Long Sex Kahani सोलहवां सावन
07-06-2018, 01:39 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
सुनील 







गाँव में एक आदत मैंने सीख ली थी, लड़कों की निगाह तो सीधे उभारों पर पड़ती ही थी उसमें मैं कभी बुरा नहीं मानती थी, लेकिन अब जैसे वो मेरे कबूतरों ललचाते थे, मेरी निगाह बिना झिझक के सीधे उनके खूंटे पे पहुँच जाती थी, कितना मोटा, कितना कड़ा, कितना तन्नाया बौराया, ... 


सुनील का खूंटा तो लग रहा था कपडे फाड़ के बाहर आ जाएगा, और अगर वो मेरे जोबन को रगड़ मसल सकता था तो मैं क्यों नहीं,


कपडे के ऊपर से ही मैं उसे रगड़ने मसलने लगी। 



बस मेरे छूते ही उसकी हालत ख़राब, लेकिन चन्दा फिर मैदान में आगयी।


" अरे तेरा तो वो खोल के रगड़ मसल रहा है तो तू क्यूँ ऊपर से आधा तीहा मजा ले रही है। " 

और मुझसे पहले चन्दा ने ही उसके कपडे खींचके, ... ... और फिर जैसे संपेरा कोई पिटारा खोले और खुलते ही मोटा कड़ियल जहरीला नाग फन काढ़ कर खड़ा हो जाए। 

बस उसी तरह सुनील का, मोटा खड़ा, कड़ा खूब भूखा, तन्नाया, ... लेकिन मैं भी तो विषकन्या थी, सांप के फन से खेलना उसका जहर निकालना मुझे अच्छी तरह आता था। 

और मैं भूखी भी थी, २४ घंटे से ज्यादा हो गया था मेरे मुंह में 'कुछ ' गए हुए। 

बस मैंने उसे मुंह में, पूरा नहीं सिर्फ उसका फन, ... सुपाड़ा मुंह में ले लिया। 



वही बहुत मोटा था, मैं लगी उसे चूसने चुभलाने, मेरी जीभ कभी मोटे मांसल सुपाड़े को चाटती तो कभी जीभ की नोक से सुपाड़े की आँख ( पी होल, पेशाब के छेद पे सुरसुरी कर देती ). 


बिचारा सुनील,... मस्ती में वो चूतड़ उचका रहा था, मेरा सर पकड़ के अपने मोटे लण्ड को को मेरे मुंह में ठेल दिया। 

मैं गों गों करती रही लेकिन अब सुनील बैठा हूआ था और दोनों हाथों से उसने कस के मेरे सर को लण्ड के ऊपर दबा दिया था।


सुनील का मोटा लण्ड आलमोस्ट हलक तक धंसा था। मेरे तालू से रगड़ता हुआ अन्दर तक, मैं ऑलमोस्ट चोक हो रही थी, मेरे गाल दुःख रहे थे, मुंह फटा जा रहा था। पर फिर भी मैं जोर जोर से चूस रही थी, नीचे से जीभ मेरी सटासट सुनील के कड़े लण्ड को चाट रही थी, कुछ दिख नहीं रहा था। 



लेकिन ऐसा लगा की गन्ने के खेत में सरसराहट सी हुयी, कोई और लड़का आया। 


मै लण्ड चूसने में इतनी मगन थी की कुछ फरक मुझे नहीं पड़ रहा था, और सुनील भी बस जैसे मेरी बुर में लण्ड पेल रहा हो वैसे अपने चूतड़ उठा उठा के हलके हलके धक्के लगाता और साथ में गालियों की बौछार,

साली, तेरी माँ का भोसड़ा चोदूँ, क्या मस्त माल पैदा किया है, क्या चूसती है जानू, चूस कस कस के, ... 



और मैं दूने जोर जोर से चूसने लगती। 


जितना मजा सुनील को अपना मोटा लण्ड चुसवाने में आता था उससे कहीं ज्यादा मुझे उसका लण्ड चूसने में आता था। सब कुछ भूलके मैं चूसने चाटने में लगी थी लेकिन जो बगल से सपड सपड की आवाजें सुनाई दे रही थी, उससे साफ़ लग रहा था की मेरी सहेली चन्दा भी लण्ड चूसने के मस्त काम में लग गयी थी। 

और पल भर के लिए दुखते गालों को आराम देने के लिए मैंने मुंह हटाया और उसके तने लण्ड को साइड से चाटने लगी तो मैंने देखा, चन्दा रानी इतने चाव से जिसके लण्ड को चूस रही थी वो और कोई नहीं, दिनेश था। 



अजय और सुनील का पक्का दोस्त और वैसा ही चुदक्कड़, लण्ड तो सुनील ऐसा मोटा किसी का नहीं था लेकिन दिनेश का भी उसके बराबर हो होगा, पर लम्बाई में दिनेश के औजार की कोई बराबरी नहीं थी। 

ये देख के मेरी आँखे फटी रह गयी की चंदा ने एकदम जड़ तक लण्ड घोंट लिया था, बेस तक लण्ड उसके मुंह में घुसा था लेकिन वो जोर जोर से चूसे जा रही थी। 



सुनील अब गन्ने के खेत के बीच जमींन पर लेट गया था, और बोला,

" हे चल चुदवा ले अब गुड्डी, लण्ड पागल हो रहा है। "

उसके होंठों पर प्यार से चुम्मी ले के मैं बोली,  

" तो चोद न मेरे राजा, मना किसने किया है मेरे राजा को। "

"हे गुड्डी, सुन आज तू मेरे ऊपर आजा, बस थोड़ी देर मन कर रहा है मेरा प्लीज, पहले तू घोंट ले मेरा। ' सुनील ने रिक्वेस्ट की। 

मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था, ऐसी चुदवासी हो रही थी चूत मेरी, लेकिन उसका मोटा कड़ा लण्ड देखकर मेरी हिम्मत जवाब दे गयी। 

सुनील की बात और थी वो करारे धक्के मार मार के मेरी कसी कच्ची किशोर चूत में मोटा मूसल ठेल देता था लेकिन मैं कैसे घोट पाउंगी। 

सर हिला के मैंने मना किया और मुंह खोल के रिक्वेस्ट की,

" नहीं तू ही आ जा ऊपर न आज बहुत मन कर रहा है, घबड़ा मत नीचे से मैं दूंगा न साथ, घोंट लेगी तू घबड़ा मत। चन्दा से पूछ कितनी बार वो ऐसे चुद चुकी है। ' सुनील बार बार रिक्वेस्ट कर रहा था। 


चूत में आग लगी थी, कित्ती देर हो गयी थी चूत में लण्ड गए लेकिन सुनील का मोटा लण्ड देखकर मेरी हिम्मत जवाब दे रही थी। 

हर बार तो वही ऊपर आके, लेकिन आज क्या हो गया था उसे, झुंझला के मैं बोली,

"यार तुझे चोदना हो तो चोद, वरना,... "

अब मेरा ये बोलना था की चन्दा की झांटे जैसे सुलग गईं, चूसना छोड़ के तपाक से मेरे पास वो खड़ी हो गयी। गुस्से में मुझसे बोली,

" वरना, वरना क्या, ...मेरी पक्की सहेली भी मेरे यार को ऐसे जवाब नहीं देती। अरे क्या करेगी तू छिनार की जनी, चली जायेगी न, जा अभी जा, तुरंत। "
Reply
07-06-2018, 01:39 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
चंदा, सुनील और, ...



"यार तुझे चोदना हो तो चोद, वरना,... "

अब मेरा ये बोलना था की चन्दा की झांटे जैसे सुलग गईं, चूसना छोड़ के तपाक से मेरे पास वो खड़ी हो गयी। गुस्से में मुझसे बोली,

" वरना, वरना क्या, ...मेरी पक्की सहेली भी मेरे यार को ऐसे जवाब नहीं देती। अरे क्या करेगी तू छिनार की जनी, चली जायेगी न, जा अभी जा, तुरंत। "

और मेरी निगाह चन्दा के हाथों पे पड़ी, जिसमें मेरे कपडे वो जोर से पकडे थी। 

" जा न ऐसे ही, बहुत जाने वाली बनी है, अरे सुनील बिचारा नहीं चाहता है की इस गन्ने के खेत के बड़े बड़े ढेलों पे तेरे गोरे गोरे कोमल मुलायम शहर के चूतड़ रगड़े जाएं इसलिए बिचारा खुद नीचे लेटकर, ...और तू है की नखडा चोद रही है। "





मुझे भी लगा की मैं गलत थी। 


बिचारा सुनील कल भी मैंने उसे मना कर दिया था, आज का प्रॉमिस किया था। आज भी वो बिचारा कब से मेरी बाट रहा था, भी तो, ... फिर बिना कपडे लिए एकदम नंगी कैसे जा सकती हूँ मैं। यहाँ से तो रास्ता भी नहीं जानती हूँ मैं। 

" जा जा न देख क्या रही है, रास्ते में इत्ते लौंडे मिलेंगे न तुझे की चार दिन तक घर नहीं पहुँच पाएगी। गांड का भोसड़ा बन जाएगा। जा मत चढ़ सुनील के लण्ड के ऊपर, .... " चन्दा का गुस्सा कम होने को नहीं आ रहा था। 


मैं बिना कपडे के जाने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी। लेकिन बिचारा सुनील ही बोला,

" चन्दा दे दे कपडे न उसके, ... "

" देख कितना भला है ये तेरा कैसा ख्याल करता है। लण्ड खड़ा है तब भी तुझे बिन चोदे छोड़ रहा है, चल मैं दे देती हूँ तेरे कपडे लेकिन आज के बाद गाँव के लौंडे क्या कुत्ते भी नहीं पूछेंगे तुझे। याद रखना। ले ले कपडे अपने। "

