XXX Kahani मुम्बई के सफ़र की यादगार रात
07-01-2017, 10:29 AM,
#1
XXX Kahani मुम्बई के सफ़र की यादगार रात
मुम्बई के सफ़र की यादगार रात-1

लेखक : सन्दीप शर्मा 

दोस्तो, 

मेरी पिछली कहानियों के बाद आप सभी के प्यार का बहुत-बहुत शुक्रिया ! 

आपके काफ़ी ईमेल मिले तथा तीन सौ से अधिक फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली, मेरा दिल खुश हो गया। मैंने लगभग हर मैसेज और मेल का जवाब देने की कोशिश की है पर अगली कहानी शुरू करने के पहले मैं कुछ बात आपसे करना चाहूँगा जो आप सभी के कुछ सवाल हैं और उनका जवाब है। 

पहली बात यह है कि मेरी कहानी पूरी सच्ची कहानी है, उसमें कोई लाग लपेट या झूठ नहीं है कहीं भी, जो हुआ था मैंने वही लिखा था तो कृपया यह सवाल फिर से ना करें कि घटना सच्ची है या झूठी। मेरी 48 कहानियाँ हैं जो सभी पूरी सच्ची हैं और मैं उन्हें लिखूँगा। 

मेरी दूसरी बात ! अगर आप मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजें तो आपके नाम से भेजे किसी दूसरे के या छद्म नाम से भेजे वो आपकी सोच है पर मेरी महिला मित्रों के नम्बर मांगने के लिए लिंग परिवर्तित कर के किसी लड़की के नाम से मेरे पास रिक्वेस्ट ना भेजिए, मैंने एक भी लड़के की फ्रेंड रिक्वेस्ट रिजेक्ट नहीं की है पर चार छद्म लड़कियों को जरूर ब्लाक किया है। 

अब मैं कहानी पर आता हूँ। 

आज से करीब छः साल पहले की बात है, मुझे इंदौर से दफ्तर के कुछ काम के सिलसिले में मुंबई जाना था। कार्यक्रम अचानक तय हुआ था, इसलिए ट्रेन का टिकट तो मिल नहीं सकता था तो बस से जाने का तय हुआ। उस वक्त एसी वाली बसें चलन में थी अत: मेरे लिए एसी स्लीपर बस का टिकट आया और मैंने अपना बैग पैक करके शाम को साढ़े छः पर हंस ट्रेवल से बस पकड़ ली। 

मैं बस में आने के पहले यही सोच रहा था कि काश कोई अच्छी भाभी, आंटी या लड़की मिल जाये तो सफर आसान हो जायेगा। मुझे दरवाजे से दूसरे नम्बर की अकेली सीट मिली थी। मैंने देखा मेरी सीट के सामने वाली सीट पर तो कोई अभी तक आया ही नहीं था पर बगल वाली सीट पर एक माँ-बेटी जरूर बैठी हुई थी, बेटी काफी सुंदर थी पर माँ उतनी ही खडूस दिख रही थी तो मुझे लगा कि अपना काम नहीं होगा। 

मेरे पास उस वक्त कंपनी का नया लैपटॉप था और साथ ही डाटा कार्ड भी जो उस वक्त बहुत धीमा इन्टरनेट देता था लेकिन कनेक्शन दे देता था। मैंने लैपटॉप चालू किया और मैंने याहू पर चैटिंग शुरू कर दी। थोड़ी देर पड़ोस वाली लड़की देखती रही फिर पूछने लगी- क्या आप नेट चला रहे हो? 

मैंने सर हिला कर हाँ में जवाब दिया तो बोली- क्या आप मेरा मेडिकल एंट्रेंस का रिजल्ट देख कर बता दोगे? शाम को आना था पर हमें मुंबई जाना पड़ रहा है। 

मैंने कहा- ठीक है, कोई दिक्कत नहीं ! 

मैंने उसका रिजल्ट देखा लेकिन रिजल्ट तब तक आया नहीं था। फिर हम दोनों की थोड़ी बातें शुरू हो गई, मैं भी मेडिकल की परीक्षा दे चुका था तो मैं उसी बारे में बात करने लगा। 

इतने में हम लोग बस के अगले स्टॉप पर आ गये और यहाँ पर एक बूढ़े दादा-दादी जी आंटी के सामने वाली सीट पर बैठ गये और मेरे सामने वाली सीट पर एक लड़की बैठ गई। 

देखने में वो लड़की कोई बहुत सुंदर नहीं थी पर आकर्षक बहुत थी, सामान्य सा चेहरा, थोड़ी सी मोटी, हलकी चपटी नेपाली नाक, गेंहुवा रंग, हलके घुंघराले बाल पर उसकी आँखें बहुत सुंदर थी और बहुत आकर्षक भी। उसने जींस और टी शर्ट पहन रखी थी जिसमें वो काफी आकर्षक लग रही थी। वो आकर मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गई और मेरी बांछें खिल उठी, मैंने सोचा चलो रास्ते भर का काम हो गया। 

वो आई तो मैंने लैपटॉप बंद कर दिया और उससे बातें करने लगा, बातों बातों में पता चला कि वो दिल्ली की रहने वाली है, उसका नाम साक्षी मालिक है और मुंबई में धारावाहिकों में एक्स्ट्रा के तौर पर काम करती है, यहाँ किसी काम से आई थी और अब वापस जा रही है। 

हम लोग ऐसे ही बातें करते जा रहे थे और कब सनावद आ गया पता ही नहीं चला। वहाँ बस यात्रियों के खाना खाने के लिए रुकी थी तो मैंने साक्षी से भी कहा- चल कर खाना खा लो ! 

और उन दोनों माँ बेटी से भी कहा तो आंटी ने तो मना कर दिया और मन मार कर उनकी बेटी को भी मना करना पड़ा लेकिन साक्षी मेरे जोर देने पर मेरे साथ खाना खाने के लिए आ गई। वो खाना खाने आई तो हम दोनों अकेले ही हो गये थे हमने थोड़ा खाना आर्डर किया और बिल मैंने ही भरा। खाना खाते हुए मैं उससे मजाक करने लगा था जिसमें थोड़ा बहुत सेक्स का पुट भी था और उसे उस मजाक से कोई तकलीफ नहीं हुई तो मेरे हौंसले बढ़ गये और मैं उससे और सेक्सी मजाक करने लगा। 

फिर खाना खा कर हम बस में आ गये और हम थोड़ी देर बात करते रहे, चूंकि अब तक रात हो चुकी थी तो पड़ोस में जो चारों लोग थे वो नीचे और ऊपर वाली बर्थ पर सो चुके थे। 

साक्षी मुझसे बोली- संदीप तुम्हारे लैपटॉप में फिल्में हैं क्या? अगर हैं तो चालू करो, देखते हैं। 

मेरे पास फिल्में तो थी ही, लेकिन मैंने कहा- मेरे पास अंग्रेजी फिल्में हैं, हिंदी नहीं हैं ! 

वो बोली- कोई बात नहीं वही चालू करो ! मुझे भी इंग्लिश फिल्में देखना पसंद है। 

मैंने कहा- ठीक है ! 

और मैंने हेडफोन लगा कर "द ड्रीमर्स" फिल्म शुरू कर दी.. 

मैंने इस फिल्म को पहले भी देखा था और मैं जानता था कि इसमें बहुत ही उत्तेजक दृश्य हैं। दो सीट का बेड बना कर, पर्दा लगा कर मैंने साक्षी को मेरा बगल में पैर फैला कर बैठने के लिए कहा, ऊपर से कम्बल रख लिया और हेडफोन का एक स्पीकर साक्षी को दे दिया और दूसरा मेरे कान में लगा कर फिल्म देखने लगे। 

करीब 45 मिनट तक हम फिल्म देखते रहे और एक दूसरे के हाथों में हाथ ले कर बैठे रहे, जगह कम थी तो यह समझिए कि एक दूसरे के ऊपर नहीं थे बस बाकी चिपके हुए ही थे.. 

मेरे बदन में तो आग लगना शुरू हो ही चुकी थी और साक्षी भी कोई शांति से बैठी नहीं थी और इस सब के बीच में एक दो बार कुछ ऐसे दृश्य आ चुके थे जिसमें लड़की-लड़का बिना कपड़ों के एक दूसरे के साथ सोये हुए हैं... उसके भी हाथ मेरे बदन पर चल ही रहे थे। इसी बीच फिल्म में एक सेक्सी सीन आने लगा जो कि निहायत ही सेक्सी था जिसमे फिल्म की नायिका पूरे कपड़े उतार कर डांस कर रही थी और उसके बाद कौमार्य भंग का दृश्य था जो कि पूरी तरह से दिख रहा था और गजब का सेक्सी था। 

उस सीन के आने पर साक्षी पागल हो गई और मेरे लण्ड को पैंट के ऊपर से ही मसलने लगी। मैंने भी लैपटॉप उठा कर पैरों के तरफ कोने में कर दिया और कपड़ों के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ चलाने लगा, उसे चूमने लगा और उसके बड़े बड़े चूचों को दबाने लगा। 

हम दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही एक दूसरे के साथ मस्ती करते रहे फिर लैपटॉप पर पैर पड़ रहा था और वो तकलीफ भी दे रहा था तो मैंने लैपटॉप को बंद करके बैग में रखा और पूरी सीट को खाली कर लिया। 

अब हमने एक दूसरे को फिर से चूमना शुरू किया और मैंने साक्षी को नीचे लेटा दिया। बस में कपड़े उतरना बहुत ही खतरे का काम था तो मैं उसके ऊपर कपड़े पहने पहने ही चढ़ गया और उसके होंठों को चूमने लगा जिसमें वो मेरा पूरा साथ दे रही थी अपने हाथों से मेरे सर को सँभालते हुए। 

मैं दोनों हाथों से उसके बड़े बड़े दूधों को मसल रहा था और कपड़ों के ऊपर से ही मेरे लण्ड को उसकी चूत पर मसल रहा था। बीच बीच में मैं उसकी गर्दन पर भी चूम लेता था, इस हालात में भी उसने अपनी आवाजें बिल्कुल संयत कर रखी थी, वो तड़प तो रही थी पर उसके मुँह से एक भी आवाज नहीं निकलने पा रही थी। 

हम दोनों ने यह काम 15-20 मिनट किया होगा कि वो झड़ने लगी और अचानक ही उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और पूरी तरह से झड़ गई। 

मैं अभी भी उसको ऊपर चढ़ कर कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ रहा था तो वो धीरे से बोली- बस, अब सहन नहीं होता। 

मैंने कहा- ठीक है, कोई बात नहीं ! मैं उतरता हूँ ! 

