुराकर देखते हुए मेरे गालो को चूम

लिया सच रोहित तेरी मम्मी के होंठ बहुत रसीले है जब हम ऑटो मे बैठे तो एक तरफ मंजू दीदी की मोटी

जंघे और दूसरी तरफ संगीता की जंघे सहलाते हुए मैं तो मस्त हो गया,

रोहित और अजय ने पीना स्टार्ट कर दिया और दोनो नशे मे मस्त हो रहे थे,

रोहित- अच्छा मामा सच बताओ तुमने मम्मी को चोद रखा है ना,

अजय- शरमाते हुए अरे भान्जे अब तुझे क्या बताऊ तेरी मम्मी जब भी मेरे घर आती है मैं उसे पूरी नंगी

करके रात भर चोद्ता हू, सच रोहित तेरी मम्मी बड़ी मस्त माल है रंडी को चोदने मे आदमी मस्त हो जाता है

रोहित- क्या मम्मी बड़ी मस्त तरीके से चुदवाति है

अजय- अरे रोहित जब तेरी मम्मी की चूत मे खुजली होती है तो वह बड़ी मस्त हो जाती है और इतने मस्त तरीके से अपनी

गंद और चूत उठा-उठा कर दिखाती है कि तू देख ले तो रंडी को चोदे बिना नही रह सकता,

तेरी मम्मी को

सबसे ज़्यादा मज़ा अपनी चूत चटाने और अपनी गंद मरवाने मे आता है और सबसे सुंदर तो उसका उठा हुआ

गदराया पेट है, जब तू अपनी मम्मी के नंगे पेट को घूर कर देखेगा तो तुझे उसकी चूत का एहसास अपने आप हो

जाएगा और तेरा लंड खड़ा हो जाएगा,

रोहित- मामा बहुत दिनो से तुमने मम्मी की चूत नही मारी है ना

अजय- हाँ यार लास्ट टाइम जब तेरी मम्मी आई थी तब वह 15 दिन रुकी थी और 15 दिन तक मैं उसे तेरी मामी के साथ

नंगी ही रखता था जब भी मैं काम से आता तो तेरी मम्मी और मामी दोनो नंगी ही घर का कम करती रहती थी

फिर मैं दोनो को एक साथ रात भर छोड़ता था,

अजय-तेरी मम्मी की गंद बहुत हेवी है तू अपनी मम्मी का नंगा पेट और नाभि उसकी गंद दबोच कर एक बार

अपने मूह से चूम ले तो तू पागल हो जाएगा इतनी गरम है तेरी मम्मी,

अजय- क्या तेरा बहुत मन करता है अपनी मम्मी को चोदने का

क्रमशः......................
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11-05-2017, 12:17 PM,
#17
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मस्त घोड़ियाँ--10

गतान्क से आगे........................

रोहित- हाँ मामा मेरा बड़ा दिल करता है उसे चोदने का एक बार मुझसे अपनी चूत

मरवा लेगी तो मस्त हो जाएगी,

अजय- पर एक बात है रोहित अपनी बीबी के साथ अपनी मम्मी या बहन को चोदने मे बड़ा मज़ा आता है तू जब भी

अपनी मम्मी को चोदना अपनी बीबी के साथ ही चोदना

रोहित- पर मामा आज तुम्हारा मन किसे चोदने का कर रहा है

मामा- सच पुंछ भान्जे तो आज तेरी बहन संगीता की चूत मारने का खूब मन कर रहा है जबसे उसकी जीन्स

मे उठी मोटी गंद और उसकी टीशर्ट मे कसे हुए उसके मालदार दूध देखे है तब से बस संगीता की नंगी गंद

ही गंद नज़र आ रही है, वैसे तूने तो अपनी बहन को चोद लिया होगा ना,

रोहित- हाँ मामा मैने संगीता की खूब तबीयत से चुदाई की है उसकी सील मैने हो तोड़ी थी बड़ी टाइट थी साली की चूत

मैं तो संगीता को चोद-चोद के मस्त हो गया था,

अजय- तेरी मम्मी की सील भी बहुत टाइट थी रोहित सच तेरी मम्मी की सील तोड़ने मे पसीना आ गया था

रोहित- फिर तो मामा मम्मी की गंद भी बहुत टाइट होगी

अजय- हाँ तेरी मम्मी की गंद बहुत कसी हुई है और वह हर किसी से अपनी गंद नही मरवाती है कहती है जिसके

साथ चुदवाने मे उसे सबसे ज़्यादा मज़ा आता है उसी से अपनी गंद ठुकवाटी है,

रोहित- मामा आज तुमने मेरे तन बदन मे आग लगा दी है मेरी रंडी मम्मी की गंद और चूत की बात कर-कर के

आज मेरा बड़ा दिल कर रहा है अपनी मम्मी के नंगे बदन से चिपकने का उसका गुदाज पेट इतना उठा हुआ है तो

उसकी चूत कितनी फूली होगी,

चलो मामा अब घर चले मेरा मन अपनी मम्मी की गुदाज भरी हुई जवानी देखने का

बड़ा मन कर रहा है,

रोहित- चलते हुए, मामा तुमने कभी मम्मी की चूत से पेशाब पिया है

अजय- नही भान्जे वह मेरे कहने पर कभी मुतती ही नही है

रोहित- मामा मेरा तो बड़ा दिल करता है अपनी मम्मी को मुतते हुए देखने का और जब वह मुते तो मैं अपना

मूह उसकी चूत से लगा कर उसका सारा पेशाब पी जाउ,

मामा- भान्जे अगर तेरा ऐसा मन करता है तो अपनी मम्मी की चूत को दोनो हाथो से फैला कर अपनी जीभ से

उसकी चूत चूस्ते जाना और कहते जाना मूत रंडी मूत मेरे मूह मे फिर देखना वह तेरे मूह मे ज़रूर मूत देगी

दोनो मामा भान्जे का लंड पूरी तरह तना हुआ था और दोनो अपने घर पहुच जाते है

रात को सभी खाना खा कर बैठक मे बैठे हुए थे एक सोफे पर पापा, बुआ और पापा के दूसरी तरफ संगीता बैठी थी उनके सामने वाले सोफे पर मामा, मम्मी और रोहित बैठे थे, संध्या तभी सबके लिए कॉफी बना कर लाती है और फिर पापा के पीछे जा कर खड़ी हो जाती है, संध्या की कॉफी पीने से पहले यह सब ग्रूप मे बात कर रहे थे और जब कॉफी पीने लगे तो इनकी बाते आपस मे शुरू हो गई,

मंजू- अजय तू भैया संगीता वाले रूम मे सो जाना या तेरा मन हो तो गेस्ट रूम मे रुक जा, अजय- अरे दीदी तुम जहाँ कहोगी मैं तो वहाँ सो जाउन्गा तुम उस सब की फिकर मत करो, फिर मामा ने मम्मी की गुदाज जाँघो पर हाथ रख कर दबाते हुए कहा, दीदी अपने रोहित की तरफ भी ज़रा ध्यान दो अब वह भी बड़ा हो गया है, मंजू- रोहित के गाल खींच कर मुस्कुराती हुई अभी तो मेरा बेटा बच्चा है मुझे तो इसमे कोई भी बडो वाले गुण नही नज़र आए, रोहित का लंड तो वैसे ही अपनी मम्मी के बदन से आती हुई भीनी-भीनी खुश्बू के कारण खड़ा हो गया था पर जब उसकी मम्मी के बोलते समय उसके रसीले होंठो को अपने इतने करीब से देखा तो उसका दिल करने लगा कि अभी अपने होंठ अपनी मम्मी के रसीले होंठो से लगा दे,

रोहित- मम्मी मैं बड़ा हू या छ्होटा लेकिन मुझे हमेशा बडो मे दिलचस्पी रही है,

मामा- अरे दीदी रोहित अब जवान मर्द हो चुका है यह बात संध्या से बेहतर कोन जान सकता है चाहो तो पुंछ कर देख लो संध्या सारी बात आपको बता देगी,

