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Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
09-03-2018, 08:03 PM,
#51
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
खानदानी चुदाई का सिलसिला--17

गतान्क से आगे..............

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा इस कहानी का सत्रहवाँ पार्ट लेकर हाजिर हूँ

''बाबूजी मुझे आपका ये फ़ैसला मंज़ूर नही है. हम 3नो भाई एक छत के नीचे रहेंगे और एक ही बिज़्नेस करेंगे. मैं आपका फ़ैसला नही मान सकता.'' राजू अचानक से ये सब बातें सुन के स्तब्ध था.

''जी बाबूजी मैं भी राजू भैया के साथ हूँ. मुझे आपका ये फ़ैसला नही मानना'' सुजीत भी बोल पड़ा.

संजय ने सिर झुकाया हुआ था. वो कुच्छ सोच में था. फिर वो बोला. ''बाबूजी आपकी आग्या सिर माथे. आपने जो कहा उसके पिछे कुच्छ गहरी बात है. पर मैं इसमे आपसे कुच्छ कहना चाहता हूँ. आप बिज़्नेस का बटवारा ना कीजिए. हम 3नो भाइयों की अपनी अपनी स्ट्रेंत हैं और कमियाँ भी. पर हम 3नो मिलके बहुत अच्छे से काम करते हैं. आपको लगता है कि अगर आगे कोई दिक्कत होगी तो आप लॉयर से बात करके कुच्छ पेपर्स बनवा लीजिए और हम 3नो उसको साइन कर देंगे. पर फिज़िकली हमे एक साथ काम करने दीजिए. दूसरे घर में जगह कम है ये मैं मानता हूँ. अभी के लिए सब ठीक है. अगर करवाना है तो इसी घर में हम कुच्छ रूम्स एक्सट्रा बनवा लेंगे. एक फ्लोर और बनाई जा सकती है. या बाहर इसी घर से जुड़ते हुए कुच्छ रूम्स और बनाए जा सकते हैं. बस मुझे यही कहना है.'' संजय ने वापिस अपना सिर झुका लिया.

बाबूजी 3नो भाईओं की बातें सुन के भाव विभोर हो गए. उन्होने 3नो को अपने गले से लगा लिया. ''ठीक है मेरे बच्चों जो संजय ने कहा मैं उससे सहमत हूँ. तुम तीनो एक साथ रहो और आगे बढ़ो इससे ज़ियादा मेरे लिए खुशी की बात और कोई नही. पर 3 साल के बाद मैं अपनी रिटाइयर्मेंट का प्लान नही बदलूँगा. वो अपनी जगह कायम है.'' बाबूजी ने तीनो के सिर पे बारी बारी हाथ फेरा.

सभी की आँखें नम थी पर मन में खुशी थी. संजय ने 3 ड्रिंक्स और बनाए और भाईओं को पकड़ाते हुए चियर्स किया. ''बाबूजी ये हमारे परिवार की खुशी के लिए''. उसके ऐसा करने से माहौल जो कि सीरीयस हो गया था फिर से लाइट हो गया. ड्रिंक्स काफ़ी हो चुकी थी और सभी को नशा हो चुका था. संजय अब थोड़े मस्ती में आ गया था. ''बाबूजी आपसे एक बात कहनी थी पर मौका नही मिला था. दरअसल ये बात हम 3नो को कहनी थी पर आपके साथ अकेले में करनी थी. अच्छा हुआ आज ही मौका बन गया. राजू भैया बाबूजी को पिक्निक की बात बताइए ना.'' संजय सोफा पे आधा लुड़का हुआ था और मुस्कुरा रहा था.

''ह्म्‍म्म..नही रे तू बता मैं नही बता सकता..बाबूजी की छड़ी से मार नही खानी मुझे..'' राजू बोला.

''बताओ क्या बात है जो तुम नही बता सकते..मैं भी तो सुनूँ कि किस बात पे मैं तुम्हारी पिटाई करूँगा..'' बाबूजी ने सरल स्वाभाव से पुचछा.

''बाबूजी दारस्ल पिक्निक पे हम 3नो से कुच्छ ग़लती हो गई. पर आप सच मानिए वो ग़लती ही थी और कुच्छ नही. हमारा कोई भी ग़लत इरादा नही था....'' राजू बोला.

''अब बता भी नही तो वाकई में छड़ी उठाउँगा'' बाबूजी बोले.

''दरअसल बाबूजी पिक्निक में हम 3नो ने एक साथ एक औरत को ठोका..और वो औरत इस घर की सदस्य नही है....'' राजू बोलते हुए सिर झुकाए बैठा अपनी हँसी दबा रहा था.

''क्याअ..क्या कहा तूने...दोबारा बोल...साले तुम लोगों से सब्र नही हुआ..3नो बहुएँ भी तो सब्र करे बैठी हैं..'' बाबूजी थोड़े उत्तेजित होते हुए बोले.

''बाबूजी ..बाबूजी ..आप गुस्सा मत हो, आराम से पूरी बात सुनिए..मैं बताता हूँ '' और संजय ने फिर पूरी कहानी नमक मिर्च लगा के बता दी. उसकी बातें सुन के बाबूजी का लंड अब तंन गया. सब बातें सुन के उन्हे यकीन हो गया कि ये सब सच है. इसमे लड़कों की कोई ग़लती या शरारत नही. पर शरारत तो हुई थी पर किसने की ये उन्हे समझ नही आया. पूरी बात सुनने के बाद उन्होने फिर से किरण के जाने की बात पुछि और उसने क्या कहा था.किरण का सरला को लेके बोला गया डाइयलोग सुनते ही उन्हे यकीन हो गया कि ये सब सरला का किया धारा था.

''साली छिनाल..मेरे लड़कों को बिगाड़ती है...ये सब तेरी सास का किया हुआ है संजय...साली की चूत में काफ़ी दिन से लंड नही गया तो उसका दिमाग़ उल्टा चलने लग गया है. इसका तो कोई इलाज करना होगा..और वो भी जल्दी ही.'' बाबूजी धोती के उपर से लंड सहलाते हुए बोले.

'' बाबूजी आपकी बात सही है और आपका अंदाज़ा भी. दरअसल गाड़ी में बैठते हुए जो बात उन्होने कही और दूसरे जो गाड़ी में उन्होने किया उससे साफ है कि वो बहुत चुदासी हैं.'' संजय ने फिर गाड़ी में बैठने से लेके घर तक का सारा किस्सा बयान किया.

'' सुजीत तू तो किस्मत का बहुत धनी निकला रे..जो सरला को तेरे लंड के सपने आते हैं. साली को लगता है तेरा दिलवाना ही पड़ेगा...'' बाबूजी ने मुच्छों पे हल्के हल्के ताव दिया और मुस्कुराते रहे.

''बाबूजी एक बात कहूँ ..हम 3नो को चूत तो चाहिए पर जब आपको संयम बरतते हुए देखते हैं तो हममे हिम्मत आ जाती है.'' राजू बोला.

इस्पे बाबूजी ज़ोर से हंस दिए और फिर उन्होने कम्मो और उसकी सहेलिओंके साथ हुई बात का पूरा जिकर कर दिया. बाबूजी की बातें सुन के 3नो भाईओं के मूह खुले के खुले रह गए. उनकी उमर में 3 औरतों को एक साथ संतुष्ट करना....बाप रे बाप....

''बाबूजी अब मुझे समझ आया कि आपकी मूछे इतनी क्यो कड़क हुई पड़ी थी. लगता है हमारे आने से पहले आपने कम्मो की चूत का सेवन किया था...'' सुजीत हंसते हुए बोला.

''कम्मो का नही ....मुन्नी का ..वो अपना काम करवा के चली गई थी ..हां पर अगर तुम लोग गौर से देखते तो धोती पे कम्मो के होंठो का गीलापन नज़र ज़रूर आता...'' बाबूजी भी मुस्कुराते हुए बोले.
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09-03-2018, 08:03 PM,
#52
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
इतनी सब गरम बातें होने के बाद सबके लंड तन्ने हुए थे. आज ये पहली बार हुआ था कि घर के 4 मर्द एक साथ बैठ के चुदम चुदाई की बातें कर रहे थे. रात का 1 बज चुका था और सबकी थरक चरम सीमा पे थी. पर जो भी होना था वो अगले दिन ही होना था. बाबूजी ने ड्रिंक ख़तम किया और सबको सोने को कहा. उनके दिमाग़ में कुच्छ चल रहा था पर क्या ये उन्होने जाहिर नही होने दिया. रात के 2 बजे 4ओं मर्द अपने अपने हाथों का इस्तेमाल करके सो गए.

सनडे की सुबह सरला और 3नो बहुएँ जल्दी उठ गई और कम्मो और मुन्नी को काम पे लगा दिया. घर की सॉफ सफाई चल रही थी जब बाबूजी और सुजीत भी उठ गए और तैयार हो गए. राजू और संजय अभी भी सोए पड़े थे. दोपहर के 12 बज गए थे और अभी तक खाना नही बना था. बाबूजी ने तुरंत ही सबसे कहा कि आज दोपहर का खाना आज बाहर खाएँगे. पर चूँकि शहेर छ्होटा था तो कोई ख़ास अच्छी जगह नही थी पर 20 किमी पे बड़ी सिटी थी. बाबूजी की बात सुन के बहुएँ बड़ी खुश हुई. सब तैयार होने लगे. पर राजू ने जाने से मना कर दिया. उसको रात का हॅंगओवर नही उतरा था. राजू को घर पे छोड़ के बाकी सब सदस्य 2 गाडियो में चल पड़े. सुजीत, मिन्नी और राखी एक गाड़ी में थे और संजय, सखी, बाबूजी और सरला दूसरी गाड़ी में. आज सरला ने एक शिफॉन की लाइट ब्लू साड़ी पहनी थी और साथ में अपने बाल खुले रखे हुए थे. बाबूजी ने भी आज पॅंट कमीज़ पहनी हुई थी और काफ़ी अलग दिख रहे थे. गाड़ी में पिच्छली सीट पे बैठे हुए दोनो अपने अपने ख़यालों में गुम्म बाहर देख रहे थे. संजय और सखी आपस में बातें कर रहे थे.

शहेर के रास्ते में एक जगह पे छ्होटी सी नदी पे एक पुल बना हुआ था जिसकी रिपेर चल रही थी. उसकी वजह से ट्रॅफिक धीमा था. 2 बजे तक सब फॅमिली सिटी में पहुँचे और अपने फेवोवरिट रेस्टोरेंट में जाके खाना खाया. करीब 4 बजे तक खाना पीना ख़तम हुआ तो बाबूजी को अचानक याद आया कि उन्हे अपने एक दोस्त के साथ एक छ्होटी सी मीटिंग करनी है. फोन किया तो पता चला कि वो कुच्छ घंटे के लिए अवेलबल है उसे शाम को उसने एक शादी में जाना था. बाबूजी ने तुरंत प्लान बनाया कि संजय उनको दोस्त के घर छोड़ देगा और मीटिंग ख़तम होने पे बाबूजी उसे फोन कर देंगे. तब तक बाकी सभी लोग थोड़ी शॉपिंग कर लें. संजय और बाबूजी दोस्त के घर चले गए और सुजीत बाकी सभी के साथ एक माल में शॉपिंग के लिए चला गया.