तो बोली- तुम नीचे आ जाओ, मैं चूस कर निकाल दूँगी और तुम्हारी अंडरवियर भी गन्दी नहीं होगी। 

मुझे इससे ज्यादा क्या चाहिए था, मैं नीचे लेट गया उसने मेरी पैंट खोल कर नीचे खसकाई, अंडरवियर नीचे किया और मेरा लण्ड मुँह में ले कर चूसने लगी, गजब का चूस रही थी यार ! 

उसके चूसने से मैं तड़पने लगा, बस आवाज ही दबा कर रखी हुई थी मैंने ! अगर आवाज निकालता तो बस में सबके जागने का डर था। उसने दो मिनट चूसा होगा कि मैं झड़ने लगा, मैंने उसको इशारों में कहा तो वो और तेज चूसने लगी और बस उसके तुरंत बाद ही मैं भी बुरी तरह से झड़ने लगा और वो मेरे वीर्य की एक एक बूँद पी गई, उसने तब तक मुँह नहीं हटाया जब तक मेरा पूरा लण्ड साफ़ नहीं हो गया। 

उस समय झड़ते वक्त मैं मेरी चीख कैसे रोक पाया था, मैं ही जानता हूँ लेकिन यह तय है कि अगर मैंने आवाज ना रोकी होती तो पूरी बस जाग गई होती। 

चूसने के बाद उसने उसके हैण्ड बैग से टिशु पेपर निकाला और मेरा लण्ड पोंछा फिर मेरे मुरझाये हुए लण्ड को मेरे कपड़ो में डाल के मेरी पैंट ऊपर खसका दी। 

उसके बाद... 

इसके बाद की कहानी अगली कड़ी में ! 

इन्तजार कीजिए और मुझे मेल भेज कर बताइए कि कैसी लगी मेरी कहानी आपको?
-
Reply
07-01-2017, 10:30 AM,
#2
RE: XXX Kahani मुम्बई के सफ़र की यादगार रात
मुम्बई के सफ़र की यादगार रात-2

लेखक : सन्दीप शर्मा 

उसके बाद उसने अपने हैण्ड बैग से टिशु पेपर निकाला और मेरा लण्ड पौंछा, फिर मेरे मुरझाये हुए लण्ड को मेरे कपड़ों में डाल के मेरी पैंट ऊपर खसका दी, मेरे होंठों को चूमते हुए बोली- मुझे आज तक कपड़ों के साथ इतना मजा कभी नहीं आया। 

मैं समझ गया कि मेरा मुम्बई का चार दिन का स्टे बढ़िया रहने वाला है। 

चूंकि हम दोनों का ही एक बार हो चुका था और बस में नीचे की सिंगल सीट में कपड़े उतारना मुमकिन नहीं था तो आगे का हम दोनों ने कुछ करने का भी नहीं सोचा। 

सुबह मुझे काम पर जाना था तो थोड़ी नींद लेना मेरे लिए भी जरूरी था, इसलिए मैंने उसे कहा- रात हो गई है, तुम ऊपर जा कर अपनी सीट पर सो जाओ। 

वो ऊपर जा कर उसकी सीट पर सो गई, मैं नीचे अपनी सीट पर सो गया। नींद कब लगी पता ही नहीं चला, बीच में एक बार नींद खुली, उसे देखा तो वो ठंड से कांप रही थी तो अपना कम्बल मैंने साक्षी पर डाल दिया और उसका एसी बंद कर दिया। मैं चादर ओढ़ कर सो गया। 

सुबह करीब सात बजे उसने ही मुझे जगाया। जागने का मन तो नहीं था पर सो भी नहीं सकता था अत: उठ गया, उठ कर उससे बाते करने लगा पर रात वाली कोई बात न उसने करी न मैंने की। 

फिर उसने मेरा नम्बर माँगा मैंने कार्ड निकाल कर उसे दे दिया, कार्ड में सिर्फ दफ्तर का नम्बर और मेरा मेल आई डी लिखा था। मैंने पेन से उस पर मोबाइल नम्बर भी लिख दिया। वो मेरा पहला मोबाइल फोन था जो मैंने खरीदा था 1300 रूपये में सेमसंग का रिलायंस वाला फोन। 

उसने कहा कि वो फोन करेगी। 

मैंने कहा- मैं शाम को तो फ्री रहूँगा तो तुम फोन करना, हम लोग साथ में कॉफी के लिए मिलेंगे। 

उसने कहा- ठीक है। 

मैंने उसका नम्बर माँगा तो वो बोली- मेरे पास मोबाईल नहीं है ! 

जो आज से छः साल पहले सामान्य बात थी। 

फिर हम दोनों की ज्यादा बात नहीं हुई और हम आठ बजते बजते मुंबई पहुँच गये। मेरे रहने का इन्तजाम बोरीवली स्टेशन के पास के किसी होटल में किया गया था और आईसीआईसीआई बैंक की मुख्य शाखा के पास मुझे काम करने जाना था। 

मैं दस बजे दफ्तर पहुँचा और काम करना शुरू तो किया लेकिन मेरा मन काम में कम और साक्षी में ज्यादा था। 

जैसे तैसे मैं काम निपटा रहा था और शाम को करीब तीन-चालीस पर साक्षी का फोन आया, वो बोली- मेरे पास जो रहने की जगह थी वो अब नहीं है और अभी रहने का कोई ठिकाना नहीं है। क्या एक दिन के लिए तुम्हारे साथ मेरे होटल में रुक सकती हूँ, कल मेरी सहेली आ जायेगी तो उसके घर चली जाऊँगी। 

मुझे क्या चाहिए था, मैंने कहा- हाँ बिल्कुल रुक जा ना यार ! तेरे लिए मना तो है नहीं। 

मैंने कहा- तू मुझे आईसीआईसीआई बैंक की मुख्य शाखा पर मिल ! 

तो वो बोली- मैं बोरीवली स्टेशन आ जाऊँगी। 

मैंने कहा- ठीक है, वहीं आ जा ! 

और मैं पाँच बजे तक काम निपटा कर वहाँ से निकल गया। मेरा प्रेजेंटेशन अगले दिन था तो उस दिन जल्दी निकल भी सकता था मैं। 

मैं ऑटो पकड़ कर सीधे बोरीवली स्टेशन गया, तब तक उसका भी फोन आया, मैंने बताया कि मैं कहाँ पर हूँ, मैंने उसे जगह बताई और हम लोग स्टेशन से सीधे मेरे होटल आ गये। रास्ते में मैंने ध्यान दिया कि उसके पास सिर्फ एक छोटा सा बैग था जिसमें मुश्किल से तीन जोड़ी कपड़े आ सकते थे, पर मैंने कुछ कहा नहीं। 

दफ्तर से स्टेशन जाते हुए मैंने एक मेडिकल स्टोर पर ऑटो रुकवा कर पहले ही मूड्स सुप्रीम कंडोम का एक बड़ा पैकेट खरीद लिया था। 

होटल पहुँच कर मैंने उसे तो सीधे कमरे की तरफ भेज दिया था और मैं खुद चाभी लेने काउंटर पर चला गया। 

काउंटर से चाभी ली और मैं कमरे की तरफ गया, उसे साथ लिया और कमरे में पहुँच गया। 

कमरे के अंदर पहुँचना था कि वो तो मुझ पर मानो चढ़ ही गई, उसने बैग एक तरफ फैंका, मेरा लैपटॉप बैग कंधे से जबरन ही उतारा और मुझे चूमना शुरू कर दिया। 

मैं भी रुकना तो चाहता नहीं था तो मैंने भी उसके चुम्बनों का जवाब देना शुरू कर दिया, चुम्बनों के साथ ही मैं उसके दोनों बड़े बड़े स्तनों को भी दबाते जा रहा था और वो एक हाथ से मेरे लण्ड को मसल रही थी। 

मैंने इसी बीच उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए और उसने मेरे। 

मैंने पहले उसकी जैकेट उतारी फिर टीशर्ट भी उतार दी अब वो काली ब्रा और जींस में बड़े बड़े चूचक में गजब की दिख रही थी। हालांकि कमर पर थोड़ी सी चर्बी जरूर थी पर फिर भी उस वक्त तो मुझे वो जन्नत की हूर ही दिख रही थी। 

उसकी टीशर्ट उतार कर मैंने उसके चूचों को मसलना और चूमना शुरू कर दिया, जीभ से चाटना भी शुरू कर दिया तो वो भी जल्दी जल्दी मेरे कपड़े उतारने में लग गई और मुझे पता भी नहीं चला कि कब उसने मेरी शर्ट और पैंट उतार दी। अब मैं सिर्फ अंडरवियर और बनियान में था और वो ब्रा और जींस में ! 