उधर मनोहर अपने एक हाथ को संगीता के कमर मे डाले हुए उसकी चिकनी कमर का मज़ा ले रहा था वही दूसरे हाथ से बुआ की गदराई जाँघो को पकड़ रखा था, मनोहर की निगाहे बुआ के बड़े-बड़े थनो और उसके बड़े से ब्लौज के उपर से उभरे निप्पलो पर,

रोहित ने संध्या की ओर देखा और संध्या ने रूम मे चलने का इशारा किया और रोहित उठ कर अपने रूम मे निकल गया, उसके जाने के कुच्छ देर बाद वहाँ से संध्या भी अपने रूम मे आ गई और रोहित के उपर आकर उसके होंठो को चूमती हुई,

संध्या- जानू थोड़ा दबाओ ना,

रोहित- संध्या के दोनो दूध को अपने हाथो मे भर कर उसके होंठो को चूमता हुआ कस कर दबा देता है और संध्या की चूत से पानी आ जाता है, संध्या अपनी चूत को सहलाती हुई सच रोहित तुम्हारे एक बार चूमने भर से मेरी चूत मे पानी आ जाता है,

रोहित- आ जाता है ना, लेकिन मम्मी को क्या पता

संध्या- रोहित मम्मी ने कुच्छ कहा है क्या

रोहित- हाँ कहती है रोहित तो अभी बच्चा है उसमे मर्दो वाले उन्हे तो कोई गुण नज़र नही आते है,

संध्या-अपनी नाक पर गुस्सा चढ़ाते हुए ऐसा कहा उन्होने, मेरे मर्द को बच्चा कह रही है, रोहित अब ये संध्या तुम्हे तुम्हारी मम्मी की चूत और गंद दोनो खूब कस-कस कर चोदने को दिलवाएगी,

रोहित- खुश होते हुए सच मेरी जान, एक बार बस मुझे मेरी मम्मी की चूत और मोटी गंद मारने को मिल जाए फिर देखना संध्या मैं कैसे अपनी मम्मी की गंद और चूत मार-मार कर फाड़ता हू, रोहित अपना लंड मसल्ते हुए सच संध्या मम्मी की गंद और चूत फाड़ ना दी तो कहना, तब समझ मे आएगा कि मैं बच्चा हू या उनका बाप,

रोहित अपने पेंट की चैन खोले अपने लंड को अपने हाथो से सहलाता हुआ बोला पर संध्या हम कैसे मम्मी को चोदने मे कामयाब होगे,

संध्या रोहित के खड़े लंड को जाकर अपने हाथ से पकड़ लेती है और उसके लंड से अपनी चूत को लगा कर उसके लंड पर चढ़ने की कोशिश करती है और रोहित उसकी मोटी गंद के नीचे हाथ लगा कर उसे अपने लंड पर बैठा लेता है, संध्या के मूह से एक मस्त सिसकी निकल जाती है रोहित का मोटा लंड उसकी पूरी चूत को खोल कर अंदर तक फस चुका था संध्या ने रोहित के कंधो को अपने दोनो हाथो से थमते हुए अपनी चूत को लंड से अड्जस्ट किया और फिर अपने दोनो पेरो को रोहित की कमर से लपेट कर अपने पूरे पेट को रोहित के पेट से चिपका लिया रोहित का पूरा लंड संध्या की चूत मे फिट हो चुका था,

अब रोहित संध्या की गंद के दोनो पाटो को अपने हाथ से पकड़ कर फैलाए हुए उसकी चूत मार रहा था और संध्या उसके होंठो से अपने होंठ चिपकाए चूस रही थी,

फिर रोहित ने संध्या की पूरी गंद को एक ही हाथ से थाम लिया और दूसरे हाथ से संध्या के दूध को कस-कस कर मसालने लगा, कुछ देर बाद रोहित ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और संध्या की चूत मे कस-कस कर 8-10 धक्के मारे और अपना पानी उसकी चूत मे छ्चोड़ दिया, संध्या पूरी तरह रोहित के लंड पर मचल उठी और फिर शांत होकर नीचे उतर आई,

दोनो बिस्तेर पर लेट गये और हफने लगे, कुछ ही देर मे संध्या और रोहित की नींद लग गई,

उधर मामा जी और मम्मी सोफे पर बैठे बैठे कर रहे थे और पापा भी संगीता और बुआ के बीच बैठे हुए थे, तभी संगीता उठ कर अपने मामा के बगल मे बैठ जाती है, संगीता की टीशर्ट से झाँकते उसके नुकीले चुचो की कठोरता को महसूस करके मामा का लंड झटके मारने लगा, तभी मम्मी ने कहा संगीता आज तू अपने मामा जी को अपने बिस्तेर मे सुला लेगी ना,

संगीता- क्यो नही मम्मी मैं तो यही चाह रही थी की आज मैं मामा जी के साथ सोऊ,

मंजू- ले अजय अब ठीक है ना दोनो मामा भांजी आराम से जाकर सो जाओ सुबह मिलते है ओके

मामा और संगीता अपने रूम मे चले गये और इधर मम्मी उठ कर सीधे पापा के बिल्कुल करीब बैठ गई और अब सोना भी है कि रात भर यही बैठे रहना है,

पापा- उठते हुए भाई मैने कब मना किया है चलो और फिर वहाँ से उठ कर अपने रूम मे जाने लगते है,

पापा रूम के अंदर चले जाते है तब मम्मी बुआ को कहती है आ ना रुक्मणी अभी से कहाँ तुझे नींद आ जाएगी,

रुक्मणी ने आज दिन मे ही अजय का मस्त लंड अपनी चूत मे लिया था इसलिए आज उसका कुच्छ खास मन नही था और उसने कहा नही भाभी आज मेरा मन नही है आप लोग बाते करो मैं जाकर सो जाती हू,

मम्मी- हस्ते हुए सच कह रही है या कोई और बात है

बुआ- शरमाते हुए अरे नही भाभी और कोई बात माही है आज वो क्या है ना दिन मे रोहित ने मेरे बदन की बहुत तबीयत से मालिश कर दी थी बस तब से भाभी पूरे रोम-रोम मे दर्द उठ रहा है,

मम्मी- ऐसी कैसी मालिश की है रोहित ने कही तूने वहाँ भी मालिश तो नही करवाई,

बुआ- अब भाभी जब पूरे बदन की बात कर रही हू तो समझ जाओ

मम्मी- हे भगवान तूने रोहित से ही अपनी चूत मरवा ली, फिर मम्मी हस्ते हुए चल कोई बात नही वैसे भी रोहित तो अभी बच्चा है,

बुआ- अरे भाभी भरोसे मत रहना उसका मस्त लंड अगर तुम्हारी चूत मे घुस जाए तो तुम्हारी चूत की धज्जिया उड़ा देगा, एक बार लेके तो देखो पसीने ना च्छुटा दे तुम्हारे तुम्हारा बेटा तो कहना,

मम्मी- थोड़ा आश्चर्या से देख कर बोलती है क्या बहुत बड़ा और मोटा है उसका लंड, तुझे खूब चोदा है क्या उसने,

बुआ- मेरी तो चूत मे अभी तक दर्द है और गंद अलग दर्द कर रही है,

मम्मी- क्या तेरी गंद भी मारी है उसने,

बुआ- तुम अपनी गंद बचा के रखना भाभी

मम्मी-क्यो

बुआ- क्यो कि वह तो तुम्हारी गंद का दीवाना है वह तुम्हे खूब मस्त तरीके से ठोकना चाहता है,

मम्मी- चल झूठी कही की

बुआ- तुम्हारी कसम भाभी उसकी नज़र हमेशा तुम्हारी मोटी गंद पर रहती है,

बुआ की बाते सुन कर मम्मी की चूत मे पानी आ जाता है और वह बुआ से और खोद-खोद के पुच्छने लगती है,

मम्मी- उसने क्या तुझे पूरी नंगी कर दिया था,

बुआ- हाय भाभी मुझे शर्म आती है

मम्मी- बता ना रंडी चुद चुकी है और शर्मा रही है, मस्त भोसड़ा मरवा चुकी है और मुझे बताने मे शर्म आ रही है अब बोल भी,