माल नया खुला था तो वहाँ शुरुआती डिसकाउंट सेल लगी हुई थी. 3नो बहुएँ और सरला जल्दी ही शॉपिंग में मगन हो गए और सुजीत वही एक जगह बैठ के उन्हे देखता रहा. उसकी नज़र सरला पे टिकी हुई थी. सरला करीब 5 फ्ट 3 इंच की एक घुटि हुई औरत थी. शायद 40सी के मम्मे होंगे और कमर 35 - 36 की. पर सबसे बढ़िया चीज़ उसके चूतर थे जो कि 40- 42 के करीब थे. उसके चूतर की प्रपोर्षन बहुत बढ़िया थी. जिस तरीके से उनका फैलाव था उतनी प्रपोर्षन में ही वो बाहर भी निकले हुए थे. कुल मिला के एक आम साधारण औरत पर ध्यान से देखने पे उसमे एक आकर्षण था. सुजीत उसके साड़ी में लिपटे बदन को देख के उत्तेजित हो रहा था. साँवले बदन पे नीला रंग अच्छा जच रहा था. सरला और रखी एक साथ शॉपिंग कर रहे थे. सुजीत की नज़रे सरला पे थी और दिमाग़ में संजय की बताई हुई बात. इन्ही ख़यालों में घूम उसका ध्यान राखी की तरफ नही गया. राखी उसे दूर से पुकार रही थी पर जब उसने कोई जवाब नही दिया तो राखी उसकी नज़रों का पिच्छा करने लगी. सुजीत की नज़र सरला की गांद पे थी. राखी एक सेकेंड में ही सब समझ गई. चूँकि राखी सरला के बारे में सब जानती थी इसलिए सुजीत का उसको घूर्ना कुच्छ हद तक उसे समझ आया. राखी के हिसाब से सुजीत भी उतना ही थर्का हुआ था जितना शायद वो खुद.

राखी के दिमाग़ में एक बात सूझी. उसने सरला को नज़दीक बुलाया और उससे एक ड्रेस के बारे में राई माँगी. वो एक बॅकलेस चोली और घाघरे का जोड़ा था. सरला को ड्रेस बहुत अच्छी लगी पर सिर्फ़ एक प्राब्लम थी. उस ड्रेस की फिटिंग कैसे चेक हो. राखी की प्रेग्नेन्सी की वजह से उसे अंदाज़ा नही लग रहा था क़ि ड्रेस उसे फिट होगी या नही.

''आंटी मुझे ये ड्रेस बहुत पसंद है और इसकी कीमत भी ठीक है..आप मेरी हेल्प कर दो एक.'' रखी ने सरला को कहा.

''हां हां बोलो ..क्या हेल्प चाहिए ? मैं करती हूँ ना.'' सरला का मन भी उस ड्रेस पे आ गया था.

''आंटी आप इसे ट्राइ करके देखिए ना ..अगर ये ड्रेस आपको फिट आएगी तो मुझे भी आ जाएगी..'' राखी ने कहा.

''अरी पगली मैं कैसे ट्राइ करूँ..मैं तेरे जैसी थोड़े ही हूँ '' सरला बोली.

''आंटी मेरा साइज़ 40सी है ..आपका भी शायद इतना ही होगा...आप करो ना एक बार ट्राइ..प्लीज़ ..मुझे ये ड्रेस लेने का बहुत मन है'' राखी रुसने का नाटक करते हुए बोली.
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09-03-2018, 08:03 PM,
#53
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
''अच्छा बाबा ठीक है ..साइज़ तो तेरा मेरा एक जैसा है..चल तू कहती है तो ट्राइ करती हूँ .चल आजा मेरे साथ..ट्राइयल रूम में..'' कहते हुए सरला ने ट्राइयल रूम का रास्ता पूछा और राखी के साथ चल पड़ी. सुजीत उन्हे ट्रायल रूम की ओर जाते हुए देखता रहा और थोड़ी देर के बाद उठ के ट्राइयल रूम के आस पास मंडराने लगा.

''आंटी एक बात पुछू..? बुरा मत मानिएगा..'' रखी ने ब्लाउस उतारती हुई सरला को पुछा.

''हाँ पुच्छ तू तो बेटी जैसी है..तेरी बात का बुरा क्यों मानूँगी..'' सरला ने चोली पहनते हुए कहा.

''आंटी मैने सुना है कि बच्चा होने के बाद बूब्स बहुत ढालक जाते हैं..उनका कसाव कम हो जाता है दूध पिलाने से..पर आपका तो इस उमर में भी बहुत अच्छा कसाव है...और उपर से तो आपके 2 बच्चे हैं..'' राखी ने चोली की डोरिओं को पिछे से बाँधते हुए पुछा.

''अररी पगली ...ये तो तेरे हाथ में है.. आम तौर पे बच्चे 1 से 2 साल की उमर तक दूध पीते हैं..उसके बाद तुम अपने बदन का ख़याल रखो...कसाव फिर से वापिस आ जाएगा. मेरी मा ने मुझे एक आयुर्वैदिक तेल का नुस्ख़ा बताया था जिससे मैं रोज़ मालिश करती थी. उस वजह से मेरी स्किन में कसाव बना रहा. जब तुम लोगों के बच्चे हो जाएँगे तो मैं तुम लोगों की मालिश भी करवाउंगी उसी तेल से.'' सरला ने शीशे के सामने चोली को ठीक करते हुए इतराते हुए बोला.

''हाए ऑंटी क्या लग रही हो आप इसमे...क्या निखार आ रहा है ...आंटी मुझे तो लगता है ये ड्रेस आपको ज़ियादा सूट करती है..'' राखी ने सरला को निहारते हुए अपनी तरफ मोड़ा.

''चल पगली ..मेरी भी कोई उमर है ये सब पहनने की..ये तो तुम जवान औरतों के लिए है ..मैं तो 45 से उपर की हो गई..'' सरला के चेहरे पे स्माइल थी और दिल में खुशी.

''नही आंटी सच में आप अपनी उमर से 10 साल छ्होटी लग रही हो. सच्ची आंटी ये ड्रेस आप ले लो..देखो ना इसमे आपके ये कितने अच्छे से फिट हुए हैं..और कैसे उभर उभर के नज़र आ रहे हैं..आप ये घाघरा भी ट्राइ करो. प्लीज़ आंटी ..प्लीज़..मेरे लिए..'' राखी ने सरला से मिन्नत की.

''अच्छा बाबा ठीक है ..तू कहती है तो करती हूँ..पर तू ज़रा उधर मूड जा. मुझे शरम आती है'' सरला ने राखी को दरवाज़े की तरफ मूह करके खड़ा कर दिया.

दरवाज़े पे भी एक फुल लेंग्थ मिरर था और राखी उसमे उनको देख रही थी. साड़ी और पेटिकोट खुलते ही बॅकलेस चोली में सरला का गदराया अधनंगा बदन देख के राखी के मूह में पानी आ गया. जब से प्रेग्नेन्सी हुई थी तब से मिन्नी की चूत का स्वाद नही ले पाई थी और अब सखी की मा उसके सामने अपना बदन दिखा रही थी. एक बार को राखी का मन किया कि उनको पिछे से अपनी बाहों में ले ले पर फिर...खैर उसकी आँखों के सामने लाइट ब्लू कलर की नेट वाली सेक्सी पॅंटी में सरला खड़ी अपनी पॅंटी के एलास्टिक को अड्जस्ट कर रही थी. पहले कमर के आस पास फिर टाँगो के आगे और चूतदो के पिछे से अच्छे से एलास्टिक में उंगलियाँ डाल के कंफर्टबल हुई. उसके बाद उसने घाघरा उठाया और अड्जस्ट करते हुए नाडा बाँधा.

''क्यों री..ऐसे क्या घूर घूर के देख रही थी मुझे...मैने सब देखा शीशे में...'' सरला ने मुस्कुराते हुए राखी को छेड़ा.

''आंटी सच में अगर मैं लड़का होती तो आज आपकी खैर नही थी...सच्ची में आप इस उमर में भी इतनी सेक्सी और खिली हुई हो...मेरा तो मन डोल गया एक बार को कि मैं अभी के अभी ....वाआह आप क्या लग रही हो इसमे..मेरा तो सीटी मारने का मन कर रहा है..आंटी..यू आर लुकिंग वंडर्फुली सेक्सी...मम्मूऊुआहह ..मज़ा आ गया..'' राखी ने सरला की तारीफ़ के पुल बाँध दिए और उसकी कमर को पकड़ते हुए सरला के गाल पे एक ज़बरदस्त चुम्मा दे डाला. राखी की लिपस्टिक के निशान गाल पे लग गए और सरला झेंप गई.

''चल चल पागल ..मैं ऐसी भी सेक्सी नही हूँ ...देख मेरा पेट कितना बाहर है और ये मेरी बॅक...इस ड्रेस में तो और भी फूली फूली लग रही है..मैं नही लूँगी ये ड्रेस...मैने तेरे लिए ट्राइयल किया था सो अब तू देख ले कि तुझे फिट आ जाएगी या नही..बस ये चोली थोड़ी टाइट है...पर तू अड्जस्ट करवा लेना..और अगर ये घाघरा थोड़ा और नीचे होता तो और अच्छा था. और मेडम इसको पहनने के साथ तो ब्रा भी उतारनी पड़ेगी...इसमे तो बॅक है ही नही...'' सरला अपनी ब्रा के स्ट्रॅप को दिखाते हुए बोली.

''अर्रे आंटी ..क्या बात कर दी आपने..आप पे ये ड्रेस बहुत अच्छी लग रही है...इसे आप ही रखो..अगर ये आपको थोड़ी टाइट है तो बच्चे के बाद तो मेरे और बड़े हो जाएँगे तो मुझे तो ये बिल्कुल भी नही आएगी...आपका क्या है ..आपका साइज़ तो अब चेंज होगा नही..हहहे..हे..हे..बस एक ही शर्त पे होगा ...पर...खैर आप ले लो और आप ये ब्रा के चक्कर को छोड़ो ..इसमे कुच्छ नही रखा...आजकल तो ज़माना बदल गया है..वैसे भी चोली में आगे इतनी कारीगरी है कि आगे से तो पता चलेगा नही और पिछे आप ये दुपपटे से ढक के रखना...देखो ना आंटी ये दुपट्टा भी कितना हेवी और सुंदर है...'' राखी ने दुपट्टा गर्दन और पीठ पे अड्जस्ट करते हुए कहा.