मैंने भी उसकी जींस उतारने के लिए उसको बिस्तर पर ले जाकर धक्का दे दिया क्यूँकि उसको उठाना मेरे बस के बाहर की बात थी। उसे बिस्तर पर गिरा कर मैं उसकी जींस उतारने लगा। जब मैंने जींस उतारी तो देखा कि जांघों से लेकर पैरों तक एकदम चिकनी थी वो, कहीं कोई बाल नहीं, कहीं कोई रुखी त्वचा नहीं। 

उसके बाद मेरा ध्यान उसकी बांहों पर गया जो पूरी तरह से चिकनी थी और उसकी बगलों में भी कोई बाल नहीं था, और बाकी के शरीर पर भी मुझे कोई बाल नहीं दिखा, जो मेरे लिए एक नया अनुभव था पर मैं तो उसको काली जालीदार ब्रा और पैंटी में देख कर पागल सा हो रहा था और वो शायद और ज्यादा पागल हो रही थी। 

मैंने साक्षी के ऊपर आकर उसे चूमना शुरू किया और उसने अपने हाथों से मेरी अंडरवियर और बनियान भी उतार दी। अब मैं पूरा नंगा था और वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में, पर मैंने उसकी ब्रा और पैंटी उतारने की कोई जल्दी नहीं की बल्कि उसकी ब्रा के ऊपर से ही मैंने उसके कड़क हो चुके चुचूकों को चूसना शुरू कर दिया। वो तड़पने लगी और अपने नाखूनों से मेरी पीठ को खरोंचने लगी। उसने इतनी जोर से नाखून चुभाये कि मेरी पीठ पर थोड़ा खून उभर आया पर उस वक्त की मस्ती में होश किसे था, वो नाखूनों का चुभना भी तब तो सुख ही लगा था। 

अब मैंने उसके चूचों को छोड़ उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया, होंठों को चूसने में वो भी मेरे होंठों को चूसते हुए पूरा साथ दे रही थी। फिर उसने मेरी जीभ को अपने मुँह में लेकर मेरी जीभ को चूसना शुरू कर दिया और मैं उसके दोनों तन चुके चुचूकों को ब्रा के अंदर हाथ डाल कर मसल रहा था। 

हम दोनों इसी तरह एक दूसरे को चूम रहे थे और मैं उसे मसल रहा था, वो मेरी पीठ को खसोट रही थी, हाथों से मेरे बालों को सहला रही थी। 

यह कार्यक्रम कुछ मिनटों तक चलता रहा, फिर वो बोली- मुझे तुम्हारा चूसना है।मैंने कहा- चूसो ! मैंने कहाँ मना किया है? 

पर मैंने उसके मुंह में लण्ड देने के बजाय खुद को उसके नीचे की तरफ खिसकना शुरू कर दिया और होंठों से नीचे होता हुआ उसकी ठोड़ी पर कुछ सेकंड तक चूमा, फिर और नीचे खिसक कर उसके गले को चूमा, फिर और थोड़ा नीचे खिसक कर उसके दोनों चुचूकों के बीच में चूमा और वहाँ थोड़ी देर तक चूसता रहा। 

मैं यह सब कर रहा था और वो कह रही थी- संदीप बस करो ना.. और नहीं.. प्लीज रुक जाओ.. मुझसे सहन नहीं हो रहा। 

लेकिन इसके बाद भी एक भी बार उसने मुझ हटाने की कोशिश नहीं की और मैं उसे चूसता हुआ थोड़ा और नीचे खिसका और उसकी चूचियों को थोड़ा ऊपर उठा कर मैंने साक्षी की चूचियों के नीचे वाली जगह को चूमना शुरू कर दिया और इसके बाद वो पागल सी होने लगी तड़पने लगी। 

मैं थोड़ा और नीचे खिसक कर उसकी नाभि के पास आया और मैंने उसकी नाभि के चारों तरफ अपनी जीभ चलाना शुरू कर दी। मेरी जीभ जैसे ही उसकी नाभि पर गई वो तो उछल गई, उसने हाथों से मेरे बालों को नोचना शुरू कर दिया और अपने पैरों को मेरी पीठ पर लपेट लिया। मैंने अपनी जीभ को उसकी नाभि के अंदर तक घुसा दिया और जोर जोर से चलाने लगा, मेरा सीना उसकी चौड़ी टांगों के बीच में था जिससे वो खुद को रगड़ रही थी। मैंने उसकी नाभि के छेद को जीभ से चूसना लगातार चालू रखा और वो मुझे अपने में समाने की कोशिश करते हुए अचानक अकड़ने लगी और मैं कुछ समझता उससे पहले ही वो बुरी तरह से झड़ने लगी और झटके मारने लगी। 

हर झटके के बाद उसकी पकड़ ढीली होती और हर झटके के वक्त मुझे कस लेती, जब वो दस-बारह झटके मार कर पूरी तरह से झड़ गई तो बड़े प्यार से उसने मेरे सिर को पकड़ कर मुझे ऊपर की तरफ खींचा और मैं भी उसकी तरफ खिचंता चला गया। 

उसने अपने तपते हुए होंठ को मेरे होंठों पर रख दिए... 

इसके बाद क्या हुआ? 

जानने के लिए अगली कड़ी का इन्तजार कीजिए ! 

मुझे बताइए कि कैसी लगी मेरी कहानी आपको?
-
Reply
07-01-2017, 10:30 AM,
#3
RE: XXX Kahani मुम्बई के सफ़र की यादगार रात
मुम्बई के सफ़र की यादगार रात-3

लेखक : सन्दीप शर्मा 

मैं थोड़ा और नीचे खिसक कर उसकी नाभि के पास आया और मैंने उसकी नाभि के चारों तरफ अपनी जीभ चलाना शुरू कर दी। मेरी जीभ जैसे ही उसकी नाभि पर गई वो तो उछल गई, उसने हाथों से मेरे बालों को नोचना शुरू कर दिया और अपने पैरों को मेरी पीठ पर लपेट लिया। मैंने अपनी जीभ को उसकी नाभि के अंदर तक घुसा दिया और जोर जोर से चलाने लगा, मेरा सीना उसकी चौड़ी टांगों के बीच में था जिससे वो खुद को रगड़ रही थी। मैंने उसकी नाभि के छेद को जीभ से चूसना लगातार चालू रखा और वो मुझे अपने में समाने की कोशिश करते हुए अचानक अकड़ने लगी और मैं कुछ समझता उससे पहले ही वो बुरी तरह से झड़ने लगी और झटके मारने लगी। 

हर झटके के बाद उसकी पकड़ ढीली होती और हर झटके के वक्त मुझे कस लेती, जब वो दस-बारह झटके मार कर पूरी तरह से झड़ गई तो बड़े प्यार से उसने मेरे सिर को पकड़ कर मुझे ऊपर की तरफ खींचा और मैं भी उसकी तरफ खिचंता चला गया। 

उसने अपने तपते हुए होंठ को मेरे होंठों पर रख दिए... और हम दोनों फिर एक दूसरे को के होंठों का रसपान करने लगे, जिस तरह से साक्षी झड़ी थी मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि वो दूसरी बार के लिए भी इतनी जल्दी तैयार होगी, अब उसने मुझे पलट कर नीचे कर दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई और उसके ऊपर आने के बाद उसके नर्म नर्म स्तन मेरे सीने पर दब रहे थे, उसके होंठ मेरे होंठों को चूस रहे थे, उसके हाथ मेरे बालों पर चल रहे थे और मेरे हाथ उसकी ब्रा को खोलने में मग्न थे। 

वो मुझे चूमती जा रही थी और मैंने उसकी ब्रा खोलने के बाद मेरे हाथों से उसकी पैंटी को भी थोड़ा सा नीचे खसका दिया और फिर मेरे पैरों का इस्तेमाल करते हुए उसकी पैंटी को पूरा निकाल दिया, जिसमें साक्षी ने भी मेरी पूरी मदद की। 

अब साक्षी पलट कर के मेरे पैरों की तरफ आ गई और मेरे लण्ड को उसने मुँह मे लेकर चूसना शुरू कर दिया, कभी वो मेरे लण्ड को सीधे चूस रही थी कभी बगल से चाट रही थी और कभी मेरी अंटियों को मुँह में भर ले रही थी और दूसरी तरफ मैं भी उसकी चूत को चूमते जा रहा था, कभी मेरे होंठों से उसके निचले बड़े बड़े होंठों को मुँह मे भर कर निचोड़ लेता तो कभी वो मेरे लण्ड के सुपारे को अपने मुँह से निचोड़ रही थी... 

हम दोनों का यही सब काम कुछ देर तक चला था कि मैं झड़ने वाली हालात में आ गया, मैंने कहा- साक्षी, मैं झड़ने वाला हूँ ! 

यह सुनते ही उसने मेरे लण्ड को चूसना बंद कर दिया, मेरे लण्ड के सुपारे की चमड़ी को पलट कर उसे चाटने लगी और जोर जोर से जीभ सुपारे के ढके रहने वाले संवेदनशील हिस्से पर चलाने लगी और जीभ से उसे चाटने लगी। 

मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ ! और इसके साथ ही वो अपनी चूत को भी मेरे होंठों पर रगड़े जा रही थी। मेरी हालत ऐसी थी कि मैं कभी भी झड़ सकता था। 

साक्षी ने इसी तरह से कुछ देर मेरे सुपारे को चाटा और फिर मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर उसे वापस चूसना शुरू कर दिया और मैं पूरे वक्त उसकी चिकनी चूत को चूस रहा था, रस का मजा ले रहा था, उसकी मोटी गाण्ड को मसल रहा था कि अचानक वो झड़ने लगी, वो झड़ते हुए मेरे लण्ड को भी जोर जोर से चूस रही थी और मैं भी झड़ने लगा, कभी मैं झटका मार रहा था कभी वो ! 