चन्दा ने मेरे कपड़ों को गोल गोल किया और पूरी ताकत से ऊपर उठा लिया बोली,

" ले इसे मैं फेंक दे रही उस धान के खेत में काम करने वालियों के पास जा के उनसे निहोरा करना, देंगी तो देंगी। जा न रुकी क्या है माँ चुदवानी है क्या अपनी, गधाचोदी। "


मुझे लग रहा था की कितनी बड़ी गलती मैंने की, सुनील का इतना मस्त लण्ड खड़ा था और बिना चुदे, ... फिर वो धान के खेत वाली तो कभी मेरे कपडे वापस नहीं करतीं। 

मैंने सुनील से ही गुहार की,

" गलती हो गयी मुझसे, कोशिश करती हूँ ", आखिर कामिनी भाभी के मर्द के ऊपर तो चढ़ी ही थी। 

हेल्प भी चन्दा ने ही की ऊपर चढाने में, बांस के। 

मैं अपनी दोनों लम्बी लम्बी गोरी छरहरी टाँगे सुनील की कमर के दोनों ओर कर के बैठ गयी। मेरी प्यासी गीली चूत सुनील के मोटे सुपाड़े से रगड़ खा रही थी, मन तो मेरी गुलाबो का भी यही कर रहा था की उसे कैसे जल्द से गप्प कर ले। लेकिन कैसे, पर मेरी प्यारी सहेली चन्दा ने पूरा साथ दिया। 

आगे सब काम चन्दा ने किया, मेरी चूत के पपोटे खोल के चूत में सुनील का मोटा सुपाड़ा सेट करने का, मेरे कंधे पकड़ के जोर से पुश करने का, सुनील भी मेरी पतली कमर पकड़ के जोर से खींच रहा था। 



मैने भी पूरी ताकत लगाई और दो चार मिनट में जब पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाड़ा मेरी बुर ने लील लिया तब चन्दा ने प्रेशर कम किया। और चिढ़ाते हुए बोली,


पैदायशी छिनार हो तुम, कितने नखड़े कर रही थी अब कैसे गप्प से मेरे यार का सुपाड़ा घोंट गयी। "

" यार रहा होगा तेरा अब तो मेरा यार है, यार भी मेरा उसका औजार भी मेरा, तू दिनेश के साथ मजे ले "


मैं कौन उन्नीस थी, आँख नचा के मैं बोली और सुनील के कंधे पकड़ के एक बार फिर खूब जोर से प्रेस किया, अपनी चूत को। 

सुनील ने भी मुझे अपनी ओर झुका लिया और जैसे मेरी बात में हामी भरते, कस के पहले मेरे होंठों को फिर उभारों को चूम लिया। 

मैं अपनी ओर से पूरी ताकत लगा रही थी, लेकिन सुनील का था भी बहुत मोटा। 


मेरी चूत परपरा रही थी, दर्द से फटी जा रही थी, आँख में आंसू तैर रहे थे, लेकिन मैंने तय कर लिया था कुछ भी हो जाए उसका मोटा खूंटा घोंट के रहूंगी। कामिनी भाभी की सारी सीख मैं आँखे बंद के याद कर रही थी, कैसे घुटनो के बल, किन मसलस को ढीला छोड़ना है, कहाँ प्रेस करना है, और साथ साथ चूत को कभी ढीला छोड़ के कभी कस के लण्ड पे भींच भींच के,


मेरी सहेली चन्दा भी पूरा साथ दे रही थी। ताकत भी बहुत थी उसके हाथों में और उसे सब मालुम भी था की कैसे कब कहाँ कितना दबाना है। 

उसके दोनों हाथ मेरे कंधे पे थे, सुनील भी दोनों हाथ से एक बार फिर मेरी पतली कमर को पकड़ के अपनी ओर खींच रहा था। मैं भी आँखे बंद कर के, .. 


सूत सूत कर के उसका बालिश्त भर का लण्ड सरक सरक के,


इतना मजा आ रहा था की बता नहीं सकती। 

लेकिन कुछ देर बाद चन्दा की खिलखिलाहट सुन के मैंने अपनी आँखे खोली,  

" ज़रा नीचे देख, ... " वो हंस के बोली। 

वो एक बार फिर से दिनेश के पास बैठी उसका लण्ड चूस रही थी। 

चन्दा ने तो मुझे छोड़ ही दिया था, सुनील के भी दोनों हाथ कब के मेरी कमर को छोड़ चुके थे, और मैं खुद अपने जोर से ऊपर नीचे, आठ इंच से ज्यादा लण्ड घोंट चुकी थी और जैसे कोई नटनी की लड़की बांस के ऊपर नीचे चढ़े, मैं भी सुनील के बांस के ऊपर नीचे हो रही थी। 


वह चुद रहा था, मैं चोद रही थी। 




एक पल के लिए मैं शरमाई, फिर चन्दा को उकसाया,  

" हे तू भी चढ़ जा न उसके ऊपर, फिर बद के चोदते हैं दोनों न। "

लेकिन चन्दा ने कोई जवाब नहीं दिया, वह अपने मुंह से बड़े बड़े थूक के गोले बना के दिनेश के लण्ड पे बार बार डाल रही थी। दिनेश का लम्बा लण्ड खूब गीला हो रहा था। 



"अरे छिनार तेरे सारे खानदान की गांड मारुं, मुझे तो चढ़वा दिया इस मीठी शूली पर, अब खुद चढ़ते हुए क्यों गांड फट रही है। अगर अपने बाप की जनी है न तो चढ़ जा नहीं तो समझूंगी तू छिनार की, रंडी की जनी अपने मामा की, ... "

गालियों का मजा सुनील को बहुत आता है, ये मुझे मालूम था। 


और अब वो खूब जोर जोर नीचे से धक्के मार रहा था। मुझे भी चुदने में एक नया मजा आ रहा था। चूत दर्द के मारे फटी जा रही थी, जाँघे एक दम दर्द से चूर हो रही थीं लेकिन फिर भी मैं सुनील के कंधो को पकड़ के सटासट अपनी चूत अंदर बाहर कर रही थी। 

साथ में जैसे कामिनी भाभी ने सिखाया था, चुदाई का काम सिर्फ चूत का नहीं, पूरी देह का है, ... 

तो कभी मेरे होंठ सुनील के होंठों पर तितली की तरह जा के बैठ जाते और उन के रस ले के कभी गालों पे तो कभी सुनील के निप्स पे, भाभी ने ये भी सिखाया था की मर्द के निप्स किसी लौंडिया से कम सेंसिटिव नहीं होते तो, कभी उसे मैं चूसती चुभलाती तो कभी जोर से स्क्रैच कर लेती। 

मस्ती से सुनील की हालत खराब थी। 

पर सुनील को जो सबसे ज्यादा पसंद थे, जिसपे वो मरता था वो थीं मेरी कड़ी कड़ी गोरी गोरी नयी आती चूचियाँ। 

मेरी कच्ची अमिया। 


और आज मैंने जाना था की मरद की हालत कैसे खराब की जाती है उपर से, अपने कच्चे टिकोरों को कभी चखाकर तो कभी ललचा कर। 



कभी मैं अपने निपल उसे चुसा देती तो कभी उसे ललचाती, दूर कर लेती 






और बस हचक हचक के चोदती, और चोदते समय भी मेरी चूत जब आलमोस्ट ऊपर आ जाती तो उसके सुपाड़े को सिर्फ भींच भींच के निचोड़ के सुनील की हालत खराब कर देती। 


उधर दिनेश की ललचाई आँखे मेरे मस्त कसे नितम्बों पर गड़ी थीं। बस वहीँ वो देखे जा रहा था एकटक, और मैं भी उसे उकसाने के लिए कभी उसे दिखा के अपने चूतड़ मटका देती तो कभी फ्लाईंग किस उछाल देती। 

बिचारा उसका मोटा लम्बा बांस एकदम टनटनाया, कड़ा, पगलाया था। 

लेकिन चन्दा बस कभी उसे चूसती जोर जोर से तो कभी बस अपनी लार से नहला देती। 



" अरे रंडी की औलाद काहें बिचारे को तड़पा रही है, चुदवा ले न, उसे बिचारे को भी तो नीचे वाले छेद का मजा दे दे। अगर लण्ड के ऊपर चढ़ने में गांड फट रही है, तो मैं बोल देती हूँ न तुझे कुतिया बना के चोद देगा। " 

अब मेरी बारी थी चन्दा को हड़काने की,

मेरी गालियों का असर सुनील पे इतना पड़ा की उसने मुझे बांहों में भर के जोर से अपनी ओर नीचे पूरी ताकत से खींचा, अपने दोनों पैर भी अब उठा के उसने मेरी पीठ पर कैंची की तरह फंसा दिये थे। 

पूरा लण्ड ऑलमोस्ट मेरी चूत में पैबस्त था और अगला धक्का मैंने जो मारा सुनील के साथ साथ ताल में ताल मिला के तो उसका मोटा सुपाड़ा सीधा मेरी बच्चेदानी पे लगा और लण्ड का बेस क्लिट पे रगड़ खा रहा था। 

मस्ती से मेरी आँखे बंद हो रही थी। 

चन्दा मेरे बगल में आ गयी थी और मेरे कान में फुसफुसा रही थी,


" जानू, मेरी पांच दिन वाली सहेली कल से ही आगयी है, इसलिए पांच दिन की मेरी छुट्टी, समझी चूतमरानो। बिचारा सुनील इसीलिए कल से भूखा है और दिनेश को भी मिलेगा नीचे वाले छेद का मजा, घबड़ा मत। "





मुझे कुछ समझ में नहीं आया।

ATTACHMENTS[Image: file.php?id=880]topless 7.jpg (34.51 KiB) Viewed 1125 times

Re: सोलहवां सावन,
Sponsor

Sponsor 



Gold MemberPosts: Joined: 15 May 2015 07:37Contact: 




 by  » 11 Aug 2016 20:26
ट्रिपलिंग : गन्ने के खेत में 









मुझे कुछ समझ में नहीं आया। 
…………………………………………………………………..