]अब सरला अपने आपको अच्छे से शीशे में देखने लगी. वाकई में ड्रेस उसपे सूट कर रही थी. चोली तंग थी पर ब्रा उतारने के बाद ठीक लगेगी. दुपट्टा हेवी होने की वजह से उसकी पीठ को अच्छे से कवर कर रहा था. क्लीवेज भी ज़ियादा गहरी नही थी..बस 1 इंच की दरार दिख रही थी. कलर के हिसाब से उसको रेड और ब्लॅक का कॉंबिनेशन सूट कर रहा था. प्राब्लम सिर्फ़ घाघरे की थी जो कि घुटनो से जस्ट नीचे तक ही था. सरला के कॅव्स और पैर पूरे दिख रहे थे. हालाँकि उसके कॅव्स पहले की तरह सुडोल नही थे पर किसी भी तरीके से वो बुरे भी नही लग रहे थे. बहुत दिन के बाद कोई ड्रेस पहेन के सरला सेक्सी महसूस कर रही थी.

''अब बस भी करो आंटी..कहीं आपकी खूबसूरती देख के शीशा ही ना टूट जाए...हे हे..हे..'' राखी हँसती हुई पिछे से सरला से लिपट गई और उसकी कमर के आसपास हाथ फेरने लगी.

क्रमशः................................................
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09-03-2018, 08:05 PM,
#54
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
खानदानी चुदाई का सिलसिला--18

गतान्क से आगे..............
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा इस कहानी का अठारहवाँ पार्ट लेकर हाजिर हूँ
राखी के टच से सरला रोमांचित हो उठी. उसे क्या पता था कि ये टच मिन्नी को भी पागल करता है. एक सेकेंड के लिए तो जैसे सरला भूल ही गई कि राखी एक मर्द नही औरत है और उसका मन मचल गया. फिर अचानक से दुपट्टे को अड्जस्ट करते हुए उसने अपना गला साफ किया.


''ह्म्‍म्म चल तेरी बात मान लेती हूँ कि ये ड्रेस मुझे फिट है ..वैसे तूने क्या कहा था कि मेरे और बड़े नही होंगे ..अनलेस मैं..क्या मतलब था तेरा..??? शरारती कहीं की..'' सरला ने हल्के से अपने से लिपटी राखी का कान पकड़ा.


''म्‍म्म्मम आंटी अगर आप इस उमर में इन्हे दब्वओगि या ...मूह का इस्तेमाल इन्पे कर्वओगि तभी तो और बड़े होंगे...नही तो जो हैं सो हैं...वैसे मेरा मन कर रहा है ..आप कहो तो...'' राखी ने एक हाथ से उसके मम्मो को दबोचा और दूसरा उसकी कमर और पेट पे फेरा. लास्ट बात बोलते हुए उसकी जीभ होंठो से बाहर निकल के लपलपा रही थी.


''चल बदमाश..तू बहुत खराब है..तेरी मा की तरह हूँ ..कैसी बातें करती है...छियियी....'' सरला रोमांचित मूड में उसको डाँटने का नाटक करते हुए बोली.


''मा जैसी हो ...मा सबसे अच्छी सहेली होती है ...दूसरे मा जैसी हो तो कुच्छ चीज़ें जो मा के साथ नही कर सकती वो आपके साथ तो कर ही सकती हूँ...'' राखी का मन बहुत ललचाया हुआ था और सरला के नरम मम्मे उसके हाथों में बहुत तपिश दे रहे थे. कुच्छ हद तक राखी की चूत भी पनिया रही थी.


''म्‍म्म्ममम...मत कर...चल पिछे हट...मुझे चेंज करने दे...बाहर चल यहाँ बहुत गर्मी है...उम्म...'' सरला ने हल्के हाथों से अपने मम्मे को छुड़ाने की नाकाम कोशिश की और उसकी आँखें 2 सेकेंड के लए मूँद गई.


''चलते हैं आंटी बस एक शर्त पे..एक बार आप ये चोली ब्रा लेस पहनो और फिर चलेंगे....ये ब्रा आपकी ड्रेस की खूबसूरती को खराब कर रही है..वैसे एसी माल में आपको गर्मी लग रही है...क्या बात है आंटी..अंकल की याद आ गई क्या ???'' राखी ने फिर एक बार मम्मो की चिकोटी ली और पिछे को हुई.


''नही रे अब मैं ये ड्रेस चेंज करके साड़ी पहनुँगी...तू जा बाहर...मैं चेंज करूँगी..'' सरला ने मुड़ते हुए राखी की आँखों में देखा. दोनो की हाइट में 3 इंच का डिफरेन्स था और सरला को मूह थोड़े उपर करना पड़ा. नज़रें मिलते ही दोनो को एक दूसरे की भूख का अंदाज़ा हो गया. 1 पल के लए वक़्त ठहेर गया..और ना जाने कैसे राखी की गरम गरम साँस सरला के होंठो को छ्छूने लगी. कंचन और फूफा जी के साथ सेक्स करते हुए सरला ने कंचन के मम्मे और चूत खूब चूसे और चुस्वाए थे पर कभी उसके साथ 1 तो 1 चुम्मि नही ली. जब भी होती तो 3 वे चुम्मि होती जिसमे कि फूफा जी की जीभ के साथ वो दोनो जीभ भिड़ाती थी. पर आज ये एक नयी सिचुयेशन थी..और बहुत अजीब ..पर बहुत ही एग्ज़ाइटिंग...बिना कुच्छ कहे ही सरला की आँखें बंद हो गई और उसके होंठ हल्के से खुल गए. राखी का खूबसूरत चेहरा उसके दिमाग़ में था और ......ये क्या...इतने तपते हुए होंठ...उसके होंठो को जलाते हुए...एक नई तरह की आग उसके बदन को झुलसा रही थी.....इसको ठंडा करने के लए जीभ निकालना ज़रूरी था और देखते ही देखते सरला की जीभ राखी के मूह में नाचने लगी. दोनो के बदन अभी भी दूर थे पर होंठो से जुड़े हुए.


राखी की सेक्सी लिपस्टिक की खुश्बू और स्वाद सरला के नाक और मूह में भर गया. राखी ने आपे सारे स्किल्स दिखाते हुए अपनी जीभ से सरला को मज़ा देना शुरू कर दिया. '''उम्म्म्मह...उउम्म्म्मम...एम्म्म....ऊओमम्म्मममम...स्लुउउरप्प..स्ल्ल्लुर्र्रप्प्प.... उउम्म्म्म ...औंतयययी......म्‍म्म्मममम...राखि...मत कार्रररर....उउम्म्म्मममम स्लूउर्र्रप्प्प्प.....ऊहमम्म्मम मत कारर्र......कुच्छ हो र्हा है....होने दो आंटीयीईयी...इसी खोलो....उउंम्म...स्लुउउर्र्रप्प्प...जीभह स्ल्ल्लूउर्रप्प दूऊऊऊ...मेरे मूह में....ऊहह जल रहा हा....सब...उउंम्म....ऊहह सरला आंटी.....हान्न्न्न्न चूस............बड़े कर दे.....ऊओहमाआ......इतना सुख......रख्ह्ह्हीइ...ऊओह..हान्णन्न्....ऊहह...उउम्म्म्म...'' सरला राखी के किस्सस से पागल हो गई थी. राखी के होंठ जीभ चूस्ते हुए उसे एक नया एहसास हुआ..जो आज तक किसी मर्द ने नही दिया था..एक ऐसा एहसास जो उसके जिस्म में करेंट बन के दौड़ रहा था...क्या मैं लेज़्बीयन भी हू....ऊओह्ह्ह और अगर हूँ तो पहले क्यों नही बनी...ऊहह मा....क्या चूस रही है...मेरे मम्मे लगता है जैसे ...ऊओउउफफफ्फ़...ख़ाआ जाएगी ये तो...ऊऊहहमा....सरला के दोनो हाथ सिर के पिछे शीशे पे फिर रहे थे...उसकी चोली और ब्रा उसके गले तक सिमटी हुई थी..आधी खुली आखों से वो डोर पे लगे शीशे में राखी की छवि देख रही थी. राखी के दोनो हाथ उसके मम्मो को निचोड़ रहे थे. निपल्स पे इतनी नरम जीभ और होंठ आजतक उसको नसीब नही हुई थे. कंचन बहुत अलग थी ाओह उसकी चूचिओ पे रफ अटॅक करती थी क्योंकि आम तौर पे फूफा जी का लंड या तो सरला या कंचन की चूत में होता था. पर यहाँ ऐसा कुच्छ भी नही था.

चूत का ख़याल आते ही सरला का एक हाथ घाघरे के उपर चलने लगा. उसकी चूत बहुत बुरी तरह से पनियाई हुई थी. जैसे ही उसका हाथ चूत पे लगा सरला को एहसास हुआ कि वो कभी भी झर सकती है. उसे रुकना होगा..पर राखी के मन में कुच्छ और ही था. दोनो मोटे मम्मो को साइड्स से पकड़ते हुए उसने दोनो निपल एक साथ सटा दिए और फिर एक अंगूठा दोनो को एक साथ मसल्ने लगा. ऑलरेडी कड़क निपल इस हमले सेऔर कड़क होके बाहर निकल आए. काले निपल देख के राखी ने एक बार फिर अपना मूह पूरी तरह से खोला और दोनो को एक साथ अपने आगे के दांतो में जाकड़ लिया और दाँतों के बीच फँसे हुए निपल्स पे उसने अपनी जीभ चला दी.
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09-03-2018, 08:05 PM,
#55
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
''ऊओउू मा....ऊओह.......ऊऊहह..उउउम्म्म्म..ऊओ..ऑश....'' सरला ने टाँगों को भींचते हुए अपनी चूत पे ज़ोर से अपने दोनो हाथों का प्रेशर बनाया और झरने लगी. उसका बदन काँप उठा और टांगे शिथिल पड़ गई. 2 सेकेंड में ही उसके घुटनो ने उसका साथ छोड़ दिया और वो शीशे से पीठ लगाए सरकती हुई ..झरती हुई ज़मीन पे अपने चूतडो पे बैठ गई. चूत बहुत ज़बरदस्त कंपन्न महसूस कर रही थी. उससे कोई होश नही था. दोनो हाथ चूत को उपर से दबाए हुए थे. पॅंटी और घाघरे के अंदर की लाइनिंग चूत रस से भीग चुके थे. बाल हल्के बिखरे हुए थे और आँखें बंद. खुले हुए होंठो से सिसकियाँ निकल रही थी. घुटनो से मूडी हुई टांगे और अपनी राइट साइड को झुकी हुई पोज़िशन में एक आख़िरी बार सरला ने चूत पे प्रेशर डाला और एक छ्होटी सी पिचकारी उसकी चूत से निकल गई. ओऊऊउउइमा की आवाज़ के साथ सरला वहीं ज़मीन पे लूड़क गई और गहरी गहरी साँसे लेने लगी. आँखें खुली तो राखी उसकी बगल में बैठी उसके बालों में हाथ फेर रही थी और उसके गालों को सहला रही थी. शायद 10 सेकेंड तक वो मस्ती में मदहोश रही थी पर ये 10 सेकेंड और उससे पहले के 15 - 20 सेकेंड उसकी पिच्छले कई महीनो की तड़प का सबसे सुखद अंत थे.