साक्षी की चूत से ढेर सारा नमकीन रस निकला जो मैं पूरा पी गया और मेरे सारे वीर्य को वो पी गई, उसने एक बूँद भी इधर उधर नहीं जाने दी, पूरा वीर्य अंदर गटक गई। 

जब हम दोनों का झड़ना बंद हुआ तो मैं तो बुरी तरह से थक चुका था और साक्षी की भी हालत कोई ठीक नहीं थी तो वो मेरे बगल मे आ कर मेरे दायें कंधे पर सर रख कर लेट गई और मेरे बालों को सहलाने लगी और बड़े प्यार से बोली- तुम्हें कम से कम तुम्हारे प्यूबिक हेयर तो साफ़ करके रखना चाहिए ना ! कितनी तकलीफ देते हैं, मुँह में आते हैं। 

मैंने कहा- सॉरी डार्लिंग ! आगे से कर लूँगा ! 

और लेटे लेटे ही फोन उठा कर पावभाजी का एक्स्ट्रा पाव के साथ आर्डर दे दिया, और चार बोतल पानी की भी लाने को कह दिया। मुझे सेक्स के बाद यूँ भी बहुत भूख प्यास लगती है और तब तो दिन भर का भूखा था ही। 

मैंने खाने का आर्डर दे दिया तो वो बोली- थोड़ा आराम कर लो, फिर कुछ काम करना पड़ेगा.. 

मैंने कहा- काम तो आज रात भर करना है ! जानू, तुम क्यों चिंता करती हो? 

हम दोनों थोड़ी देर लेटे थे कि दरवाजे की घंटी बजी... साक्षी ने कम्बल पूरी तरह से ओढ़ लिया मैने जल्दी से शर्ट पहनी, तौलिया लपेटा और जाकर ट्रॉली ले ली और वेटर को बाहर से ही चलता कर दिया। 

अब हम दोनों ने पाव भाजी खाई और उसके बाद साक्षी मुझसे बोली- अब तुम्हें एक काम करना होगा मेरी मर्जी से... 

मैंने कहा- हुकुम करो जान ! क्या करना है? 

वो उठी, उसके बैग में से कुछ निकालने गई और मुझसे बोली- तुम बाथरूम में चलो, मैं भी आ रही हूँ। 

मैं आज्ञाकारी बच्चे की तरह बिना किसी सवाल के बाथरूम में चला गया, पीछे पीछे वो भी आई, जब वो अंदर आई तो उसके हाथ में... 

इसके बाद की कहानी अगली कड़ी में ! 

मुझे मेल भेज कर बताइये कि कैसी लगी मेरी कहानी आपको !
-
Reply
07-01-2017, 10:31 AM,
#4
RE: XXX Kahani मुम्बई के सफ़र की यादगार रात
मुम्बई के सफ़र की यादगार रात-4

लेखक : सन्दीप शर्मा 

हम दोनों ने पाव भाजी खाई और उसके बाद साक्षी मुझ से बोली अब तुम्हे एक काम करना होगा मेरी मर्जी से ... 

मैंने कहा- हुकुम करो जान क्या करना है वो उठी उसके बैग में से कुछ निकालने गई और मुझ से बोली तुम बाथरूम में चलो मैं भी आ रही हूँ | मैं आज्ञाकारी बच्चे की तरह बिना किसी सवाल के बाथरूम में चला गया पीछे पीछे वो भी आई, जब वो अंदर आई तो उसके हाथ में एक इलेक्ट्रिक रेजर था। 

मैंने कहा- इसका क्या करने वाली हो? मैंने शेव तो सवेरे ही बनाई थी। 

वो तौलिया खींच कर मेरे लण्ड की तरफ इशारा करते हुए बोली- तुम्हारी शेव तो बनी हुई है पर इसकी नहीं बनी ! मुझे इसकी शेव करनी है, इसके बाल मुँह में जाते हैं तो मजा नहीं आता। 

मैंने कहा- देखना बाल के साथ कुछ और मत काट देना ! 

वो बोली- तुम चुपचाप रहो और मुझे मेरा काम करने दो। 

इसी बीच साक्षी ने गीजर चालू कर दिया और रेजर से मेरी झांटों के बाल बड़े प्यार से साफ करने लगी। उसको इस काम में मुश्किल से 5 मिनट लगे होंगे उतने वक्त में उसने मेरी झांट के पूरे बाल साफ़ कर दिए, उसके बाद उसने मेरे हाथ ऊपर करके मेरी बगल के भी बाल साफ़ कर दिए। 

मेरे बाल साफ़ करने के बाद मुझसे बोली- एक मिनट में वापस आती हूँ, फिर तुम नहा लेना। 

मैंने कहा- तुम भी साथ में आओ, साथ में नहायेंगे। 

वो बोली- ठीक है, पहले वापस तो आने दो उसके बाद साथ में ही नहाएँगे। 

वो गई, रेजर रख कर जब वो वापस आई तो उसके हाथ में तौलिया, पियर्स सोप और शैम्पू भी था पर साक्षी ने अपने बालों को प्लास्टिक कवर से ढक रखा था। 

मेरे पूछने पर बोली- मैं अपने बाल गीले नहीं करना चाहती ! यहाँ आने के पहले बाल धोए हैं और यहाँ हेयर ड्रायर लेकर नहीं आई हूँ, अगर अभी बाल गीले हो गये तो सूख नहीं पाएँगे। 

तौलिया उसने सूखे हुए बेसिन के ऊपर रख दिया और बाकी सामान मेरे पास ले आई। 

मैंने कहा- ठीक है जैसा तुम्हें ठीक लगे। 

उसने शावर चालू किया तो पानी की बौछार मेरे ऊपर आना शुरू हो गई, वो गुनगुना पानी बड़ा ही अच्छा लग रहा था। उसने अपने हाथों से मेरे सर शावर की तरफ करके पूरा भिगो दिया और शावर बंद कर दिया, हाथ में शैम्पू लेकर मेरे सर पर लगाया और फिर साबुन लेकर मेरे गीले बदन पर साबुन मलना शुरू कर दिया। उसके हाथ लगाने से मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा था पर मैं जैसे ही उसको हाथ लगाने लगा तो बोली- चुपचाप खड़े रहो, अभी कुछ नहीं करना ! 

मैं बेचारा रुक गया, उसने जब पूरे बदन पर अच्छे से साबुन लगा दिया तो शावर चालू कर दिया। शावर चालू होने के बाद जब वो मेरे सर के शैम्पू को धोने लगी तो मैंने उसे मेरे पास खींच लिया और उसको मेरी बाँहों में भर लिया और मेरे साथ साथ वो भी गीली होने लगी। वो अपने हाथों से मेरे सर पर लगे शैम्पू को धो रही थी और मैं उसके गीले हो रहे बदन पर मेरे हाथ चला रहा था और उसे अपने पास खींचता जा रहा था। 

कपड़े तो दोनों ने ही नहीं पहने थे इसलिए मेरा पूरा तना हुआ लण्ड उसकी चूत से टकरा रहा था और अंदर घुसने की नाकाम कोशिश कर रहा था। मैं तो जोश में था ही, मेरी इस हरकत से वो भी जोश में आ रही थी पर फिर भी उसने पूरा ध्यान सिर्फ मुझे नहलाने में लगा रखा था। जब सर का शैम्पू और बदन का साबुन लगभग साफ़ हो गया तो मेरे हाथ छुड़ा कर वो मेरे पीछे आ गई और मुझे घुमा कर मेरे सीने को शावर की तरफ कर दिया जो अभी तक पीठ की तरफ था और मेरे सीने पर अपने हाथ चलाने लगी और सीने का साबुन साफ़ करके मेरे खड़े लण्ड को अपने हाथों से धोने लगी। 

अब मैं काबू से बाहर हो रहा था, मैं घूमा और उसे मैंने पकड़ कर उसके होंठों को चूम लिया, उसने भी मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया था, मैं उसे चूम रहा था और वो मेरे लण्ड को मसल रही थी। 

मुझसे और रुकते नहीं बन रहा था तो मैंने उसे कमोड की तरफ खींचा। मैं खुद कमोड पर जा कर बैठ गया और उसे मैंने अपने ऊपर खींचा तो मुझे होंठों पर चूम कर बोली- बस एक मिनट रुको। 

उसने पहले शावर बंद किया, सिंक पर से तौलिया उठाया, उसमें से एक कंडोम निकाला और उसे खोल कर मेरे लण्ड पर पहना दिया फिर मेरे लण्ड को अपने हाथों से पकड़ कर खुद चूत पर टिकाया और एक धक्के में मेरा पूरा लण्ड अंदर ले लिया। 

इस अचानक हुए हमले से मेरे मुँह से एक सिसकारी निकल गई और उसकी भी हल्की सी आह निकल गई। लण्ड अंदर तक डलवाने के बाद उसने मुझे होंठों पर चूमा और धीरे धीरे उसने झूमना शूरू कर दिया, मैं भी कमोड पर बैठा बैठा ही उसके धक्कों का साथ दे रहा था, कभी उसके होंठों को चूम रहा था और कभी उसके बड़े बड़े स्तन मुँह में लेकर चूस रहा था। 

हम दोनों की आह आह ओह ओह पूरे बाथरूम में गूँज रही थी, वो हर धक्के के साथ मुझे जोर से कस लेती थी।कमोड पर होंठों और चूचियों को चूसने और एक-दूसरे में खो जाने का कार्यक्रम कितनी देर चला, वक्त का तो पता नहीं पर यही कार्यक्रम तब तक बिना आसन बदले चलता रहा जब तक़ साक्षी पूरी तरह से झड़ नहीं गई। उसके झड़ने में हर झटके पर वो चूत को समेट लेती थी जिससे मेरे लण्ड पर बड़ा ही प्यारा अनुभव होता था। जब वो पूरी तरह से झड़ गई तो उसने मुझे प्यार से चूमा और बड़ी अदा से मेरे ऊपर से उठी और जाकर बेसिन पर झुक कर खड़ी हो गई बोली- आओ ना ! 