तब भी समझ में नहीं आया, जब सुनील ने कस के मुझे अपनी बांहों और पैरों के बीच इस तरह बाँध लिया था की मैं कितनी भी कोशिश करूँ इंच बराबर भी नहीं हिल सकती थी। 

पीछे से चन्दा ने जबरदस्त थप्पड़ कस कस के मेरे चूतड़ पर लगाए और मेरी गांड का छेद दोनों अंगूठों से फैला के, उसमें एक जबरदस्त थूक का गोला, पूरी ताकत से एकदम अंदर तक, ... 


मैं कुछ बोल भी नहीं सकती थी, सुनील ने जोर से अपने होंठों के बीच मेरे होंठ को भींच लिया, था उसकी जीभ मेरे मुंह में हलक तक घुसी हुयी थी। 

और जब समझ में आया तो बहुत देर हो चुकी थी। 

चन्दा ने घचाक से अपनी मंझली ऊँगली, थूक में सनी मेरी गांड में ठेल दी। और गोल गोल घुमाने लगी।


मुश्किल से ऊँगली घुस पायी थी लेकिन चन्दा तो चन्दा थी। कुछ देर बाद उसने उंगली निकाल के एक बार दूनी ताकत से मेरी गांड के छेद को फैला दिया और दिनेश का मोटा सुपाड़ा मैं वहां महसूस कर रही थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 

मैं कुछ नहीं कर सकती थी।

दिनेश की ताकत मैं जानती थी, और अबकी उसने और चन्दा ने मिलके मेरी गांड के संकरे मुहाने को फैलाया और दिनेश ने अपना मोटा सुपाड़ा ठोंक दिया। पूरी ताकत से, और सुपाड़े का अगला हिस्सा मेरी गांड में धंस गया। 




दर्द के मारे ऐसी चिलहक उठी की मेरा सर फट गया। लेकिन सुनील के होंठों ने इतनी कस के मेरे होंठों को भींच रखा था की चीख निकलने का सवाल ही नहीं था। चीख घुट के रह गयी। 

ऊपर से चन्दा मेरी दुश्मन, उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ के सुनील की पीठ के नीचे दबा दिए, सुनील ने वैसे ही अपने हाथों और पैरों से मुझे जकड़ रखा था, लण्ड उसका जड़ तक धंसा था, हिलने का सवाल ही नहीं था। 

चन्दा ने इतने पर भी पीछा नहीं छोड़ा। आके उसने कस के मेरी कमर पकड़ ली और दिनेश को चढ़ाते बोली,

" अरे इतने हलके हलके धक्के से इसका कुछ नहीं होगा। कोई इसकी छिनार माँ का भोंसडा नहीं मार रहे हो, जिसमें गदहे घोड़े घुस जाते हैं। हचक के पेल न साल्ली रंडी की जनी की गांड में, दिखा दो अपनी ताकत।" 


और दिनेश ने दिखा दी अपनी ताकत। 

मेरी आँखों के आगे अँधेरा छा गया। बस मैं बेहोश नहीं हुयी। गांड से सर तक दर्द की वो लहर दौड़ रही थी की बस, ... 


गाँड़ फटी जा रही थी। बस मन कर रहा था एक पल के लिए दिनेश अपना मोटा भाला बाहर निकाल ले। लेकिन बोल तो सकती नहीं थी, और दिनेश भी जबरदस्त गाँड़ मरवैया था। उसे मालुम था बिना बेरहमी के तो गांड़ मारी ही ना जा सकती ख़ास तौर से मेरी ऐसी कसी किशोरी की गांड़। 

और उसे ये भी मालूम था की जैसे बुर में धक्के लगाते हैं, वैसे धक्के लगाने की जगह गांड में ठेलना पड़ता है, पूरी ताकत से धकेलना पड़ता है, चाहे लौंडिया लाख चिल्लाए, लाख टेसुए बहाए। 

चन्दा ने फिर उसे ललकारा और अबकी दुगुनी जोर से उसने पेला और पूरा का पूरा मोटा पहाड़ी आलू ऐसा सुपाड़ा 


गप्पाक। 

मेरी गांड ने सुपाड़ा घोंट लिया था। 


एकाध मिनट दिनेश ने कुछ नहीं किया लेकिन उसका एक हाथ कस के मेरी कमर को दबोचे हुआ था और दूसरा मेरे नितम्बों पे,

चन्दा ने अब अपना हमला सुनील की ओर कर दिया और उसे हड़काया,

' बहाने दो टसुए साली को, कितना नखडा पेल रही थी तेरे लण्ड पे चढ़ने पे, अब देख रंडी को कैसे मजे से एक साथ दो दो लण्ड घोंट रही है। खोल दो मुंह इसका, चिल्लाएगी तो सारे गाँव को मालुम तो हो जाएगा, कैसे लौंडो को ललचाती पूरे गाँव को अपने मोटे मोटे चूतड़ दिखाती जो चल रही थी, कैसे हचक हचक के उसकी गांड मारी जा रही है। "

सुनील ने मेरे होंठ अपने होंठों से आजाद कर दिए, और हलके हलके मेरे गाल चूमने लगा। 


दर्द कम तो नहीं हुआ लेकिन उस दर्द की मैं अब थोड़ी थोड़ी आदी हो गयी थी। चन्दा भी मेरी पीठ सहला रही थी, लेकिन अचानक,


असली कष्ट तो अभी बाकी था, गांड का छल्ला।
Reply
07-06-2018, 01:39 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
फट गईई ई ई ई ई 









दर्द कम तो नहीं हुआ लेकिन उस दर्द की मैं अब थोड़ी थोड़ी आदी हो गयी थी। चन्दा भी मेरी पीठ सहला रही थी, लेकिन अचानक,


असली कष्ट तो अभी बाकी था, गांड का छल्ला।


…. आह, उई ई ओह्ह फट गई, मर गई ओह, मेरी चीखें निकल कर धान के खेत तो छोडिए आधे गाँव में पहुँच रही थीं और चन्दा मेरे जख्मों पे मिर्च छिड़क रही थी,

" मेरी बिन्नो, इस गन्ने के खेत में जो आती है न, उसकी फटती ही है। बिना फटे वो नहीं जाती " और साथ ही दिनेश से बोली,

" अरे पेलो साली की गांड में हचक हचक के, फट जाने दो साली की। अरे बहुत हुआ तो कल्लू मोची के पास ले जाके इसकी सिलवा दूंगीं न। बहुत हुआ तो फ़ीस में वो भी इसकी एक दो बार मार लेगा। "







ऐसा दर्द आज तक नहीं हुआ था। सुनील ने मेरी गांड मारी थी, वो भी पहली बार। कामिनी भाभी के मर्द ने तो दो बार, एक बार रात में फिर सुबह सबेरे

और तब मेरे दिमाग की बत्ती जली। 

चन्दा ने उस दिन खूब देर तक ऊँगली की थी पहले और एक जेली की ट्यूब मेरे पिछवाड़े डाल के पूरी पिचका दी थी। पूरी पूरी ट्यूब की क्रीम अंदर, चपर चपर करती और उस लुब्रिकेशन का कुछ तो फायदा मिला था,  

फिर रात में कामिनी भाभी ने मेरी टाँगे उठा के आधी बोतल से ज्यादा कडुवा तेल मेरी गांड के अंदर पिला दिया था और तब तक टाँगे उठा के रखी थीं, जब तक एक एक बूँद अंदर नहीं चली गयी थी। और उसके बाद बाकी का बचा तेल सीधे भैया के लण्ड पे अच्छी तरह चुपड़ दिया। 


सुबह तो मेरी गांड में रात की भइया की कटोरी भर की मलाई भरी थी, और अब मैं भी समझ गयी थी की मर्द की रबड़ी मलाई से बढ़कर चिकनाई कोई नहीं होती। लेकिन आज तो बस खाली थूक लगा के, ... 

अब मेरा ये भरम दूर हो गया था की मैंने सुनील से और कामिनी भाभी के मरद से गांड मरवा ली तो मैं किसी से भी आसानी से गांड मरवा सकती हूँ। 

उयी ई ओह्ह्ह, प्लीज दिनेश थोड़ी देर के लिए गांड से निकाल लो न ओह्ह, जान गयी उहहह, दिनेश ने एक और जोरदार धक्का मारा और मेरी चीख फिर गूँज गयी। 

" बोल, अब दुबारा तो छिनरपना नहीं करेगी जैसे अभी नखडा चोद रही थी की लण्ड पे नहीं चढ़ेगी। " चन्दा बोली। 

" नहीं नहीं बस इसको बोलो एक बार निकाल ले, ... " मैं दर्द से गिड़गिड़ा रही थी। 

" निकाल तो लेगा ही लेकिन हचक के तेरी गांड मारने के बाद, तू क्या सोच रही है तेरी गांड में लण्ड छोड़ के चला जाएगा। " 

मुझे चिढ़ाने में उसे बहुत मजा आ रहा था, फिर उसने अपनी शर्त भी सुना दी, आगे से इस गाँव के क्या कही भी किसी भी लौंडे को किसी चीज के लिए मना मत करना समझी। "

फट गईई ई ई ई ई 








दर्द कम तो नहीं हुआ लेकिन उस दर्द की मैं अब थोड़ी थोड़ी आदी हो गयी थी। चन्दा भी मेरी पीठ सहला रही थी, लेकिन अचानक,


असली कष्ट तो अभी बाकी था, गांड का छल्ला।


…. आह, उई ई ओह्ह फट गई, मर गई ओह, मेरी चीखें निकल कर धान के खेत तो छोडिए आधे गाँव में पहुँच रही थीं और चन्दा मेरे जख्मों पे मिर्च छिड़क रही थी,

" मेरी बिन्नो, इस गन्ने के खेत में जो आती है न, उसकी फटती ही है। बिना फटे वो नहीं जाती " और साथ ही दिनेश से बोली,

