Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - Printable Version

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RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - sexstories - 06-25-2017

यहाँ पर कोई शर्म जैसी बात नही थी. सारे लेडी सेक्रेटरीस मुझ
से भी छ्होटे कपड़ों मे थे. उनके सामने तो मैं काफ़ी डीसेंट लग रही
थी. सारे मर्द छ्होटे स्वीमिंग कॉस्ट्यूम्स पहन रखे थे और नग्न
बदन थे. उनकी मसल देख कर किसी भी युवती का मन
ललचा जाए. राज जी इस उम्र मे भी अपने हेल्त का बहुत ख़याल
रखते थे. रोज सुबह जिम जाने के कारण उनका बदन काफ़ी कसा हुआ
था. उनके सीने से लग कर मैं बहुत चाहक रही थी. यहाँ देखने
या टोकने वाला कोई नही था.

हम काफ़ी देर तक स्विम्मिंग करते रहे. वहाँ हम कुत्च्छ कपल्स
मिलकर एक बॉल से खेल रहे थे. वहीं पर जर्मनी से आए हुए
हॅमिल्टन और उसकी सेक्सी सेक्रेटरी शशा से मुलाकात हुई. हम काफ़ी देर
तक उनके साथ खेलते रहे. शशा एक बहुत ही छ्होटी सी ब्रा और
पॅंटी पहन रखी थी. वो उन कपड़ों मे बहुत ही सेक्सी लग रही थी.
दूध के जैसी रंगत और सुनहरे बॉल उसे किसी परी जैसा लुक दे
रहे थे. उसका चेहरा बहुत ही खूबसूरत था. और उसके बूब्स इतने
सख़्त थे की लग रहा था उसने अपने सीने पर दो तरबूज बाँध रखे
हो.


हॅमिल्टन का कद काफ़ी लंबा था करीब 6'2". उसके पूरे बदन पर
सुनहरे घने रोएँ थे. सिर पर भी सुनहरे बॉल थे. हल्की सी
बेतरतीब बढ़ी दाढ़ी उसके व्यक्तित्व को और खूबसूरत बनती थी.
दोनो के बीच काफ़ी अंतरंगता थी. शशा तो बे झिझक उसको किस
करती उसके सीने पर अपने स्तनो को रगड़ती और कई बार तो उसने
हॅमिल्टन के लिंग को भी सब के सामने मसल दिया था. हॅमिल्टन भी
बीच बीच मे उसके ब्रा के अंदर हाथ डाल कर शशा के स्तनो को
मसल देता था. पॅरिस मे उन्मुक्त सेक्स का बोलबाला था. कोई अगर उस
जैसे पब्लिक प्लेस मे भी अपने साथी को नग्न कर देता और संभोग
करने लगता तो भी किसी की नज़र तक नही अटकती.

वहाँ स्विम्मिंग पूल पर ही कॉकटेल सर्व किया जा रहा था. मैने एक
ग्लास लिया और पास खड़े राज जी के होंठों से लगा दिया. राज
जी मेरी कमर को थाम कर मुझे अपने सीने से सटा लिए और
मेरे हाथों से ग्लास मे से कॉकटेल सीप करने लगे. उन्हों ने एक सीप
करने के बाद मेरे होंठों से ग्लास को सटा दिया. मैने कभी शराब
नही पीती. मगर उनके रिक्वेस्ट करने पर एक सीप उसमे से ली. मेरा
नग्न बदन उनके बदन से रगड़ खा रहा था. दोनो के नग्न बदन के
एक दूसरे से रगड़ खाने के कारण एक सिहरन सी पूरे बदन मे फैली
हुई थी.

जब राज जी ने अपने ग्लास को ख़त्म किया तो मैने ग्लास को पूल
के पास ज़मीन पर रख कर उनकी बाहों से निकल गयी और वापस
स्विम्मिंग पूल मे तैरने लगी. मुझे देख कर हॅमिल्टन भी मेरे साथ
तैरने लगा. जब मैं कुच्छ देर बाद दूसरे कोने पर पहुँची तो
हॅमिल्टन मेरे पास आकर मुझे खींच कर अपने सीने से लगा लिया.

" आइ एन्वी युवर एंप्लायर. वॉट ए सेक्सी डॅम्ज़ल ही हॅज़ फॉर ए सेक्रेटरी!"
उसने कहा और मुझे खींच कर अपने बदन से कस कर सटा लिया.
उसने अपने तपते होंठ मेरी होंठों पर रख दिए. और अपनी जीभ को
मेरे मुँह मे डालने के लिए ज़ोर लगाने लगा. मैं पहले पहले अपने
उपर हुए इस हमले से घबरा गयी थी, "म्‍म्म्मम" आवाज़ के साथ मैने
उसे ठेलने की कोशिश की मगर वहाँ का महॉल ही कुच्छ ऐसा था कि
मेरा विरोध कमजोर और छनिक ही रहा. कुच्छ ही देर मे मैने अपने
होंठों के बीच उसकी जीभ को प्रवेश करने के लिए जगह दे दी.
उसकी जीभ मेरे मुँह के एक एक कोने पर घूमाने लगा. मेरी जीभ के
साथ वो बल्ले कर रहा था.

ये देख कर शशा भी राजकुमार जी के पास सरक गयी और उनसे
लिपट कर उन्हे चूमने लगी. मैने उनकी ओर देखा तो शशा ने अपने
अंगूठे को हिला कर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया. हॅमिल्टन के
हाथ मेरे नितंबों को कस कर जाकड़ रखे थे. उसने मेरे नितंबों को
कस कर अपने लिंग पर दाब रखा था. उसके खड़े लिंग का आभास मुझे
मिल रहा था.

क्रमशः........................


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - sexstories - 06-25-2017

गतान्क से आगे........................


"डज़ ही फक यू रेग्युलर्ली" हॅमिल्टन ने मुझ से पूचछा.

"स्श्ह्ह…. ही ईज़ नोट ओन्ली माइ एंप्लायर. ही ईज़ माइ फादर इन लॉ टू… सो
यू सी देर ईज़ ए डिस्टेन्स टू बी मेंटेंड बिट्वीन उस"

"ऊह फक ऑफ…" ही सेड " इट'स शियर बुलशिट"

" बिलीव मी….. इन इंडिया इन्सेस्ट रिलेशन्षिप्स आर इल्लीगल. दे आर
बॅंड बाइ दा सोसाइटी"

" इट ईज़ नोट इंडिया बेबी….यू आर इन पॅरिस कॅपिटॉल ऑफ फ्रॅन्स. हियर
एवेरी थिंग ईज़ लीगल" उसने मेरे एक ब्रेस्ट को मसल्ते हुए कहा "
हॅव यू नेवेर बिन टू एनी न्यूड बीचस ऑफ फ्रॅन्स. देर यू विल
फाइंड दा होल फॅमिली एंजायिंग कंप्लीट न्यूडिटी. गो ऑन….. एंजाय
बेबी…… फक हिज़ ब्रेन्स आउट" मैं खिल खिला कर वहाँ से हट गयी.
कुच्छ देर बाद हम वापस सेमिनार मे पहुँच गये. फिर शुरू हुई
कुच्छ घंटों की बक बक. मैं आमने ससुर जी से सॅट कर बैठी थी.
उनके बदन से उठ रही कोलोज्ञ की खुश्बू मुझे मदहोश कर दे रही
थी. पहले तो उन्हों ने कुच्छ नोटीस नही किया लेकिन बाद मे जब उनको
मेरे दिल का हाल पता चला तो वो मेरे नितंबों पर और मेरी जांघों
को सहला रहे थे. मैने पहले एक दो बार उनको रोकने की नाकाम
कोशिश की लेकिन उनके नही मानने पर मैने कोशिश छ्चोड़ दी.

शाम को ड्रेस कोड के हिसाब से कमरे मे आकर मैने अपने सारे वस्त्र
उतार दिए फिर बिना किसी अंडर गारमेंट्स के एक माइक्रो स्कर्ट और टाइट

टी
शर्ट पहनी. मैने आईने मे अपने को देखा. मेरे निपल्स टी शर्ट के
उपर से उभरे हुए दिख रहे थे. मैने पहले घूम कर फिर झुक
कर अपने को देखा फिर आईने के पास जा कर अपने को अच्छे से निहारा.
मेरे सुडोल जिस्म का एक एक कटाव एक एक उभार साफ दिख रहा था. मैने
पीछे घूम कर आईने के आगे झुकी तो मैने देखा कि झुकने के
कारण स्कर्ट उठ जाती थी और मेरी पंटयलेशस चूत और गंद साफ दिख
रही थी. मैने ड्रेस को खींच कर नीचे करने की कोशिश की
लेकिन वो बिल्कुल भी नीचे नही सर्की. मैं उसी ड्रेस मे बाहर आई.
और राज जी के कमरे मे घुस गयी. मेरे फादर इन लॉ उस वक़्त
तैयार हो रहे थे. उन्हों ने दोबारा शेविंग की थी. और एक टी शर्ट
और जीन्स मे इतने हंडसॉम लग रहे थे कि क्या बयान करूँ.

"हाई हंडसॉम आज लगता है शशा की शामत आई है. बहुत चिपक
रही थी आपसे." मैने उन्हे छेड़ते हुए कहा.

" शशा? अरे जिसकी बगल मे तुम जैसी हसीना हो तो उसे सौ शशा
भी नही बहला सकती." कह कर उन्हों ने मेरी तरफ देखा.मुझे ऊपर
से नीचे तक कुच्छ देर तक निहारते ही रह गये. उनके होंठों से एक
सीटी जैसी आवाज़ निकली. जैसी आवाज़ आवारा टाइप के मजनू निकाला
करते हैं.

"एम्म्म आज तो पॅरिस जलकर राख हो जाएगा" उन्हों ने मुस्कुराते हुए
मेरी तारीफ की.


"आप भी बस मेरी खिंचाई करते रहते हो." मैं शर्म से लाल हो
गयी थी. उन्हों ने अपने हाथ सामने की ओर फैला दिए. मैं मुस्कुराते
हुए उनके पास आ खड़ी हुई.

हम दोनो एक साथ हॉल मे एंटर किए. वाहा एक तरफ डॅन्स के लिए
जगह छ्चोड़ी हुई थी. बाकी जगह मे टेबल कुर्सियाँ बिछि थी. मैं
सकुचती हुई अपने ससुर जी की बाँहों मे समाए कमरे मे घुसी.
वहाँ का महॉल बहुत ही एग्ज़ोटिक था. मद्धिम रोशनी मे चारों तरफ
पेर्स बैठे हुए थे. सब अपने पार्ट्नर्स के साथ थे. सारे कपल्स
सेक्स क्रिराओं मे बिज़ी हो रहे थे. कोई किस्सिंग मे बिज़ी था तो कोई अपने
पर्टेर्स को सहला रहा था. किसी के हाथ पार्ट्नर्स के कपड़ों के नीचे
घूम रहे थे तो कुच्छ अपने पार्ट्नर्स को निवस्त्रा भी कर चुका था.