मैं उसका इशारा समझ गया, मैं उठ कर उसके पीछे गया और उसकी चूत में लण्ड को डाल दिया जो बिना किसी मुश्किल के अंदर चला गया। साक्षी की चूत पूरी तरह से उसकी चूत के पानी से भीगी हुई थी और वो बह कर उसकी टांगों पर भी आ रहा था, उसकी चूत इतनी गीली हो गई थी कि मुझे मजा नहीं आ रहा था।
-
Reply
07-01-2017, 10:31 AM,
#5
RE: XXX Kahani मुम्बई के सफ़र की यादगार रात
मैंने लण्ड बाहर निकाला, तौलिए से उसकी चूत को पूरी तरह से साफ़ कर दिया और कंडोम पर भी जो चिकनाई थी वो सारी चिकनाई साफ़ कर दी। उसके बाद मैंने मेरे लण्ड को फ़िर से साक्षी की चूत में घुसा दिया। इस बार अंदर जाने में थोड़ा सा घर्षण जरूर लगा लेकिन साक्षी की चूत अंदर से तो गीली ही थी अत: एक बार अंदर जाने के बाद वापस से मेरे लण्ड पर भी चिकनाई लग गई। 

मैंने उसे धक्के मारना शुरू किए और आगे झुक कर एक हाथ से साक्षी की चूत को आगे से मसलने लगा, दूसरे हाथ से उसके चूचों को दबा रहा था और उसकी चिकनी पीठ को चूस भी रहा था। मैं इसी तरह से कुछ देर तक धक्के लगाता रहा और साक्षी भी मेरा साथ देती रही, मुझे लगा अब मैं झड़ जाऊँगा तो मैंने चूचे छोड़ साक्षी की कमर को पकड़ा और जोर जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिए। 

वो भी मेरा साथ देते हुए और जोर से और जोर से का नारा बुलंद कर रही थी। साक्षी का सर बेसिन से ना टकराए इसलिए मैंने उसने सर के नीचे तौलिया रख दिया था और वो खुद एक हाथ से अपनी चूत को रगड़ने लगी थी। 

मैंने 20-22 धक्के लगाए होंगे कि मैं झड़ने लगा, मेरे झड़ने के साथ ही साक्षी भी फिर से झड़ने लगी। झड़ने के बाद वो और मैं पूरी तरह से निढाल हालत में आ चुके थे, वो बेसिन पर सर रख कर लेट सी गई थी और मैं उसकी पीठ पर। कुछ देर बाद जब दोनों के शरीर में फिर ताकत महसूस हुई तो पहले उसने ही पहल की और मुझे कमोड पर बिठा कर मेरे ढीले हो चुके लण्ड पर से कंडोम उतारा और बड़े प्यार से मेरे ऊपर आ कर दोनों तरफ पैर कर के बैठ गई और मेरी गर्दन पर बाहें डाल कर मेरे होंठों पर चूमना शुरू कर दिया। 

साक्षी की इस हरकत से मेरी भी थकान कम हो गई और मैंने भी उसे पलट कर चूमना शुरू कर दिया। 

हम दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही बैठे रहे फिर वो बोली- जानू, भूख लग रही है !कुछ खिलाओ ना ! 

भूख तो मुझे भी लग रही थी, मैंने कहा- चलो कुछ मंगाते हैं। 

वो बोली- हाँ, पर पहले ठीक से नहा तो लो ! 

मैंने शावर चालू किया, साक्षी को अपने से चिपकाया और उसके होंठों को होंठों में कस कर पानी में भीगने लगा। उसने एक बार फिर मेरे सर पर शैम्पू लगाने की कोशिश की तो मैंने कहा- अभी तो लगाया था? 

तो वो बोली- वो शैम्पू था, यह कंडीशनर है। 

मैं कुछ ना बोला। उसने पहले सर पर कंडीशनर लगाया फिर बदन पर फिर से साबुन लगा दिया और उसके बाद मुझे बड़े ही अच्छे से नहलाया और मेरे लण्ड को भी अच्छे से धोया। 

जब मुझे नहला चुकी तो फिर से मेरे पास आई और मेरे होंठ चूमते हुए एक बार फिर भीगने लगी। हम दोनों ऐसे ही 2-3 मिनट भीगते रहे उसके बाद उसने शावर बंद किया, मुझे तौलिये ऊपर से लेकर नीचे तक पौंछ कर सुखा दिया और फिर उसने खुद का लाया हुआ एक तौलिया मेरे हाथ में दे दिया। उसका इशारा समझते हुए मैंने भी उसके बदन को सुखाना शुरू कर दिया। 

जब हम दोनों एक दुसरे को सुखा चुके तो नंगे ही बाहर आए और मैं कपड़े पहनने के लिए बैग उठाने लगा तो बोली- सैंडी, मैं चाहती हूँ कि तुम आज वो कपड़े पहनो जो मैं लेकर आई हूँ। 

उसकी बात सुनकर मैं आश्चर्यचकित रह गया, मुझे उससे इस बात की उम्मीद बिलकुल नहीं थी कि वो मेरे लिए कपड़े लेकर आई होगी, उम्मीद तो अलग है मैं तो चौंक ही गया था उसकी बात सुन कर। 

मेरी ऐसी हालत देखकर वो बोली- आय एम सॉरी सैंडी ! अगर तुम्हें कोई दिक्कत है तो मैं फोर्स नहीं करूंगी। 

मैंने कहा- नहीं शोना, ऐसा नहीं है। 

मेरी बात सुन कर उसने कोई जवाब नहीं दिया, बैग से एक पोलिथीन निकाली और बोली- उम्मीद है तुम्हें ये फिट आयेंगे। 

मैंने कपड़े खोले तो उसमें एक रीबॉक का लोवर और टीशर्ट थी और साथ ही जॉकी की अंडरवियर भी। 

मैंने यह देख कर साक्षी को बाँहों में भर कर चूम लिया और फिर साक्षी ने ही अपने हाथों से मुझे वो कपड़े पहनाए। कपड़े पहनने के बाद मैंने कहा- मुझे माफ कर दो, मेरे पास तुम्हें देने के लिए कोई तोहफा नहीं है। 

मेरी बात सुन कर साक्षी बोली- मुझे और कोई तोहफा चाहिए भी नहीं जितना सुख मुझे तुमसे मिल रहा है वैसा सुख मुझे पिछले कई सालों में नहीं मिला। 

मैं उसकी बात को समझ नहीं पाया, मैने कहा- क्या मतलब? 

तो वो बोली- सब समझा दूँगी जानू, चिंता मत करो, रात भर तुम्हारे ही साथ हूँ मैं ! 

उसकी बात सुन कर मैंने कहा- अच्छा ठीक है ! चलो खाने का कुछ आर्डर दे देते हैं। 

वो बोली- तुम आर्डर करो तब तक मैं कुछ पहन लूँ। 

मुझे जो कमरा मिला था वो 2+1 बेड का कमरा था और उसमें दोनों बेड के बीच एक पर्दा लगा हुआ था तो उसने अपना बैग उठाया और दूसरी तरफ चली गई और पर्दा लगा लिया ताकि मैं उसकी तरफ न देख सकूँ। जाते जाते प्यारी धमकी वाली हिदायत भी दे गई की परदे कि उस तरफ ना देखूँ मैं वरना ठीक नहीं होगा। 

मैंने अच्छे बच्चों की तरह उसकी आज्ञा का पालन किया और खाने का आर्डर कर दिया, खाने के साथ स्वीट्स भी आर्डर कर दी। 

चूंकि साक्षी को थोड़ा वक्त लगना था तो मैं टीवी चला कर लेट कर फिल्म देखने लग गया। उस वक्त टीवी पर अमोल पालेकर वाली गोलमाल आ रही थी जो मेरी पसंदीदा फिल्म है। 

5-7 मिनट के बाद साक्षी भी तैयार होकर आ गई, उसने गुलाबी रंग का सिल्की गाऊन पहना हुआ था और बालों को एक क्लिप लगा कर संवार रखा था, होंठों पर हल्की सी लाली थी और माथे पर एक छोटी सी बिंदी लगा ली थी उसने। 

उस वक्त वो क्या गजब की लग रही थी ! मैं शब्दों में नहीं बता सकता पर उस वक्त मैंने उसे कुछ लाइनें कही थी जो आज भी जहन वैसी ही ताजा हैं: 

कुदरत का कमाल है, या जन्नत की हूर है तू, 

चमकते हीरों के बीच, में जैसे कोहेनूर है तू ! 

दीवाना हो रहा हूँ, तेरे हुस्न में खोकर मैं, 

इतनी पास होके भी क्यों मुझसे दूर है तू ! 

मेरा शेर सुन कर वो बड़े प्यार से मेरे पास चली आई और मुझे होंठों पर चूम लिया और बोली- झूठी तारीफ मत करो ! 

मैंने कहा- मैं झूठ नहीं बोलता, जो सच है तो सच है। 

मेरी बात सुन कर वो शरमा गई और बोली- मुझे भी लेटना है, कहाँ लेटूँ? 