''ऑश राखी तूने ये क्या कर दिया....मैं तो कहीं मूह दिखाने लायक नही रही...ऊहह ..'' सरला थोड़ी घबराती हुई और थोड़ी शरमाती हुई बोली.

''कुच्छ ग़लत नही हुआ आंटी..बस वही हुआ जो आपको रेग्युलर्ली मिलना चाहिए ...और जिसके लिए मैं भी इतने दिन से सब्र किए हुए हूँ...आप ने या मैने कुच्छ ग़लत नही किया..बस किस्मत थी...पर आप बहुत अच्छी हैं..आपको देख के मुझे पता चला कि आने वाले समय में ये सुख मुझे भी मिलेगा...मैं भी ऐसी ही रहूंगी...और आज के सब्र का फल मैने अपनी आखों से देखा ..आपके चेहरे पे...'' रखी ने सरला को कंधों से सहारा देते हुए उठाया. राखी के हाथ उसके उरोजो को हल्के हल्के सहला रहे थे. अचानक गिरने की वजह से निपल्स पे थोड़े दाँत के निशान बन गए थे.

''आइ आम सॉरी आंटी..ये निशान बन गए..दर्द हो रहा हो गा आपको..लाओ मैं क्रीम लगा दूं..'' राखी मम्मे छोड़ अपने पर्स में बॉरोपलुस क्रीम ढूँढने लगी पर क्रीम उसे नही मिली. पर उसे अपना स्पेशल लीप माय्स्टयरिसर मिल गया. ''आंटी आप ये लगा लो...क्रीम शायद नही है..लाओ मैं लगा देती हूँ...सॉरी आंटी दर्द हो रहा होगा...'' राखी ने लिप ग्लॉस को अच्छे से दोनो निपल्स और उनके आस पास लगाया और मसाज किया.

''उउम्म्म्म...निशान का कोई गम नही...वो कौन सा कोई देखेगा..दर्द तो है पर मीठा...डर...ऊओ...मत कर....नही तो फिर से....ऊहहूऊंम्म..मत कर ऱख्ही..देख फिर से कड़क हो गए हैं...'' सरला एक बार फिर से उतावली हो रही थी. उसे हैरानी थी कि इस उमर में भी इतनी जल्दी उसे ऐसी थरक चढ़ रही थी. कंचन के घर पे उससे इतनी जल्दी नही होता था..पर शायद तब इसलिए क्योंकि सब चीज़ें आराम से होती थी और यहाँ टाइम की मारा मारी और ...पर क्या शायद ये राखी का असर था....'''ऊहह कितनी प्यारी है ये...बच्चे के बाद इसके साथ...ऊहह ये सब मैं क्या सोच रही हूँ...पर क्या करूँ ...ये मज़ा भी तो इतना दे रही है...ऊहहमा..चूत में खुजली बढ़ गई तो लंड कहाँ से लूँगी...उठ सरला बहुत हुआ... '''

ये सब सोचते हुए सरला लड़खड़ाती हुई उठ खड़ी हुई और सबसे पहले उसकी नज़र शीशे में अपनी ड्रेस पे गई. चोली और घाघरे पे जगह जगह सिल्वते आ गई थी. घाघरे के अंदर की लाइनिंग गीली हो चुकी थी...अब क्या करें...?? सरला ने फटाफट चोली खोली और उसे पलट के देखने लगी. चोली पे कोई निशान नही था पर अब वो एक यूज़्ड ड्रेस लग रही थी. वापिस करने का तो सवाल ही पैदा नही होता. अब तो ख़रीदनी ही पड़ेगी. सरला के मूह से ये बात सुनते ही राखी की बाछे खिल गई.

''आंटी अब इसे उतारो और ये वापिस पहनो...ये सब मैं पॅक करवा देती हूँ..ये लो कंघी और आप बाल बना के बाहर आओ..आज आप इसी ड्रेस में वापिस जाओगी.'' राखी ने सरला की ब्रा निकाल ली और उसको चोली पहना दी. सरला इससे पहले के ज़ियादा प्रोटेस्ट करती राखी ने उसे पलट के चोली की डॉरियन बाँधनी शुरू कर दी थी. 30 सेकेंड में ही राखी उसे छोड़ के उसका समान इकट्ठा कर के बाहर निकल गई. जल्दी जल्दी में उसने सुजीत को नोटीस नही किया ..जो कि चेंजिंग रूम के नज़दीक पीठ किए कुच्छ ड्रेसस देख रहा था. इससे पहले कि सरला का मन बदले राखी पेमेंट कर देना चाहती थी.

पहली बार चेंजिंग रूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ शायद सुजीत के कानो तक ना पहुँची पर दूसरी बार उसको दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई तो वो मूड गया. जो नज़ारा उसकी आँखे देख रही थी वो सातवें आसमान का था...दुपट्टा भी उस मादक कमर और नंगी पीठ की खूबसूरती को छुपा नही पा रहा था. घाघरे में सीमटे चूतर और भी उभर आए थे और दुपट्टे के उपर हल्के हाथों से बनाया हुआ जूड़ा जिसमे से बालों की एक लट गर्दन के पिच्छले हिस्से को चूम रही थी उस मादक बदन की मादकता को और भी छल्का रही थी.

''कौन है ये परी...क्या ये..सरला...है...ऊऊहह मी गुड्ड्ड....ऊओह..नही ...सुजीत...नूओ मॅन''' खुले मूह से पिच्छवाड़े को निहारते हुए सुजीत का लंड हलचल करने लगा था. लंड की शेप पॅंट में 3 /4 बॅन चुकी थी जब सरला बाहर की चिताकनी लगाते हुए मूडी और सामने मूह खोले कामदेव के दर्शन हुए. एक नज़र सुजीत के चेहरे पे और दूसरी नज़र उसकी पॅंट में बने उभार को देखते ही सरला एक बार फिर से काँप उठी और आँखों में नशा उतर आया. फिर जैसे शरम और लाज ने अचानक उसके दिमाग़ पे दस्तक दी और वो जल्दी जल्दी वहाँ से राखी को ढूँढने निकल पड़ी.

''ये तुमने अच्छा नही किया मेरे साथ राखी.'' राखी की बगल में खड़ी सरला ने दबी हुई आवाज़ में कहा.

''क्या हुआ आंटी मैने ऐसा क्या किया..??'' राखी ने पैसे देते हुए उनको देखा और पुच्छा.

''तेरी वजह से मुझे ये ड्रेस पहेन के निकलना पड़ा और बाहर सुजीत खड़ा था..कैसे देख रहा था मुझे. मैं तो शरम से पानी पानी हो गई. उपर से मेरा पूरा बदन महक रहा है..शुक्र है थोड़ी दूर था नही तो ना जाने क्या क्या सोच लेता वो'' सरला कसमसाते हुए बोली. सुजीत बस 5 फीट की दूरी पे खड़ा उन दोनो को बार बार देख रहा था.
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09-03-2018, 08:05 PM,
#56
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
''ह्म्‍म्म आंटी एक बात बोलूं..सुजीत पक्का मर्द है..और आपको देख के तो कोई भी पक्का मर्द फिसल जाएगा..वैसे एक बात और भी बता दूँ आपको. सुजीत की नाक बहुत तेज़ है. अब तक तो आपकी खुश्बू उसके नाक तक पहुँच ही गई होगी..हे हे हे.. और उसका क्या हाल हुआ होगा वो मैं समझती हूँ..आख़िर बीवी जो हूँ '' राखी ने एक बार फिर मस्ती ली.

''तू पागलों जैसी बाते ना कर ...अपने पति के बारे में कैसे कैसे कह रही है ..और मैं कोई तेरी सहेली नही हूँ..शरम रख कुच्छ तो मेरे को लेके अपने पति के बारे में ऐसी बात करते हुए'' सरला ने मूह बनाया और अपनी साड़ी का पॅकेट कलेक्ट किया.

''आंटी अच्छा एक बात बताओ बस सच सच..और सच्ची बताना. आपको मेरी कसम..''

''हां बोल ..सच बताउंगी ..पर अगर सवाल टेडा हुआ तो जवाब नही दूँगी..ये भी याद रखना ..''

''आंटी अगर सुजीत जैसा सरीखा मर्द आपको आज मिल जाए और प्रपोज़ करे ..मतलब ..आप समझ लो ..तो आप अभी क्या करोगी..'' राखी ने सरला के बालों को जानभूज के संवारते हुए पुछा.

'' मैं उसे एक तमाचा मार दूँगी..'' सरला ने कहा.

''आप झूठ बोल रही हैं..आपने कसम खाई है..'' राखी ने कहा.

''ठीक है तो मैं इस सवाल का जवाब नही दूँगी बाकी तुझे जो समझना है तू समझ, चल अब बाकी सब वेट कर रहे होंगे..'' सरला ने राखी की बाजू पकड़ के खींचा. राखी ने फ़ोन निकाला और सखी से बात की. सखी, मिन्नी और संजय एक कॉफी शॉप में बैठे थे. सरला, राखी और सुजीत भी वहाँ पहुँच गए. सखी ने राखी को आते हुए देखा तो हाथ हिलाया. फिर उसकी नज़र अपनी मा पे पड़ी और उसके हाथ अनायास ही अपने खुले मूह की तरफ चले गए. जब सरला उनकी टेबल के नज़दीक पहुँची तो संजय का मूह खुला का खुला रह गया और मिन्नी के मूह से एक छ्होटी सी खुशी की चीख निकल गई. सखी ने उठ के अपनी मा को गले से लगा लिया और फिर थोड़े पिछे हट के उसे निहारने लगी.

''ऊवू माआ...आप कितनी सुन्दर लग रही हो..ऊओह मुझे नही पता था कि आप ऐसी ड्रेसस भी पहनती हो..म्‍मम्मूऊुआहह..किसी की नज़र ना लगे ...आइ लव यू मम्मा..'' कहते हुए सखी ने उसे 2 - 3 चुम्मियाँ दे दी. सरला बुरी तरह से झेंप गई. पहले तो सुजीत और अब संजय का भी वोई रिक्षन था. अपने ही दामाद को ऐसे देख के उसे बड़ा अजीब सा सुकून मिला. अब उसे यकीन हो गया कि उसकी ढलती जवानी में अभी भी दम है..

''ये तो इसने फोर्स किया तो लेनी पड़ी नही तो मैं कहाँ ये सब पहनती हूँ'' सरला थोड़े झेन्प्ते हुए बोली.