" अरे पेलो साली की गांड में हचक हचक के, फट जाने दो साली की। अरे बहुत हुआ तो कल्लू मोची के पास ले जाके इसकी सिलवा दूंगीं न। बहुत हुआ तो फ़ीस में वो भी इसकी एक दो बार मार लेगा। "







ऐसा दर्द आज तक नहीं हुआ था। सुनील ने मेरी गांड मारी थी, वो भी पहली बार। कामिनी भाभी के मर्द ने तो दो बार, एक बार रात में फिर सुबह सबेरे

और तब मेरे दिमाग की बत्ती जली। 

चन्दा ने उस दिन खूब देर तक ऊँगली की थी पहले और एक जेली की ट्यूब मेरे पिछवाड़े डाल के पूरी पिचका दी थी। पूरी पूरी ट्यूब की क्रीम अंदर, चपर चपर करती और उस लुब्रिकेशन का कुछ तो फायदा मिला था,  

फिर रात में कामिनी भाभी ने मेरी टाँगे उठा के आधी बोतल से ज्यादा कडुवा तेल मेरी गांड के अंदर पिला दिया था और तब तक टाँगे उठा के रखी थीं, जब तक एक एक बूँद अंदर नहीं चली गयी थी। और उसके बाद बाकी का बचा तेल सीधे भैया के लण्ड पे अच्छी तरह चुपड़ दिया। 


सुबह तो मेरी गांड में रात की भइया की कटोरी भर की मलाई भरी थी, और अब मैं भी समझ गयी थी की मर्द की रबड़ी मलाई से बढ़कर चिकनाई कोई नहीं होती। लेकिन आज तो बस खाली थूक लगा के, ... 

अब मेरा ये भरम दूर हो गया था की मैंने सुनील से और कामिनी भाभी के मरद से गांड मरवा ली तो मैं किसी से भी आसानी से गांड मरवा सकती हूँ। 

उयी ई ओह्ह्ह, प्लीज दिनेश थोड़ी देर के लिए गांड से निकाल लो न ओह्ह, जान गयी उहहह, दिनेश ने एक और जोरदार धक्का मारा और मेरी चीख फिर गूँज गयी। 

" बोल, अब दुबारा तो छिनरपना नहीं करेगी जैसे अभी नखडा चोद रही थी की लण्ड पे नहीं चढ़ेगी। " चन्दा बोली। 

" नहीं नहीं बस इसको बोलो एक बार निकाल ले, ... " मैं दर्द से गिड़गिड़ा रही थी। 

" निकाल तो लेगा ही लेकिन हचक के तेरी गांड मारने के बाद, तू क्या सोच रही है तेरी गांड में लण्ड छोड़ के चला जाएगा। " 

मुझे चिढ़ाने में उसे बहुत मजा आ रहा था, फिर उसने अपनी शर्त भी सुना दी, आगे से इस गाँव के क्या कही भी किसी भी लौंडे को किसी चीज के लिए मना मत करना समझी। "





और जोर से दिनेश को आँख मार दी, दिनेश ने हलके हलके लण्ड बाहर निकालना शुरू कर दिया, और जब पूरा सुपाड़ा आलमोस्ट बाहर हो गया तो जान में जान आई। 

चन्दा मेरी पीठ सहला रही थी, दिनेश ने मेरी कमर पकड़ रखी थी, और फिर अचानक, उसने एक ही धक्के में पहले से दस गुनी के ताकत के साथ,


गांड का छल्ला पार हो गया, आधे से ज्यादा लण्ड करीब ५ इंच अंदर धंस गया और उस के बाद तो एक से एक करारे धक्के,  

धकाधक धकाधक, सटासट सटासट, वो मेरी गांड के परखचे उड़ा रहा तो, न उसे मेरे रोने की परवाह थी न चीखने की। 

दस मिनट तक इसी तरह, आलमोस्ट पूरा लण्ड करीब ८ इंच अंदर डालकर मेरी गांड वो कूटता रहा /


इस पूरे दौरान सुनील चुपचाप मेरे नीचे लेटा रहा, अपना बालिश्त भर का लण्ड मेरी चूत में घुसेड़े। और जब दिनेश सांस लेने को रुका तो नीचे से सुनील चालू,


पन्दरह बीस धक्के उसने वो ऐसे करारे मारे की मैं गांड का दर्द उसमें जड़ तक घुसा दिनेश का मोटा लण्ड सब भूल गयी। 








और जब वो रुक गया तो दिनेश ने गांड मारनी चालु कर दी फिर से, एकदम बाहर तक निकाल के चीरते फाड़ते दरेरते वो घुसेड़ देता। बारी बारी से दोनों, ऐसे जुगलबंदी दोनों की थी की न मेरी बुर को चैन न गांड को आराम। 

फिर दोनों एक साथ, एकसाथ दोनों बाहर निकालते, एक साथ अंदर ठेलते, दोनों के बीच मैं पिस रही थी, एक एक चूंची भी दोनों ने बाँट ली थी। और चन्दा भी खाली नहीं बैठी थी कभी वो मेरी क्लिट नोच लेती तो कभी निपल्स और दर्द और मजे की एक नयी लहर दौड़ जाती। 



मुझे बार बार कामिनी भाभी की बात याद आ रही थी, गुड्डी, गांड मराने का मजा तुम उस दिन लेना सीख जाओगी, जिस दिन तुम दर्द का मजा लेना जान जाओगी। गांड मरवाने में तो जितना दर्द उतना मजा, मारने वाले को भी, मरवाने वाली को भी। 


बात उन की एकदम सही थी और मैं अब दिनेश और सुनील दोनों के धक्के का जवाब धक्के से दे रही थी साथ में कभी गांड में लण्ड निचोड़ लेती तो कभी अपनी बुर को सुनील कमाते लण्ड केऊपर भींच लेती। 

मजे से उन दोनों की भी हालत खराब थी। 


मैं दो बार झड़ी लेकिन न सुनील ने चुदाई स्लो की न दिनेश ने। 

जब तीसरी बार झड़ी तो जाके पहले दिनेश और फिर सुनील, ... खूब देर तक बुर गांड दोनों में बारिश होती रही। मैं एकदम लथपथ, थकी, गन्ने के खेत में जमीं पर लेटी, बस मजे से मेरी आँखे बंद, ...आँखे खोलने का मन भी नहीं कर रहा था, एक ओर सुनील तो दूसरी ओर दिनेश।
Reply
07-06-2018, 01:40 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
सीधे गां* से, ... एक अलग, ... 





मेरी देह दर्द, थकान और मजे तीनों से चूर चूर हो रही थी। जाँघे फटी पड़ रही थीं। हिलने की भी हिम्मत नहीं कर रही थी। 

बस मैंने गन्ने के खेत में मट्टी पे पड़ी थी, चुपचाप। आँखे खोलने की भी हिम्मत नहीं पड़ रही थी, बस सुनील का हाथ अपने उभार पर महसूस कर रही थी, बगल में वो करवट लेटा था, मुझे हलके से पकड़े। 

लेकिन मुंह खोलना पड़ा, चंदा ने बोला, " हे गुड्डी मुंह खोल न, बस जरा सा। '

और बिना आँखे खोले जैसे अपने आप मेरे होंठ खुल गए। 



मोटा सा सुपाड़ा, खूब कड़ा, ... फिर तो बिना कुछ कहे मेरे होंठ गोल हो गए,

सुपाड़ा अंदर गप्प, ... खूब मोटे रसीले गुलाब जामुन की तरह, रस से लिथड़ा चुपड़ा, 




मैं हलके हलके चूसने चुभलाने लगी। चन्दा प्यार से मेरा सर सहला रही थी, मेरी जीभ सुपाड़े के चारो ओर गोल गोल घूम के चाट रही थी, मजे से स्वाद ले रही थी। लेकिन,




लेकिन 

लेकिन अचानक मुझे लगा की ये स्वाद तो एकदम, ...कैसा, कैसा, ....फिर ये सुपाड़ा सुनील का तो नहीं है। उसके सुपाड़े का स्वाद तो मैं सपने में भी पहचान सकती थी, और फिर सुनील तो अभी मेरे बगल में लेटा हुआ है। 




कैसा लग रहा है स्वाद इसका, ... उप्पस,,,, इसका मतलब ये दिनेश का, ... और वो तो अभी कुछ देर पहले ही मेरी गांड में, ... तो गांड से सीधे, ... 

यक यक, .... ये ध्यान आते ही न जाने कैसे कैसे होने लगा। मैंने मुंह से उसे बाहर पुश करने को कोशिश की, उठने लगी। 


पर चन्दा पहले से ही तैयार थी शायद इस रिएक्शन के लिए, उसने अपने हाथ से कस के मेरा सर पकड़ लिया और एकहाथ से नथुने दबा दिया,


" घोंट साली चुपचाप, गांड में तो मजे ले ले के घोंट रही थी, तो गांड से निकलने के बाद क्या हो गया। "

दिनेश ने भी मुझे कस के दबोच रखा था, लेकिन मैं कोशिश कर रही थी की मुंह न खोलूँ वर्ना चन्दा, ...उसका बाकी लण्ड भी, जो अभी अभी मेरी कसी गांड चोद कर निकला था, ... 

लेकिन मेरे चाहने से क्या होता है, उसने इतने जोर से नथुने दबा रखे थे की सांस के लिए अपने आप झट से मेरे होंठ फ़ैल गए। और अब चन्दा ने मेरे निपल उमेठते हुए हुकुम सुनाया,



" बस अब अच्छी लड़की की तरह अपनी ये बड़ी बड़ी कजरारी आँखे भी खोल दे, मेरी छिनार रानी, जरा देख तो नजारा, तेरी मस्त गांड से निकलने के बाद दिनेश का लण्ड कैसा मस्त लग रहा है। "





इतनी जोर से वो निपल उमेठ रही थी की आँखे भी खुल गईं, सुपाड़े के अलावा सारा लण्ड तो बाहर ही था। 

मेरी गांड के रस से अच्छी तरह लिथड़ा चुपड़ा, एकदम लण्ड के जड़ तक लगा था, ... 