हम टेबल ढूढ़ते हुए आगे बढ़े तो एक टेबल से हॅमिल्टन ने हाथ
हिला कर हमे बुलाया. हम वहाँ पहुँचे. शशा हॅमिल्टन की गोद मे
बैठी हुई थी. हॅमिल्टन का एक हाथ उसकी टी-शर्ट के नीचे घुसा हुआ
उसकी चूचियो को सहला रहा था. शशा के सन्तरो के उभार बता रहे
थे कि उनपर हॅमिल्टन के हाथ फिर रहे थे.हमे देखते ही शशा
हॅमिल्टन की गोद से उठ गयी. हॅमिल्टन ने मुझे अपनी गोद मे खींच
लिया और शशा ससुर जी की गोद मे जा बैठी. हॅमिल्टन ने मेरे बूब्स
पर टी-शर्ट के ऊपर से हाथ फिराया.

"ई अगेन टेल यू स्वीटहार्ट यू आर टू सेक्सी टू ड्राइव एनिवन क्रेज़ी"
उसने कहा और टी शर्ट के बाहर से मेरे स्तनो को मसल्ने लगा. मैने
राज जी की तरफ देखा. वो मुझे हमलटों से बूब्स मसळवते हुए
बड़ी गहरी नज़रों से देख रहे थे. मैने शर्मा कर दूसरी ओर
नज़रें फेर ली. मैं बीच मे बने डाइयास पर थिरक रहे जोड़ों को
देखने लगी.

" कॉम'ऑन स्वीट हार्ट लेट'स डॅन्स." हॅमिल्टन ने मुझे खींच कर
उठाते हुए कहा. मैने राज जी की तरफ एक नज़र देखा. उन्हों
ने सिर हिला कर अपनी रजा मंदी देदी. हम बीच सर्कल मे डॅन्स
करने लगे. डॅन्स फ्लोर पर बहुत ही कम रोशनी थी. इसलिए डॅन्स तो
कम चल रहा था एक दूसरे को मसलना ज़्यादा चल रहा था. कुच्छ
पार्ट्नर्स बिल्कुल नग्न होकर डॅन्स कर रहे थे.


हॅमिल्टन भी मुझे अपने सीने मे दाब कर मेरे टी शर्ट के अंदर हाथ
डाल कर मेरे बूब्स को ज़ोर से मसल्ने लगा. फिर मेरे टी शर्ट को उँचा
कर के मेरे बूब्स को नंगा कर दिया और अपने मुँह मे मेरा एक निपल
भर कर चूसने लगा. मैने अपने आस पास नज़रें दौरई. उनकी हालत
तो मेरे से भी बुरी थी. ज़्यादातर लड़कियाँ या तो टॉपलेस हो चुकी
थी या पूरी तरह ही नंगी हो गयी थी. हमारे पास एक जोड़ा तो
म्यूज़्क पर ही खड़े खड़े कमर हिलहिला कर एक दूसरे से संभोग मे
लीन था.

हॅमिल्टन का दूसरा हाथ मेरे स्कर्ट के अंदर घुस कर मेरे टाँगों के
जोड़ पर फिर रहा था. मेरी बालों रहित चिकनी योनि पर मैं उसके
हाथों का दबाव महसूस कर रही थी. मैने अपने टेबल की तरफ अपनी
नज़रें दौराई तो पाया की
शशा घुटनो के बल ज़मीन पर बैठ कर राज जी का लिंग अपने
मुँह मे भर कर चूस रही है. मैने भी अपने हाथ हॅमिल्टन के
लिंग पर रख कर उसके जीन्स के उपर से ही उसके लिंग को सहलाने
लगी. हॅमिल्टन ने खुश हो कर अपने जीन्स की ज़िप नीचे कर दी.
मैने अपना हाथ उसकी पॅंट के भीतर डाल कर उसके लिंग को पकड़ कर
बाहर निकाला. मैं उसके लिंग को अपने हाथों से सहलाने लगी. मेरी
नज़रें बराबर अपने ससुर जी पर टिकी हुई थी.

" लेट `एम एंजाय. एन लेट मी डू दा सेम" हॅमिल्टन ने मेरी नज़रों को
भाँपते हुए कहा. "कोँमन लेट'स गो टू सम कॅबिन फॉर ए क़ुककी"

मैं उसका आशय सम्झ नही पाई और उसकी ओर देखस तो उसने बात क्लियर
की,

"देर आर सम क्बीन्स मेड फॉर कपल्स हू आर शी टू फक इन दा
पब्लिक. कम ऑन लेट्स गो देर फॉर ए फक."

"नो...नो आइ वोंट डू तट" मैं ने उसका विरोध करते हुए कहा "मी
फादर इन लॉ मे टेक इट अदरवाइज़."

" हः यू इंडियन्स आर सो शाइ. आइ लव इंडियन्स. लुक सेक्सी युवर फादर
इन लॉ ईज़ बिज़ी फक्किंग माइ शशा" उसने हमारी टेबल की तरफ इशारा
किया. मैने देखा शशा राज जी की गोद मे बिकुल नग्न बैठी
है. उसका चेहरा सामने की ओर है और वो टेबल पर अपने दोनो हाथों
का सहारा लेकर अपनी कमर को उनके लिंग पर उपर नीचे कर रही
है.डॅडी के दोनो हाथ शशा के स्तनो को मसल्ने मे व्यस्त हैं.

हॅमिल्टन मुझे खींचता हुआ दीवार के पास बने कुच्छ कॅबिन मे से
एक मे ले गया. मैं झिझक रही थी उसको इतना लिफ्ट देते हुए लेकिन
उसने ज़बरदस्ती मुझे कॅबिन के अंदर खींच ही लिया. मुझे वहाँ
रखे टेबल के पास खड़ी करके उसने मेरे हाथ टेबल पर टीका दिए.
मेरे बदन
से मेरी टी शर्ट को नोच कर फेंक दिया और मेरे बूब्स को पीछे की
तरफ से पकड़ कर मुझे टेबल के ऊपर झुका दिया और मेरे स्कर्ट को
खींच कर उतार दिया. मेरे कपड़े उसने उतार कर एक तरफ फेंक दिए.
उसने जल्दी जल्दी अपने सारे कपड़े उतार कर बिल्कुल नग्न हो गया. लाइट
ऑन करके हमने एक दूसरे के नग्न बदन को निहारा. उसका लिंग हल्का
गुलाबी रंग का था जो कि उसके एक दम गोरे रंग से मेल खा रहा था.
उसने दोबारा मुझे टेबल पर झुका दिया और
पीछे से अपना लिंग मेरी योनि पर लगा दिया. फिर मेरे बूब्स को ज़ोर
से पकड़ कर एक ज़ोर का धक्का मारा और मेरे मुँह से "आआआहह "
की आवाज़ के साथ उसका लिंग मेरी योनि मे घुस गया. उसका लिंग कोई
अस्वाभाविक बड़ा नही था. इसलिए उसे अपनी योनि मे लेने मे किसी तरह
की कोई दिक्कत नही आई.

वो मुझे ज़ोर ज़ोर से पीछे से धक्के मारने लगा. कुच्छ देर तक इसी
तरह मुझे चोदने के बाद वो सोफे पर बैठ गया और अपने लिंग पर
मुझ बिठा लिया मेरे दोनो बगलों मे अपने हाथ डाल कर मेरे हल्के
बदन को अपने हाथो से अपने लिंग पर ऊपर नीचे करने लगा. कुच्छ
देर बाद मुझे खड़ा कर के खुद भी खड़ा हो गया. फिर मेरी बाहों
को अपने गर्देन के चारों ओर डाल कर मुझे ज़मीन से ऊपर उठा
लिया. उसका लिंग मेरी योनि मे घुस गया. मैं अपने को गिरने से बचाने
के लिए उसकी कमर के चारों ओर अपने पैरों का घेरा डाल दिया. इस

तरह से अपने लिंग पर मुझे बिठा कर अपने लिंग को मेरी योनि मे आगे
पीछे करने लगा. मुझे अपने लिंग पर बिठाए हुए इसी अवस्था मे
मुझे लेकर सोफे तक पहुँचा. फिर सोफे पर खुद लेट कर मुझे अपने
लिंग पर वापस बिठा लिया. मैं उसके लिंग पर कूदने लगी. उसकी
ठुकाई से सॉफ लग रहा था कि ये जर्मन चुदाई के मामले मे तो
अच्च्चे अच्च्हों को ट्रैनिंग दे सकता है. मुझे करीब करीब एक
घंटे तक उसने अलग अलग पोज़ मे चोदा. मेरे मुँह मे मेरे गुदा मे
मेरी योनि मे हर जगह अपने लिंग को रगड़ा. जब उसके लिंग से फुहार
छूटने को हुई तो उसने अपने लिंग को मेरी योनि से निकाल कर मेरे मुँह
मे डाल दिया और ढेर सारा वीर्य मेरे मुँह मे भर दिया. मैं उसके
छूटने तक तीन बार झाड़ चुकी थी. मैने उसके वीर्य को छ्होटे
छ्होटे घूँट मे पी गयी.


मैं लहरा कर कर नीचे ज़मीन पर गिर गयी. और वहीं पड़े
पड़े लंबी लंबी साँसे ले रही थी. हॅमिल्टन के लिंग से अभी भी
हल्की हल्की वीर्य की पिचकारी निकल रही थी. जिसे वो मेरे स्तनो
पर गिरा रहा था. स्तानो पर छलके हुए वीर्य को उसने मेरे टी शर्ट
से सॉफ किया. टी शर्ट से उसने अपने वीर्य को कुच्छ इस तरह पोंच्छा
की जब मैने दोबारा टी शर्ट पहनी तो मेरे दोनो निपल्स के उपर दो
बड़े बड़े गीले धब्बे थे. टी शर्ट मेरे दोनो निपल्स पर चिपक
गयी थी. और निपल्स बाहर से दिखने लगे थे.