बुआ- अरे भाभी उसने तो मुझे पूरी नंगी कर दिया था और जब अपने मोटे लंड को मेरी चूत मे भर कर मुझे चोदा तो मैं तो मस्त हो गई, सच भाभी तुम्हारा बेटा बहुत मस्त तरीके से चूत ठोकता है, एक बार तुम अपने बेटे का लंड अपनी चूत मे ले लोगि तो मस्त हो जाओगी,

मंजू की चूत अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के नाम से पनिया गई थी और वह अपनी चूत को अपने हाथो से मसल्ते हुए,

मंजू- हफ्ते हुए और बता ना मेरे बारे मे क्या कह रहा था, क्या वह अपनी मम्मी को भी चोदना चाहता है,

बुआ- हाँ भाभी वह कह रहा था कि उसे सबसे सुंदर मम्मी लगती है मम्मी के रसीले होंठो को पीने के लिए वह पागल रहता है और उसे सबसे अच्छे तो तुम्हारे ये चौड़े चूतड़ लगते है, कभी देखना उसे कैसे खा जाने वाली नज़रो से तुम्हारी मोटी गंद देखता है,

मम्मी- हाई राम मैं तो उसे बच्चा समझती थी मुझे क्या पता वह अपनी मम्मी की चूत का ही प्यासा है,

बुआ- दीदी मैं तो जब से उससे चुद कर आई हू मेरा सारा बदन टूट रहा है गजब चुड़क्कड़ बेटा पेदा किया है तुमने अब वह तुम्हारी ही चूत कूटने के चक्कर मे है,

मम्मी- क्या संध्या भी साथ थी तुम लोगो के

बुआ- अरे बहू तो पक्की चुदेल है वही तो उकसाती है उसे तुम्हे चोदने के लिए, कहती है रोहित मुझे अपनी मम्मी समझ कर चोदो,

मंजू मन ही मन खुस होते हुए कितना ख्याल है मेरी बहू को मेरा,

मंजू- अच्छा तू अब हमारे साथ सोएगी या अकेली, आना हो तो आ जा, तेरे भैया को वैसे ही तुझे चोदे बिना नींद नही आएगी,

क्रमशः......................
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11-05-2017, 12:17 PM,
#18
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मस्त घोड़ियाँ--11

गतान्क से आगे........................

रुक्मणी- आज भैया को तुम अपनी चूत चटवा दो मैं कल देखूँगी आज तो मेरी चूत मे तुम्हारे बेटे के लंड की चुभन ही महसूस होने दो आज बहुत दिनो बाद किसी जवान लंड ने चोदा है अलग ही मिठास पेदा हो रही है,

बुआ के जाने के बाद मंजू अपने पति के पास जाकर बैठ जाती है और मनोहर एक बात .

मनोहर- मंजू का गुदाज उठा हुआ पेट सहलाते हुए हाँ पुछो रानी,

मंजू- क्या मैं बहुत सुंदर हू और क्या बहुत सेक्सी लगती हू,

मनोहर- मेरी रानी तुम बहुत सुंदर और सेक्सी हो तुम्हारे चेहरे को देख कर ही काम रस टपकता है

मंजू- क्या मुझे देख कर किसी का लंड भी खड़ा हो स्कता है

मनोहर- हाँ मेरी जान तुम्हारी गुदाज जवानी को देख कर किसी का लंड भी खड़ा हो सकता है

मंजू- क्या मेरे बेटे का लंड भी मुझे देख कर खड़ा होता होगा

मनोहर -क्यो नही तुम इतनी मस्त चोदने लायक लगती हो कि तुम्हारे बेटे का लंड भी तुम्हे देखते ही खड़ा हो जाता होगा, और तो और तुम्हारा बेटा तो तुम्हे अपने ख़यालो मे ही कई बार पूरी नंगी करके चोद चुका होगा, तुम्हे मालूम नही अपनी मम्मी को चोदने मे बेटो को कितना सुख मिलता है,

अगर तेरे जैसी खूबसूरत रंडी मेरी मम्मी होती तो मैं तो तेरी चूत अपने लंड से चोद-चोद के भोसड़ा बना देता, दिन रात तेरी गंद रंडियो की तरह चोद्ता,

मनोहर- लेकिन आज तुम यह सब अचानक क्यो पुच्छने लगी कही रोहित ने तुम्हारी चूत मे हाथ तो नही मार दिया या फिर तुम्हारी मोटी गंद को दबा दिया,

मंजू- नही ये बात नही है पर आज कल मैने देखा है वह मेरे चुतडो की तरफ बहुत देखने लगा है,

मनोहर- तुम्हारी जवान गंद देख कर तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए फिर वह तो तुम्हारा बेटा है उसका लंड तो अपनी मा की गदराई जवानी देख कर खड़ा होना ही है,

उधर अजय अपनी भांजी संगीता के पास पहुच जाता है और संगीता अपनी टीशर्ट और स्कर्ट पहने बैठी रहती है,

मामा- संगीता यहाँ आओ अब तो तुम कितनी बड़ी हो गई हो और मामा संगीता के गालो को चूम लेता है,

संगीता अपने मामा से चिपकती हुई ओह मामा तुम कितने दिनो बात आए हो अब तो तुम्हारी भांजी तुम्हारे साइज़ की हो गई है,

मामा- संगीता की गुदाज जवानी और उसके कठोर दूध जो की टीशर्ट मे एक बड़ा सा शॅप बनाए हुए नज़र आ रहे थे को देख कर कहता है मेरी रानी तुम तो बहुत ज़्यादा जवान हो गई हो और पूरी अपनी मम्मी पर गई हो, कुछ दिनो मे ही तुम्हारी ये जंघे और तुम्हारी ये गुदाज गंद अपनी मम्मी जैसी ही मस्त फैल जाएगी और फिर देखना तुम्हारी जवानी को पीने के लिए लोगो का दिन मचल जाएगा

संगीता अपने सीने को उपर की ओर तान कर अंगड़ाई लेते हुए हे मामा जी पूरा बदन टूट रहा है

मामा - अरे बेटी मैं आज तेरे बदन के हर हिस्से मे अच्छी मसाज कर देता हू,

दोनो एक दूसरे को सहलाते हुए बातो मे मगन थे तभी उन्हे किसी के आने की आहट होती है और संगीता चुपचाप आँख बंद करके लेट जाती है और मामा जी दरवाजे की ओर देखने लगते है

मामा- अरे दीदी अभी तक सोई नही तुम

मंजू- हाँ रे नींद नही आ रही थी फिर मंजू अपनी बेटी संगीता की ओर देखने लगी जो अपने दोनो पेरो के घटनो को मोड हुए सोने की आक्टिंग कर रही थी, मम्मी ने देखा संगीता की मूडी हुई टाँगो के बीच का हिस्सा साफ नज़र आ रहा था और उसकी जंघे बहुत चिकनी गोरी और मस्त लग रही थी और उसकी पॅंटी का वह हिस्सा इतना फूला हुआ लग रहा था जहाँ संगीता की मस्त बिना झांतो वाली चूत दबी हुई थी,

मामा जी की नज़रे भी संगीता की मस्त पॅंटी के उपर से फुल्ली नज़र आ रही चूत पर थी, मम्मी ने मुस्कुराते हुए मामा जी से पुछा अभी सोई है क्या,

मामा- हाँ दीदी

मंजू- और सुना भाभी और बच्चे की याद तो नही आ रही है

मामा- मम्मी की नशीली आँखो मे देखते हुए अपने लंड को सहला कर दीदी तेरी बेटी संगीता को तो तुमने एक दम मस्त माल बना दिया है देख उसकी गुदाज बुर कितनी फूली लग रही है और फिर मामा ने संगीता की दोनो टाँगो को और भी ज़्यादा चौड़ा कर दिया और संगीता की गुलाबी चूत पॅंटी के एक साइड से झाँकने लगी,

मम्मी - मामा के सामने अपना गुदाज उठा हुआ पेट सहलाते हुए, उसके पास जाकर मुस्कुराती हुई उसके सर पर हाथ फेर कर, क्या बात है भाई इतने क्यो परेशान दिख रहा है,

मामा- ने अपने मूह को मम्मी को गुदाज पेट से लगा दिया और अपने हाथ को मम्मी की मोटी गंद के पिछे लेजा कर दबाते हुए, हे दीदी तुम्हारी लोंड़िया भी बिल्कुल तुम्हारी तरह चिकनी दिखने लगी है मैं तो बहुत तड़प रहा हू