''आंटी आप तो सच में कमाल लग रही हो..काश मैं लड़का होती तो अभी के अभी आपको प्रपोज़ कर देती ..'' मिन्नी ने सरला को अपने बगल में बिठाते हुए कहा.

''अर्रे भाभी फिर तो आपको एक ज़ोर का तमाचा पड़ता..हे हे हे..'' राखी हँसी और एक आँख मारी.

''क्यों पड़ता ..ऐसे कैसे..खूबसूरत औरत को प्रपोज़ करने में बुराई क्या है..इसमे तो उसकी खूबसूरती की तारीफ है..क्यों संजय क्या कहते हो..'' मिन्नी ने कहा.

''हहानन्न..हान्ं सही कहा भाभी..'' संजय सकपकाया.

''देखा संजय ने भी हां कही तो इसका मतलब अब तो आपको मानना पड़ेगा..आंटी कि मैं सही हूँ और तमाचा नही पड़ेगा.'' मिन्नी खिलखिला के हंस दी.

''चुप करो..तुम दोनो ही एक जैसी हो..संजय मेरा बेटा है..दामाद है..शरम करो कुच्छ ..'' सरला ने राखी और मिन्नी दोनो को डांटा.

''ई लो..मैने क्या किया आंटी जो मुझे बिना बात के डाँट रहे हो..और वैसे भी मैने तो सिर्फ़ इतना पुछा था कि सुजीत जैसा कोई आपको प्रपोज़ करेगा तो आप क्या करोगी..अब संजय का नाम तो भाभी ने लिया..मैने थोड़े ही...'' राखी ने रूठने का नाटक करते हुए कहा.

अपना नाम सुन के सुजीत शर्मा गया और संजय उसको देख के मंद मंद मुस्कुरा दिया. संजय भैया की तो लॉटेरी लगने वाली है...अर्रे कहाँ लॉटरी तो सासू मा की लगेगी अगर ....अगर क्या बच्चू तेरी सास है ..शरम कर..सास है तो होगी ..इस टाइम तो माल है माल...खा जाने के मन कर रहा है.. संजय के दिमाग़ में ये सब बाते चल रही थी कि अचानक सखी की आवाज़ ने उसे चौंकाया.

''सुनो कुच्छ खाने का ऑर्डर कर दो ना..बहुत भूख लगी है..'' सखी ने कहा.

''संजय मैं भी चलता हूँ तेरे साथ'' सुजीत भी उठ कर संजय के साथ चल दिया.

''आंटी आप थोड़ी उठोगी ..मुझे फ्रेश होने जाना है..'' मिन्नी ने सरला से रास्ता माँगा.

''चल मैं भी चलती हूँ'' सरला ने एक नज़र राखी को देखा तो जवाब में उसे एक कुटिल मुस्कान मिली.

''एम्म सखी एक बात बोलूं...तेरी मम्मी बहुत टेस्टी माल है री..'' राखी ने होंठो पे जीभ फेरते हुए कहा.

''भाआब्ब्भी...क्या कह रही हो आप ...मम्मी है मेरी...सच में आप तो इतने दिन से थरकि हुई हो कि आपको कोई शरम ही नही रही..वैसे आप ये जीभ क्यों फेर रही थी..?? बताओ बताओ ..कहीं आपने..ऊवू माइ गोड्ड़..'' सखी के हाथ एक बार फिर उसके मूह पे थे और उसकी आँखें फटी हुई थी. राखी ने उसके आख़िरी सेंटेन्स पे उसको आँख मारी थी.

''अभी तो सिर्फ़ आधा नमक चखा है..ये बच्चा हो जाने दे फिर तस्सली से तेरी नमकीन मम्मी को पूरा चखूँगी..सच में मिन्नी भाभी से भी बढ़ के हैं..मस्स्स्त्त्त..'' राखी ने टाय्लेट में जाती हुई सरला को देख के एक चटखारा लिया.

''नूऊ भाभी ..मम्मी को तो छोड़ दो...आप क्या कह रही हो पता है..आइ मीन हाउ कॅन यू...मेरी मा है वो..'' सखी अब थोड़ी बिगड़ गई थी.

''देख मेरी बन्नो तू बिगड़ नही और शांत होके मेरी बात सुन...पहली बात तो जो भी हुआ वो अचानक हुआ..दूसरी अगर तू अपने ससुर के साथ कर सकती है तो मैं तेरी मा के साथ क्या ग़लत है. तीसरे तुझे बाबूजी, कंचन बुआ और फूफा जी का आंटी के साथ का संबंध तो पता ही है. चौथी बात कि आंटी बाबूजी से सिर्फ़ थोड़ी बड़ी हैं और मैने उनकी आखों में वो तड़प देखी है जो कि एक अकेली औरत के दिल में होती है. पता नही आज तक तूने उन्हे सिर्फ़ मा के नाते देखा है ..औरत की तरह नही. मुझे उनपे तरस भी आता है और प्यार भी..और एक बात आंटी को देख के सुजीत और संजय के मूह भी खुले रह गए थे. माना सुजीत पराया है पर संजय तो दामाद है. जब वो इतना सर्प्राइज़्ड हो सकता है तो सुजीत का तो हाल ही अलग रहा होगा. आंटी सेक्सी हैं..और हर सेक्सी औरत के मन में मर्दों की नज़र अपने बदन पे पड़वाने का मन होता है. मूह से नही तो कम से कम आँखों से तो उनकी तारीफ हो.'' और इसके बाद राखी ने चेंजिंग रूम में हुई बात सखी को बता दी.
क्रमशः..........................
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09-03-2018, 08:05 PM,
#57
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
खानदानी चुदाई का सिलसिला--19

गतान्क से आगे..............
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा इस कहानी का उन्नीसवाँ पार्ट लेकर हाजिर हूँ
सखी का मूह खुला का खुला रह गया. उसे यकीन नही हो रहा था. पर फिर उसे अपने और बाबूजी के संबंध समझ आए. सेक्स तो सेक्स है..उसमे रिश्ते नही आते ..ख़ास तौर से एक बार अगर खुला पन आ जाए तो. राखी के मन में कोई पाप तो था नही. सब कुच्छ अचानक हो गया. अब अगर उसकी मा की इच्छा जागृत हो गई है तो उसमे भी क्या ग़लत है. सखी कुच्छ बोली नही पर राखी की बाते चुप चाप सुनती रही. उसके मन में अलग अलग ख़याल थे. उसके चेहरे के भाव बार बार बदल रहे थे. तभी उसने सरला और मिन्नी को टाय्लेट से बाहर आते हुए देखा. साथ ही उसकी नज़र रास्ते में लगे एक टेबल पे बैठे हुए 4 - 5 कॉलेज स्टूडेंट्स पे पड़ी. सरला को देख के उनके मूह भी खुले के खुले रह गए थे और एक लड़के का हाथ अनायास ही अपनी पॅंट के उपर चलने लगा. एक सेकेंड के लए सखी को बहुत गुस्सा आया पर फिर जैसे ही उसने सरला को देखा उसका गुस्सा गायब हो गया. सरला के चेहरे पे एक खुशी और सुकून था जो काफ़ी समय से सखी ने नही देखा था. आज एक नई सरला उसके सामने थी. उसके टेबल पर पहुँचने से पहले सखी ने राखी को हामी भर दी.

''ठीक है भाभी मैं आपके साथ हूँ ..अब आगे देखते हैं उपर वाले को क्या मंज़ूर है..'' सखी ने अपने चेहरे पे स्माइल लाते हुए राखी को देखा. राखी ने उसके कंधे पे हाथ रखते हुए उसे आश्वासन दिया.

15 - 20 मिनट में सबने लाइट स्नॅक्स लिए और माल से बाहर जाने की तैयारी करने लगे. संजय ने बाबूजी को फोन लगाया और उनके बारे में पुछा. बाबूजी ने कहा कि उन्हे कुच्छ समय और लगेगा. जब संजय बाबूजी से बात कर रहा था तो सखी अपने पेट को सहलाते हुए बैठ गई और राखी टेबल पे सिर रख के सो गई. संजय ने वापिस आके बाते की बाबूजी को समय लगेगा. शाम के 5 बज चुके थे और संजय तो रास्ते में ट्रॅफिक जाम की चिंता हो रही थी. संजय ने सखी को पेट पे हाथ फेरते हुए देखा तो पुछा की बात क्या है. सखी ने कहा कि उसे उनेअसिनेस्स लग रही थी और वो लेटना चाहती थी. राखी को सोया देख के सुजीत ने उससे पुछा तो कहने लगी कि उसे भी थकान महसूस हो रही है. तब सखी ने संजय से घर चलने को कहा. संजय ने बाबूजी की बात कही तो सुजीत बोला कि वो बाबूजी को ले आएगा. थोड़ी बहस और डिस्कशन के बाद डिसाइड हुआ कि सुजीत बाबूजी की वेट करेगा और संजय सभी लॅडीस को लेके घर की तरफ रवाना होगा.

सभी पार्किंग लॉट में पहुँचे तो सखी पेट पकड़ के गाड़ी की पिच्छली सीट पे लेट गई. उसने करीब करीब पूरी जगह ले ली थी. संजय ने उसे उठ के बैठने को कहा तो उसने मना कर दिया. अब गाड़ी में संजय के अलावा सिर्फ़ 2 लोग और बैठ सकते थे. मिन्नी अगली सीट पे बैठी और राखी को सुजीत ने अपनी गाड़ी में बैठने को कहा. सरला सखी के साथ पिच्छली सीट पे बैठने ही लगी थी कि अचानक राखी ने पीठ दर्द की शिकायत की और सुजीत को उसकी पीठ की मसाज करने को कहा. शायद प्रेग्नेन्सी की वजह से कमर में दर्द उठ रहा था. ये सब देख के सभी परेशान हो गए. ऐसे में बड़पान्न और समझारी दिखाते हुए सरला बोली.

''संजय तुम एक काम करो. इन 3नो को घर लेके जाओ. मिनी तू पिच्छली सीट पे आजा और सखी का सिर अपनी गोद में रख ले. राखी तू आगे बैठ. मैं सुजीत के साथ तुम्हारे बाबूजी का वेट करती हूँ. हम तीनो आ जाएँगे. वैसे भी तुम लोग स्लो जाओगे तो हम लोग भी पिछे पिछे तुम लोगों को मिल ही जाएँगे.'' सरला ने अब घर की बड़ी बुज़ुर्ग होने के नाते हुकुम सुनाया. इससे पहले कि कोई और बहस होती सरला ने संजय को बाजू से पकड़ के ड्राइवर सीट की तरफ इशारा किया और मिन्नी पिच्छली सीट पे शिफ्ट हो गई. सुजीत ने राखी को अगली सीट पे बिठाया और दरवाज़ा बंद किया.