बार बार जो वो मेरी गांड के छल्ले को रगड़ते हुए चोद रहा था उसी का असर था ये और उससे ज्यादा, जब मैं दुबारा झड़ रही थी और उसका सिर्फ सुपाड़ा गांड में घुसा था तो खुद, चन्दा ने दिनेश के मोटे मूसल को पकड़ के गोल गोल, गांड में बार बार घुमाया था और बोल भी रही थी,  

" अरे गुड्डी ज़रा तेरी गांड की मलाई लग जाए न तो बस सटासट जाएगा। "

एकदम अच्छी तरह, लण्ड का रंग दिख ही नहीं रहा था। 

मेरा मुंह तो कह रहा था किसी तरह बाहर निकालो लेकिन दिनेश की ताकत और चन्दा की चालाकी, नथुने बंद होने से मुंह जो खुला तो दिनेश ने और पेल दिया। लेकिन थोड़ा सा लण्ड घुसा होगा की चन्दा ने रोक दिया,  

" अरे इतना जुलुम मत करो बेचारी पे, शहर का माल है, यहां आने तक एकदम कुँवारी कली थी अभी सोलहवां सावन लगा है, ज़रा थोड़ा थोड़ा ठेलों, पहले उतना चाट चूस के साफ़ कर दे फिर बाकी, और उस को स्वाद का भी मजा मिलेगा और देखने का भी। "


दो तिहाई लण्ड अभी भी बाहर था। 

और चन्दा ने मुझे हड़काया,


" जल्दी से चाट के साफ़ कर देगी तो छुट्टी वरना तो गांड के रस का मजे ले ले के धीमे धीमे स्वाद ले ले के चूसना चाहती है तो तेरी मर्जी, रुकी रह शाम तक यहां। मुझे और दिनेश को भी कोई जल्दी नहीं है। "

क्या करती हलके हलके चाटना शुरू किया, ये जानते हुए भी क्या लगा है, कहाँ से निकला है लण्ड। 


ऐसा नहीं है ये पहली बार था। कल सुबह ही तो कामिनी भाभी ने, उन्हों ने भी तो जबरदस्ती, भैया का लण्ड मेरी गांड से निकलने के बाद मेरे मुंह में, ... और मंजन के नाम पे भी गांड में दो उंगली घुसा के सीधे मुंह में, ... ( बाद में गुलबिया ने समझाया गाँव में तो होली इस के बिना पूरी ही नहीं होती जबतक भौजाई अपनी ननद को ऐसे मंजन नहीं कराती। )


कुछ देर में ही मेरी चूसने चाटने की रफ़्तार तेज हो गयी, और चन्दा भी प्यार से मुझे समझा रही थी,

" अरे गाँव में आई हो तो हर तरह के मजे लो न, ये तो तेरा ही माल है यार, तेरी ही गांड का। तू समझ ले, तू क्या सोचती है भौजाइयां क्या तुझे अपनी गांड का रस चखाए बिना यहां से जाने देंगी। "

भौजाई तो छोडिए उन का तो रिश्ता ऐसा है, आखिर पहले दिन से ही बिना नागा हमारे भाई उनकी टाँगे उठा के चढ़ाई कर देते हैं, लेकिन मुझे तो लग रहा था की कहीं मेरी भाभी की माँ भी, ... जिस तरह से बातें वो कर रही थी, उनका इरादा भी। 


और दिनेश भी अब उसने कमान अपने हाथ में ले ली थी। लण्ड उसका खूब कड़क हो गया था, और वो हचक हचक के मेरा मुंह चोद रहा था। 

सुनील बगल में बैठा उसे मेरा मुंह चोदते, मुझे उसका लण्ड चूसते देख रहा था और ये देख के अब उसका हथियार भी सुगबुगाने लगा था। 



७-८ मिनट की चुसाई के बाद जब दिनेश ने लण्ड बाहर निकाला तो एकदम साफ़, चिकना, मेरी गांड की मलाई का कहीं पता नहीं और सबसे बढ़के, एकदम खड़ा तन्नाया,  

मैंने उसे आँख के इशारे से दो मिनट रुकने के लिए बोला और उंगली टेढ़ी कर के सुनील को अपने पास इशारा कर के बुलाया। 

सुनील को कुछ समझ में नहीं आया, लेकिन वो एकदम पास में आ गया। 

और जब तक वो कुछ समझता समझता, उसका थोड़ा सोया थोड़ा जागा सा सोना मोना खूंटा मेरे मुंह में,

मैं प्यार से उसे चुभला रही थी, मेरी एक कोमल कलाई उसके लण्ड के बेस पे कभी हलके से दबाती, कभी मुठियाती। और दूसरे हाथ की उंगलियां उसके बॉल्स पे,

चूड़ियों की रुन झुन के साथ साथ मुठियाना, रगड़ा रगड़ी, चूसना चाटना चल रहा था। 

और उस का नतीजा जो होना था वही हुआ,


बस चार पांच मिनट में ही सुनील का लण्ड फनफनाता चूत की मां बहन एक करने को तैयार, ... 

और अब एक बार फिर मैंने दिनेश का मुंह में, ... 

बारी बारी से मैं दोनों का लण्ड चूसती चाटती,

और जब एक को चूसती, तो दूसरा मेरी नरम गरम मुट्टी की पकड़ में होता, कभी मेरा अंगूठा उसके मखमली सुपाड़े को दबा रहा होता तो कभी ऊँगली से मैं उसके पेशाब के छेद को रगड़ती उसमें नाख़ून से सुरसुरी करती, और कुछ नहीं तो जोर जोर से मुठियाती। 


दोनों ही लण्ड पागल हो रहे थे। एकदम बेताब,


चंदा जोर जोर से खिलखिलाई बोली,


"गुड्डी रानी, लगता है फिर तू दोनों लण्ड एक साथ गटकना चाहती है। "

सच पूछिए तो मन मेरा यही कर रहा था लेकिन चन्दा को चिढ़ाते मैं बोली,

"ना बाबा न अबकी तेरी बारी एक बार मेरी ऐसी की तैसी तूने करवा दी न बस, अब तू घोंट, मेरा काम तैयार करना था। "

" तू क्या सोचती है मैंने इन दोनों कोे एक साथ कभी घोंटा नहीं है, अरे यार मेरी पांच दिन वाली छुट्टी चल रही है इसलिए न, ... वरना तेरे कहने की जरूरत नहीं थी। इसलिए आज तो, ... तूने दोनों को खड़ा किया है तुझे ही झेलना पडेगा। " हंस के चन्दा बोली।
Reply
07-06-2018, 01:40 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
लड़की एक लड़के दो,  










" तू क्या सोचती है मैंने इन दोनों कोे एक साथ कभी घोंटा नहीं है, अरे यार मेरी पांच दिन वाली छुट्टी चल रही है इसलिए न, ... वरना तेरे कहने की जरूरत नहीं थी। इसलिए आज तो, ... तूने दोनों को खड़ा किया है तुझे ही झेलना पडेगा। " हंस के चन्दा बोली। 


लेकिन असली जवाब दिनेश ने दिया। 

अबकी जब मैंने उसका खूंटा निकाल के सुनील का मुंह में लिया तो,


वो सीधे मेरे ऊपर, मैं वहीँ मिटटी ढेले में लेटी और उसने मेरी दोनों टाँगे अपने कंधे पर रह कर वो करारा धक्का मारा,

दिन में, गन्ने के खेत में तारे नजर आने लगे। 

और मैं चीख भी नहीं पा रही थी। सुनील ने अपना लण्ड पूरे हलक तक कस के पेल रखा था। दोनों एक एक चूचियाँ कस के दबा मसल रहे थे। 


और मेरी दुबारा गन्ने के खेत में चुदाई चालू हो गयी।

और वो भी तूफानी चुदाई। 

बड़ी बड़ी चुदवासी भी दिनेश के नाम से कांपती थी और इसका कारण सिर्फ उसका घोडा मार्का लण्ड नहीं था, बल्कि उसकी तूफानी चुदाई थी। 

वैसे तो वो बहुत सीधा सादा शरीफ इंसान था लेकिन जब एक बार लड़की के ऊपर चढ़ गया तो फिर बौराए सांड को भी मात कर देता, ले धक्के पर धक्का, और अगर कही लड़की चीखी चिल्लाई तो फिर तो लड़की की और आफत, चूत के परखच्चे तो उड़ेंगे ही चूंची की भी ऐसी की तैसी हो जायेगी। 

और वही गलती मुझसेहो गयी। 

और नतीजा भी वही हुआ। फिर आज तो मेरे मुलायम, कोमल चूतड़ों के नीचे घास भी नहीं थी, सिर्फ मोटे कड़े मिटटी के ढेले, चुभते, दबते। 

जितनी जोर से दिनेश के धक्के पड़ते उससे भी जोर से नीचे से वो ढेले, कड़ी मिटटी के,... 