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - sexstories - 06-25-2017

कुच्छ देर बाद हम वहीं रेस्ट करके अपने कपड़े पहन कर बाहर आ
गये. बाहर अपने टेबल पर

आकर देखा कि टेबल खाली थी. मैने बैठते हुए इधर उधर नज़र
दौड़ाई. लेकिन शशा और ससुर जी कहीं नही दिखे. हॅमिल्टन अपनी
कुर्सी पर बैठ कर मुझे अपनी गोद मे खींच लिया. मैं उसकी गोद मे
बैठ कर उसके गले मे अपनी बाहों का हर डाल दी और हम दोनो एक
दूसरे को चूमने लगे. आस पास सारे कपल्स सेक्स मे ही लिप्त दिखे.
किसी को किसी की फ़िक्र नही थी. कुच्छ तो वहीं पूरे नंगे हो कर
चुदाई मे लगे हुए थे. वेस्टर्न कल्चर मे तो ये एक मामूली सी बात
थी. तभी वेटर डिन्नर सर्व कर गया. हॅमिल्टन की गोद मे बैठे
बैठे हमने डिन्नर लिया. हम एक दूसरे को खिलते रहे. हॅमिल्टन का
लिंग वापस मेरे नितंबों के नीचे खड़ा हो रहा था. उसने मुझे
उठाया और मेरी योनि पर लिंग को सेट करके वापस अपनी गोद मे बिठा
लिया. इस बार हम दोनो ने किसी तरह की उच्छल कूद नही की. मैं
उसके लिंग को अपनी योनि मे लेकर डिन्नर करने मे व्यस्त हो गयी. वो
भी डिन्नर ले रहा था.


थोड़ी देर बाद राज जी शशा को बाहों मे लिए इधर आते हुए
दिखे. मैं झट से हॅमिल्टन की गोद से उतर कर अपनी सीट पर बैठ
गयी. आख़िर हम इंडियन्स की आँखों मे कितने भी अड्वॅन्स्ड हो जाएँ
कुच्छ तो शर्म बची ही रहती है. हॅमिल्टन ने अपने लिंग को अंदर
करने की कोई कोशिश नही की.

ससुरजी आकर अपनी अपनी सीट पर बैठ गये. हम दोनो एक दूसरे से
नज़रें नही मिला पा रहे थे. हॅमिल्टन और शशा चुहलबाजी करते
रहे. हॅमिल्टन ने खींच कर शशा को अपने लिंग पर बिठा लिया.
शशा ने भी एक झटके से अपनी टी शर्ट उतार दी और हॅमिल्टन के लिंग
की सवारी करने लगी.

लेकिन हम दोनो चुप चाप अपने अपने विचारों मे खोए खाना खाते
रहे और बीच बीच मे चोर निगाहों से अपने सामने चल रही ब्लू
फिल्म का भी मज़ा लेते रहे. सामने उन दोनो की चुदाई देखते हुए
अक्सर हम दोनो की निगाहें टकरा जाती तो मैं शर्मा कर और ससुर जी
मुस्कुरा कर अपनी निगाहें हटा लेते.

खाना खाकर हम दोनो ने उन दोनो से विदा लिया. मैं अपने ससुर की
बाहों मे अपनी बाहें डाल कर अपने रूम की तरफ बढ़ी.


"मैं शशा के साथ किसी नये प्रॉजेक्ट के बारे मे डिसकस करने पास
के एक कॅबिन मे गया था. तुमको बता नही पाया क्योंकि तुम कहीं मिली
नही. पता नही भीड़ मे तुम कहा हॅमिल्टन के साथ डॅन्स कर रही
थी."

उनके मुँह से ये बात सुन कर मुझे बहुत रिलीफ मिली कि उनको नही
पता चल पाया की उसी दौरान मैं भी पास के ही किसी कॅबिन मे
हॅमिल्टन के संग संभोग करवा रही थी.हम दोनो के अलग अलग रूम्स
थे. मैं अपने कमरे के सामने पहुँच कर उन्हे गुडनाइट कहा और
कमरे की तरफ बढ़ने लगी.

"कहाँ जा रही हो. आज मेरे कमरे मे ही सो जाओ ना" ससुर जी ने कहा.
उनका इरादा साफ था. आज बर्फ पिघल रही थी. लेकिन मुझे भी अपनी
मर्यादा तो बनाए ही रखनी थी. इसलिए मैने उनकी तरफ देख कर
अपनी नज़रें झुका ली और अपने कदम कमरे की तरफ बढ़ाए.

"अच्च्छा ठीक है तुम अपने कमरे मे चलो. मैं अभी आता हूँ कपड़े
चेंज मत करना." उन्हों ने मुझसे कहा.

"क्यों क्या हुआ?" मैने पूचछा

"नही कुच्छ नही तुम इन कपड़ों मे बहुत खूबसूरत लग रही हो तुम्हे
इन कपड़ों मे कुच्छ देर तक देखना चाहता हूँ."

"क्यों इतनी देर देख कर भी मन नही भरा क्या?" मैने उनकी तरफ
मुस्कुरा कर देखा " ससुर जी अपने मन को कंट्रोल मे रखिए. अब मैं
आपके लड़के की बीवी हूँ" कहते हुए मैं हँसती हुई कमरे मे चली
गयी. अंदर आकर मैने अपने शरीर पर पड़े टी शर्ट और स्कर्ट को
उतार दिया और शवर मे अपने बदन को अच्छि तरह से सॉफ किया.
बदन पर सिर्फ़ तौलिया लपेटे बाथरूम से बाहर आकर मैने ड्रेसिंग
टेबल के सामने खड़े होकर अपने टवल को हटा दिया. मेरा नग्न
शरीर रोशनी मे चमक उठा. मैं अपने नग्न बदन को निहार रही
थी. शादी के बाद कितने लोगों से मैं सहवास कर चुकी थी. इस
बदन मे कुच्छ ऐसा ही आकर्षण था कि हारकोई खींचा चला आता था.
मैने उसी अवस्था मे खड़े होकर डियो लगाया और हल्का मेकप किया.
अपने बालों मे कंघी कर ही रही थी कि डोर बेल बजा.

"कौन है"

"मैं हूँ….दरवाजा खोलो" बाहर से ससुर जी की आवाज़ आई.

मैने झट अपने शाम को पहने हुए कपड़ों को वापस पहना और
दरवाजे को खोल दिया. उन्हों ने मुझसे अलग होने से पहले उन्ही कपड़ों
मे रहने को कहा था. अब दोनो निपल्स के उपर टी शर्ट पर लगा
धब्बा सूख गया था लेकिन धब्बा साफ दिख रहा था की वहाँ कुच्छ
लगाया गया था. राज जी अंदर आए. उन्हों ने शायद अपने कमरे
मे जाकर भी एक दो पेग लगाया था. उनके चल मे हल्की लड़खड़ाहट
थी. कमरे मे आकर वो बिस्तर पर बैठ गये.

"आओ मेरे पास " उन्हों ने मुझे बुलाया. मैं धीरे धीरे चलती हुई
उनके पास पहुँची. उन्हों ने अपनी जेब मे हाथ डाल कर एक
खूबसूरत सा लॉकेट निकल कर मुझे पहना दिया.

"वाउ क्या खूबसूरत है" मैने खुश होकर कहा" किसके लिए है ये?

"तुम्हे पसंद है?" मैने हामी मे सिर हिलाया"ये इस खूब्ड़सूरत गले
के लिए ही है." कहकर उन्हों ने मेरे गले को चूम लिया.

"एम्म बहुर सुंदर है ये." मैने लॉकेट को अपने हाथों से उठाकर
निहारते हुए कहा.

" मुझे भी तो पता चले कि तुम कितनी खुश हो. खुश हो भी या……"
मैं झट से उनकी गोद मे बैठ गयी और उनके गले मे अपनी बाहों का
हार डाल कर उनके होंठों पर अपने होंठ सटा दिए. मैने उनको एक
डीप किस दिया. जब हम दोनो अलग हुए तो उन्हों ने मुझे उठाया.

"स्टेरीयो पर कोई सेक्सी गाना लगाओ" उन्हों ने कहा मैने स्टेरीयो ऑन कर
दिया. वॉल्यूम को तेज रखने के लिए कहने पर मैने वॉल्यूम को काफ़ी
तेज कर दिया.


"अब तुम नछो. " उन्हों ने कहा. मैं चुपचाप खड़ी रही. मैं
असमंजस मे थी समझ मे नही आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए.

" तुम बहुत अच्च्छा नाचती हो. मैने कई बार देखा है तुम्हे नाचते
हुए"

"लेकिन यहाँ ? "

"क्यों यहाँ क्या प्राब्लम है ? मैं देखना चाहता हूँ तुम्हारे बदन
की थिरकन. "

मैं धीरे धीरे वेस्टर्न म्यूज़िक पर थिरकने लगी. आन्द्रूनि कपड़े
नही होने के कारण मेरे स्तन उच्छल रहे थे और मेरा ध्यान डॅन्स
पर कम और अपनी उस मिनी स्कर्ट पर था कि नाचते हुए मेरी योनि उनकी
नज़रों के सामने ना जाए.

" अपने उन दोनो स्तनो को ज़ोर से हिलाओ. खोब शानदार हैं ये दोनो
बूब्स तुम्हारे. " मैं उनकी पसंद का ख़याल रखते हुए अपने स्तनो को
हिलाने लगी.

" अब नाचते नाचते अपने कपड़े उतार दो. सारे कपड़े उतार देना.
स्ट्रिपटीज़ जानती हो?" उन्हों ने मुझसे पूचछा

"हाँ" मैं उनकी बातों से हैरान हो रही थी. उनपर कुच्छ तो शराब
का और कुच्छ उन्मुक्त महॉल का नशा चढ़ा हुआ था.

"चलो मेरे सामने स्ट्रिपटीज़ करो" कहते हुए उन्हों ने अपने गाउन को
खोल कर अलग कर दिया. गाउन के नीचे वो बिल्कुल नग्न थे. मैं
नाचना छ्चोड़ कर मुँह फाडे उनके लिंग को देख रही थी.

"डॅडी….ये सब ठीक नही है." मैने उनसे कहा

"क्या ठीक नही है?"


"यही जो आप कर रहे हैं या करना चाहते हैं."

"क्यों….इसमे क्या बुराई है. तुम्ही तो शादी के पहले से ही मुझ से
चुदाना चाहती थी" उनके मुँह से इस तरह की गंदी बातें सुन कर
मई शर्म से गड़ गयी.

"जी…जी….वो…..उस समय की बात और थी. तब मैं आपकी सेक्रेटरी थी."

"तो…?"

"आज मैं आपके लड़के की बीवी हूँ."

" लेकिन पहले तू मेरी सेक्रेटरी है. यहा पर तू मेरी सेक्रेटरी बन
कर आई है मेरे बेटे की बहू नही. और सेक्रेटरी का काम होता है
अपने एंप्लायर को खुश रखना. देखा नही यहाँ मौजूद दूसरी
सेक्रेटरीस को"


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - sexstories - 06-25-2017

"क्या हो गया है आज आपको?" मैने थूक निगलते हुए कहा.