सबने सुजीत और सरला को बाइ कही और संजय ने ड्राइविंग शुरू की. सुजीत ने बाबूजी को फोन लगाया और सरला सखी को बाइ करते हुए गाड़ी को जाते हुए देखती रही. जब वो ओझाल हो गए तो सरला सुजीत की तरफ मूडी. सुजीत की साइड सरला की तरफ थी और वो बाबूजी को सब बातें समझा रहा था और उनकी इन्स्ट्रक्षन्स को सुन रहा था. पॅंट की लेफ्ट साइड में बना हुआ हल्का उभार एक बार फिर सरला की निगाह को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था....आआआूओ...आआ जाआओ..मेरे पास मेरी आगोश में..................तुम्हे सुख दूँगा............
दोस्तो उधर मे क्या हो रहा है चलो देखते है.......................................................
''भैईयाज़ी ये इस समान का क्या करना है..?'' कम्मो बिस्तर के बगल में खड़ी थी. पैरों में एक पुराना सूटकेस पड़ा था. आज कम्मो ने अपना सबसे सस्ता और पुराना सूट पहना हुआ था. घर की सॉफ सफाई में वो भी गंदा हुआ पड़ा था. राजू सुबह से सिर दर्द से परेशान था. मिन्नी के जाते ही फिर सो गया. 12 बजे उठा तो देखा मुन्नी और कम्मो घर की सफाई में लगी हैं. कम्मो से कह के चाइ बनवाई और पी के फिर सो गया. अब दोपहर के 2 बजे थे. बिस्तर पे बनियान और लोअर में उल्टे लेटे हुए उसने आँखें खोली.

''कौन सा समान...क्या कह रही है ..??'' खीजते हुए उसने पुछा.

''ये बाबूजी का कोई पुराना सूटकेस है. इसमे क्या है पता नही. बताओ क्या करूँ. बस ये आख़िरी काम है फिर सब ख़तम.'' कम्मो ने जवाब दिया.

''सूटकेस खोल के दिखा फिर बताता हूँ.'' राजू की नज़र के ठीक सामने कम्मो का पेट था. आधी खुली आँखों से वो उसके पेट को देख रहा था. हेडएक कम हो गया था पर दिमाग़ ठीक से फोकस नही था.

कम्मो सूटकेस खोलने के लिए ज़मीन पे बैठी तो अब उसका सिर नज़र आने लगा. एक एक करके कम्मो ने सूटकेस से चीज़ें निकाली. कुच्छ पुराने कपड़े, 2- 3 किताबे और एक फोटो आल्बम थे उसमे.

''भैया जी इसे तो आप ही देखो..'' कम्मो बैठे बैठे बोली.

''अर्रे निकाल के दिखा दे क्या क्या है. '' राजू अब भी सुस्ती में था.

कम्मो कपड़ो को लेकर खड़ी हुई और एक एक करके राजू को दिखाने लगी. कपड़ो की हालत देख के लग रहा था जैसे 20 - 25 साल पुराने हो. एक सुहागन का जोड़ा था शायद. अच्छी कारीगरी किया हुआ ब्लाउस. एक घाघरा, एक चुननी. कम्मो सब कपड़ो को एक एक करके फैला के दिखा रही थी और ज़मीन पे फेंक रही थी. कपड़ो के साइज़ से लगा कि किसी पतली औरत के कपड़े थे. उनको देख के राजू की जिग्यासा जाग उठी. उसका दिमाग़ सोचने लगा कि किसके कपड़े हैं. इतने में कम्मो नीचे झुकी और अब राजू की नज़र के सामने सूट के टॉप से छलक्ति हुई उसकी मोटी मोटी चूचियाँ आ गई. कम्मो की ब्रा से बाहर आती हुई चूचियो ने राजू का ध्यान ऐसे खींचा कि वो सब भूल गया. कम्मो 4 - 5 सेकेंड झुकी रही और राजू उल्टे लेटे लेटे अपने लंड का कड़कपन महसूस करता रहा.
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09-03-2018, 08:05 PM,
#58
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
2 सेकेंड के लिए राजू ने आँखें बंद की ..जैसे कि इस नज़ारे को अपनी आँखों में क़ैद करना चाहता हो. ''भैया जी इन किताबों का क्या करूँ.'' कम्मो अपनी बाहों में 4 - 5 मोटी मोटी किताबें संभाले हुए खड़ी थी.

''इन्हे यही बिस्तर पे रख दे.'' राजू ने चाल चली.

कम्मो ने अपनी लेफ्ट बाजू से किताबों को संभालते हुए एक एक करके उन्हे रखना शुरू किया. बिस्तर के नज़दीक खड़े किताबें रखने को झुकते हुए उसके राइट चूचे का उभार फिर से नज़र आने लगा. अपनी गर्दन बिना हिलाए राजू आँखें बड़ी बड़ी करके उन्हे देख रहा था. उसका पूरा फोकस चूचे निहारने में था और उसने कम्मो की नज़रों पे गौर नही किया. कम्मो किताबे एक एक करके रखते हुए राजू को देखने लगी. उससे एहसास हो गया कि राजू की ललचाई हुई नज़रे उसके मोटे चूचों का नज़ारा ले रही है. कम्मो की चूत में अचानक से खलबली हो उठी. राजू का लंड बड़ा है ये तो उसने मिन्नी के मूह से सुना हुआ था और आज शायद मौका आ गया था जानने का कि वो कितना बड़ा है. बाबूजी से चुदे हुए उसे 1 हफ्ते से उपर हो गया था. पति के साथ तो बस पत्नी धरम निभा रही थी. रमेश अपनी शादी के बाद से होनेमून से लौटा नही था. अक्सर चूत में चीटियाँ सी रेंगती थी और अब भी वही हाल हो रहा था. कम्मो का मन डोल गया और उसने ठान लिया कि अब तो राजू को पटा के ही छोड़ेगी.

''क्या हुआ भैया जी कहाँ खो गए...'' कम्मो ने आख़िरी किताब को बेड पे रखते हुए अपने बदन को मोड़ा और राजू के चेहरे के ठीक सामने अपनी छातियो को रखते हुए बेड पे दोनो हाथ रखे और आधी झुकी हुई अवस्था में खड़ी हो गई. अचानक हुए सवाल और कम्मो के मुड़ने से राजू थोड़े चौंक गया. 1 सेकेंड के लिए उसने कम्मो का चेहरा देखा और उसे लगा जैसे कि कम्मो उसे एक मादक मुस्कान से लुभा रही है. शायद ये उसका भ्रम था पर शायद नही...कन्फ्यूज़्ड अवस्था में राजू थोड़े पिछे हुआ और करवट ली. कछे में क़ैद लंड का उभार देखते ही बनता था. बरबस कम्मो की नज़रें उसकी तरफ चली गई और उभार का साइज़ समझते ही उसकी आँखों में नशा उतर आया और नीचे का होंठ दाँतों के बीच काटते हुए उसके मूह से एक बहुत ही हल्की और दबी हुई सिसकी निकल गई.

सिसकी की आवाज़ राजू के कानो से बची नही और उसने एक बार कम्मो को देखा और फिर उसकी नज़रों का पिच्छा करते हुए अपनी कॅप्री के उभार को. कम्मो की नज़रें वहाँ गढ़ी हुई थी और उसके चेहरे के भाव बदल चुके थे. झुके झुके उसकी साँसे थोड़ी तेज़ हो गई और उरोज थोड़ी स्पीड से उठने लगे. सूट का कपड़ा हल्का था सो ब्रा में बनती हुई निपल्स की शेप भी दिखने लगी थी.

''वो क्या है ना मुझे अचानक से बहुत भूख लगी है और कुच्छ रसभरी चीज़ खाने का मन कर रहा है ..जैसे की आम या खरबूजे...मीठा हो और बढ़िया रसीला. देखो तुम कुच्छ अरेंज्मेंट कर सकती हो तो..वैसे खरबूजों के साथ अगर कुच्छ नमकीन रस या जूस मिल जाए तो और भी अच्छा हो जाएगा... वैसे तुम किन ख़यालों में खो गई कम्मो ? '' राजू अब थरक चुका था. कम्मो की नज़रें उसे उत्तेजित कर रही थी. लंड में गर्मी का एहसास बढ़ गया था.

''भैया जी वैसे भूख तो मुझे भी बड़ी लगी है..केला खाए बहुत दिन हो गए और कहीं केले का शेक मिल जाए तो और भी अच्छा होगा..मैने सुना है केले के साथ अंडे खाने चाहिए ...उनसे औरतों को ताक़त मिलती है. खरबूजों की खावहिश कैसे पूरी होगी...दरअसल जहाँ से खरबूजे मिलेंगे वहाँ कोई दिक्कत नही पर एक संतरे की दुकान भी है बगल में वो कहीं ना दिक्कत करे.'' अब कम्मो ने राजू की आँखों में आँखें डालते हुए अपनी तेज़ साँसों से उभरती गिरती चूचियों को खुल के दिखाते हुए कहा. उसका इशारा साफ था कि वो तैयार है पर मुन्नी भी घर में है और उसकी वजह से दिक्कत हो सकती है.

राजू समझ गया. उसका दिमाग़ तेज़ी से दौड़ने लगा. ''कम्मो अगर तुम्हे ठीक लगे तो क्यों ना खरबूजों के साथ संतरे भी खाए जाएँ. वैसे मुझे लगता है कि संतरे वाले को केले का शौक होगा और फिर केला बड़ा है तो एक साथ 2 लोगों की भूख मिट जाएगी...क्या कहती हो ????'' राजू का दिमाग़ अब कम्मो और मुन्नी दोनो को एक साथ चोद्ने का था.

''भैया जी मुझे कोई ऐतराज नही अगर आप खरबूजे और संतरे एक साथ खाओ. बस मुझे एक बात का डर है कि संतरे वाले ने कहीं केला खाने से मना कर दिया. वैसे भी बड़े केले से शायद वो डर जाए. मेरा क्या है मैं तो बड़े केले खा चुकी हूँ. '' अब कम्मो बिस्तर की किनारे पे बैठ गई थी. अभी भी वो आधी झुकी हुई थी.

''कम्मो तो एक काम करो. मैं संतरे वाले को केला दिखा के आता हूँ तब तक तुम तरबूज तैयार करो. जिसको खाना है वो अपने आप देखे और डिसाइड करे कि केला उसको चाहिए या नही. बाकी अगर मना किया तो कोई बात नही तब की तब देखी जाएगी.'' राजू अब ठीक से सोच नही पा रहा था. उसका ये प्लान फैल होने का पूरा पूरा चान्स था. कम्मो को पता था की मुन्नी कामुक है पर इतनी छिनाल भी नही की एक बार देखते ही मान जाए. वो भी अगर उसको इतने सीधे तरीके से दिखाया जाए तो. बाबूजी ने बहुत मस्त अंदाज़ में और अपनी पोज़िशन का इस्तेमाल करते हुए उसको सिड्यूस किया था. पर वो राजू के साथ ऐसे ही मानेगी वो पक्का नही था. और उसके चक्कर में कम्मो को भी कुच्छ नही मिलेगा.