मम्मी- मामा के लंड को अपने हाथो मे थाम कर, अरे पगले चुपचाप संगीता की गंद से चिपक कर उसकी चूत और बोबे थोड़े दबा दे वह खुद ही कुछ देर मे उठ जाएगी, पर हाँ अभी कुँवारी है बड़े प्यार से उसकी चूत मारना और हाँ अपनी बेटी समझ कर ही चोदना समझे,

मामा- मम्मी के होंठो को चूस कर दीदी संगीता इतनी कसी हुई माल है फिर भी जीजाजी ने अभी तक अपनी बेटी की चूत नही मारी क्या बात है,

मम्मी- अरे जब से उनकी बहन रुक्मणी आई है तब से वह उसको ही ज़्यादा चोद्ते है इसलिए उनका ध्यान नही गया और फिर संगीता की चूत की सील भी तो तेरे लंड से टूटना लिखी थी,

उधर संगीता अपने मन मे सोचती है तुम क्या खाक मेरी सील तोडोगे मैं तो कब की अपने भैया से अपनी चूत मरा चुकी हू,

मामा- दीदी आज मैं तेरी चिकनी बेटी की चूत फाड़ कर रख दूँगा

मम्मी- मुस्कुराते हुए वो तो तेरा खड़ा लंड ही बता रहा है कि तू मेरी चिकनी लोंड़िया को देख कर कैसे तड़प रहा है,

मामा- दीदी थोड़ा सा शहद है क्या

मम्मी- क्यो अब शहद का क्या करेगा

मामा- दीदी मैं जब भी कुँवारी लोंदियो की चूत चाट्ता हू तो शहद लगा कर चाटने मे बड़ा मज़ा आता है

मम्मी- बड़ा आया कुँवारी लोंदियो को चोदने वाला तूने अभी तक किसी कुँवारी लोंड़िया को चोदा भी है,

मामा-अब क्या करू दीदी कभी मोका ही नही लगा

मम्मी- जब तेरी खुद की बेटी थोड़ी बड़ी हो जाए तब उसे चोदना फिर देखना अपनी ही बेटी की चिकनी चूत चूसने मे तुझे कितना मज़ा आएगा,

मामा- दीदी अब तुम यहाँ से जाओ नही तो मैं तुम्हारी चूत मे अपना लंड फसा दूँगा

मम्मी- जाती हू बाबा पर तेरे लिए शहद तो ला दू फिर थोड़ी देर बाद मम्मी शहद देकर चली गई और मामा दरवाजा बंद करके संगीता के पेरो के पास बैठ गये संगीता एक दम से उठ कर बैठ जाती है और अपने मामा का मोटा लंड पकड़ते हुए,

संगीता- मामा जी आज अपनी बेटी को चोदने वालो हो क्या

मामा- संगीता के रसीले होंठो को एक दम से अपने मूह मे भर लेता है और उसकी शर्ट उतार देता है जब मामा संगीता की कसी हुई गुदाज चुचिया देखता है तो उसका लंड झटके मारने लगता है और वह अपनी भांजी के दूध को पागलो की तरह मसल्ने लगता है,

संगीता- आह मामा जी बहुत जोश मे लग रहे हो आज अपनी बेटी की बुर पीने का बड़ा मन कर रहा है आपका पर मामा जी मेरी रंडी मम्मी को भी यही चोद देते, बहुत बड़ी रंडी है वो तुमने तो खूब उसकी चूत खोल -खोल के सूँघी होगी ना,

मामा- संगीता के दूध के निप्पल मे शहद की बूंदे टपका कर उसके एक निप्पल को कस कर अपने दांतो से काट कर चूस्ते हुए, हाय मेरी रंडी भांजी तेरी मम्मी अपनी गंद मारने को मुझे नही देती है नही तो साली की गंद मार-मार कर लाल कर दू,

संगीता- आह मामा जी कितना अच्छा चूस्ते हो अब सीधे मेरी चूत मे शहद डाल कर चाट लो तो मज़ा आए,

मामा- संगीता की पॅंटी को एक झटके मे उतार कर उसकी जाँघो को खूब कस कर फैला देता है और फिर अपनी भांजी की गुलाबी चूत को देख कर उसको चूमते हुए उसमे खूब सारा शहद लगाने लगता है और संगीता आह आह करने लगती है,

संगीता- मामा जी मेरा दिल करता है कि कोई मेरी मम्मी को खूब रंडी की तरह चोदे, इतना चोदे इतना चोदे कि रंडी का मूत निकाल दे मेरी मम्मी किसी चुदी हुई कुतिया की तरह अपनी गंद हिलाती पड़ी रहे और उसकी गंद और चूत मे तगड़े लंड घुस-घुस कर उसे चोद्ते रहे,

मामा तब तक संगीता की बुर मे शहद डाल कर उसे चाटने लगा था वह जितना संगीता की गुलाबी चूत को फैला कर चाट्ता संगीता उतना ही सी सी की आवाज़ निकालने लगती, मामा पागल कुत्ते की तरह संगीता की चूत को चाट रहा था और उसकी चूत एक दम लाल हो चुकी थी तभी मामा जी ने संगीता को उठा कर उसकी जगह खुद लेट गये और संगीता को उठा कर उसकी गंद को अपने मूह से सटा लिया इस तरह संगीता मामा के पेट पर लेट गई और उनके लंड पर शहद लगा कर चाटने लगी, अब इधर मामा संगीता की गंद और चूत दोनो को फैला-फैला कर चाट रहा था उधर संगीता अपने मामा का मोटा लंड चूस रही थी,

संगीता-मामा जी मम्मी की चूत का रस ज़्यादा अच्छा है या मेरा

मामा- बेटी अभी तो तेरी चूत के रस से अच्छा कुछ भी नही लग रहा है, पर एक बात बता तुझे सबसे ज़्यादा चुदने का मन किससे होता है,

संगीता- मामा जी मुझे तो पापा का लंड सबसे अच्छा लगता है, जब पापा मेरे उपर चढ़ कर मेरी मस्त गंद ठोंकेगे तब देखना मैं अपने पापा को अपने भोस्डे मे भर लूँगी,

मामा- संगीता की चूत की फांको को पिछे से पूरी तरह खोल कर उसके गुलाबी छेद मे अपनी नुकीली जीभ डाल कर उसका रस चूस लेता है और संगीता अपनी चूत मामा के मूह मे दबा देती है,

मामा- बेटी जब तेरे पापा तेरी चूत मे अपना लंड पेल देंगे तब उन्हे भी अपनी बेटी को चोदने मे मज़ा आ जाएगा और फिर मामा जी संगीता को अपने मूह से उतर कर उठ कर बैठ जाते है,

और संगीता की जाँघो को फैला कर देखते हुए, उसकी चूत का दाना सहलाते हुए संगीता बहुत खुजली हो रही है ना,

संगीता- हाँ मामा जी अब जल्दी से मेरी चूत मे लंड डाल दो और मुझसे खूब गंदी-गंदी बाते करो

मामा- हैरानी से संगीता की ओर देखते हुए बेटी तू बिल्कुल अपनी मम्मी पर गई है जब तेरी मम्मी अपनी चूत मरवाती है तो उसे भी खूब गंदी बाते करने का मन होता है,

संगीता अपनी चूत को फैला कर अपनी टाँगे हवा मे उठा लेती है और मामा जी अपने लंड को उसकी चूत के छेद मे लगा कर एक कस कर धक्का उसकी फूली बुर मे मार देते है और संगीता आह मामा जी मर गई आह आह

मामा जी प्लीज़ थोड़ा धीरे डालो बहुत मोटा लंड है, तभी मामा जी संगीता की चिकनी जाँघो को अपने हाथो मे दबोच कर दूसरा धक्का कस कर देते है और उनका पूरा लंड संगीता की चूत मे फिट हो जाता है औ संगीता ओह ओह मामा मार डाला रे कुत्ते कितना तेज धक्का मार दिया,