"प्यार तुझे आज जी भर कर प्यार करना चाहता हूँ." आज ससुर जी
के मुँह से इस तरह की बातें सुन कर अजीब सा लग रहा था. राज
जी हमेशा से ही एक सोबर और मर्यादित आदमी रहे हैं. मैने जब
शादी से पहले इतनी कोशिश की थी उन्हे सिड्यूस करने की तब भी
नही हीले थे अपने उसूलों से. अगर वो चाहते तो मेरी सील तोड़ने का
श्रेय मैं उन्ही को देती. मैं तो चाहती ही थी उनकी मिस्ट्रस बनने की
मगर उनके उँचे विचारों ने मेरी एक नही चलने दी.लेकिन वो
स्तंभ, वो उँचे उसूलों का पुतला आज कैसे सेक्स के दलदल मे गोते
खा रहा है. थोड़ी बहुत चुहल बाजी थोडा लिपटना थोडा मसलना ये
सब तो मैं भी पसंद करती थी क्योंकि उन्हे मैं हमेशा ही मन से
चाहती थी. मगर उनके साथ सेक्स? मैं आसमंजस्य मे फँस गयी थी.
समझ मे नही आ रहा था कि आज वो कैसे अपना पद अपनी मर्यादा, हम
दोनो के बीच का संबंध सब भूल कर इस तरह की बातें कर रहे
हैं.

"डॅडी आपने आज बहुत पी रखी है आप आज अपने कंट्रोल मे नही
हो. आप रेस्ट करो मैं अपने कमरे मे जाती हूँ." मैने दरवाजे की
तरफ अपने कदम बढ़ाए ही थे. कि उनकी कदक्ति आवाज़ से मेरे कदम
वहीं रुक गये.


"खबरदार अगर एक भी कदम आगे बढ़ाया तो. जैसा कहता हूँ कर
नही तो आज मैं तेरारेप करने से भी नही चूकुंगा"

"डॅडी क्या हो गया आज आपको. हम दोनो का रिश्ता बदनाम हो जाएगा.
अगर किसी को पता चल
गया तो लोग क्या कहेंगे."

"तू उसकी चिंता मत कर. किसी को पता ही नही चलेगा. यहा अपने
देश से दूर हूमे जानने वाला है ही कौन. और तू रिश्तों की दुहाई
मत दे. एक आदमी और एक औरत मे बस एक ही रिश्ता हो सकता है और वो
है हवस का रिश्ता. जुब तक यहाँ रहेंगे हम दोनो साथ रहेंगे.
अपने घर जा कर तू भले ही वापस मुझसे घूँघट कर लेना."

"ऐसा कैसे हो सकता है. हम दोनो के बीच एक बार जिस्म का संबंध
हो जाने के बाद क्या सोचते हैं कभी वापस नॉर्मल हो सकेगा?"

"तू जब तक यहाँ है भूल जा कि तो मेरे बेटे से ब्याही है. भूल
जा की मैं तेरा ससुर हूँ. तू बस मेरी सेक्रेटरी है. अगर तेरी
शादी मेरे बेटे से नही हुई होती तो हम यहाँ क्या करते?"

"फिर तो बात दूसरी ही होती." मैने कहा.

"तू समझ अब भी वही बात है. तू केवल मेरी सेक्रेटरी है." देखा
नही सारी सेक्रेटरीस अपने एंप्लायर्स के साथ कैसे खुल्लम खुल्ला
सेक्स कर रहे थे."

"लेकिन….." मैं अभी भी झिझक नही छ्चोड़ पा रही थी. राज जी
उठे और कमरे मे कुर्सी टेबल खिसका कर जगह बनाया. फिर मुझे
खींच कर बीच मे खड़ा कर दिया. अंदर कुच्छ नही पहना होने के
कारण मेरे बूब्स बुरी तरह इधर उधर हिल रहे थे. और मेरे
हाथों को अपने हाथ मे थाम कर थिरकने लगे. मैं भी धीरे धीरे
उनका साथ देती हुई डॅन्स करने लगी.

कुच्छ ही देर मे मैं मूड मे आ गयी और पूरे जोश के साथ मैं
म्यूज़िक पर थिरकने लगी. राज जी ने एक झटके मे अपने बदन पर
पहने गाउन को अलग किया. मैने देखा कि वो अंदर कुच्छ भी नही
पहने थे. वो पूरी तरह नग्न हो गये थे. अपने गाउन को वही छ्चोड़
कर वो वापस जाकर बेड पर बैठ गये. अब मैं भी झिझक छ्चोड़
कर खुद को समय के हवाले कर दिया.

"मेरी ओर झुक कर अपनी चूचियो को हिलाओ" राज जी ने कहा.
मैने वैसा ही किया. उन्हों ने अब मुझे टी शर्ट उतारने के लिए इशारा
किया. उनके सामने नग्न होने का ये पहला मौका था. मैने झिझकते
हुए अपने हाथों से अपनी टी शर्ट को पकड़ कर उँचा करने लगी.
जैसे जैसे टी शर्ट उँचा होता जारहा था, मेरे अनमोल खजाने के
दोनो रत्न बाहर निकलते जा रहे थे. मैने अपनी टी शर्ट को निकाल कर
अपने हाथों से पकड़ कर एक बार सिर के उपर हवा मे घुमाया फिर उसे
राज जी की तरफ फेंक दिया. त शर्ट सीधा जा कर उनकी गोद मे
गिरा. राज जी ने उसे उठाकर कुच्छ देर तक सूंघते रहे और
चूमते रहे. मैं टॉपलेस हालत मे थिरक रही थी. थोड़ी थोड़ी देर
मे अपने बूब्स को एक झटका देती तो दोनो बूब्स उच्छल उठते. मैं
डॅन्स करते करते राज जी के पास पहुँची और उसके होंठों के
सामने अपने दोनो बूब्स को थिरकने लगी. मैने अपने एक स्तन को अपने
हाथों से थाम कर उँचा किया. फिर निपल को अपनी उंगलियों से खींच
कर उनकी होंठों के पास ले गयी. जैसे ही राज ने अपने होंठ
खोल कर मेरे बूब्स पर झपटा मारा मैं किसी मछली की तरह उनकी
पकड़ से निकल गयी. इतने दीनो की आस आज पूरी हो रही थी.
राज को तरसाने मे खूब मज़ा आ रहा था.



राज जी का लिंग उनके घने बालों के बीच खड़ा हुआ झटके खा
रहा था. मैने उसे एक बार अपनी मुट्ठी मे लेकर उसके उपर की चाँदी
को उपर नीचे किया और फिर छ्चोड़ दिया. मेरी इस हरकत से उनके लिंग
के उपर एक बूँद प्रेकुं चमकने लगा. राज ने अपने सूखते
हुए होंठों पर अपनी जीभ फिरा कर मुझे स्कर्ट उतारने के लिए
इशारा किया. मैने स्कर्ट के एलास्टिक मे अपनी उंगलियाँ डाल कर उनकी
तरफ देखी. उनकी आँखें मेरी स्कर्ट से चिपकी हुई थी. वो उतावले
हुए
जा रहे थे. मैने उन्हे कुच्छ और परेशान करने की सोची. मैने
उनकी
तरफ अपनी पीठ कर ली और अपनी स्कर्ट को धीरे धीरे नीचे कर
दिया. वो मेरी मोटी मोटी गंद को ललचाई नज़रों से देख रहे थे. मैं
अब खड़े होकर अपने बदन को म्यूज़िक पर थिरकने लगी. कुच्छ देर बाद
मैं धीरे धीरे सामने की ओर मूडी. मेरी नग्न योनि अब उनके सामने
थी.
वो एक तक मेरी काले सिल्की झांतों से भरी योनि को निहार रहे थे.

अब तो उन्हे अपने ऊपर कंट्रोल करना मुश्किल हो गया. वो उठे और
मुझे बाहों मे लेकर मेरे संग कमर हिलाने लगे. उनका गाउन उन्हों ने
बिस्तर पर ही छ्चोड़ दिया था. वो मेरे पीछे से सटे हुए थे.
हमारे नग्न बदन एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे. मेरी योनि गीली
हो
गयी थी. उनका लिंग मेरे दोनो नितंबों के बीच जगह तलाश कर
रहा था. उनके हाथ मेरे बदन पर फिसल रहे थे. सामने आदमकद
आईने मे मैने हम दोनो के अक्स को एक दूसरे से गूँथे हुए देखा तो
एग्ज़ाइट्मेंट और बढ़ गयी. उन्हों ने मुझे आईने मे देखता देख कर

मुस्कुरा कर मुझे वहीं छ्चोड़ कर मेरे पीछे पहुँचे और मेरे
दोनो
बगलो से अपने हाथ डाल कर सामने मेरे स्तन को सहलाने लगे. मैने
अपने सुंदर स्तन को राज जी के हाथों द्वारा मसला जाते देख
रहा
था. मेरी पीठ उनके सीने से लगी हुई थी. मैने अपना सिर पीछे
की
ओर करके उनके कंधे पर रख दिया.

क्रमशः........................


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - sexstories - 06-25-2017

गतान्क से आगे........................