" आज आ रहा है न गाँव में असली चुदाई का मजा, गन्ने के खेत का। " और दिनेश को और चढ़ाया,

" अरे ई पैदायशी छिनार है, खानदानी, रंडी की जनी, इसको ऐसे हलके धक्कों से मजा नहीं आता, इसको तो पाटा बना के घिर्राओ, ... "

( गाँव में पाटा मट्टी को भुरभुरी करने के लिए चलाते हैं, एक लकड़ी के पटरे पर एक या दो लोग खड़े हो जाते हैं और दो लोग रस्सी से उस पाटे को खींचते हैं। उनके भार से मट्टी के ढेले चूर चूर हो जाते हैं। )

फिर क्या था, मेरी दोनों चूंची पकड़ के रगड़ते मसलते, दिनेश ने ऐसे हचक के चोदा, सच में मेरी गांड के नीचे के ढेले मट्टी में बदल गए। 


हर बार वो आलमोस्ट सुपाड़ा बहार निकाल कर ऐसा करारा धक्का मारता की सीधे बच्चेदानी पे मेरे, ( अगर मैंने कामिनी भाभी की दवा न खायी होती तो सच में वो गाभिन कर के छोड़ता ) और फिर जब लण्ड का बस जोर जोर से क्लिट पे रगड़ता,

तो मैं दर्द से चीख उठती और मजे से सिसक उठती ;लेकिन बिना आवाज निकाले,


मेरे मुंह में तो सुनील का मोटा लण्ड था जो अब हलके मेरे मुंह को चोद रहा था, इक बार फिर दोनों छेदों का मजा। 





पर सच में शायद चन्दा की बात सच थी। 

थी मैं छिनार, पक्की चुदवासी, ... कुछ देर में मैं खुद ही नीचे से चूतड़ उठा के धक्के मारती, जोर से अपनी बुर में दिनेश का लंबा लण्ड निचोड़ लेती,


और जब सुनील ने मेरे मुंह से अपना करारा लण्ड निकाल लिया तो फिर क्या गालियां दी मैंने,


गुलबिया और बसंती मात, ( सिखाई भी उन्ही की थीं )

" चोद न, देखूं क्या सिखाया है तेरी बहनों ने, तेरी मां का भोसडा नहीं है, तालाब पोखर ऐसा जो ऐसे, ... "

आग में घी पड़ गया। 

पर कुछ देर में दिनेश ने पोज बदला, हम दोनों अब साइड में थे, धक्के जारी थे लेकिन मेरे पिछवाड़े को कुछ आराम मिल गया। 


पर वो आराम टेम्पोरेरी था। 

पीछे से सुनील ने सेंध लगा दी। बस गनीमत थी की अबकी बुचो बुच मलाई भरी थी एकदम ऊपर तक। 

और सुनील था भी एक्सपर्ट चुदक्कड़, लेकिन उसका लण्ड इतना मोटा था की तब भी हलकी चीख निकल ही गयी। 





पर अब न दिनेश को जल्दी थी न सुनील को, दोनों एक बार झड़ चुके थे, नम्बरी चोदू थे इसलिए मुझे भी मालूम था की दोनों आज बहुत टाइम लेंगे। 

दोनों जैसे मुझे सावन का झूला झुला रहे थे। 

कभी दिनेश पेंग मारता तो कभी सुनील, और मैंने दोनों के धक्के के साथ दो मस्त मोटे तगड़े खूंटो पर गन्ने के खेत में झूले का मजा लूट रही थी। 

झूले में पवन की आई बहार प्यार छलके।

ओ मेरी तान से ऊंचा तेरा झूलना गोरी, तेरा झूलना गोरी। 

मेरे झूलने के संग तेरे प्यार की डोरी, तेरे प्यार की डोरी। 

झूले में पवन की आई बहार,प्यार छलके, प्यार छलके। 


प्यार छलक रहा था, सावन की रुत की मीठी ठंडी बयार बही रही थी। 

एक बार फिर काले काले बादल आसमान में छा गए थे, पास में ही कहीं मेड पर से कामग्रस्त मोर की मोरनी को पुकारने की आवाजें आ रही थीं। झूले पर झूलती कुंवारियों की कजरी की ताने भी बीच बीच में गूँज उठती थी। 

और गन्ने के खेत में मैं भाभी के गाँव में सोलहवें सावन का जम के मजे लूट रही थी। 


दोनों छेदों में सटासट दो मस्त तगड़े लण्ड कभी एक साथ, तो कभी बारी बारी से, ... कभी मैं दर्द से चीखती तो कभी मजे से सिसकती 


और चन्दा भी अपने दोनों यारों के साथ, ...कभी मेरे निपल खिंच देती तो कभी क्लिट रगड़ देती,

नतीजा वही हुआ, मैं दो बार झड़ी, ...उसके बाद दिनेश और सुनील साथ साथ। और उनके साथ मैं भी। 

देर तक हम दोनों चिपके रहे, फिर दिनेश ने बाहर निकाला, और फिर हलके हलके सुनील ने। 

उसके लण्ड की वही हालत थी जो दिनेश की थी जब वो मेरी गांड से निकला था लिथड़ा, रस से सना लिपटा,  


लेकिन अब न मुझसे किसी ने कहा, न कोई जबरदस्ती हुयी मैंने खुद ही मुंह में ले लिया और चूम चाट के साफ़। 

दिनेश को कहीं जाना था पर थोड़ी देर हम तीनो सुनील, मैं और चन्दा बाते करते रहें। 

हाँ कामिनी भाभी की एक सलाह मैंने याद रखा था, जैसे ही दोनों के हथियार बाहर निकले मैंने जोर से अपनी चूत और गांड दोनों भींच ली जिससे एक बूँद भी मलाई बाहर न निकले, और भींचे रही। 




भाभी ने बोला था की किसी जवांन होती ;लड़की की चूत और गांड के लिए इससे अच्छा टॉनिक कोई नहीं। 
Reply
07-06-2018, 01:40 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
हाँ कामिनी भाभी की एक सलाह मैंने याद रखा था, जैसे ही दोनों के हथियार बाहर निकले मैंने जोर से अपनी चूत और गांड दोनों भींच ली जिससे एक बूँद भी मलाई बाहर न निकले, और भींचे रही। 


भाभी ने बोला था की किसी जवांन होती ;लड़की की चूत और गांड के लिए इससे अच्छा टॉनिक कोई नहीं। 
,
हाँ एक बात और जब चन्दा दिनेश को खेत से बाहर छोड़ने गयी थी, सुनील ने मुझसे एक जरुरी बात की और तीन तिरबाचा भरवा लिया उसके लिए। 

बताउंगी न, एक बार चन्दा को जाने तो दीजिये। 


मैं उठ नहीं पायी, किसी तरह सुनील और चन्दा ने मुझे खड़ा किया और दोनों के कंधे के सहारा लेकर मैं चल रही थी। 





एकदम जैसे गौने की रात के बाद ननदें अपनी भौजाई को किसी तरह पकड़ कर सहारे से, पलंग से उठा के ले आती हैं। 


सुनील तो गन्ने के खेत से बाहर निकल के जहां अमराई आती है वहीँ मुड़ गया, हाँ इशारे से उसने अपने वादे की याद दिलाई और मैंने भी हलके से सर हिला के, मुस्करा के हामी भर दी। 

चन्दा भी घर के दरवाजे के बाहर से ही निकल जाना चाहती थी, पर दरवाजा खुला था और भाभी की माँ ने उसे बुला लिया। 

हाँ उसके पहले वो मुझे बता चुकी थी की उसके यहाँ कोई आने वाला है इसलिए शाम को तो किसी भी तरह नहीं आ सकती और कल भी मुश्किल है। 


भाभी की माँ ने उससे क्या सवाल जवाब किये अगले पार्ट में।
Reply
07-06-2018, 01:40 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
अरे बाहर से ही निकल जाओगी क्या, कितने यारों को टाइम दे रखा है, अंदर आओ, हमारी बिटिया को भूखा ही रखा या, .... "



एक साथ आधे दरजन सवाल भाभी की माँ ने चन्दा के ऊपर दाग दिए। 



वो आँगन में चटाई पे नीम के पेड़ के नीचे लेटी, गुलबिया से तेल लगवा रही थीं, साडी उनकी घुटनों से भी बहुत ऊपर तक उठी थी और मांसल चिकनी गोरी जाँघे खुली साफ़ दिख रही थीं। पास में ही बसंती बैठी चावल बिन रही थी और तीनो लोग 'अच्छी अच्छी ' बातें कर रहे थे। 


मेरे घुसते ही वो तीनों लोग खड़े हो गए और माँ तो एकदम मेरे पास आके, ऊपर से नीचे तक, अपनी एक्स रे निगाहों से देख रही थीं। और मैं श्योर थी उन्हें सब कुछ पता चल गया होगा। मैं मुश्किल से अपनी मुस्कराहट रोक पा रही थी, जिस तरह से उन्होंने चन्दा को हड़काया। 

चन्दा कुछ जवाब देती उसके पहले ही वो तेल पानी लेकर गुलबिया और बसंती के ऊपर पिल पड़ीं,

" कइसन भौजाई हो, अरे ननद घूम टहलकर लौटी है, ज़रा हालचाल तो पूछो, चेक वेक कर के देख लो "

उनका इतना इशारा करना काफी थी, गुलबिया पहले ही मेरे पीछे आ के खड़ी हो गयी थी। मेरे पिछवाड़े की दीवानी थी वो इतना तो मैं समझ गयी ही थी। 


गचाक, गचाक, ... 


जब तक मैं कुछ सोचूं, समझूँ सम्हलु, गुलबिया ने मेरी बित्ते भर की छोटी सी स्कर्ट ऊपर की और दो उँगलियाँ पिछवाड़े अंदर, एकदम जड़ तक। 

उसने चम्मच की तरह मोड़ा, और सीधे अंदर की दीवारों से जैसे कुछ करोच कर निकाल रही हो, फिर गोल गोल जोर लगा के घुमाने लगी। 

बसंती क्यों पीछे रहती। उसकी मंझली ऊँगली मेरी खुली स्कर्ट का फायदा उठा के सीधे बुर के अंदर और अंगूठा क्लिट पे,  

मैं गिनगिना उठी। 

दो मिनट तक जबरदस्त ऊँगली कर के गुलबिया ने पिछवाड़े से उंगली निकाली और सीधे भाभी की माँ को दिखाया,

सुनील और दिनेश की मलाई से लबरेज थी, लेकिन सिर्फ मलाई ही नहीं मक्खन भी था मेरे अपने खजाने का,



तीनो जोर से मुस्कायी, गुलबिया बोलीं,  

" लगता है कुछ तो पेट में गया है। ऊपर वाले छेद से नहीं तो नीचे वाले से ही, गया तो पेट में ही है। "

और तब तक बसंती ने भी बुर में से ऊँगली निकाल ली। 


वो भी गाढ़े सफ़ेद वीर्य से लिथड़ी थी। 





ख़ुशी से भाभी की माँ का चेहरा दमक रहा था और पता नहीं उन्होंने गुलबिया को आँख मारी ( मुझे तो ऐसा ही लगा ) या खुद गुलबिया ने, वो मक्खन मलाई से लदी ऊँगली मेरे मुंह में, .... 