मामा जी बस मेरी रानी बस अब बहुत धीरे-धीरे तुझे चोदुन्गा और मामा जी अपने लंड को संगीता की बुर मे पेलने लगे, संगीता अपनी गंद उठा कर मामा के लंड पर दबाने लगी और जल्दी ही संगीता की चूत बहुत चिकनी होकर अपने मामा का लंड लेने लगी,

मामा जी संगीता के रसीले होंठो को चूस्ते हुए उसकी कसी हुई चुचियो को दबा-दबा कर उसकी बुर मे गहराई तक लंड पेलने लगते है,

संगीता-आह आह ओह मामा जी कितना मस्त लंड है तेरा, बहुत बढ़िया चोद रहे हो मामा जी

मामा- बेटी बस आज ऐसे ही रात भर तेरी चूत को तेरा मामा चोदेगा बस तू आराम से अपनी जाँघो को फैलाए रह,

संगीता- आह अच्छा मामा जी आदमियो को सबसे ज़्यादा किसकी चूत मारने मे मज़ा आता है

मामा- बेटी किसी भी आदमी को सबसे ज़्यादा मज़ा उसकी खुद की मम्मी को चोदने मे आता है, मा को अपने बेटे का लंड लेने का बड़ा मन करता है और अपने बेटे के लंड को सोच-सोच कर खूब अपनी चूत मरवाती है,

और एक बाप को अपनी कुँवारी बेटी को चोदने मे बड़ा मज़ा आता है, और अगर बेटी शादीशुदा होती है तो बाप को अपनी बेटी को चोदने मे और भी मज़ा आता है,

संगीता- आह आह मतलब जब मेरी शादी हो जाएगी तो पापा और भी मस्त तरीके से मुझे चोदने के लिए तड़प उठेगे,

क्रमशः......................
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11-05-2017, 12:17 PM,
#19
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मस्त घोड़ियाँ--12

गतान्क से आगे........................

मामा- हाँ बेटी उस समय तेरी गंद तेरी मम्मी की गंद की तरह मोटी और गुदाज हो जाएगी तेरा पेट बच्चे पेदा करने से और भी उभर कर सामने आ जाएगा और तेरे ये दूध और भी मोटे हो जाएगे तब देखना तेरे पापा तेरी गदराई जवानी को देख कर तेरी मस्त तरीके से चूत मारेंगे,

एक बाप के सामने जब उसकी बेटी एक भरी पूरी औरत बन कर आएगी तब देखना तेरे पापा का लंड तुझे देखते से ही खड़ा हो जाएगा,

मामा जी ने संगीता की गंद के नीचे हाथ डाल कर उसकी गंद को अपने हाथो मे भर कर उपर उठा लिया और अपने पेरो के पंजो के बल पर बैठ कर संगीता की चूत को खूब कस-कस कर ठोकने लगे और संगीता हाय मामा ओह मामा मर गई और तेज मारो खूब चोदो मामा जी और चोदो की आवाज़ लगाने लगी,

पूरा कमरा उनकी चुदाई की ठप से गूँज उठा और मामा जी सतसट अपने लंड को संगीता की चूत मे पेलते जा रहे थे,

संगीता अपनी चूत को खूब उठा-उठा कर मामा के लंड पर मार रही थी और संगीता की सूजी हुई लाल चूत देख कर मामा उसे खूब रगड़-रगड़ कर चोद रहे थे, लगभग एक घंटे का खेल होने के बाद मामा ने अपना माल संगीता की बुर मे जैसे ही छ्चोड़ा संगीता मामा के लंड से अपनी चूत को पूरी तरह चिपकाते हुए हफने लगी और उसकी बुर ने ढेर सारा पानी छ्चोड़ दिया,

अगले दिन मनोहर अपने ऑफीस निकल गया और बुआ और संगीता मार्केट चली गई उसके बाद रोहित और मामा भी इधर उधर घमते हुए पान की दुकान पर खड़े होकर बाते करने लगे, घर मे संध्या और मंजू आमने सामने बैठ कर काम करने लगी, उधर मनोहर के पास ऑफीस मे सपना का फोन आता है कि उसको उसके पापा रतन ने बुलाया है,

मनोहर कुछ देर बाद रतन के कॅबिन मे पहुच जाता है और तभी सपना रतन की गोद से उठ कर मनोहर को मुस्कुराकर देखते हुए बाहर चली जाती है तभी रतन सपना को दो कॉफी का इशारा कर देता है और फिर-

रतन- यार मनोहर मुझे तो एक बात आज पता चली और साले तूने भी बताया नही

मनोहर- कौन सी बात

रतन- यही कि मेहता तो तेरा समधी है

मनोहर- अपने सर पर हाथ फेरते हुए हाँ यार तुझसे मैने यह राज च्छूपा रखा था

रतन- तभी तो कहु की मेहता तेरे एक कहने पर कैसे मान गया, पर तूने यह भी नही बताया कि आख़िर तूने उस पर ऐसा क्या एहसान कर रखा है जो वह तेरी बात कभी नही टालता है,

मनोहर- उसका एक बहुत बड़ा कारण है रतन, यह एक घटना है जो बस घट गई

रतन- बता तो हुआ क्या था

मनोहर- यार यह एक ऐसी घटना है जिसे तू एक अनोखा हादसा कह सकता है और यही घटना थी जिसकी वजह से मैने अपने बेटे रोहित की शादी बड़ी सादगी से मेहता की बेटी संध्या से कर दी थी,

रतन- मेहता का पूरा नाम मनोज मेहता है ना, और मेरे ख्याल से उसकी तो बस एक बेटी ही है

मनोहर- मुस्कुराते हुए क्यो रतन उसकी बीबी ममता को भूल गया क्या,

रतन- हाँ-हाँ याद आया लेकिन हुआ क्या था जो तुझे और मेहता को अपने बच्चो की शादी इतने सादगी भरे अंदाज मे कर दी,

मनोहर- चल अब तूने पुरानी याद ताज़ा कर दी है तो मैं तुझे बता ही देता हू, एक बार मैं अपनी कार से सुनसान रोड पर चला जा रहा था, रोड के आस पास जंगली इलाक़ा था, तभी मुझे एक लड़की की चीखने की आवाज़ सुनाई दी और मैने जल्दी से कार रोक कर आवाज़ की तरफ जाने लगा और जब मैं थोड़ा जंगल के अंदर गया तो वहाँ एक काला सा आदमी एक लड़की के उपर चढ़ा हुआ था और वह उसे पूरी नंगी कर चुका था लड़की का जीन्स और उसकी टीशर्ट साइड मे पड़े थे मैं उन दोनो से बस थोड़ी दूरी पर था तभी उस काले आदमी ने उस लड़की की जाँघो को फैलाया और अपने लंड का एक तेज झटका उसकी चूत मे मार दिया लड़की बिल्कुल अन्छुइ और कुँवारी थी जिसके कारण उस काले का मोटा लंड का टोपा ही अंदर घुसा होगा

और मैं ज़ोर से वहाँ से आवाज़ लगा कर उसकी और दौड़ा, मुझे देखते ही वह काला आदमी अपने लंड को निकाल कर बहुत तेज़ी से दूसरी ओर भाग गया,

रतन- फिर क्या हुआ

मनोहर- वह जगह बिल्कुल सुनसान थी और उसके आगे एक तालाब था, मैं जब उस लड़की के पास पहुचा तो वह कराहती हुई नंगी अपनी जंघे फैलाए पड़ी थी और उसकी चूत से थोड़ा सा खून निकल रहा था मैं समझ गया कि लड़की की सील पर धक्का लगने से थोड़ा सा खून आ गया है मुझे खुशी थी कि मैने उसे पूरी तरह चुद से बचा लिया था नही तो उस आदमी का क्या भरोशा था कि वह उसे चोदने के बाद जिंदा छ्चोड़ देता,

मैने जब उस लड़की के गुदाज रसीले बदन उसकी चिकनी जंघे उसके कसे हुए पपीते की तरह दूध उसका सपाट चिकना पेट और उसकी मस्त गोरी और फैली हुई गंद देखी तो सच मानो रतन मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया, मैने उस लड़की के सर के नीचे हाथ डाल कर उसे उठाया तो वह एक दम से मेरे सीने से चिपक कर रोने लगी, मैने उसके आँसू पोछ्ते हुए उसके गालो पर हाथ फेरा और उसकी गोरी नंगी पीठ सहलाते हुए उससे कहा चुप हो जा बेटी वह कमीना भाग गया है,