उनके हाथ मेरे दोनो बूब्स को बुरी तरह मसल रहे थे. आईने मे
हमारा ये पोज़ बड़ा ही सेक्सी लग रहा था. उन्होने मेरे दोनो निपल्स
अपनी उंगलियों से पकड़ कर आईने की तरेफ खींचा. मेरे दोनो निपल्स
खींचाव के कारण लंबे लंबे हो गये थे. उनके मसल्ने के कारण
दोनो
बूब्स की रंगत सफेद से गुलाबी हो गयी थी. उनकी गर्म साँसे मैं
अपनी गर्देन पर इधर से उधर फिरते हुए महसूस कर रही थी. उनके
होंठ मेरी गर्देन के पीछे जहाँ से मेरे बॉल शुरू हो रहे हैं
वहाँ जा कर चिपक गये. फिर उन्हों ने मेरी गर्देन पर हल्के से
दाँत गड़ाए. उनके होंठ मेरी गर्देन पर घूमते हुए मेरे बाएँ कान तक
आए. वो मेरे लेफ्ट कान के उपर अपने होंठ
फिराने लगे. कान औरत का एक जबरदस्त एग्ज़ाइट्मेंट पॉइंट होता है.
मई उनकी हरकतों से उत्तेजित हो गयी. मैने अपने हाथों से अपनी
योनिको सख्ती से दाब रखा था. मेरे मुँह से उत्तेजना मे टूटे हुए शब्द
निकल रहे थे. मैने अपने होंठ को दन्तो मे दबा रखा था फिर भी
पता नही किस कोने से मेरे मुँह
से "आआआअहह… .म्‍म्म्ममममम… ..ऊऊऊओ" की आवाज़ें निकल रही थी.
फिर उसने कान पर अपनी जीभ फिराते हुए कान के निचले हिस्से को अपने
मुँह मे भर लिया और. हल्के हल्के से उसे दाँत से काटने लगे. मैने
उनके सिर को अपने हाथों से थाम रखा था. हुमारे बदन एक दूसरे से
सटे हुए संगीत की धुन पर इस तरह से थिरक रहे थे मानो दो
नही एक ही जिस्म हो. उन्हों ने मुझे अपनी ओर घुमाया और मेरे बूब्स
परअपने होंठ रख कर मेरे निपल्स को चूसने लगे. इसी तरह की
हरकतों की ख्वाहिश तो जब से मैने उन्हे पहली बार देखा तब से
मेरे मन मे थी. मुझे उनके साथ पॅरिस आने का निमंत्रण स्वीकार
करतेसमय ही पता था कि इस तौर मे हम दोनो के बीच किस तरह का
रिश्ताजन्म लेने वाला है. मैं उसके लिए शुरू से ही उतावली थी.मैने भी
उनको अपनी ओर से पूरा आनंद प्रदान करना चाहती थी. मैं भी उनकी
चूचियो पर झुक कर उनके छ्होटे छ्होटे निपल्स को अपने दाँतों से
कुरेदने लगी. मैने अपनी जीभ से उनके निपल्स को सहलाना शुरू
किया.
उत्तेजना से उनके निपल्स भी खड़े हो गये. मैं उनके
बालों से भरे सीने को सहला रही थी. मैने अपने दन्तो को उनके
सीने मे गाड़ा कर जगह जगह अपने दाँतों के निशान छ्चोड़ दिए.
मैने कुच्छ देर तक उनके निपल्स से खेलने के बाद अपने होंठ नीचे
की ओर ले जाते हुए उनकी नाभि मे अपनी जीभ घुसा दी. उसनकी नाभि को
अपनी जीभ से चाटने लगी. वो मेरे खुले बालों मे अपनी उंगलियाँ फिरा
रहे थे. फिर मैं घुटनो के बल उनके सामने बैठ गयी और उनके लिंग
को अपने हाथों मे लेकर निहारने लगी. मैने मुस्कुरा कर उनकी ओर
देखा. फिर मैने उसके लिंग के उपर से चाँदी को नीचे की ओर
खींचा.
उनके लिंग का गोल
मटोल टोपा बाहर निकल आया. मैने उसके टिप पर अपने होंठ लगा दिए.
एक छ्होटा सा किस लेकर अपने चेहरे के सामने उनके लिंग को सहलाने
लगी. उनके लिंग को अपने मुँह मे लेने की इच्च्छा तो हो रही थी लेकिन
मैं उनके द्वारा रिक्वेस्ट करने का इंतेज़ार कर रही थी. मैं उनके
सामनेये नही शो करना चाहती थी कि मैं पहले से ही कितना खेली खाई
हुई हूँ. "इसे मुँह मे लेकर प्यार करो. " "एम्म्म नही ये गंदा
है. "
मैने लिंग को अपने से दूर करने का अभिनय किया, "छि इससे तो
पेशाब भी किया जाता है. इसे मुँह मे कैसे लूँ? " " तूने अभी तक
पंकज के लिंग को मुँह मे नही लिया क्या? " " नही वो ऐसी गंदी
हरकतें नही करते हैं. " "ये गंदा नही होता है एक बार तो लेकर
देख. ठीक उसी तरह जैसे चोकोबार आइस्क्रीम को मुँह मे लेकर
चाटतीहो." मैने झिझकते हुए अपनी जीभ निकाल कर उनके लिंग के टोपे पर
फिराने लगी. मेरे
बाल खुले होने के कारण उनको देखने मे परेशानी हो रही थी.
इसलिए उन्हों ने मेरे बालों को पकड़ कर जुड़े के रूप मे बाँध दिया.
फिर मेरे चेहरे को पकड़ कर अपने लिंग को मेरी ओर ठेलने लगे. मैने
उनकी हरकत के समर्थन मे अपना मुँह खोल दिया. उनका लिंग आधा
अंदरजा कर मेरे गले के द्वार मे फँस गया.

"बुसस्स और नही जाएगा." मैने कहना चाहा मगर मुँह से
बस, "उम्म्म्मम
उम्म्म्म" जैसी आवाज़ निकली. इसलिए मैने उनके लिंग को अपने मुँह मे
लिएलिए ही उन्हे इशारा किया. वो अपने लिंग को अब आगे पीछे करने लगे.
मैं उनके लिंग को अपने मुँह से चोद रही थी. साथ साथ उनके लिंग
पर अपनी जीभ भी फिरा रही थी. "पूरा ले. मज़ा नही आ रहा है.
पूरा अंदर जाए बिना मज़ा नही आएगा." उन्हों ने अपने लिंग को बाहर
खींचा. "इतना बड़ा लंड पूरा कैसे जाएगा. मेरा मुँह मेरी योनि
जैसा तो है नही की कितना भी लंबा और मोटा हो सब अंदर ले लेगा."
मैने कहा. उन्हों ने मुझे उठाया और बिस्तर पर ले जाकर लिटा दिया.
मैं पीठ के बल लेट गयी. अब उन्हों ने मेरे बदन को कंधों से
पकड़ कर बिस्तर से बाहर की तरफ खींचा. अब मेरा सिर बिस्तर से
नीचे लटकने लगा था. "हाँ ये ठीक है अब अपने सिर को बिस्तर से
नीचे लटकाते हुए अपने मुँह को खोल." मैने वैसा ही किया. इस
पोज़िशन मे मेरा मुँह और गले का च्छेद एक सीध मे हो गये थे.
ससुरजी अब मेरे मुँह मे अपने लिंग को डालते हुए मुझसे बोले, "एक ज़ोर
की साँस खींच अंदर." मैने वैसा ही किया. वो अपने लिंग को अंदर

थेल्ते चले गये. उनका मोटा लंड सरसरता हुया गले के अंदर
घुसताचला गया. पहले तो उबकाई जैसी आई. लेकिन उनका लिंग फँसा होने के
कारण कुच्छ नही हुआ. उनका लिंग अब पूरा अंदर घुस चुका था. उनके
लंड के नीचे लटकते दोनो गेंद अब मेरे नाक को दाब रहे थे. एक
सेकेंड इस अवस्था मे रख कर उन्हों ने वापस अपने लंड को बाहर
खींचा उनका लिंग जैसे ही गले को खाली किया मैने आवने फेनफ्डो मे
जमी हवाखाली की और वापस साँस लेकर उनके अगले धक्के का इंतेज़ार
करने लगी. उन्हों ने झुक कर मेरे दोनो स्तनो को अपनी मुट्ठी मे भर
लिया और उन्हे मसल्ते हुए वापस अपने लिंग को जड़ तक मेरे मुँह मे
थेल दिया. फिर एक के बाद एक धक्के मारने लगे. मैं अपनी सांसो को
उनके धाक्को के साथ अड्जस्ट कर ली थी. हर धक्के के साथ मेरे
स्तनो को वो बुरी तरह मसल्ते जा रहे थे. साथ साथ मेरे निपल्स
को भी उमेथ देते. जैसे ही वो मेरे निपल्स को पकड़ कर खींचते
मेरा पूरा बदन धनुष की तरह उपर की ओर उठ जाता. काफ़ी देर तक
यूँ ही मुख मे लेने के बाद उन्हों ने अपना लिंग बाहर निकाल लिया. और
ज़यादा देर चूसने से हो सकता है मुँह मे ही निकल जाता. उनका लिंग
मेरी थूक से गीला हो गया था और चमक रहा था.
उनके उठते ही मैं भी उठ बैठी. उन्हों ने मुझे बिस्तर से उतार कर
वापस अपनी आगोश मे ले लिया. मैने उनके सिर को अपने हाथों से थाम
कर उनकी होंठों पर अपने होंठ सख्ती से दाब दिए. मेरी जीभ उनके
मुँह मे घुस कर उनकी जीभ से खेलने लगी. मैने अपने पंजे उनके
पैरों के उपर रख कर अपनी एडी को उपर किया जिससे मेरा कद उनके
कदके कुच्छ हद तक बराबर हो जाए. फिर मैने अपने दोनो स्तनो को
हाथोंसे उठा कर उनके सीने पर इस तरह रखा कि उनके निपल्स को मेरे
निपल्स छूने लगे. उनके निपल्स भी मेरी हरकत से एक दम कड़े हो
गये थे. मेरे निपल्स तो पहले से ही उत्तेजना मे तन चुके थे.

मैनेअपने निपल्स से उनके निपल्स को शहलाना शुरू किया. उन्हों ने मेरे
नितंबों को सख्ती से पकड़ कर अपने लिंग पर खींचा. "म्‍म्म्मम
सीमीईीईईईईई म्‍म्म्मम. तुम बहुत सेक्सी हो. अब अफ़सोस हो रहा है कि