मैंने आँखों से मेरे दायें कंधे की तरफ इशारा करते हुए कहा- यहाँ पर ! 

तो वो बिस्तर पर मेरे दाईं तरफ आई और मेरे कंधे पर सर रख कर लेट गई। मैंने कुछ कहने की कोशिश की तो उसने मेरे होंठों पर ऊँगली रख दी और... 

आगे की कहानी अगली कड़ी में !
-
Reply
07-01-2017, 10:31 AM,
#6
RE: XXX Kahani मुम्बई के सफ़र की यादगार रात
मुम्बई के सफ़र की यादगार रात-5

लेखक : सन्दीप शर्मा 

उस वक्त वो क्या गजब की लग रही थी ! मैं शब्दों में नहीं बता सकता पर उस वक्त मैंने उसे कुछ लाइनें कही थी जो आज भी जहन वैसी ही ताजा हैं: 

कुदरत का कमाल है, या जन्नत की हूर है तू, 

चमकते हीरों के बीच, में जैसे कोहेनूर है तू ! 

दीवाना हो रहा हूँ, तेरे हुस्न में खोकर मैं, 

इतनी पास होके भी क्यों मुझसे दूर है तू ! 

मेरा शेर सुन कर वो बड़े प्यार से मेरे पास चली आई और मुझे होंठों पर चूम लिया और बोली- झूठी तारीफ मत करो ! 

मैंने कहा- मैं झूठ नहीं बोलता, जो सच है तो सच है। 

मेरी बात सुन कर वो शरमा गई और बोली- मुझे भी लेटना है, कहाँ लेटूँ? 

मैंने आँखों से मेरे दायें कंधे की तरफ इशारा करते हुए कहा- यहाँ पर ! 

तो वो बिस्तर पर मेरे दाईं तरफ आई और मेरे कंधे पर सर रख कर लेट गई। मैंने कुछ कहने की कोशिश की तो उसने मेरे होंठों पर ऊँगली रख दी और... 

और बोली- चुप रहो, थोड़ी देर आराम करने दो, तुम टीवी देखो और मुझे सोने दो। 

उसकी बात सुनकर मैंने उसे परेशान करना ठीक नहीं समझा और उसके बाल सहलाते हुए फिल्म देखने लगा। फिल्म खत्म होने में आधा घंटा बाकी था और खाने के लिए भी होटल वालो ने 40-45 मिनट का वक्त बताया था तो मैं शांति से साक्षी को कंधे पर सुला कर फिल्म देखने लगा। मैं जब फिल्म देख रहा था तो उसके बीच में ही साक्षी को नींद आ गई थी और जब फिल्म खत्म होने को आई तो उसी वक्त खाना भी आ गया। 

मैंने धीरे से साक्षी को मेरे कंधे से नीचे उतारा उसे चादर औढ़ा कर दरवाजा खोल कर खाना लिया और उसे 20 का नोट देकर बाहर से ही चलता कर दिया। 

दरवाजे पर "डू नॉट डिस्टर्ब " का तमगा लगाया और अंदर आ गया। 

मैं अंदर आया तो मैंने देखा कि साक्षी जाग गई थी और नींद में बड़ी प्यारी लग रही थी। उसने बाहें फैला कर मुझे गले लगाने के लिए बुलाया।

मैं उसके पास गया, उसको बाँहों में भर कर उसके सर को चूमा और बोला- चलो खाना खा लो। 

वो लेटी रही और मैं खाना निकालने लगा तो वो बोली- संदीप, मुझे कुछ बात करनी है। 

मैंने बिना उसकी तरफ देखे कहा- शोना, रात भर तुम मेरे साथ हो, फिर क्यों चिंता कर रही हो ! पहले कुछ खा लो फिर बात कर लेना। 

वो फिर कुछ बोलने ही वाली थी कि मैंने पास जाकर उसके होंठों को चूम लिया और उसकी आवाज वहीं रुक गई। 

मैंने कहा- पहले खाना उसके बाद दूसरी बात ! 

वो बेचारी हार कर खाना खाने के लिए उठी और फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया, साक्षी ने खाना खाते हुए मुझे अपने हाथ से भी खाना खिलाया और मैंने उसे ! 

फिर हम दोनों ने गुलाबजामुन खाए, मुझे साक्षी ने बाद में बताया कि उसे भी गुलाबजामुन बहुत पसंद हैं। 

जब हम खा चुके तो मैं वापस लेट गया और साक्षी को भी मैंने साथ लेटा लिया। 

मेरे कंधे पर सर रखने के बाद साक्षी बोली- संदीप, मुझे तुम से कुछ कहना है। 

मैंने कहा- रहने दो, ऐसे ही लेटो, अच्छा लग रहा है। 

मेरी बात सुन कर उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे, वो बोली- प्लीज सुन लो.. 

मैं उठ कर बैठ गया, मैंने कहा- ठीक है कहो क्या कहना है? 

वो बोली- नहीं, तुम लेट जाओ, फिर तुम्हारे कंधे पर सर रख कर ही बताऊँगी। 

मैंने कहा- ठीक है बाबा जैसा तुम कहो ! 

और मैं लेट गया, उसने मेरे कंधे पर सर रखा मुझे पकड़ लिया और बोली- संदीप, मैं कॉल गर्ल हूँ ! 

यह मेरे लिए एक और झटका था क्योंकि इसके पहले मेरे हिसाब से कॉलगर्ल के मायने सिर्फ पैसे की भूखी लड़कियाँ होती थी और यहाँ तो यह मुझ पर ही खर्च किए जा रही थी और मुझसे मिलने की इसे कोई उम्मीद भी नहीं थी। 

मैंने कहा- साक्षी, मजाक करो, लेकिन ऐसे मजाक नहीं जो हद से बाहर हो। 

तो वो बोली- मेरे आँसू तुम्हें मजाक लग रहे हैं? 

मैंने कहा- सॉरी शोना, पर मुझे यकीन नहीं हो पा रहा है कि कोई कॉल गर्ल इस तरह से प्यार कर सकती है। 

वो बोली- संदीप, कॉल गर्ल्स भी प्यार की भूखी होती है जो उन्हें पैसे के बदले कभी नहीं मिल पाता। 

उसका जवाब तो ठीक था पर संतोषजनक नहीं, मैंने कहा- आय एम् सॉरी ! पर मुझ में तुमने ऐसा क्या देख लिया कि मुझसे प्यार करो? और मैं बहुत अच्छा भी नहीं दिखता। 

वो बोली- प्यार करने के लिए अच्छा दिखना जरूरी नहीं होता, अच्छा इंसान होना जरूरी होता है। 

मैंने कहा- पर मैंने तो ऐसा कुछ अच्छा भी नहीं किया? 

वो बोली- वो तो मैंने देखा है कि क्या किया और क्या नहीं ! 

मैंने पूछा- मैंने क्या किया? 

तो बोली- मैंने देखा था मुझे खाने के लिए तुमने प्यार से मनाया, मेरे झड़ जाने पर बस में कोई जबरदस्ती नहीं की, तुमने इस बात का बस में पूरा ध्यान रखा कि मेरे बारे में कोई गलत न सोचे और रात में खुद का कम्बल मुझे दे दिया ताकि मुझे ठण्ड न लगे। 

मैंने कहा- कोई भी होता तो यही करता। 

वो बोली- नहीं संदीप, कोई ऐसा नहीं करता, मैं जानती हूँ मर्दों के लिए औरत सिर्फ एक सामान होती है जिसे इस्तेमाल किया और फैंक दिया। 

यह बोल कर वो रोने लगी और मैंने उसे पलट कर अपनी बाँहों में भर लिया और उसके बाद उसके आंसुओं को होंठों से पीने लगा और उसे गले लगा लिया। 

उसने भी मुझे जोर से गले लगा लिया, कुछ मिनट तक हमें ऐसे ही रहे फिर उसने मेरे होंठों पर चूमना शुरू किया और मैंने भी उसके चुम्बनों का जवाब देना शुरू कर दिया। 

इस बीच कब मेरा लोअर और अंडरवियर उतरा, पता ही नहीं चला, इसी बीच साक्षी ने भी पैंटी उतार दी थी और हम दोनों की बीच में सिर्फ एक ओवरकोट ही था जो खुला हुआ ही था। 

मैंने आगे बढ़ने की कोशिश की तो साक्षी बोली- कंडोम तो लगा लो? 