और तभी मैंने देखा की मेरी भाभी और चंपा भाभी भी आँगन में किचन से निकल कर आ गयी थीं और दोनों मेरी हालत देख कर बस किसी तरह हंसी रोक रही थीं। 

मेरी भाभी, आज कुछ ज्यादा ही, … बोलीं,


" मैंने बोला था न जब ये लौटे तो आगे पीछे दोनों छेद से सड़का टपकना चाहिए तब तो पता चलेगा न की सोलहवें सावन में भाभी के गाँव आई हैं। "



और जैसे उनकी बात के जवाब में,... 

अबतक तो मैंने चूत और गांड दोनों ही कस के सिकोड़ रखी थी। जो कटोरे कटोरे भर मलाई सुनील, दिनेश ने मेरे गांड में चूआया था एक बूँद भी मैंने बाहर निकलने नहीं दी थी। 



लेकिन जैसे ही गुलबिया और बसंती की उँगलियों ने अगवाड़े पिछवाड़े सेंध लगायी, बूँद बूँद दोनों ओर से मलाई टपकने लगी।
मेरी भाभी खुश,

चम्पा भाभी खुश लेकिन,
Reply
07-06-2018, 01:41 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
भाभी की माँ



सबसे ज्यादा खुश, माँ। 

मैंने जल्दी से पूरी ताकत लगा के चूत और गांड दोनों कस के भींचा। आखिर कामिनी भाभी की शिष्या थी,  

लेकिन रोकते रोकते भी, चार पांच बूँद गाढ़ी थक्केदार, सफ़ेद रबड़ी आगे मेरी गोरी चिकनी जाँघों से फिसलती, घुटनों के नीचे पहुँच गयी। और उससे भी बुरी हालत पिछवाड़े थी जहां लिसलिसाता मक्खन मलाई के थक्के,चूतड़ को गीला करते, मेरी मखमली पिंडलियों तक पहुँच गए.


भाभी की मां ने मुझे कस के अंकवार में भींच लिया था जैसे मैं कोई जग जीत के लौटी हूँ मैं। 

बसंती और गुलबिया की उँगलियों के हटने के बाद स्कर्ट ने फिर अगवाड़ा पिछवाड़ा ढँक लिया था। 





टॉप हटा तो नहीं लेकिन जैसे प्यार दुलार में, भाभी की माँ सीधे टॉप के अंदर,

और मुझे ही नहीं सबको, मेरी भाभी, चम्पा भाभी, बसंती और गुलबिया सब को अंदाज था की ये कतई वात्सल्य नहीं बल्कि शुद्ध कन्या रस प्रेम है। 

मुझे अब अंदाजा होरहा था की माँ को कच्ची अमिया का पुराना शौक है। लेकिन मुझे भी अब इस खेल तमासे में बहुत मजा आ रहा था। 

ऐसा नहीं था मुझे ये सब मालूम नहीं था, मेच्योर औरतें और कच्ची कलियाँ, ... 

इस्मत आपा की रजाई मैंने कब की पढ़ी थी और कितनी बार पढ़ी थी। लेकिन कहानी पढ़ने और कहानी का हिस्सा बन जाना कदम अलग है। 

थोड़ी देर तक तो उनका हाथ मेरी कच्ची अमिया पर था पर धीमे धीमे उनकी उँगलियाँ अपने को रोक नहीं पायी। 

भाभियाँ, उनकी हरकते देखकर मुश्किल से अपनी हंसी दबा पा रहा थीं, लेकिन उनके ऊपर कोई असर नहीं हो रहा था, उलटे उन्होंने सबकी हड़का लिया, ख़ास तौर से मेरी भाभी को,





' तुम लोग न खाली मेरी बिटिया के पीछे पड़ी रहती हो। तुमने बोला था न आगे पीछे दोनों ओर, तो हो गया न बिस्वास, अरे आज कलजुग में ऐसी ननद मिलना मुस्किल है जो भौजाइयों की सब बातें माने, ऐसी सीधी लड़की कहाँ मिलेगी जो किसी को भी कभी भी किसी भी बात के लिए मना नहीं करती। बेटी मानती हो न भौजाइयों की बात, बोल दो सबके सामने, ... "


और मैंने बिना कुछ सोचे झट से हामी में सर हिला दिया।

मेरा ध्यान तो मां की उँगलियों पर था जो अब खुल के मेरे छोटे छोटे निपल टॉप के अंदर रोल कर रहे थे। 



वो आलमोस्ट खींच कर दीवाल से सटी, नीम के पेड़ के नीचे बिछी चटाई पर ले आईं और उन्होंने और गुलबिया ने मिल कर मुझे वहां बैठा दिया, जहाँ थोड़ी देर पहले गुलबिया उन्हें कड़ुआ तेल लगा रही थी। 

" अरे कइसन भौजाई हो बेचारी कितना थकी लग रही है तोहार ननद, तानी ओकर गोड़ ओड मीज दो, दबा दो, थकान उतर जायेगी उसकी। " उन्होंने गुलबिया से बोला 

लेकिन जवाब मेरी भाभी ने दिया,

" हाँ ठीक तो कह रही हैं माँ, पता नहीं कितनी देर बिचारी ने अपनी लम्बी लम्बी टाँगे उठायी होगी, जाँघे फैलाई होगी " फिर उन्होंने सवाल मुझसे पूछ लिया,

" टाँगे उठा के या फिर कुतिया बना के भी, .. "

और अबकी फिर जवाब भाभी की माँ ने दिया मेरी ओर से। मेरी वो सबसे बड़ी वकील थीं घर में। 

" अरे टाँगे उठा के, कुतिया बन के खुद ऊपर चढ़ के, ... मेरी बेटी को समझती क्या ही जबतक यहां से जायेगी ८४ आसान सीख भी लेगी और प्रैक्टिस भी कर लेगी। सारी की सारी स्टाइल ट्राई किया होगा इसने हर तरह से मजा लिया होगा, ये कोई पूछने की बात है। थोड़ी देर आराम करने दो न बिचारी को, गुलबिया चल तेल लगा। सब थकान उतार दे। "

और मुझे पकड़ के चटाई पर लिटा दिया, एक छोटी सी तकिया भी सर के नीचे लगा दिया। 

गुलबिया ने तेल लगाना शुरू किया और वास्तव में उसके हाथों में जादू था।
Reply
07-06-2018, 01:41 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
गुलबिया








गुलबिया ने तेल लगाना शुरू किया और वास्तव में उसके हाथों में जादू था।
……..
उसकी उँगलियों में गदोरी में जैसे कोई दर्द खींचने की मशीन लगी हो, सारा दर्द, थकान एक झटके में उसने खींच लिया। 

जिस तरह से दिनेश ने गन्ने के खेत में मिटटी के ढेलों के ऊपर रगड़ा था, पोर पोर दुःख रहा था, चला नहीं जा रहा था। एक कदम रखती तो चिल्हक उठती, लगता था गांड में किसी ने लकड़ी का मोटा पिच्चड़ ठोंक दिया हो। थकान से देह टूट रही थी। 

लेकिन सबसे पहले पैर के तलुओं में फिर पैर की उंगलियों और मेरी मांसल पिंडलियों पे जिस तरह उसने अपनी उँगलियों से कस के दबा दबा के मालिश की, बस कुछ दी देर में थकान गायब। 


थोड़ी ही देर में गुलबिया के खेले खाये हाथ मेरे किशोर घुटनों के ऊपर तक पहुँच गए थे और वो बोली,



" अरे ई स्कर्ट तो बहुत महंग होई कहीं तेल वेल लगा गया तो,... " झिझकते हुए वो बोली और डांट खा गयी मां से जो मेरे बगल में बैठी मेरा सर सहला रही थीं। 



" अरे ई बिचारी इतनी थकी है, तू कइसन भौजाई हो, ई सब बात कहीं ननद से पूछी जाती है, उतार दो। "



मैंने आँखे कब की बंद कर रही थी और बस इतना लगा की सरसराती स्कर्ट मेरी जाँघों से फिसल कर नीचे सरक गयी। 


असली थकान जाँघों में थी, कितनी ताकत लगा के सुनील के मोटे खूंटे के ऊपर मैं चढ़ी थी, फिर पूरी ताकत से धक्के भी मैंने मारे थे। 

लेकिन गुलबिया के हाथ वहां पहुँचते ही दर्द, थकान एकदम जैसे उड़न छू। 

मुझे नींद आने लगी। आँखे वैसे ही बंद थी और अब नींद के मारे खोलना मुश्किल हो रहा था। 

बहुत आराम मिल रहा था, पता नहीं कित्ते देर तक वो ऐसे ही, फिर उसने दोनों जाँघों को खूब दूर दूर फैला दिया और एकदम ऊपरी हिस्से में भी अंगूठे और तरजनी से दबा दबा के,
Reply
07-06-2018, 01:41 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
बहुत आराम मिल रहा था, पता नहीं कित्ते देर तक वो ऐसे ही, फिर उसने दोनों जाँघों को खूब दूर दूर फैला दिया और एकदम ऊपरी हिस्से में भी अंगूठे और तरजनी से दबा दबा के,
... 
टाइम का अहसास कब का खत्म हो गया था। माँ भी हलके हलके मेरा माथा दबा रही थी, सहला रही थी। 

मैं एकदम से सो गयी थी, फिर भी पता नहीं शायद सपने में या सच में, ... माँ के फुसफुसाने की आवाज सुनी। वो गुलबिया से बोल रही थीं,







अरे अइसना कच्ची कली रोज रोज नहीं मिलती अरे होंठों का इस्तेमाल करो, चूस कस के, पूरा शहद निकाल ले। "

बस मुझे गुलबिया की जीभ की नोक का अहसास हुआ, ....'वहां' नहीं बस उसके ठीक बगल में जैसे वो योनि द्वीप की परिक्रमा कर रही हो, देर तक। 


नींद में भी मैं गिनगिनाती रही, सिसकती रही, बस लगता था कब वो अपनी जीभ सीधे वहां ले जाए। 

थकान तो वहां भी थी, लेकिन गुलबिया को कौन समझाए समझाये उसे तो बस तड़पाने में मजा मिल रहा था 


और फिर अचानक, सडप सडप, ... जैसे कोई लंगड़े आम की फांक फैला के चाटे बस वैसे,

नीचे से ऊपर तक, फिर ऊपर से नीचे तक, ... 