वह लड़की सिसकिया लेते हुए मुझसे बुरी तरह चिपकी हुई थी और मैं उसके नंगे बदन को सहलाते हुए उसे लगभग अपनी गोद मे बैठाए था, मैने उससे कहा अच्छा अब रोना बंद करो और मुझे अपना नाम बताओ

उसने मुझे अपना नाम संध्या बताया और फिर उसने बताया कि वह इस काले से लिफ्ट लेकर आ रही थी लेकिन उसके बाद उसने उसकी गाड़ी जंगल मे मोड़ दी और मुझे उतार कर जबदस्ती करने लगा, फिर वह फुट-फुट कर रोने लगी और कहने लगी मुझे छ्चोड़ दो मैं मर जाना चाहती हू मैं अपने पापा के पास अब क्या मूह लेकर जाउन्गि, मुझसे कौन शादी करेगा,

मेरा हाथ एक दम से उसके कसे हुए दूध पर चला गया और मेरा लंड झटके देने लगा, मैने उसके रसीले होंठो और गालो पर हाथ फेरते हुए उसे चुप कराया और उससे कहा ठीक है अगर मैं तेरी शादी अपने बेटे से करवा दू तब तो मरने के बारे मे नही सोचेगी, तब कही जाकर वह थोड़ा शांत हुई और फिर उसे जब अपने नंगे बदन का ख्याल आया तो मेरे पास से उठते हुए बोली हटिए मुझे कपड़े पहनने दीजिए,

वह जैसे ही अपनी मोटी गंद उठा कर मेरे सामने खड़ी हुई मेरा तो लंड पानी-पानी हो गया,

बस फिर क्या था मैं जज्बाती हो गया और मैने उससे कहा, देखो लड़की तुम्हारा बलात्कार हुआ है और अगर तुम

यह चाहती हो कि समाज मे तुम्हारी इज़्ज़त बरकरार रहे तो जैसा मैं कहता हू वैसा ही करो और फिर मैने उसे नंगी ही अपनी गोद मे उठा लिया और उसे तालाब के पास ऐसी जगह पर ले गया जहाँ से किसी को भी हम दिखाई नही देते, वह मेरी गोद मे नंगी चढ़ि हुई थी और उसका गुदाज गोरा बदन और भारी चुतडो ने मेरे लंड को पूरी तरह खड़ा कर दिया था,

मैने उसे उगी हुई घास पर बैठा दिया और फिर मैं उसकी दोनो जाँघो को फैला कर उसकी चूत को देखने लगा तो उसने अपनी जंघे कस कर चिपकाते हुए कहा अंकल यह आप क्या कर रहे है,

मैने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा देखो बेटी पहले तो बिल्कुल भी घबराव मत यह समझ लो कि अब तुम अपने पापा की गोद मे आ चुकी हो और दूसरी बात तुम्हारे अंगो से खून आ रहा है इसे पानी से अच्छे से धोने दो और फिर मैने जब उसकी जाँघो को चौड़ा किया तो वो भी अपनी जाँघो को चौड़ा करते हुए अपनी चूत देखने लगी और उसे मेरी बात पर यकीन आ गया कि मैं ठीक कह रहा हू,

मैने ठंडे पानी से उसकी फूली हुई मस्त चूत को धोना शुरू कर दिया और फिर जब मेरा हाथ उसकी गोरी मुलायम बिना बालो वाली चूत पर पड़ा तो मैं तो मस्त हो गया और मैने उसकी चूत को पानी से अच्छे से रगड़ना चालू कर दिया,

रतन- हस्ते हुए लोंदियो की नब्ज़ पकड़ना तुम अच्छी तरह जानते हो मनोहर

मनोहर- रतन उस समय तू उसे पूरी नंगी देखता तो वह तेरी मा भी होती तो उसे चोदे बिना नही रह पाता

रतन- हस्ते हुए अच्छा भाई फिर क्या हुआ,

मनोहर- फिर क्या था दोस्त मैं जानबूझ कर उसके भज्नाशे को पानी डाल-डाल कर रगड़ने लगा और वह मस्ताने लगी, मैं बड़े गौर से उसकी गुलाबी बुर देख रहा था और वह मुझे अपनी चूत धोते हुए बड़े प्यार से देख रही थी, फिर वह कुच्छ शरमाने लगी और फिर से अपनी जंघे बंद कर ली,

मैने उसको देख कर कहा क्या हुआ बेटी तब उसने मुझसे कहा अंकल प्लीज़ अब रहने दो मुझे शर्म आ रही है,

मैने उससे कहा बेटी उस गंदे आदमी के कारण तुम्हे कोई इन्फेक्षन ना हो इसलिए पानी से धोना ज़रूरी है, और फिर इस बार मैने उसकी दोनो जाँघो को पूरी तरह चौड़ा कर दिया और उसकी मस्त गुलाबी चूत खिल कर पूरी सामने आ गई, अब मैं संध्या की चूत मे पानी डाल-डाल कर रगड़ते हुए उसके भज्नाशे को जैसे ही छेड़ता वह एक दम से अपनी गंद उठाने लगती उसका चेहरा अब कामुक हो चला था और मैं देख रहा था कि अब उसे भी मज़ा आने लगा था तभी मैने उसके दूध के निप्पल को देखा तो मस्त हो गया उसके दूध के गुलाबी निप्पल पूरी तरह तन कर खड़े हो गये थे,

वह अपनी मस्ती मे मस्त हो रही थी और मैने धीरे से अपनी बीच वाली उंगली उसकी चूत के लाल छेद मे डाल दी जिससे वह गन्गना उठी और एक दम से मुझसे चिपक गई,

मैं बिल्कुल भी जल्दिबाजी नही करना चाहता था और मैने उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसके कसे हुए दूध बुरी तरह मेरी छाती से दबने लगे, लेकिन मैने उसकी चूत से हाथ नही हटाया था और अपनी उंगली को धीरे-धीरे उसकी बुर मे दबाता जा रहा था,

अब मेरी उंगली मे यह एहसास हो चला था कि उसकी चूत से चिकनाहट बाहर आ रही है, जब मैने उसकी चूत से अपनी मोटी उंगली को बाहर निकाल कर देखा तो उसकी चूत से मलाई मेरी उंगली पर लग गई थी, मैने धीरे से उंगली वापस उसकी चूत मे डाल कर उसे चूम लिया और वह कराह उठी और फिर मुझसे कस कर चिपक गई उसका मन शायद अपने बोबे मसलवाने का होने लगा था वह अपने दूध मुझसे रगड़ रही थी और यह भी कह रही थी अंकल प्लीज़ अब छ्चोड़ दीजिए,

मैने उसे नंगी ही उठा कर अपनी गोद मे बैठा लिया और उसके मोटे-मोटे दूध को कस कर अपने हाथो मे भर कर मसल्ने लगा और उसके होंठो को चूम लिया,

मेरा लंड सीधे उसकी चूत और गंद के बीच रगड़ खाने लगा और उसने मुझसे शरमाते हुए कहा अंकल प्लीज़ छ्चोड़ दीजिए मुझे, और फिर वह मेरे सीने से कस कर चिपकती हुई बोली अंकल आप ही ऐसा करेगे तो फिर आपमे और उस काले मे क्या फ़र्क रह जाएगा,

मैने कहा पहली बात तो तुम मुझे अंकल मत कहो पापा कहो और दूसरी बात उस काले मे और मुझमे यह फ़र्क है कि वह सिर्फ़ तुमको दर्द देता और मैं तुमको दर्द के साथ मज़ा भी दूँगा और मैने उसके दूध को कस कर दबा दिया,

वह नंगी तो पहले से ही थी और मेरे सहलाने से उसकी चूत मे पानी आ गया और फिर रतन बाबू उस दिन मैने अपनी बहू संध्या को वही जंगल मे तालाब किनारे खूब कस कर चोदा, जब मैं संध्या को चोद चुका तब वह अपने कपड़े पहन कर रेडी हो गई और मैं उसे लेकर उसके पापा के पास पहुच गया,