मैंने कहा- मैं नहीं चाहता, मुझे तुम पर भरोसा है। और मैं बाहर निकाल लूँगा। 

तो वो बोली- मुझे चाहिए, मुझे खुद पर भरोसा नहीं है। 

उसने इतनी प्यार से यह बात कही थी, मैं उसकी बात टाल नहीं सका, मैंने लैपटॉप बैग में से मूड्स सुप्रीम का पैकेट निकला तो उसे मेरे हाथ से पैकेट ले लिया, उसमें से एक कंडोम निकाला और अपने नर्म हाथों से मेरे तने हुए लण्ड पर पूरा कंडोम चढ़ा दिया। 

उसके बाद मुझे अपने इशारे से वो नीचे की तरफ ले गई और मेरे लण्ड को अपने हाथ से रास्ता बताते हुए अपनी चिकनी चूत में डलवा लिया। 

लंड को डलवाने के बाद उसने अपनी दोनों टाँगें मेरी पीठ पर लपेट ली और मुझे होठो पर चूमने लगी। 

अब मैं ऊपर से उसे चोद रहा था और वो नीचे से धक्के मार मार कर चुदवा रही थी, साथ ही मेरे होंठ भी चूसते जा रही थी। 

इस बार हम दोनों ही एक दूसरे के होंठों को मानो रगड़ रहे थे और इसमें हम दोनों के चेहरे की स्थिति भी बदल रही थी, कभी इस तरफ से तो कभी उस तरफ से दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे और इस चूमने मे हम दोनों की नाक एक दूसरे की नाक से रगड़ खा रही थी जो मुझे अपने तौर पर बहुत अच्छी लग रही थी। 

अभी भी मैंने मेरी टीशर्ट पहनी हुई थी और साक्षी ने भी उसके ऊपर के कपड़े पहने हुए ही थे जिन्हें निकालना भी उतना ही जरूरी लग रहा था जितना नीचे वाले। 

तो साक्षी ने मेरी टीशर्ट निकाल दी और मैंने साक्षी को थोड़ा सा ऊपर उठा कर उसके कपड़े भी पूरी तरह से निकाल दिये। अब उसके बदन पर सिर्फ उसकी गुलाबी ब्रा थी जो मैंने जानबूझ कर नहीं उतारी और मैंने उसे चोदना शुरू कर दिया। मैं ऊपर से धक्के लगा रहा था वो नीचे से धक्के लगा रही थी। 

इसी बीच में कभी कभी मैं उसकी चूत को रगड़ रगड़ कर भी चोद रहा था जो उसे बहुत अच्छा लग रहा था। साथ ही हम दोनों का होंठों से होंठों को टकराना और नाक से नाक का रगड़ना तो जारी ही था। 

और मैं एक हाथ से उसकी चूची को भी दबाते जा रहा था। हम दोनों एक दूसरे को इसी तरह से काफी देर तक चोदते रहे पर हम दोनों ने ही अपनी जगह बदलने की इच्छा नहीं की। 

बीच बीच में मैं एक दो मिनट के लिए रुक कर उसके सीने पर आराम भी कर लेता था और फिर से उसे चूमते हुए धक्के लगाना शुरू कर देता था। और वो मेरे हर धक्के का जवाब धक्के से ही देती थी। 

हम दोनों एक दूसरे के साथ इसी तरह काफी देर तक प्यार की कुश्ती लड़ते रहे और फिर मैं झड़ने की कगार पर आया तो मैंने तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए, उसकी गर्दन में खुद को छुपा लिया और उसकी गर्दन और कंधों पर चूमने लगा। 

साक्षी ने भी मेरा पूरा साथ दिया और कुछ धक्के मार कर पूरी तरह से झड़ गया। 

मैं दो बार तो पहले ही झड़ चुका था तो इस बार मैं पूरी तरह से थक चुका था और झड़ने के बाद मैं साक्षी के ऊपर ही थक कर लेट गया। मुझे कब नींद आ गई, पता भी नहीं चला। 

और मुझे यह तब पता चला कि मैं सो गया था जब साक्षी ने मेरे लण्ड को चूस चूस कर मुझे जगाया। 

मैंने उससे पूछा- मैं कितनी देर तक सोता रहा? 

तो वो बोली- करीब एक घण्टा ! 

मैं कुछ कहता, उससे पहले ही उसने इशारे से मुझे चुप करा दिया और... 

बाद की कहानी अगली कड़ी में !
-
Reply
07-01-2017, 10:31 AM,
#7
RE: XXX Kahani मुम्बई के सफ़र की यादगार रात
मुम्बई के सफ़र की यादगार रात-6

लेखक : सन्दीप शर्मा 

मैंने उससे पूछा- मैं कितनी देर तक सोता रहा? तो वो बोली करीब एक घण्टा ! 

मैं कुछ कहता उसके पहले ही उसने इशारे से मुझे चुप करा दिया, उसने मुझे पानी दिया और मेरे सामने घुटने के बल बैठ कर मेरे लण्ड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। जब मेरा लण्ड भी पूरी तरह से जाग गया और मैं भी, तो उसने एक कंडोम मेरे लण्ड पर लगाया, फिर आकर चूत को मेरे लण्ड पर टिकाकर एक झटके में मेरा पूरा लण्ड उसने अपनी चूत में घुसा लिया, मेरे लण्ड पर बैठ कर झूमने लगी और अपनी चूत के अंदर-बाहर करने लगी। 

वो खुद ही ब्रा भी उतार चुकी थी तो उसके बड़े बड़े स्तन हिल रहे थे जिन्हें पकड़ कर एक स्तन को मैंने मुँह में भर लिया और चूसने लगा तथा दूसरे स्तन को दबाने लगा। जब एक स्तन चूस कर मन भर जाता तो दूसरे स्तन को चूसना शुरू कर देता। 

उस वक्त वो आह जानू ! बहुत अच्छा लगा जानू ! जैसे शब्द बार बार कह रही थी। 

वो काफी देर तक इसी तरह से मेरे ऊपर आकर खुद को चुदवाती रही और मैं नीचे से उसके दूध पीता रहा। अचानक उसने अपनी गति तेज कर दी तो मुझे लगा कि अब यह झड़ने वाली है और उसने मेरा मुँह उसके स्तनों से अलग हटा कर उसके होंठों से लगा लिया और मुझे जोर जोर से चूमने लगी। मैं भी उसके चुम्बनों का जवाब दे रहा था और उसके धक्कों में उसका साथ दे रहा था कि अचानक वो पूरी तेजी से झड़ गई। 

झड़ने के बाद वो थक कर मेरे ऊपर लेट गई और मैं उसकी नंगी पीठ को सहलाने लगा। उसने कुछ मिनटों में ही मुझे फिर से चूमना शुरू कर दिया, जिसका मतलब था कि वो फिर से तैयार है। 

मैं तो एक नींद ले ही चुका था तो मेरी ताकत तो वापस आ ही गई थी पूरी तरह से, पर इस बार मेरा मन उसकी गाण्ड मारने का था तो मैंने उसे कहा- साक्षी, अब आगे वाली रानी की तो काफी सेवा कर चुका, थोड़ी पीछे की महरानी की भी सेवा करने का मन है। 

तो वो बिना कुछ बोले पलट कर घोड़ी बन गई और मैं उसके पीछे आ गया। पीछे आने के बाद मैंने उसकी गाण्ड को हाथों से थोड़ा सा खोला और कंडोम समेत पूरा लण्ड धीरे धीरे उसकी गाण्ड में डाल दिया। 

पूरे लण्ड के अंदर जाने के बाद भी उसके मुँह से सिर्फ एक हल्की सी आह ही निकली, वो बोली- सॉरी जानू, यह भी काफ़ी खुल चुकी है... 

मैंने कहा- कोई बात नहीं जान ! मुझे ऐसी ही चाहिए जिससे पूरा मजा मिल सके और तुम्हें भी तकलीफ ना हो। 

उसकी गाण्ड में लण्ड डाल कर मैंने साक्षी की गाण्ड मारना शुरू कर दिया, मैं उसे धक्के मार रहा था और वो भी मेरे हर धक्के का जवाब धक्के से ही दे रही थी, साथ ही उसने अपनी गाण्ड को भी सिकोड़ लिया था जिससे मुझे और मजा आ रहा था। 

गाण्ड मारते हुए मैंने एक हाथ से उसकी चूत को दबा रखा था एक हाथ से उसके स्तन को मसल रहा था और उसके मुँह से सिर्फ आह आह जैसे शब्द निकल रहे थे। 

मैं इसी तरह से कुछ मिनट तक उसकी गाण्ड मारता रहा और वो झड़ने की कगार पर आ गई, वो बोली- संदीप, मेरा होने वाला है। 

मैं बोला- हो जाने दो जानू ! 

और उसको और जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए मैंने। 

मैंने 10-12 धक्के और मारे होंगे कि वो झड़ गई और इस बार उसकी चूत से एक पिचकारी सी छूट गई जो बिस्तर को गीला कर गई। 

मेरा भी बस होने ही वाला था तो मैंने उसकी गाण्ड को दोनों हाथों से पकड़ा और जोर जोर से धक्के मारना शुरू कर दिया और मैंने भी कुछ धक्के मारे होंगे कि मैं भी उसकी गाण्ड में ही जोर से चीखता हुआ झड़ गया। 

मेरे झड़ने के बाद वो भी लेट गई और मैं उसके ऊपर ही लेट गया, एक दो मिनट के बाद जब मैं थोड़ा सा ठीक हुआ तो मैंने उसकी गाण्ड में से लण्ड निकाला, कंडोम निकाल कर पलंग के नीचे फैंका पास में पड़ी हुई तौलिया उठा कर लण्ड पौंछा और साक्षी को पास में खींच कर अपने से चिपका कर लेट गया। 

साक्षी ने भी मुझे कस कर बाँहों में भर लिया। 

हम दोनों को नींद कब आई पता ही नहीं चला। सुबह साढ़े छः पर मेरे मोबाइल के अलार्म से नींद खुली। 

जागने के बाद भी हम दोनों ने ही न उठने की कोई कोशिश की और ना ही एक दूसरे से अलग होने की। हम दोनों एक दूसरे और चिपक गये और तब तक चिपके रहे जब तक मेरे मोबाइल ने दस मिनट बाद का दूसरा अलार्म नहीं बजा दिया। 

अलार्म बंद करने के बाद मैंने मोबाइल बगल में रखा, कंडोम का पैकेट उठाया और साक्षी की तरफ देखते हुए इशारों में उससे पूछा तो उसने मुस्कुरा कर सर हिला कर हाँ में जवाब दिया। 

बस इस जवाब की देर थी कि मैंने कंडोम चढ़ाया और साक्षी को नीचे लिटाया, मैं उसके ऊपर चढ़ गया। 