तुम्हे
इतने दीनो तक मैने च्छुआ क्यों नही. ओफफफफफफफफफफो तुम तो मुझ पागल
कर डालगी. आआआअहह हाआअँ आइसे हीईीईईईईई " वो अपने लिंग को
मेरी योनि के उपर रगड़ रहे थे. कुच्छ देर तक हम एक दूसरे के
बदन को रगड़ने के बाद उन्हों ने मुझे बिस्तर के पास ले जाकर मेरे
एक पैर को उठा कर बिस्तर के ऊपर रख दिया. अब घुटनो के बल
बैठने की उनकी बारी थी. वो मेरी टाँगों के पास बैठ कर मेरे
रेशमी झांतों पर अपनी जीभ फिराने लगे. मुझे अपनी योनि पर हल्के
रेशमी बॉल रखना बहुत अच्च्छा लगता है इसलिए अक्सर मेरी योनि
छ्होटे छ्होटे रेशमी बालों से घिरी रहती थी. शायद उन्हे भी वहाँ
बाल देखना पसंद था इसलिए राज जी अपने दाँतों से मेरी सिल्की
झांतों को पकड़ कर उन्हे हल्के हल्के से खींच रहे थे. फिर उनकी
जीभ मेरे टाँगों के जोड़ पर घूमने लगी. उनकी जीभ मेरे घुटने
परसे धीरे धीरे आगे बढ़ती हुई मेरे टाँगों के जोड़ तक पहुँची.
उन्हों ने अपनी जीभ से मेरी चूत को उपर से चाटना शुरू किया. वो
अपने हाथों से मेरी चूत की फांकों को अलग करके मेरी चूत के
भीतरअपनी जीभ डालना चाहते थे. " नही. ऐसे नही. " कहकर मैने उनके
हाथों को अपने बदन से हटा दिया और मैं खुद एक हाथ की उंगलियों
सेअपनी चूत को खोल कर दूसरे हाथ से उनके सिर को थाम कर अपनी योनि
से सटा दिया. "लो अब चॅटो इसे. " उनकी जीभ किसी छ्होटे लिंग की
तरह मेरे योनि के अंदर बाहर होने लगी. मैं बहुत उत्तेजित हो गयी
थी. मैं उनके बालों को अपनी मुट्ठी मे पकड़ कर उन्हे खींच रही
थी
मानो उन्हे उखाड़ ही देना चाहती हौं. दूसरे हाथों की उंगलियों से
मैने अपनी योनि को फैला रखा था और साथ साथ एक उंगली से अपनी
क्लीत्टोरिस को सहला रही थी. मैने सामने आईने मे देखा तो हम दोनो
कीअवस्था को देख कर और अपने उपर कंट्रोल नही कर पायी और मेरे
बदन से लावा बह निकाला. मैने सख्ती से दूसरे हाथो की मुट्ठी मे
उनके बालों को पकड़े हुए उनके सिर को अपनी योनि मे दाब रखा था.
उनकी जीभ मेरी योनि से बहते हुए अमृत धारा को अपने अंदर समा
लेने मे व्यस्त हो गयी. काफ़ी देर तक इसी तरह चूसने के बाद जब
मेरी बर्दस्त से बाहर हो गया तो मैने उनके सिर को अपनी चूत से
खींच कर अलग किया. उनके सिर के कई बाल टूट कर मेरी मुट्ठी मे
आगये थे. उनके होंठ और ठुड्डी मेरे वीर्य से चमक रहे थे. "ऊवू
राअज" अब मैं अपने संबोधन मे चेंज लाते हुए उन्हे उपर अपनी ओर
खींची.वो खड़े हो कर मुझ से लिपट गये. और मेरे होंठों पर
अपने होंठ रख कर मेरे होंठों को अपने मुँह मे खींच लिया और
उन्हे बुरी तरह चूसने लगे. मैं नही जानती थी कि उधर भी इतनी
ज़्यादा आग लगी हुई है. उन्हों ने अपनी जीभ मेरे मुँह मे डाल दी.
मुँह मे अजीब सा टेस्ट समा गया. मैने जिंदगी मे पहली बार अपने
वीर्य का स्वाद चखा. मैने उनके चेहरे पर लगे अपने वीर्य को
चाटकर सॉफ किया.


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - sexstories - 06-25-2017

उन्हों ने थिरकते हुए बिस्तर के साइड मे अपने साथ लाए फ्रेंच वाइन
की बॉटल उठा ली. उसके कॉर्क को खोल कर उन्हों ने उसमे से एक घूँट
लगाया. फिर मुझे अपने से अलग कर अपने सामने खड़ा कर दिया. फिर उस
बॉटल से मेरे एक ब्रेस्ट पर धीरे धीरे वाइन डालने लगे. उन्होने
अपने होंठ मेरी निपल के उपर रख दिए. रेड वाइन मेरे बूब्स से
फिसलती हुई मेरे निपल के उपर से होती हुई उनके मुँह मे जा रही
थी. बहुत ही एग्ज़ोटिक सीन था वो. फिर उन्हों ने बॉटल को उपर कर
मेरे सिर पर वाइन उधलने लगे. साथ साथ मेरे चेहरे से मेरे कानो
से मेरे बालों से टपकते हुए वाइन को पीते जा रहे थे. मैं वाइन मे
नहा रही थी और उनकी जीभ मेरे पूरे बदन पर दौड़ रही थी. मैं
उनकी हरकतों से पागल हुई जा रही थी. इस तरह से मुझे आज तक
किसीने प्यार नही किया था. इतना तो साफ़ दिख रहा था कि मेरे ससुरजी
सेक्स के मामले मे तो सबसे अनोखे खिलाड़ी थे. जब बॉटल आधी से
ज़्यादाखाली हो गयी तो उन्हों ने बॉटल को साइड टेबल पर रख कर मेरे
पूरे बदन को चाटने लगे. मेरा पूरा बदन वाइन और उनकी लार से
चिप चिपा हो गया था. उन्हों ने एक झटके मे मुझे अपनी बाहों मे
उठा लिया और अपनी बाहों मे उठाए हुए बाथरूम मे ले गये. इस उम्र
मे भी इतनी ताक़त थी की मुझको उठाकर बाथरूम लेजाते वक़्त एक बार
भी उनकी साँस नही फूली. बाथरूम मे बात टब मे दोनो घुस गये

और
एक दूसरे को मसल मसल कर नहलाने लगे. साथ साथ एक दूसरे को
छेड़ते जा रहे थे. सेक्स के इतने रूप मैने सिर्फ़ कल्पना मे ही सोचा
था. आज ससुर जी ने मेरे पूरे वजूद पर अपना अधिकार जमा दिया.
वहीं पर बाथ टब मे बैठे बैठे उन्हों ने मुझे टब का सहारा
लेकर घुटने के बल झुकाया और पीछे की तरफ से मेरी योनि और
मेरे गुदा पर अपनी जीभ फिराने
लगे. "ऊऊऊओह…….ऱाआअज…….जाआअँ……..यी क्य्ाआ कर रहीई
हूऊ. चिईीईईईईईईई नहियीईईईईईईई वहाआन जीईईभ सीई
माआतचटूऊऊ. नाआहियीई……..हाआअँ आआऔउर अंडाअर और अंडाअर."
मैंउत्तेजना मे ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी. ससुर जी मेरे गुदा द्वार को अपनी
उंगलियों से फैला कर उसके अंदर भी एक बार जीभ डाल दिए. मेरी
योनि मे आग लगी हुई थी. मैं उत्तेजना मे अपने ही हाथों से अपने
स्तनो को बुरी तरह मसल रही थी.

"बस बस और नही….अब मेरी प्यास बुझा दो. मेरी चूत जल रही है
इसेअपने लंड से ठंडा कर दो. अब मुझे अपने लंड से चोद दो.अब और
बर्दस्त नही कर सकती. ये आअप्ने क्या कर डाला मेरे पूरे बदन मे
आग जल रही है. प्लीईईसससे अओर नहियीई". मैं तड़प रही थी.
उन्हों ने वापस टब से बाहर निकाल कर मुझे अपनी बाहों मे उठाया और
गीले बदन मे ही कमरे मे वापस आए.

उन्हों ने मुझे उसी अवस्था मे बिस्तर पेर लिटा दिया. वो मुझे लिटा
करउठने को हुए तो मैने झट से उनके गर्देन मे अपनी बाहें डाल दी.
जिससे वो मुझसे दूर नही जा सकें. अब इंच भर की दूरी भी
बर्दास्तसे बाहर हो रही थी. उन्हों ने मुस्कुराते हुए मेरी बाँहों को अपनी
गर्देन से अलग किया और अपने लिंग पर बॉटल मे बची हुई वाइन से
कुच्छ बूँद रेड वाइन डाल कर मुझसे कहा

" अब इसे चूसो." मैने वैसा ही किया. मुझे वाइन से भीगा उनका
लिंगबहुत ही टेस्टी लगा. मैं वापस उनके लिंग को मुँह मे लेकर चूसने
लगी. उन्हों ने अब उस बॉटल से बची हुई वाइन धीरे धीरे अपने
लिंगपर उधेलनी शुरू की. मैं उनके लिंग, उनके अंडकोषों पर गिरते वाइन
कोपीरही थी. कुच्छ देर बाद उन्हों ने मुझे लिटा दिया और मेरी टाँगे
अपनेकंधों पर रख दिया. फिर उन्हों ने मेरे कमर के नीचे एक तकिया
लगा कर मेरी योनि के उपर से मेरी झांतों को हटा कर योनि की
फांकोंको अलग किया. मैं उनके लिंग के प्रवेश का इंतेज़ार करने लगी. उनके
लिंग को मैं अपनी योनि के उपर सटे हुए महसूस कर रही थी. मैने
आँखें बंद कर अपने आप को इस दुनिया से काट लिया था. मैं दुनिया
केसारे रिश्तों को सारी मर्यादाओं को भूल कर बस अपने ससुर जी का,
अपने बॉस का, अपने हुह राज शर्मा, अपने राजू के लंड को अपनी चूत मे घुसते
हुए महसूस करना चाहती थी. अब वो सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे प्रेमी थे.
उनसे बस एक ही रिश्ता था जो रिश्ता किसी मर्द और औरत के बीच
जिस्मों के मिलन से बनता है. मैं उनके लिंग से अपनी योनि की दीवारों
को रगड़ना चाहती थी. सब कुच्छ एक स्वर्गिक अनुभूति दे रहा था.
उन्हों ने मेरी चूत की फांकों को अलग कर के अपने लिंग को मेरे
प्रवेशद्वार पर रखा. "अब बता मेरी जान कितनी प्यास है तेरे अंदर मे?
मेरे लंड को कितना चाहती है?" राज जी ने मुझे अपने लिंग को
योनि के द्वार से रगड़ते हुए पूचछा. "अयाया क्या करते हो....म्‍म्म्मम
अनदर घुसा दो इसे." मैने अपने सूखे होंठों पर जीभ फेरी. "मैं
तो तुम्हारा ससुर हूँ.....क्या ये उचित है?" "ऊऊओह राअज राआज
मेरे जाआअन मेराआ इम्तेहाअन मत लूऊ. म्‍म्म्मम दाल्दू इसे अपने
ल्डकेकी बीवी की चूत फाड़ दो अपने लंड से.....कब से प्यासी हूओ....ऊ
कितने दिनूओ से ईए आअग जल रहीइ थाइयीयियी. मैं तो शुरू से
तुम्हरीइ बनना चह्तीइ थी. ऊऊऊओह तुम कितने पत्थर दिल
हूऊऊओ...किठनाआ तर्सयाआअ मुझीए आअज भिओ तरसा रहे हो."
मैने उनके लिंग को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी योनि की ओर ठेला
मगर उन्हों ने मेरी कोशिश को नाकाम कर दिया. मेरी योनि का मुँह
लिंगके आभास से लाल हो कर खुल गया था जिससे उनके लिंग को किसी तरह
की परेशानी ना हो. मेरी योनि से काम रस झाग के रूप मे निकल कर
मेरे दोनो नितंबों के बीच से बहता हुआ बिस्तर की ओर जा रहा था.
मेरी योनि का मुँह पानी से उफान रहा था और उस पत्थर को मुझे
छेड़ने से फ़ुर्सत नही थी. "अंदर कर दूँ...?" "हाआँ ऊवू
हाआन" "मेरे लंड पर किसी तरह का कोई कॉंडम नही है. मेरा
वीर्यअपनी कोख मे लेने की इच्च्छा है क्या?" "हाआन ऊहह माआ हाआँ
मेरियोनि को भाअर दो अपने वीर्य सीई. डाअल दो अपनाअ बीज़ मेरि
कोख मईए." मैं तड़प रही थी. पूरा बदन पसीने से तरबतर हो
रहा था. मेरी आँखें उत्तेजना से उलट गयी थी और मेरे होंठ खुल
गये थे. सूखे होंठों पर अपनी जीभ चला कर गीला कर रही
थी. "फिर तुम्हारे कोख मे मेरा बच्चा आ जाएगा." "हाआँ हाआँ मुझे
बनाडो प्रेगञेन्ट. अब बस करूऊऊ. मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ और
मत सतऊओ. मत तड़पाव मुझे." मैने अपने दोनो पैर बिस्तर पर
जितनाहो सकता था फैला लिए,"देख तुम्हारे बेटे की दुल्हन तुम्हारे सामने
अपनी चूत खोल कर लेती तुमसे गिड़गिदा रही है कि उसके योनि को फाड़
डालो. रगड़ दो उसके नाज़ुक बदन को. मसल डालो मेरे इन स्तनो को जिन
पर मुझे नाज़ है. ये साब आपके स्पर्श आपके प्यार के लिए तड़प
रहेहैं." मैं बहकने लगी थी. अब वो मेरी मिन्नतो पर पसीज गये और
अपनी उंगलियों से मेरी क्लाइटॉरिस को मसल्ते हुए अपने लिंग को अंदर
करने लगे. मैं अपने हाथों से उनकी छाती को मसल रही थी.
उनकेलिंग को अपने चूत की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर प्रवेश करते
महसूस कर रही थी. "हाआअँ मेरीई राआअज इस आनानद काअ मुझे
जन्मूऊ से इंतएजाआर थाअ. तुउँ इतनईए नासमझ कयूओं हूओ.
मेरीए दिल को समझनईए मे इतनीी देर क्यूँ कर दीईइ."उन्हों ने
वापस मेरी टाँगों को अपने कंधों पर रख दिया. उनके दोनो हाथ अब
मेरे दोनो बूब्स पर थे. दोनो हाथ मेरी चूचियो को ज़ोर ज़ोर से
मसल