रतन- फिर

मनोहर- फिर क्या था मैने उसके बाप के हाथ मे उसकी बेटी को दिया और उससे कहा कि आज तुम्हारी बेटी का बलात्कार हुआ है और फिर उस काले वाली बात मेहता को बता दी, मेहता अपनी बेटी को अपने सीने से लगा कर उससे पुच्छने लगा और संध्या ने रोते हुए उसे सब बता दिया और कहा आज अगर ये अंकल वहाँ नही आते तो मैं आपके सामने जिंदा ना खड़ी होती,

मेहता बुरी तरह घबरा गया और कहने लगा मैं पोलीस को फोन करता हू लेकिन मैने उसे बदनामी का डर बता कर मना कर दिया और फिर जब मैने उसकी चुदी हुई

बेटी से अपने बेटे की शादी का ऑफर किया तो मेहता मेरे पेरो मे घिर पड़ा और बस फिर क्या था संध्या और रोहित की शादी हो गई,

रतन-मुस्कुराते हुए वाकई दिलचस्प थी तुम्हारी कहानी खेर तुम्हे जान कर खुशी होगी कि आज रात मैने एक छ्होटी सी पार्टी रखी है और तुम्हारे लिए एक मस्त माल का भी इंतज़ाम किया हुआ है

मनोहर-हस्ते हुए कमिने ज़रूर अब तेरी नज़र किसी और मुनाफ़े मे अटक गई है नही तो फ्री मे तू मुझे क्या माल ऑफर करेगा, हाँ अगर सोदा तेरे फ़ायदे का हो तो तू अपनी मा को भी दाव पर लगा दे ऐसा आदमी है तू,

रतन- भाई मनोहर रतन का तो हिसाब ऐसा है कि जो चीज़ उपयोग की है उसका उपयोग हो और जो चीज़ उपभोग की हो उसका पूरी तरह उपभोग होना चाहिए,

क्रमशः......................
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11-05-2017, 12:18 PM,
#20
RE: Chudai Sex Kahani मस्त घोड़ियाँ
मस्त घोड़ियाँ--13

गतान्क से आगे........................

मनोहर- हस्ते हुए तू साले कभी नही सुधरेगा अच्छा अब मैं चलता हू

रतन- शाम को टाइम पर आ जाना और भाभी जी से कह देना आज रात तू रतन का मेहमान रहेगा,

मंजू आज सुबह से ही खूब चुदासी हो रही थी रात भर उसके ख्वाबो मे अपने बेटे रोहित का लंड उसकी मोटी गंद मे चुभता रहा, रात मे कई दफ़ा तो उसने अपनी गंद

मे अपनी उंगलिया तक डाल ली थी, उसकी चूत खूब खुज़ला रही थी, घर मे कोई नही था बस संध्या किचन मे कुछ काम कर रही थी,

मंजू- सोफे पर बैठते हुए, संध्या बेटी ज़रा पानी तो पीला दे,

संध्या- अभी लाई मम्मी और फिर संध्या पानी लेकर आती है, संध्या ने अपनी साडी को काफ़ी नीचे करके बाँधा था वहअपनी पूरी नाभि और उठा हुआ पेट दिखाती हुई अपनी सास के पास बैठ गई,

मंजू संध्या का गाल चूमते हुए क्या बात है संध्या आज कल बहुत

खोई -खोई रहती है रोहित तेरा अच्छे से ख्याल नही रखता है क्या, और फिर मंजू संध्या के गुदाज पेट को दबा कर सहलाती हुई क्या बात है तेरा पेट काफ़ी उभर आया है कही कुछ है तो नही,

संध्या- मुस्कुराते हुए, अरे नही मम्मी ऐसा कुछ नही है और फिर अगर पेट उभरने से उसमे बच्चा मान लिया जाय तो आपका गुदाज पेट तो मुझसे भी बड़ा है तो क्या मैं यह सोच लू कि रोहित का भाई आने वाला है,

मंजू- हस्ते हुए बहुत बड़ी -बड़ी बाते करने लगी है, मेरे रोहित को कही बच्चा तो नही बना दिया तूने

संध्या- मैं क्या उन्हे बच्चा बनाउन्गि उन्होने तो खुद मुझे अपनी मम्मी बना लिया है

मंजू- वह कैसे

संध्या- अब देखो ना मम्मी वह मुझे कहते है कि मुझे अपनी मम्मी की तरह दूध पिला

मंजू संध्या के दूध को पकड़ कर हल्के-हल्के मसल्ते हुए, तो क्या हो गया बेटी अगर वह तेरा दूध नही पिएगा तो किसका पिएगा,

संध्या भी समझ गई कि मम्मी की चूत पानी छ्चोड़ रही है और अपने बेटे का लंड उनकी आँखो के सामने झूल रहा है,

संध्या- धीरे से मम्मी की मोटी जाँघो को सहलाते हुए, मम्मी मेरा भी बदन आपके जैसा भरा हुआ होना चाहिए था,

मंजू- क्यो क्या कमी है तेरे बदन मे

संध्या- अरे वो बात नही है, अब इन्हे देखो ना इनका वो तो इतना मोटा और लंबा है कि मैं तो पस्त हो जाती हू सच मम्मी उनका लंड तो आपके लायक है, आप अगर मेरी जगह होती तो बड़े आराम से उनका लंड सह लेती,

मंजू- क्यो बहुत बड़ा हो गया है क्या रोहित का

संध्या- अरे जब आप देखेगी तो कहेगी ऐसा लंड आज तक आपने नही देखा होगा,

मंजू- संध्या की चुचियो को थोड़ा ज़ोर से दबाती हुई क्यो तुझे मज़ा नही आता क्या उसके लंड से

संध्या- नही वो बात नही है मज़ा तो बहुत आता है ऐसा लगता है रात भर करते रहे, फिर संध्या अपनी सास के दूध के निप्पल को सहलाती हुई उसके गालो को चूम कर, एक बात कहु मम्मी

मंजू-क्या

संध्या- उन्हे आप बहुत अच्छी लगती हो कभी-कभी तो मुझे चोद्ते हुए मेरे गालो को काटने लगते है और कहते है मम्मी तुम कितनी मस्त हो

मंजू- अपनी आँखे बंद कर लेती है और अपनी जाँघो को थोड़ा सा फैला देती है और संध्या का हाथ पकड़ कर अपनी साडी के उपर से फूली हुई गुदाज चूत पर दबाने लगती है, संध्या उसका इशारा समझ कर उसकी फूली हुई चूत को दबा-दबा कर सहलाने लगती है,

मंजू- आह बेटी तू नही जानती मैं तुझसे कितना प्यार करती हू, मुझे तो संगीता से भी

ज़्यादा तेरा मोह हो गया है

संध्या समझ गई कि अब उसकी सास पूरी मस्ती मे आ चुकी है,

संध्या- पर मम्मी आपका बेटा तो मुझसे भी ज़्यादा आपको प्यार करता है,

मंजू- नही रे पगली वह तुझे बहुत चाहता है अब मैं उसकी मम्मी हू तो प्यार तो करेगा ही,

संध्या- अपनी सास की चूत की फांको को खोलने की कोशिश करती है और मंजू अपनी जंघे और खोल लेती है, मम्मी मुझे तो कही-कही लगता है कि आपका बेटा आपको ही चोदना चाहता है,

मंजू- संध्या के दूध को कस कर दबाते हुए उसे चूम कर क्या रोहित ने तुझसे ऐसा कहा है कि वह मुझे चोदना चाहता है,

संध्या- वह तो जब भी मुझे चोद्ते है यही कहते है कि मैं अपनी मम्मी को पूरी नंगी करके खूब कस-कस कर चोदना चाहता हू,

मंजू- क्या वह बहुत अच्छे से तेरी चूत मारता है

संध्या- खूब रगड़-रगड़ कर उपर से ओह मम्मी ओह मम्मी की आवाज़ अलग निकालते है, जैसे वह मुझे नही आपको चोद रहे हो, और फिर संध्या जैसे ही सोचती है कि सासू मा की साडी के अंदर हाथ डाले तभी बुआ और संगीता आ जाती है और मंजू और संध्या सीधी होकर बैठ जाती है,