सुबह की खुमारी थी, हम दोनों ही एक दूसरे के साथ के मजे ले रहे थे, मैंने उसके होंठ चूमने की कोशिश की तो वो बोली- ब्रश नहीं किया है, बदबू आएगी। 

मैंने बिना कुछ कहे उसके गालों को चूसना शुरू कर दिया और उसने भी पलट कर मेरे गालों को चूसना शुरू कर दिया। उसने मेरी कमर को अपनी टांगों में लपेट लिया और मैंने भी तेज तेज धक्के मारने शुरू कर दिये, जब मैं उसे चोद रहा था तो वो मेरी पीठ पर बड़े प्यार से हाथ चला रही थी और मेरे गालों और कंधों को चूस रही थी, हल्के-हल्के काट रही थी जिससे मेरा जोश और बढ़ रहा था और मुझे और ज्यादा मजा आ रहा था। 

मैंने थोड़ी देर धक्के मारे होंगे कि मैं झड़ने की कगार पर आ गया और मैंने रफ़्तार बढ़ा दी और कुछ धक्को के बाद मैं झड़ गया। मेरे झड़ने पर उसने मुझे अपने सीने पर सुला लिया और बड़े प्यार से मेरी पीठ सहलाने लगी। 

मैं उसकी बगल में लेट गया और उसके होंठों को चूमने लगा और उससे प्यार भरी बातें करने लगा। 

फिर मैंने फोन उठा कर चाय ब्रेड जैम और उपमा का ऑर्डर दिया और फ़िर साक्षी से बातें करने लगा, बातों बातों में उसने विस्तार में बताया कि वो कैसे कॉल गर्ल बनी और उसकी मजबूरियाँ क्या थी। 

यह कहानी शायद कभी नहीं लिखूँगा तो कृपया कोई उम्मीद ना करें। 

तब तक नाश्ता आ गया हम दोनों ने नाश्ता किया, मुझे नाश्ता भी साक्षी ने अपने हाथों से ही कराया। उसके बाद हम दोनों साथ में ही चिपककर नहाए। नहाते हुए साक्षी ने मुझे भी प्यार से नहलाया, मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया था तो साक्षी ने मेरे खड़े लण्ड को चूस चूस के फिर से मुझे शांत किया। 

तैयार होते होते हमें नौ बज चुके थे, मुझे दफ्तर जाना था तो हम लोग साढ़े नौ बजे बाहर निकलने लगे, मैंने उससे कहा- मुझे अपना फोन नंबर दे दो। 

तो वो बोली- प्लीज संदीप, मुझ से तुम नम्बर मत मांगो, शाम को तुम्हें मैं जरूर मिलूँगी। 

मैंने उसकी बात मान ली और मैं दफ्तर आ गया। मैं तब इतना खुश था कि मैंने दो दिन का काम एक ही दिन में पूरा कर लिया। 

मैंने सोचा कि अब तो कल दफ्तर भी नहीं आना है तो मजे ही मजे ! 

शाम को मैं सवा पाँच दफ्तर से निकला और सीधे होटल आया तो रिशेप्सन पर मेरे लिए एक गिफ्ट पैक रखा हुआ था। 

मैं जानता था कि इसे साक्षी ने ही भेजा होगा, मैंने कमरे में जाकर उस गिफ्टपैक को खोल कर देखा तो उसमें पीटर इंगलैंड की दो शर्ट, एक टाइटन की घड़ी, एक लिफाफा और एक चिट्ठी रखी हुई थी। 

चिट्ठी में सिर्फ इतना ही लिखा था- संदीप, तुमने मुझे बहुत प्यार दिया पर मुझे माफ कर देना मैं तुमसे अब कभी नहीं मिल पाऊँगी। 

मैंने लिफाफा खोला तो उसमें 8500 रूपये रखे हुए थे। मेरी मानसिक स्थिति मैं शब्दों में तो नहीं बता सकता लेकिन फिर मेरा मन मुंबई में रुकने का नहीं हुआ, मैंने अपना बैग पैक किया, इंदौर के लिए एक टैक्सी बुक की और उसी रात आठ बजे इंदौर के लिए निकल आया। 

उसके बाद से कई सालों तक मैं साक्षी के फोन का इन्तजार करता रहा पर उसका फोन मुझे नहीं आया। 

इन्तजार आज भी है... साक्षी अगर तुम यह कहानी पढ़ती हो तो प्लीज एक बार मुझसे बात कर लो। 

आपको हम दोनों की छोटी सी प्रेम कहानी कैसी लगी, बताइयेगा जरूर !
-
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Lightbulb Antarvasna Sex kahani वक़्त के हाथों मजबूर sexstories 207 69,724 Yesterday, 04:05 AM
Last Post: rohit12321
Thumbs Up bahan sex kahani बहन की कुँवारी चूत का उद्घाटन sexstories 44 18,485 04-23-2019, 11:07 AM
Last Post: sexstories
mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी ) sexstories 59 57,631 04-20-2019, 07:43 PM
Last Post: girdhart
Star Kamukta Story परिवार की लाड़ली sexstories 96 44,461 04-20-2019, 01:30 PM
Last Post: sexstories
Thumbs Up Sex Hindi Kahani गहरी चाल sexstories 89 80,809 04-15-2019, 09:31 PM
Last Post: girdhart
Lightbulb Bahu Ki Chudai बड़े घर की बहू sexstories 166 243,563 04-15-2019, 01:04 AM
Last Post: me2work4u
Thumbs Up Hindi Porn Story जवान रात की मदहोशियाँ sexstories 26 26,156 04-13-2019, 11:48 AM
Last Post: sexstories
Star Desi Sex Kahani गदरायी मदमस्त जवानियाँ sexstories 47 35,354 04-12-2019, 11:45 AM
Last Post: sexstories
Exclamation Real Sex Story नौकरी के रंग माँ बेटी के संग sexstories 41 32,336 04-12-2019, 11:33 AM
Last Post: sexstories
Lightbulb bahan sex kahani दो भाई दो बहन sexstories 67 31,836 04-10-2019, 03:27 PM
Last Post: sexstories

Forum Jump:


Users browsing this thread: 1 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


sxe.Baba.NaT.H.K.sasur kammena bahu nageena sex story sex babaSex stories of subhangi atre in xxxशरीर का जायजा भी अपने हाथों से लिया. अब मैं उसके चूचे, जो कि बहुत बड़े थेLadkiyo ke levs ko jibh se tach karny seJacqueline fernandez nude sex images 2019 sexbaba.netras bhare chut ko choda andi tel daalkarhot ma ki unkal ne sabke samne nighty utari hinfi kahaniRandikhane me rosy aayi sex story in Hindiuncle ne bataya hot maa ki hai tight chut sex storiesXxx vide sabse pahale kisame land dalajata haichhoti kali bur chulbulisex video babhike suharatApane dono haathon se chuchu dabai all moviesMaa bete ki accidentally chudai rajsharmastories Ashwarya rai south indian nudy sexbabaहवेली कि गांड कथाLadkibikni.sexkam ke bhane bulaker ki chudai with audio video desibudhhe se chudwakar maa bani xossipantervasna bus m chudaiपिताजी से चुदाई planing bna krववव तारक मेहता का उल्था चस्मा हिंदी सेक्स खनिअAntervasna sax Baba hamara chudakad parivar.netfast chodate samay penish se pani nikal Jay xxx sexHindi Lambi chudai yaa gumaiSex bhibhi or nokar ki malishSex stories of bhabhi ji ghar par hai in sexbabalabada chusaibudhhe se chudwakar maa bani xossipporns mom chanjeg rum videoshrdhakapoor imgFy.netNAUKAR SE SUKH MYBB XOSSIP SEX STORYmoot pikar ma ki chudai ki kahaniaगोद मे उठाकर लडकी को चौदा xxx motixixxe mota voba delivery xxxconगंदी वोलने वाली MP 3 की बातेAntervasnacom. 2015.sexbaba.mujhe ek pagal andhe buddha ne choda.comबदनामी का डर चुदाई की कहानीThakur ki hawali sex story sex babaलड़की ने नकली लंड से लड़के की गांड़ फाड़ डालीApni nand ki gand marwai bde land seఅక్క కొడుకు గుద్దుతుంటేphariyana bhabhi ko choda sex mmsSex store pershan didiचूचियाँ नींबू जैसीXx he dewangi baba sexबदन की भूख मिटाने बनी रंडीkahani xxy ek majbur ladke ki bagh 2https://forumperm.ru/Thread-tamanna-nude-south-indian-actress-ass?page=45beharmi se choda nokari ke liyeLugai ki sexy lugai kholo laga hua sexy video se, xy videoबूबस की चूदाई लड़की खूश हूई Preity zinta nude fucking sex fantasy stories of www.sexbaba.netबाबा सेक्स मे मजेदार स्टोरीXxxviboe kajal agrval porn south inidanwinter me rajai me husand and wife xxxnewsexstory com marathi sex stories E0 A4 A8 E0 A4 B5 E0 A4 B0 E0 A4 BE E0 A4 A4 E0 A5 8D E0 A4 B0mummy ki santushi hot story sex baba.comwww.ek hasina ki majburi sex baba netmypamm.ru maa betaSexbaba.comलाल सुपाड़ा को चुस कर चुदवाईSoumay Tandon sexbabपंजाबी भाभी बरोबर सेक्स मराठी कथा मै घर से दुकान पर गई तो दुकान वाले ने नाप के बहाने मेरी चुदाई की Sex storiyयदि औरत की बाई और कमर से लेकर स्तन तक नस सूजे तो इसका क्या मतलब हैmaa ki moti gand gahri nabhi bete ka tagda land chudsi kahaniaफारग सेकसी