रहे थे. मेरे निपल्स को उंगलियों से मसल रहे थे. मेरी छूट बुरी
तरह से गीली हो रही थी इसलिए उनके लिंग को प्रवेश करने मे
ज़्यादा
परेशानी नही हुई. उनका लिंग पूरी तरह मेरी योनि मे समा गया
था.फिर उन्हों ने धीरे धीरे अपने लिंग को पूरी तरह से बाहर खींच
कर वापस एक धक्के मे अंदर कर दिया. अब उन्हों ने मेरी टाँगें अपने
कंधे से उतार दी और मेरे ऊपर लेट गये. मुझे अपनी बाँहों मे भर
कर मेरे होंठों को चूमने लगे. सिर्फ़ उनकी कमर उपर नीचे हो
रहीथी. मेरे पैर दोनो ओर फैले ही थे. कुच्छ ही देर मे मैं उत्तेजित
होकर उनके हर धक्के का अपनी कमर को उनकी तरफ उठा कर और
उच्छलकर स्वागत करने लगी. मैं भी नीचे की ओर से पूरे जोश मे धक्के
लगा रही थी. एर कंडीशनर की ठंडक मे भी हम दोनो पसीने
पसीने हो रहे थे. कमरे मे सिर्फ़ एर कंडीशनर की हमिंग के
अलावा हुमारी "उउउहह" "ऊऊहह" की आवाज़ गूँज रही थी. साथ मे हर
धक्के पर फूच फूच की आवाज़ आती थी. हुमारे होंठ एक दूसरे से सिले
हुए थे. हुमारे जीभ एक दूसरे के मुँह मे घूम रही थी. मैने
अपने पावं उठा कर उनकी कमर को चारों ओर से जाकड़ लिया. काफ़ी देर
तक इसी तरह चोदने के बाद वो उठे और मुझे बिस्तर के किनारे
खींच कर अढ़लेते अवस्था मे लिटा कर मेरी रांगो के बीच खड़े

होकर मुझे चोदने लगे. उनके हर धक्के के साथ पूरा बिस्तर हिलने
लगता था. मेरी योनि से दो बार पानी की बोछर हो चुकी थी. कुच्छ
देर तक और चोदने के बाद उन्हों ने अपने लिंग को पूरे जड़ तक्मेरी
योनि के अंदर डाल कर मेरे दोनो स्तनो को अपनी मुट्ठी मे भर कर
इतनी बुरी तरह मसला कि मेरी तो जान ही निकल गयी. "ले ले मेरा
बीज मेरा वीर्य अपने पेट मे भर ले. ले ले मेरे बच्चे को अपने पेट
मे. अब नौ महीने बाद मुझसे शिकायत नही करना." उन्हों ने मेरे
होंठों के पास बड़बदते हुए मेरी योनि मे अपना वीर्य डाल
दिया. मैं उनके नितंबों मे अपने नाख़ून गाड़ा कर अपनी योनि को जितना
हो सकता उपर उठा दिया और मेरा भी रस उनके लंड को भिगोने निकल
पड़ा. दोनो खल्लास होकर एक दूसरे के बगल मे लेट गये. कुच्छ देर
तक यूँ ही लंबी लंबी साँसे लेते रहे. फिर वो करवट लेकर अपना एक
पैर मेरे बदन के उपर चढ़ा दिया और मेरे स्तनो से खेलते हुए
बोले,

"ऊओफफफ्फ़ स्मृति तुम भी गजब की चीज़ हो. मुझे पूरी तरह थका
दिया मुझे."


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - sexstories - 06-25-2017

"अच्च्छा?"

"इसी तरह अगर अक्सर चलता रहा तो बहुत जल्दी ही मुझे दवाई लेनी
पड़ेगी ताक़त की."

" मज़ाक मत करो अगर दवाई की किसी को ज़रूरत है तो मुझे. जिससे
कहीं प्रेग्नेंट ना हो जाउ."

हम दोनो वापस एक दूसरे से लिपट गये और उस दिन सारी रात एक
दूसरे से खेलते हुए गुजर गयी. उन्हों ने उस दिन मुझे रात मे कई
बार अलग अलग तरीके से चोदा.

सुबह और उठने की इच्च्छा नही हो रही थी. पूरा बदन टूट रहा
था. आज हॅमिल्टन और शशा भी हमारे साथ मिल गये. हॅमिल्टन
मौकाखोज रहा था मुझ संग संभोग का. लेकिन अब मैं राज जी के ही
रंगों मे रंग चुकी थी. मेरा रोम रोम अब इस नये साथ को तरस
रहाथा. उस दिन भी वैसी ही चुहल बाजी चलती रही. मैने स्विम्मिंग
पूलपर अपनी सबसे छ्होटी बिकनी पहनी थी. मेरा आशिक़ तो उसे देखते ही
अपने होश खो बैठा. हॅमिल्टन के होंठ फदक उठे थे. हॅमिल्टन ने
पूल के अंदर ही मेरे बदन को मसला. शाम को हम डॅन्स फ्लोर पर
गये डॅन्स फ्लोर पर कुच्छ देर हॅमिल्टन के साथ रहने के बाद
राज जी ने मुझे अपने पास खींच लिया. शशा भी उनके बदन
सेचिपकी हुई थी. दोनो को अपनी दोनो बाजुओं मे क़ैद करके वो थिरक
रहेथे. हॅमिल्टन टेबल पर बैठा हम तीनो को देखते हुए मुस्कुराता
हुया अपने कॉकटेल को सीप कर रहा था. हम दोनो ने राज जी की
हालत सॅंडविच जैसी कर दी थी. मैं उनके सामने सटी हुई थी तो
शशा उनकी पीठ से चिपकी हुई थी. हम दोनो ने उनके बदन से शर्ट
नोच कर फेंक दी थी. उन्हों ने भी हम दोनो को टॉपलेस कर दिया था.
हम अपने स्तनो को अपने सख़्त निपल्स को उनके बदन पर रगड़ रहे
थे. कुच्छ देर बाद हॅमिल्टन भी स्टेज पर आ गया उसके साथ कोई
औरलड़की थी. इसे देख कर शशा हम से अलग होकर हॅमिल्टन के पास
चली गयी. जैसे ही हम दोनो अकेले हुए.राज जी ने अपने तपते
होंठ मेरे होंठों पर रख कर एक गहरा चुंबबन लिया. "आज तो तुम
स्विम्मिंग पूल पर गजब ढा रही थी." "अच्च्छा? मिस्टर. राज एक
स्टडऐसा कह रहा है. जिसपर यहाँ कई लड़कियों की आँखें गढ़ी हुई
हैं.
जनाब जवानी मे तो आपका घर से निकलना मुश्किल रहता
होगा?" "शैतान मेरी खिंचाई कर रही है." राज जी ने मुझे अपनी
बाहों मे लिए लिए स्टेज के साइड मे चले गये' "चलो यहा बहुत
भीड़ है. स्विम्मिंग पूल पर शेलेट हैं अभी पूल खाली
होगा." "लेकिन पहले बिकनी तो ले लें." "उसकी क्या ज़रूरत" मैने उनकी
तरफ देखा," आज मूनलाइट मे न्यूड स्विम्मिंग करेंगे. बस तुम और
मैं." उनकी प्लॅनिंग सुनते ही उत्तेजना मे मेरा रोम रोम थिरक उठा.