सच में इस ' मालिश ' से मेरी गुलाबो की थकान भी एकदम दूर हो गयी बल्कि कुछ ही देर में वो रस बहाने लगी। 


मैं अभी भी आधी से ज्यादा नींद में थी, और गुलबिया ने जो गुलाबो की थकान दूर की तो नींद और गहरी सी हो गयी। 

आँखे एकदम चिपक गयी थी, देह इतनी हलकी थी की जैसे हवा में उड़ रही हूँ। बस सिर्फ गुलबिया की जीभ का अहसास मेरी गुलाबो पर हो रहां था,


उसे मुझे झाड़ने की जल्दी नहीं थी, आराम से धीमे धीमे बस वो चाट रही थी हाँ कभी छेड़ते हुए जैसे कोई लौंडा लण्ड ठेले, जीभ की नोक बुर में ठेल देती। 





पांच मिनट, पचास मिनट मुझे कुछ अंदाज नहीं था, मैंने एक बार भी आँख नहीं खोली।
और फिर कुछ ऐसा हुआ जो सोलह सावन में आज तक नहीं हुआ था,

चंदा, बसंती, कामिनी भाभी, चम्पा भाभी, कितनो ने न जाने कितनी बार मेरी मखमली गुलाबो का रस चाटा था, चूसा था, लेकिन जैसा लग रहा था, वैसे आज तक कभी नहीं लगा था। 

और मस्ती में चूर मैं आँख भी नहीं खोल सकती थी। पूरी देह काँप रही थी, मस्ती में चूर थी। कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या हो रहा है। लग रहा था अब झड़ी तब झड़ी। 

थोड़ी खुरदुरे दार जीभ, खूब कस `के रगड़ रगड़ कर, और रफ़्तार कितनी तेज थी, मैं ऐसी गीली हो गयी थी की बस,

" गुलबिया, प्लीज थोड़ा सा रुक जाओ न, क्या कर रही है, नहीं करो न, लगता है, ... ओह्ह आहह, नहीं ई ई ई ई, ... " मैं आँखे बंद किये बुदबुदा रही थी, बड़बड़ा रही थी। 



लेकिन कुछ असर नहीं पड़ा। 

चाटना और तेज हो गया, उसी की संगत में मेरे मोटे मोटे चूतड़ भी ऊपर नीचे, ऊपर नीचे,... 

जब नहीं रहा गया तो मैं जोर से चीखी,  

"ओह्ह आहह, नहीं नही रुको न, बस्स, गुलबिया, मेरी अच्छी भौजी, मेरी प्यारी भौजी, बस एक मिनट, ... रुक जाओ। '

किसी ने जोर से मेरे निपल खींचे और कान के पास आवाज आई, गुलबिया की। .. 


मेरे कुछ समझ में नहीं आया, बजाय टांगों के बीच, गुलबिया सर के पास, .... 


" अरे मेरी बाँकी छिनार ननदो, जरा आँख खोल के देख न "

मेरी आँखे फटी रह गईं। 
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Lightbulb Antarvasna Sex kahani वक़्त के हाथों मजबूर sexstories 207 66,126 Today, 04:05 AM
Last Post: rohit12321
Thumbs Up bahan sex kahani बहन की कुँवारी चूत का उद्घाटन sexstories 44 13,240 Yesterday, 11:07 AM
Last Post: sexstories
mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी ) sexstories 59 56,917 04-20-2019, 07:43 PM
Last Post: girdhart
Star Kamukta Story परिवार की लाड़ली sexstories 96 41,324 04-20-2019, 01:30 PM
Last Post: sexstories
Thumbs Up Sex Hindi Kahani गहरी चाल sexstories 89 80,024 04-15-2019, 09:31 PM
Last Post: girdhart
Lightbulb Bahu Ki Chudai बड़े घर की बहू sexstories 166 241,306 04-15-2019, 01:04 AM
Last Post: me2work4u
Thumbs Up Hindi Porn Story जवान रात की मदहोशियाँ sexstories 26 25,615 04-13-2019, 11:48 AM
Last Post: sexstories
Star Desi Sex Kahani गदरायी मदमस्त जवानियाँ sexstories 47 34,509 04-12-2019, 11:45 AM
Last Post: sexstories
Exclamation Real Sex Story नौकरी के रंग माँ बेटी के संग sexstories 41 31,353 04-12-2019, 11:33 AM
Last Post: sexstories
Lightbulb bahan sex kahani दो भाई दो बहन sexstories 67 31,273 04-10-2019, 03:27 PM
Last Post: sexstories

Forum Jump:


Users browsing this thread: 1 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


naklee.LINGSE.CHUDI.Sex.storysbehan ke sath saher me ghumne ghumte chudai ki kahaniचूत राज शरमाsex baba: suhaagan fakesnanga Badan Rekha ka chote bhai ko uttejit kiya Hindi sex kahaniRaste me moti gand vali aanti ne apne ghar lejakar gand marvai hindiperm fist time sex marathiगरल कि चडि व पेटियो बेटे के साथ चुदना अच्छा लगता हैsexbaba + baap betiसेक्स बाबा लंबी चुदायी कहानीnidhhi agerwal nude pics sexbabamaa ko uncle ne gumne tour par lejakar chudai ki desi kahaniyachut faadna videos nudeSEXBABA.NET/PAAPA AUR BETIsex కతలూ తమనDadaji Ne ladki ko Khada kar Pyar Se Puch kar kar sexy chudai HD video thamanna sex photo sex baba page45Hindhi bf xxx mms ardio video xxxnx.sax.hindi.kahani.bikari.ge.hot sexi bhabhi ne devar kalbaye kapde aapne pure naga kiya videoxxxDesi girls mms forumssali.ki.salwar.ka.nara.khola.Meri chut ki barbadi ki khani.antarvasna chachi bagal sungnaBest chudai indian randini vidiyo freemoot pikar ma ki chudai ki kahaniaghusero land chut men mereबुरचोदूJabradastee xxxxx full hd vneha sharma nangi chudai wali photos from sexbaba.comचूतसेKamukata mom new bra ki lalachpriyanka chopra sexbaba.comSex videoxxxxx comdudha valeWww orat ki yoni me admi ka sar dalna yoni fhadna wala sexxxxxbf Hindi mausi aur behan beta ka sex BF Hindiअँधी बीबी को चुदबाया कामुकताSoumay Tandon sexbabcandle jalakr sex krna gf bfaurat.aur.kutta.chupak.jode.sex.story.kutte.ki.chudaidard horaha hai xnxxx mujhr choro bfSara ali khan sexbabaXxx desi vidiyo mume lenevaliaisi sex ki khahaniya jinhe padkar hi boor me pani aajayehindi sex story sexbabaantarvasna baburaosexy.cheya.bra.panty.ko.dek.kar.mari.muth. DASE.LDKE.NAGE.CHUT.KECHUDAE.zim traner sex vedeo in girldever and bhabhi ko realy mei chodte hue ka sex video dikhao by sound pain35brs.xxx.bour.Dsi.bdoभाई बाप ससुर आदि का लंबा मोटा लन्ड देखकर चुदवा लेने की कहानीआंटी के नखरें चुदाई के लिए फ़ोटो के साथyoni finger chut sex vidio aanty saree vidioma ki chut mari bhosdhi kewww.comXXX 50saal ki jhanton wala chut Hindi stories.ingeeta ne emraan ki jeebh chusiaisi aurat, ka, phone, no, chahiye jo, chudwana, chagrin, hoनागडी पुच्चीkahanichoot chudae baba natin kaतब वह सीत्कार उठीAnsochi chudai ki kahaniमैंनें देवर को बताया ऐसे ही बूर चोदता था वोxxxxbf boor me se pani nikal de ab sexxmaushi aur beti ki bachone sathme chudai kistrict ko choda raaj sharma ki sex storyXXX noykrani film full hd downloadAnsochi chudai ki kahaniचाची की चुतचुदाई बच्चेदानी तक भतीजे का लंड हिंदी सेक्स स्टोरीज सौ कहानीयाँanti chaut shajigcold drink me Neend ki goli dekar dusre se chudvayawww sexbaba net Thread E0 A4 AD E0 A4 BE E0 A4 AD E0 A5 80 E0 A4 95 E0 A4 BE E0 A4 B0 E0 A5 87 E0 A4Sex stories of bhabhi ji ghar par hai in sexbabaसोते समय लडकी की चुची लडका पकडता है फोटोDadi bra पेहना Sex hindi khaniमेरे पिताजी की मस्तानी समधनma sa gand ke malash xxx kahani comgeeta ne emraan ki jeebh chusiMatherchod ney chut main pepsi ki Bottle ghusa di chudai storyRandiyo ke chut ko safai karna imageGARAMA GARAM HDSEX .COMGav ki ladki chut chudvane ke liye tabiyat porn videoxxxxbf Hindi mausi aur behan beta ka sex BF Hindi