मंजू- संध्या की ओर इशारा करती हुई बेटी इस बारे मे हम दोनो अकेले मे बात करेगे

संध्या- बिल्कुल मम्मी आप जब कहोगी मैं आ जाउन्गि और फिर संध्या किचन की ओर चल देती है,

उधर दोनो मामा भांजा पान की दुकान पर खड़े-खड़े आती जाती औरतो की मटकती गंद और मोटे-मोटे चुचो को देख कर एक दूसरे की ओर इशारा कर रहे थे,

मामा- यार रोहित उस औरत की कमर और गंद देख बिल्कुल तेरी बीबी संध्या जैसी लग रही है,

रोहित- सच कहा मामा अगर वह नंगी हो जाए तो बिल्कुल संध्या जैसी नज़र आएगी,

मामा- संध्या को तो तू दिन रात चोद्ता होगा ना बड़ी मस्त चूत होगी उसकी

रोहित - मामा जी इतना तड़प रहे हो तो आज दिखा दू क्या आपको संध्या की चूत, सूंघते ही पानी छ्चोड़ दोगे

मामा- अरे वो तो ठीक है पर उस लाल साडी वाली औरत को देख और बता किसके जैसी लग रही है

रोहित- मामा वह तो पूरी मम्मी जैसी लग रही है, उसकी मोटी गंद देखो बिल्कुल मम्मी की गंद की तरह मटक रही है,

मामा- भान्जे तेरी मम्मी का भोसड़ा बड़ा ही मस्त है और मुझे ताज्जुब है कि तूने अभी तक अपनी मम्मी को नही चोदा है, मैं तेरी जगह होता तो रोज रात को उसकी चूत मारता,

रोहित- अपने लंड को मसल्ते हुए अरे मामा उस रंडी पर तो मेरी कब से नज़र है बस एक बार अच्छा सा मोका लग जाए फिर देखना सारी रात उसकी चूत और गंद रगड़-रगड़ कर चोदुन्गा,

मामा- अरे बेटे तेरी मम्मी जब मुतती है तो सबसे ज़्यादा आवाज़ आती है मैं तो उसके मूतने की आवाज़ सुन कर ही पागल हो जाता हू, पर रोहित कल रात संगीता को चोदने मे बड़ा मज़ा आया बहुत ज़ोर-ज़ोर से चिपकती है साली

रोहित- संगीता के दूध बहुत कसे हुए है और उसकी चूत तो इतनी मस्त और कसी हुई है सच मामा बहुत टाइट लंड गया था उसकी चूत मे,

मामा- आश्चर्या से रोहित को देख कर तो क्या तू उसे चोद चुका है

रोहित- हाँ

मामा- लो गई भैस पानी मे मैं तो सोच रहा था कि उसकी सील मैने ही तोड़ी है,

रोहित- अच्छा मामा मम्मी ने अपना ओप्रेशन करवा रखा है या नही

मामा- हस्ते हुए क्यो तू अपनी मम्मी को चोद कर वापस मा बनाना चाहता है क्या

रोहित- हाय मामा अपनी मम्मी का उठा हुआ पेट देख कर दिल करता है कि उसे चोद-चोद कर फिर से गर्भवती कर दू, साली बहुत भरे बदन की है बहुत मोटी गंद है उसकी

मामा- चल अब ज़्यादा अपनी मम्मी के बारे मे मत सोच नही तो यही पानी निकाल देगा चल अब घर चले और फिर दोनो घर की ओर चल देते है,

संध्या- मम्मी जी मैं और रोहित आज अपने पापा के घर होकर आ जाए क्या,

मंजू- ठीक है लेकिन कल लॉट आओगे ना

संध्या- जी बिल्कुल

रोहित जब घर आता है तो संध्या उसे लेकर अपने मम्मी पापा से मिलने के लिए चल देती है रोहित अपनी बाइक पर संध्या से बाते करता हुआ चला जा रहा था,

रोहित-संध्या आज रात तुम किसके साथ बीताओगी मेरे साथ या अपने पापा के साथ

संध्या- मुस्कुराते हुए फिकर मत करो जैसा तुम्हे अच्छा लगे वैसा कर लेना पर मुझे नही लगता जब तुम मेरी मम्मी को देख लोगे तो फिर मेरे साथ सोने की इच्छा रहेगी या नही

फिर संध्या रोहित के लंड पर हाथ लेजा कर सहलाती हुई पापा को फोन करके बता देती हू कि हम आ रहे है वह बहुत खुस हो जाएगे,

संध्या जब अपने पापा को फोन करके बता देती है तब उसके पापा उसकी मम्मी के पास जाते है, उसकी मम्मी ममता का बदन बहुत हेवी और भरा हुआ था उसके दूध बहुत मोटे उसकी जंघे और गंद बहुत भारी थी उसे देख कर कोई भी बस उसकी गंद ही मारना चाहे,

मेहता- अरे सुनती हो संध्या और रोहित आ रहे है बस 1-2 घंटे मे पहुच जाएगे,

ममता- सच कह रहे हो और फिर ममता कहती है मैं तैयार हो जाती हू नही तो रोहित मुझे देख कर क्या सोचेगा कि उसकी मम्मी जी कैसी गंदी दिख रही है,

मेहता-क्या बात है बड़ा खुस हो रही हो, मैं जानता हू तुमने जब पहली बार रोहित को देखा था तभी से तुम्हे वह बहुत अच्छा लगता था,

ममता-मूह बनाते हुए मेहता के पास आती है और मेहता की लूँगी के उपर से उसका मोटा लंड जो की पूरी तरह तना हुआ था उसको अपनी मुट्ठी मे भर कर कस कर मसल्ते हुए, मुझे कहते हो और खुद का लंड तो देखो अपनी बेटी का नाम सुनते ही यह खड़ा हो गया, लगता है आज सारी रात उसे पूरी नंगी करके चोदोगे,

मेहता- अपनी पत्नी के मोटे-मोटे दूध को दबाता हुआ अपना एक हाथ ममता की साडी के अंदर डाल कर उसकी चूत मे सीधे उंगली डाल कर बाहर निकाल कर दिखाते हुए, देखो तुम्हारी चूत रोहित के लंड की कल्पना मे कितना पानी छ्चोड़ रही है,

मेहता अपनी बीबी के होंठ चूमते हुए ओह बेटी संध्या एक बार अपने पापा को अपनी रसीली जीभ चुसाओ ना

ममता- अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेहता को दिखाती है और मेहता उसकी जीभ को अपने मूह मे भर कर चूस्ते हुए उसकी चूत दबाने लगता है,

ममता- सीस्यते हुए मनोज आज मैं रोहित से रात भर चुदना चाहती हू

मेहता- आज मैं भी अपनी बेटी संध्या को पूरी नंगी करके रात भर चोदना चाहता हू,

ममता- मेहता का लंड पकड़ कर दबाते हुए सच मनोज आज तुम्हे अपनी बेटी संध्या को चोदने मे मज़ा आ जाएगा जब तुम उसे नंगी करके देखोगे ना तो मस्त हो जाओगे,

मेहता- क्या उसमे बहुत चेंजस आ गया होगा

ममता- अरे तुमने जब देखा था तब तो वह कुँवारी थी अब शादी के बाद उसका बदन पूरा भर गया होगा और पूरी औरत बन चुकी होगी अपनी बेटी का भरा हुआ मसल नंगा बदन देख कर तुम्हारा मस्त लंड पागल हो जाएगा,

मेहता- डार्लिंग चलो आज थोड़ा मूड बना लेते है फिर वो लोग आते ही होंगे

ममता- लेकिन रोहित के आने के बाद पीते तो ज़्यादा अच्छा रहता,

मेहता- अरे फिकर क्यो करती हो वह आ जाएगा तब और पी लेंगे, उसके बाद मेहता अपनी बीबी ममता के साथ मस्त ठंडी बियर का मज़ा लेते हुए उसके रसीले होंठो को चूसने लगा ओए ममता अपने पति के लंड पर बियर की ठंडी-ठंडी बोतल लगाते हुए बियर पीने लगी, कभी-कभी वह थोड़ी बियर मेहता के लंड के टोपे पर डाल कर फिर उसका लंड चूसने लगती है,

क्रमशः......................
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