मैने कुच्छ कहा नही बस चुपचाप राज जी के साथ हो ली. हम
लोगों से बचते हुए कमरे से बाहर आ गये. स्विम्मिंग पूल का नज़ारा
बहुत ही दिल्कूश था. हल्की रोशनी मे पानी का रंग नीला लग रहा
था. तब शाम को 9 बज रहे थे इसलिए स्विम्मिंग पूल पर कोई

नही
था और शायद इसीलिए रोशनी कम कर दी गयी थी. उपर पूनम का
चाँद ठंडी रोशनी बिखेर रहा था. हम दोनो वहाँ पूल के निकट
पहुँच कर कुच्छ देर टके क दूसरे को निहारते रहे फिर हम दोनो ने
एक दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किए. मैने आस पर ड्रेस कोड इन्नर
गारमेंट्स नही पहन रखा था. इसलिय जैसे ही वो मेरी स्कर्ट को
खींचने लगे मैने उन्हे रोका. "प्लीज़. इसे नही. किसीने देख
लिया तो?" "यहा कोई नही आएगा. और किसे परवाह है? देखा नही हॉल
मे सब नंगे घूम रहे थे." हम दोनो बिल्कुल निवस्त्र हो गये.
सबसेपहले राज जी ने पूल मे प्रवेश किया फिर मुझे हाथ पकड़ कर
अंदर खींच लिया. मैं खिल खिला कर हंस पड़ी. मैने अपनी अंजूरी
मे पानी भर कर उनके चेहरे पर फेंका. तो वो मुझे पकड़ने के लिए
मेरे पीछे तैरने लगे. हम दोनो काफ़ी देर तक चुहल बाजी करते
रहे. एक दूसरे के बदन से खेलते रहे. हम दोनो कस्के एक दूसरे से
लिपट जाते और एक दूसरे का बदन को चूमने लगते. राज जी ने
मेरे बदन का कोई हिस्सा नही छ्चोड़ा जहाँ उनके होंठों का स्पर्श ना
हुआ हो. मैने स्विम्मिंग पूल के किनारे को पकड़ कर अपने आप को स्थिर

किया. राज जी पीछे से मेरे बदन से लिपट कर मेरे गीले
स्तनोको मसल रहे थे. मैं अपनी गर्दन को पीछे घुमा कर उनके होंठों
को अपने दन्तो से काट रही थी. उनका लिंग मेरे दोनो नितंबों के
बीचसटा हुआ था. मैने अपने एक हाथ से उनके लिंग को थाम कर देखा लिंग
पूरी तरह तना हुआ था. " आज जाओ जान पानी भी मेरे बदन की आग
को बुझा नही पा रहा है. जब तक तुम मेरे बदन को शांत नही
करोगे मैं ऐसे ही फूंकति रहूंगी " मैने उनके बालों को अपनी मुट्ठी
मे भर कर अपनी तरफ मोड़ा और उन्हों ने मुझे अपनी बाहों मे भर
लिया. उस जगह पर पानी कम था. वो पानी पर खड़े होकर मुझे उठा
कर स्विम्मिंग पूल के उपर बिठा दिया. मेरी टाँगें पूल के किनारों
परझूल रही थी. वो अपने दोनो हाथों से मेरी टाँगों को फैला कर मेरी
टाँगों के बीच आ गये. मैने अपनी टाँगें उठा कर उनके कंधों पर
रख दी.इससे मेरी योनि उपर होकर उनके चेहरे के सामने हो गयी.
उन्होंने मेरी योनि पर अपने होंठ टीका दिए और अपनी जीभ को योनि के
ऊपरफिराने लगे. "अयाया म्‍म्म्मा...उउउउउउउउम्म्म एमेम" मैने उनके सिर को अपने
एकहाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ को ज़मीन पर रखते हुए. उनके सिर को
अपनी योनि पर दबा दिया. वो अपनी जीभ को मेरी योनि के अंदर डाल
करउसे आगे पीछे करने लगे. मैने उत्तेजना मे अपने दोनो हाथों से
राज जी को पकड़ लिया और अपनी कमर को उसके मुँह की तरफ उठाने
लगी. उन्हो ने मेरे दोनो नितंबों पर अपनी उंगलिया गढ़ा दी और मेरे
क्लिट को अपने दाँतों के बीच दबा कर हल्के हल्के से कुतरने लगे.
वोइस हालत मे पीछे हटे तो मैं उनको पकड़े पकड़े ही वापस स्विम्मिंग
पूल मे उतर गयी. मैने अपनी टाँगों को कैंची की तरह उनके बदन
को चारों ओर से जाकड़ लिया था. फिर उनके सिर को थामे हुए अपने
टाँगों को हल्का सा लूज करते हुए उनके बदन पर फिसलती हुई
नीचेकी ओर खिसकी. जैसे ही अपने बदन पर उनके लिंग का स्पर्श महसूस
किया तो अपने हाथों से उनके लिंग को अपनी योनि पर सेट करके वापस
अपनेबदन को कुच्छ नीचे गिराया. उनका लिंग मेरी योनि के दरवाजे को
खोलता हुआ अंदर घुसता चला गया. उनको ने मेरी पीठ को स्विम्मिंग
केकिनारे से सटा दिया मैने अपने हाथों से पीछे की ओर स्विम्मिंग पूल
का सहारा लेकर अपने बदन को सहारा दिया. वैसे मुझे सहरे की
ज़्यादाज़रूरत नही थी क्योंकि मेरी टाँगों ने उनके बदन को इस तरह जाकड़
रखा था कि वो मेरी इच्च्छा के बिना हिल भी नही पा रहे थे.
उन्होनेज़ोर ज़ोर से धक्के देना शुरू
किया. "अया.....अयाया. ......राज. ....राआाज. .......हाआअन्न. ....
हाा
अनन्न.....और जूऊर सीए......एम्म्म. ....म्‍म्माअजाआ आआ
गय्ाआअ.... ..ऊऊऊफ़फ्फ़. ....जूऊओरो सीईए.....म्‍म्म्मम. ....."
मैनेअपनी बाहों का हार उनके गले मे डाल दिया और उनके होंठों से अपने
होंठ चिपका दिए. मैं उनके होंठों को काट खा रही थी. "ले ले
लेले अंदर लेले अंदर पूरा....आआअहह क्य्ाआ चीज़
हाईईइ...... .म्‍म्म्ममम.. ..." कहते हुए उन्हों ने मुझे सख्ती से अपनी
बाहों मे जाकड़ लिया और अपने रास की धार मेरी योनि मे बहाना शुरू
किया. मैने इस मामले मे भी उनसे हार नही मानी. मेरा भी वीर्य
उनकेरस से मिलने निकल पड़ा. हम दोनो अपने जिस्म को दूसरे के जिस्म मे
समा गये

क्रमशः........................


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - sexstories - 06-25-2017

गतान्क से आगे........................


हम दोनो एक दूसरे मे समाने के लिए जी तोड़ कोशिश करने लगे. दोनो एक दूसरे
से इस तरह लिपट रहे थे कि पानी से भाप उठना ही बाकी रह गया था. हम दोनो
झाड़ कर स्विम्मिंग पूल पर कुछ देर तक किसी जल की मछलियों की
तरह अठ खेलियां करते रहे उसके बाद पानी से निकल कर एक दूसरे के

बदन को साथ के बाथरूम मे जाकर पोंच्छा. फिर हम अपने कमरे मे
वापस लौट गये. खाना कमरे ही मॅंगा कर खाया. राज जी कुच्छ
ज़्यादा ही रोमॅंटिक हो रहे थे. उन्हों ने मुझे अपनी गोद मे बिठा कर
अपने हाथों से खिलाया. अगले दिन हॅमिल्टन और शशा पीछे ही पड़
गये हम दोनो को अलग नही छ्चोड़ा. हमने उनके साथ ही ग्रूप सेक्स का
मज़ा लिया. लेकिन हॅमिल्टन के साथ वो मज़ा नही आया जो मुझे इस
प्यारे बूढ़े शेर मे आया. हम जीतने भी दिन वहाँ ठहरे खूब
एंजाय किए. वापसी मे हम चारों को एक दूसरे से बिच्छुड़ते हुए बहुत
दुख हुआ. वापस आने के बाद हम दोनो मेरी सासू जी की नज़रें बचा
करकभी रात को तो कभी घर से बाहर किसी होटेल मे तो कभी उनके
कॅबिन मे मिलते थे. सासूजी को हमारे जिस्मानी ताल्लुक़ात की भनक नही
लगी. अभी पंकज के वापसी मे काफ़ी दिन बचे थे. जब हफ़्ता भर
बचा रह गया तो जेठ जी मुझे लेने आ गये. काफ़ी दीनो से उनके पास
आकर ठहरने के लिए ज़िद कर रहे थे. लेकिन मैं ही टालती रही
मगरइस बार ना कहा नही गया. मैं उनके साथ उनके घर हफ्ते भर रही.
हम दोनो औरतें उनकी दो बीबियो की तरह उनके अगल बगल सोती थी.
रात को कमल्जी हम दोनो को ही खुश कर देते. उनमे अच्च्छा स्टॅमिना
था. जब वो ऑफीस होते तो हम दोनो कभी कभी लेज़्बीयन सेक्स भी

एंजायकरते. मेरी जेठानी तो मुझ पर जान च्चिड़कने लगी थी. हुमारे
बीचअब कुच्छ भी गुप्त नही रहा. कमल जब ऑफीस से लौटते उसके पहले
वोखुद बन सावँर कर तैयार होती और फिर मुझे भी सजाती साँवर्ती.
हम दोनो उनके आने के बाद सन्छिप्त कपड़ों मे उनसे लिपट जाते और
उनके साथ कामुकता का खेल शुरू हो जाता. हफ्ते भर बाद पंकज
वापसआ गया. हम वापस मथुरा शिफ्ट हो गये. लेकिन मैने राज जी से
मिलने का एक रास्ता खोल रखा. राज जी ने पंकज को कह दिया

" स्मृति एक बहुत अच्च्ची सेक्रेटरी है. अभी जो सेक्रेटरी है वो
इतनी एफीशियेंट नही है. इसलिए कम से कम एक बार हफ्ते मे इसे भेज
देना देल्ही. मेरे ज़रूरी काम निबटा कर चली जाएगी.
पंकज राज़ी हो गया कि मैं हफ्ते मे उनके ऑफीस आ जाया करूँगी और
सारे पेंडिंग काम निबटा जाया करूँगी. लेकिन असल मे मैने कभी भी
ऑफीस मे कदम नही रखा. राज ने एक फाइव स्टार होटेल मे सूट
ले रखा था जहाँ मैं सीधी चली जाती और हम दोनो एक दूसरे के
बदन से अपनी प्यास बुझाते.

अभी पंकज के आए हुए आठ दस दिन ही हुए थे कि मुझे ज़ोर की
उबकाई आई. मैने डॉक्टर को दिखाया तो उन्हों ने प्रेगञेंसी कनफ्र्म
कर दिया. मैं खुशी से उच्छल पड़ी. लेकिन इसका असली बाप कौन है
जिसके साथ मैं पिच्छले महीने हम बिस्तर हुई थी. ये न्यूज़ दी. तीनो की
खुशी का ठिकाना नही रहा. तीनो को मैने कहा कि वो बाप बनने
वाला है.

पहले के लिए : इस उम्र मे बाप बनने की खुशी.
दूसरे के लिए : उसकी मर्दानगी का सबूत
तीसरे के लिए : उसके घर की पहली खुशी थी.

तीनो ने मुझे प्यार से भर दिया. पूरे घर मे हर व्यक्ति खुशी
मेझूम रहा था. सास जेठानी सभी बिज़ी थे घर के नये मेंबर के
आगमन की खुशी मे. हुमारा पूरा परिवार सिमट आया था देल्ही मे
राज जी के निवास पर. बस मुझे एक अजीब से उलझन कचोट रही
थी कि मेरे होने वाले बच्चे का बाप कौन है. फिर भी दिल मे एक
तसल्ली थी कि चाहे वो जिसका भी हो, होगा तो वो इसी घर का खून.
देखने बोलने मे इसी परिवार का ही नज़र आएगा. वरना मैने जितने
लोगों के साथ सेक्स किया था उनमे से किसी और का होता तो लोगों को
शांत कर पाना मुश्किल होता.

एंड


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