''भैया जी आप रहने दो...मैं देखती हूँ क्या करना है. आप बस बिस्तर पे आँखें बंद करके पड़े रहिए और केले के दर्शन करवाने का इंतज़ाम कीजिए. '' ये कह के कम्मो शरमाते हुए हँसती हुई कमरे से बाहर चली गई. उसकी मटकती हुई गांद को देखते हुए राजू ने अपने लंड को मसल दिया. एक दम से वो बिस्तर से उठा और बाथरूम में फ्रेश होने चला गया. उसे समझ नही आ रहा था कि कम्मो क्या करेगी पर उसे इतना ज़रूर समझ आया कि उसे नंगा होके बिस्तर पे सोने का नाटक करना है. 5 मिनट में फ्रेश होके वो अपनी लोअर और कच्छा उतार के बिस्तर में चादर ओढ़ के साइड लेके सो गया. उसने अपने सोने का पोज़ ऐसा बनाया कि उसके लंड का टोपा उसकी चादर में ऐसी जगह उभार बनाए जिससे उसकी लंबाई का पूरा पूरा अंदाज़ा हो.
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09-03-2018, 08:05 PM,
#59
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
कम्मो फटाफट मुन्नी के पास गई. मुन्नी सब काम ख़तम करके आँगन में बैठी बीड़ी पी रही थी. उसे बीड़ी पीने की आदत नही थी पर कभी कभी थकान में पी लेती थी. कम्मो ने उसके पास जाते ही गहरी गहरी साँसे लेनी शुरू की और बगल में बैठ गई. फिर उसने भी एक बीड़ी खींची और सुलगाई. सुलगाते हुए उसके हाथ जानभूज के काँप रहे थे. फिर एक लंबा कश खींच के उसने धुआँ बाहर छोड़ा और अपनी फूली साँस को संभालने लगी. आँगन तक आते आते उसने अपने निपल्स को रगड़ के अच्छे से खड़ा कर दिया था और अब उनका उभार सॉफ दिख रहा था.

''क्या हुआ री...तू इतनी गरमाई हुई क्यों है साली....क्या कर के आई है जो चूत मे इतनी खुजली हुई पड़ी है...साली देख तो तेरी चूची कैसी खड़ी है...'' मुन्नी ने आगे बढ़ के उसकी एक चूची को दबाया और निपल को खींच लिया. कम्मो ने बीड़ी का कश लेते हुए एक सिसकी ली और उसका हाथ झटक दिया.

''जो मैने देखा अगर तू देख लेती तो तेरी भी यही हालत होती. कमीने का लंड नही है मूसल है मूसल. हाए मेरी तो मुनिया फॅड्क गई...मन कर रहा है अभी चढ़ जाउ हरामी पे..उफफफ्फ़...कुच्छ कर मुन्नी ..आग लगी हुई है जान...तू ही भुझा दे...'' कम्मो ने मुन्नी का हाथ पकड़ के अपने सूट के उपर रखवाया और सहलवाया.

कम्मो की इस हरकत से मुन्नी हैरान हो गई. उनके बीच में अक्सर ऐसी हरकतें होती थी पर आज जो हाल उसका था वो पहले कभी नही हुआ था. बाबूजी के साथ रंग रलियाँ मनाते हुए मुन्नी ने कम्मो का एक एक अंग देखा था. पर उसके बाद से उनके बीच कुच्छ नही हुआ. आज कम्मो का अंदाज़ भी अलग था और उसकी कामुकता भी चरम सीमा पे थी.

''अररी छिनाल किसका लोडा देख आई..?? हराम की जनि मुझे भी बता..मुझे भी दिखा..वैसे ही 5 दिन से चूत में कुच्छ लिया नही है...अररी बोल ना बस बीड़ी पिए जाएगी क्या...किसका देखा..??'' मुन्नी हाथ से कम्मो की चूत दबाने में लगी हुई थी.

''उस्स हरामी राजू का... इंसान नही है ..घोड़ा है घोड़ा..अगर तू नही होती तो अब तक तो मैं घोड़े की सवारी कर रही होती..सोते हुए ही उसको चोद देती...जालिम क्या चीज़ है...उफफफ्फ़..और कर्र मुन्नी ...जल्दी हाथ चला..वो तो मिलने से रहा तू ही झाड़वा दे..'' कम्मो अब अपने हाथ पिछे किए बैठी थी. टांगे पूरी खोल दी थी और ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी.

''साली मैं नही होती तो चढ़ जाती...कमीनी मेरे साथ बाबूजी के मज़े लिए और अब तुझे शरम आ रही है..या तेरी इस चूड्डकड़ चूत को अकेले ही लंड लेना है...मेरी पीठ पिछे इस घर के मर्दों से चुद्वायेगि और मैं ठेंगा हिलाती रहूं..कुतिया कहीं की ..मैं भी लूँगी हरामजादि उस घोड़े का लंड ..चल मेरे साथ अभी उसकी जवानी लूट लेते हैं....'' मुन्नी ने अपनी चूची को दबाते हुए कहा.

''अररी रहने दे ..तेरे बस की नही है उसका लेना...तेरे जैसी दुबली पतली तो मर ही जाएगी उसके नीचे...उसके नीचे तो मेरे और मिन्नी दीदी जैसी कोई चाहिए...जा तू तेरे बस की ना है..'' कम्मो ने अब आख़िरी तीर चलाया.

''अच्छा ऐसा है क्या ..तो फिर तू देख मैं क्या करती हूँ..तू बस यही पड़ी रह ..अपनी चूत को संभाल के रख मैं चली लंड खाने...घोड़ा हो या घड़ा अब तो सवारी करके ही रहूंगी...'' मुन्नी ने बीड़ी एक तरफ फेंकी और जोश में उठ के राजू के कमरे की तरफ चल पड़ी. उधर राजू काफ़ी देर इंतेज़ार करने के बाद नंगा ही अपने लंड को मुठिया रहा था. लंड मुठियाते हुए उसकी आँखें बंद हो गई थी और चादर भी अस्त व्यस्त हो गई थी. जो हिस्सा दरवाज़े के नज़दीक था वहाँ से चादर हट चुकी थी. उपर का बदन भी नंगा था. लंड के टोपे और उपर के हिस्से को राजू अपनी मस्ती में गोल गोल मुठिया रहा था. बचपन से ही उसे अपनी हथेली को लंड के टोपे पे गोल गोल घुमाने में मज़ा आता था. उसकी वजह से वो जल्दी झरता था. पर आज उसे झरना नही था बस मज़ा लेना था. इसलिए वो बीच बीच में लंड को सेंटर से पकड़ के ज़ोर से दबाता जिससे की सारा खून लंड के टोपे पे चला जाता और उसकी थरक थोड़ी शांत हो जाती. इसी तरीके से वो लंड को बीच में से दबोच के चादर के नीचे हिला रहा था कि अचानक से मुन्नी ने कमरे में दाखिला लिया.

''ह्हेयाआयीयियीयेययी भैयाअ...जी ये किययाया...है......हाथी का लंड लेके पैदा हुए थे क्या....ऊओ माआ....कम्मो ने सच ही कहा था......ऊवू दैयाअ...इसे कैसे लूँगी मैं....??'' ठर्कि मुन्नी राजू के कद्दावर लंड को चादर के नीचे देखते ही अचंभित रह गई और उसके मूह से अश्चर्य और खुशी की चीख निकल गई. आँगन से कमरे तक आते आते उसने भी अंजाने में अपने उरोजे मसले थे और वो भी कड़क हुए पड़े थे.

''तू .तू यहाँ क्या कर रही है...कमरे में आने से पहले दवज़ा तो खटखटाती..तुम्हे तमीज़ नही है...?'' राजू ने झट से चादर को सेट किया और वैसे ही पड़े पड़े अपना हाथ खींच लिया. पीठ के बल लेटे लेटे उसके लंड ने चादर में एक विशाल तंबू बनाया हुआ था. अंदर ही अंदर वो मुस्कुरा रहा था. फिर जब राजू को यकीन हो गया कि मुन्नी ने उसका साइज़ अच्छे से समझ लिया है तो वो बिस्तर के किनारे पे टांगे नीचे लटका के बैठ गया. चादर उसके लंड को ढके हुए थी पर उसकी बालों से भरी चौड़ी चेस्ट, पेट एक तरफ का चूतड़ और आधी नंगी टांगे सॉफ दिख रहे थे.

''भैया जी ...वो मैं ..मैं ना... '' मुन्नी को अचानक से होश आया कि उससे क्या ग़लती हो गई है..फिर उसकी नज़र एक बार और चादर में लिपटे हुए लंड पे पड़ी और जैसे उसकी चूत पिघलने लगी. ''भैया जी मुझे आपका हथियार चाहिए ..अभी के अभी...यहाँ ...डाल दो और चोदो मुझे भैया जी ...अब नाही रहा जाता.....'' मुन्नी अब पागल हो गई थी और उसने अपनी सलवार का नाडा खोल दिया और सूट का टॉप भी उतार फेंका. कछि तो उसने पहनी नही थी सो नंगी चूत पे हाथ फेरते हुए उसने चूत की फांके खोल दी. बाबूजी से चुद्ने के बाद उसने अपनी झाटें सॉफ की थी और तब से लेके अब तक उसकी चूत पे हल्के हल्के बॉल आ गए थे. उन बालों में एक उंगली फिराते हुए वो एक शेरनी की तरह राजू पे झपटी और उसकी गोद में जाके बैठ गई. एक ही सेकेंड में उसका मूह राजू के मूह से सटा हुआ था और उसका एक हाथ राजू की गर्दन के पिछे और दूसरा हाथ चादर को हटाने में लगा हुआ था. तो दोस्तो आपने देखा कि मुन्नी तो गई काम से फिर मिलेंगे अगले पार्ट मे फिर देखेंगे क्या मिन्नी राजू का हथियार झेल पाई या नही आपका दोस्त राज शर्मा
क्रमशः...............................................
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09-03-2018, 08:05 PM,
#60
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
खानदानी चुदाई का सिलसिला--20

गतान्क से आगे..............

दोस्तो इस कहानी का बीसवाँ पार्ट लेकर हाजिर हूँ
राजू ने भी बिना कोई देर किए उसके मूह को चूसना शुरू कर दिया और साथ ही साथ बेरेहमी से उसकी ब्रा को आगे से खींचते हुए नीचे किया और उसके दोनो नंगे मम्मे मसल डाले. अपनी 34ब की चूचिओ पे हाथ पड़ते ही मुन्नी कसमसा उठी और राजू से अलग होती हुई उसको धक्का मार दिया. मुन्नी की चूत में आग लगी हुई थी और उससे सहन नही हो रहा था. उसकी चूत के धारे बह रहे थे. राजू बिस्तर के किनारे पे टांगे लटकाए पीठ के बल लेटा हुआ था. मुन्नी ने एक झटके में चादर हटा दी और झट से बिस्तर पे चढ़ गई. 2 सेकेंड में उसकी चूत की खुली हुई फांके राजू के 10 इंच के लंड को निगलने लगी. देखते ही देखते उसने एक ही शॉट में धीरे धीरे गांद को गोल गोल घुमाते हुए पूरा लंड अंदर ले लिया. राजू के टटटे जब उसकी गांद से टकराए तो उसने एक गहरी साँस ली.

'''ऊऊऊऊ माआआआ..भर गई भैया जी ...अंदर तक भर गई.....क्या लोडा है भैया जी ...ऊऊओह ...मज़ाअ आ गया......मेरी छिनाल सहेली का शुक्रियाअ.जिसने आपके लंड को देख लिया और मुझे बता दिया...भैयाआ जी मेरे सैयाँ जीइ...ऊऊहह चोद्द डाअल...मरी जा रही हूओ...धक्के मार इतने मार की मर जाउ.....ऊओह...अजाआअ तू भी आजा ..कममू..देख ना कितना बड़ा है....ऊूउउम्म्म्म....'' मुन्नी गांद गोल गोल घुमा रही थी. राजू उसके दोनो निपल खींच रहा था. कम्मो ने कमरे में दाखिल होते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए थे. उसके मोटे मोटे मम्मे झूल रहे थे. कम्मो से भी रहा नही जा रहा था. उसकी चूत की प्यास भी ज़बरदस्त थी. पर मुन्नी ने उससे बाजी मार ली थी.
''साली हरामजादि बताया मैने और पहले तू चढ़ गई मेरे भैया के लंड पे ..कुत्ति छिनाअल....तुझसे बड़ी रंडी नही देखी मैने आज तक..भैया ये ग़लत है..पहले केला मुझे खाना था ..मैने तो आपको तरबूज खिलाने थे और आप इसके संतरे निच्चोड़ने में लग गए...बहुत ग़लत है ..ऊहह माआ.. भैया जी ऐसे ना करो ...चूत में उंगली ना दो....आग और भड़क जाएगी...'' कम्मो चूत में उंगलियाँ घुसने से कसमसा रही थी. मुन्नी के बाल पकड़ के उसने मुन्नी को एक ज़बरदस्त चुम्मा दिया.

''आआओ मेरी रंडी बहनो...अपने बेहेन्चोद सैयाँ के पास ...आज दोनो को केला खिलाउँगा.....आजा मेरे लंड की रानी ..इधर ला अपनी चूत...मेरे मूह पे...ऊऊउउउउउम्म्म्म्म....पुच्छ पुच उउम्म्म्म..स्लूउर्र्र्र्प...अच्छा नमकीन स्वाद है री तेरा...उउम्म्म्म....फूली फूली...ऊऊहहमम्म...उउउम्म्म्म...हान्न्न ऐसे ही मचका अपनी मोटी गांद..अभी इसमे लोडा दूँगा....ऊऊहह....मुन्न्नी ...आराम से कूद कुतिया.....टटटे टूट गए तो रस कहाँ से मिलेगा...ऊहह..उूउउंम्म...स्लुउउर्रप्प्प्प...स्सल्लुउर्रप्प्प्प....उउंम्म..पुचह पुकचह...'''' राजू ने कम्मो को अपने मूह पे बिठाया. कम्मो की पीठ मुन्नी की तरफ थी. मुन्नी पागलों की तरह लंड की सवारी में जुटी थी. जैसे कि उसको पहले कभी लंड मिला ही ना हो. उसकी छोटी चूचियाँ ब्रा के बाहर बुरी तरीके से झूल रही थी और उच्छल रही थी. कभी वो लंड पे उपर नीचे होती और कभी लंड की जड़ तक अपनी चूत लगा के आगे पीछे होके अपनी चूत के दाने को घिसती. उससे रहा नही गया और 10 - 15 घस्से और लेने के बाद वो झरने लगी. उसके मूह से सिर्फ़ सिसकारियाँ निकल रही थी और झरते हुए उसके बदन में झुरजूरियाँ दौड़ रही थी. उसके दोनो हाथ भज्नाशे को दबाए हुए थे. उसकी सिसकारियाँ सुनते ही कम्मो राजू के मूह से उठ गई और बिस्तर से उतर के मुन्नी के पिछे जाके खड़ी हो गई. उसने मुन्नी के दोनो चूचे मसल दिए और उसका मूह खींच के चुम्मि ली. मुन्नी की सिसकारीओं के बीच जैसे ही उसके मूह खुला तो कम्मो ने उसमे थूक दिया.

''साली रांड़....भैया जी देखो कैसी कुत्ति चीज़ है ...इतनी थर्कि औरत नही मिलेगी भैया जी...सिर्फ़ 1 मिनट में झाड़ गई....ऊओह '' कम्मो उसकी चूची को मसल्ते हुए अपने मोटे मम्मे मुन्नी की पीठ पे रगड़ रही थी. मुन्नी का कांपना जारी था पर अब वो शांत होने लगी थी. फिर अचानक ही वो निढाल हो के कम्मो की बाहों में झूल गई. कम्मो ने भी आव ना देखा ताव और उसे खींचते हुए राजू के लंड से जुदा कर दिया. लड़खड़ाती टाँगो से अपना दुबला पतला बदन लेके मुन्नी वही बिस्तर पे राजू की बगल में ढेर हो गई. राजू एक दम शॉक्ड था. 5 मिनट में ही उसके लंड पे एक चूत का रस चमक रहा था और एक चूत का रस उसके होंठो पे था. पिच्छले 15 मिनट में ही घर की एक नौकरानी ने उसे सिड्यूस किया और दूसरी ने उसे चोद डाला था. ऐसी किस्मत किसकी होती है और इससे पहले कि वो कुच्छ और सोच पाता उसके लंड पे कम्मो की चूत विराजमान हो गई.

''भैया जी अगर ये छिनाल है तो मैं भी कम नही हूँ...आओ तुम्हे तरबूज खिलाऊ तस्सली से. फिर सवारी करूँगी अपने घोड़े की...ऊहह भैया जी काट लो इनको..आज तो मज़ा आ जाएगा आपके साथ...ऊहहमाआ......ऊहहा..माआअ....काश छोटू के बापू देख पाते कि मुझे मोटे लंबे लंड कितने पसंद हैं....ऊओह...बाबूजजिि आप कहाँ हूओ...मेरी सूनी गांद में अपना लोडा डाल दो.....ऊओ भैयाअ..चूदो..चूदो..चूदू..ऊहह हां चूदू..ठोको मुझे ऊओ ऊहह ऊहह माआ..........मैं गई भोइयाआआ..............'' अपने चूचों पे राजू की जीभ के प्रहार होते ही कम्मो पग्ला गई. 1 हफ्ते से प्यासी चूत के सारे बाँध खुल गए और बाबूजी के लंड को याद करते हुए उसने राजू के लंड पे अपनी चूत की फुहार कर दी.

उसके मोटे मोटे मम्मो को चूस्ते हुए राजू को उसकी चूत का खिंचाव महसूस हुआ और उससे भी और ज़ियादा सहन नही हुआ. ''ये ले बहना....साली रांड़.....लेले भाई के केले का रस अपनी इस प्यासी चूत में ...एलीईई...ऊओह...उउउर्गघह.........ऊहह...उउम्म्म्म सुऊर्रप्प्प्प...स्लुउउर्रप्प्प....ऊहह...एस्स...ऊओह फुक्ककककक..व्हाट ...फुक्ककक मॅन....'' राजू उसके मोटे मम्मे भींचे हुए झरने लगा और अपनी गांद मचकाने लगा. कम्मो एक बार फिर से हल्के हल्के झरने लगी. राजू के लंड ने बहुत बारिश की थी. उसकी चूत अंदर तक गीली हो गई. ऐसा लगा जैसे कि जवालामुखी फूट पड़ा हो. लंड ना हो के लोहे का रोड हो. इतना कड़ा लोडा उसने आज तक नही खाया था. रमेश का भी इतना कड़क नही होता था. कम्मो से रहा नही गया और वो निढाल होके राजू पे गिर पड़ी और दोनो एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. तभी मुन्नी ने करवट बदली और अपनी जीभ निकाल के राजू के होंठो पे लपलपाना शुरू कर दिया. राजू, कम्मो और मुन्नी की लप्लपाति हुई जीभें उनकी पहली सामूहिक चुदाई का अंत थी पर अभी बहुत कुच्छ और भी बाकी था.
दोस्तो यहाँ राजू का काम तो हो गया अरे ये क्या भाई हम लोग सुजीत और सरला को तो भूल ही गये वो भी अकेले थे
चलो देखते है कही कुछ उल्टा सीधा तो नही होगया अरे ये क्या........................................
'''म्‍म्म्मममम.....स्लुउउर्र्ररप्प्प्प...स्लुउउर्र्रप्प्प्प्प...उउम्म्म्मम...कितना बड़ा है....ऊऊऊम्म्म्ममम...उउउम्म्म्म...स्लुउउर्र्रप्प्प..तूऊ.त्हूऊओ.....एम्म्म पूछ पूछ स्लुउउर्र्रप्प्प...मज़ाआ आ गया....उउंम्म कितने दिन के बाद मिला है....इतना बड़ा ...उफफफफ्फ़ और इतना मोटाआ....चूस लेने दो...रोको नही ....उउम्म्म्ममम सूपड़ा बहुत ही मस्त है...ऊऊहह जल गई मैं तो ........आअरर्रघह उंगली धीरे से करो...ऊऊहह उंगली पे मत झारवाना ....इस्पे झरना है ...उउम्म्म्म स्लुउउर्र्रप्प्प..स्ल्लुउर्र्रप्प्प......ऊओह..माआ......!!!!!''

'''हाआअंन्न ऐसे ही हल्के से ..बसस्स...बहुत मज़ा आ रहा है...तुमसे लंड चुसवाने में...ऊओह आंटीयीईयी......मूह में ना झर जाउ...''

''उम्म्म पूछ पूछ पूछ..पूछ..स्लूऊर्रप्प्प...आंटी नही....जान बोलो ..वो भी यही कहते थे...जाआअन्न कहते थे और झरते थे....मेरे अंदर...तुम भी वहीं झरना...मूह में बाद में..ऊओ ये उंगलियाँ कितनी गर्मी दे रही हैं...कोई थर्मॉमीटर से चेक करो देखो मेरे छेद का टेंप्रेचर....ऊऊहह माआ....110 डिग्री निकलेगा....जल रही हूँ जानू..अब गोद में ले ले, डंडे पे बिठा ले...''
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