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Antarvasna दर्द तो होना ही था - sexstories - 06-30-2017

दर्द तो होना ही था

दोस्तो मेरा नाम शक्ति देवनागर… मैं 46 साल का हूँ, लखनऊ का रहने वाला हूँ और एक प्राईवेट ऑफिस में क्लर्क के पद पर कार्यरत हूँ।
दो साल पहले तक मेरी आर्थिक स्थिति सही नहीं थी, किसी तरह गुजर बसर चल जाता था, पर दो साल पहले इस प्राईवेट कम्पनी का ऐड आया था और उस ऐड को पड़ने के बाद मैं भी इन्टरव्यू देने गया। इन्टरव्यू देते समय पता नहीं मुझे क्या हो गया था कि मेरे आँखों से आँसू निकल पड़े। शायद विश्वास नहीं था अपने ऊपर… लेकिन जो मैडम थी, शायद 22 वर्ष की थी, साधारण नाक नक्शे की थी, उनकी दया के कारण मुझे वो नौकरी मिल गई।
हालाँकि सैलरी कम थी, लेकिन बंधी-बंधाई सैलरी मिलने की आस में मैंने उस काम के लिये हाँ कर दिया। अगले दिन से मैं काम पर लग गया।
वो मैडम जिसका नाम प्रिया है एक कुछ सख्त मिजाज की लेडी है। उसने मुझे अपने ही चेम्बर में एक कोने की सीट दिखाई और मुझे काम समझाने लगी।
वैसे तो वो किसी बात का बुरा नहीं मानती थी, लेकिन अगर किसी का काम अधूरा हो, तो फिर उस बन्दे की शामत ही थी, चाहे फिर वो लड़की हो या लड़का। उसका कपड़ा पहनने का तरीका बहुत ही उत्तेजक था… वो टीशर्ट और जींस ही अकसर पहनती थी। वो कपड़े बहुत ही टाईट पहनती थी, इससे उसके पुट्ठे और छाती का उभार खुल कर प्रदर्शित होता था।
चूंकि मैं नया नया था, इसलिये मैं ज्यादा इस बात को तवज्जो नहीं दे रहा था।
हालांकि एक बात मैंने नोटिस की कि वो सभी बातों का जवाब बड़ी सफाई के साथ देती थी। चाहे बात द्विअर्थी ही क्यों न हो।
ऐसे ही एक दिन में बैठा हुआ था कि एक और कर्मचारी था जो काफी देर से मेरी सीट पर बैठ हुए काम कर रहा था, मुझे देखते खड़ा हुआ और कहीं जाने की तैयारी कर रहा था और बार-बार ‘मैडम इजाजत है क्या…’ कह रहा था।
मैडम झल्ला कर बोली- अरे बाबा जाओ ना!
तभी वो शायद मैडम को छेड़ते हुए बोला- जाऊँ कैसे? अभी आपने लिया नहीं और फिर कहोगी तुमने दिया नहीं इसलिये मैंने लिया नहीं।
मैडम उसी समय एक रजिस्टर उठाया और उसमें कुछ लिखने के बाद बोली- ठीक है न, अब तो तुमने दे दिया और मैंने ले लिया, अब जाओ1
मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने मैडम से पूछा- मैडम, ये कैसा लेना देना है?
मेरी तरफ देखते हुए बोली- एटेन्ड्स की बात हो रही थी।
उस दिन से पहले तक मैं थोड़ा सा खुल नहीं पा रहा था, शायद नई-नई ज्वाईनिंग के कारण… लेकिन अब मेरी भी थोड़ी सी धारणा बदल गई थी और मैं भी उससे छेड़छाड़ करने लगा था। पर वो मेरे काबू में नहीं आ रही थी।
हाँ… एक बात तो है वो अपने काम के प्रति बड़ी ईमानदार थी, काम अगर पेन्डिंग है तो वो काम पूरा करके जाती थी।
इसी तरह एक बार काम करते हुए बहुत देर हो चुकी थी, हम दोनों साथ-साथ ही घर के लिये निकले, रास्ते में मैंने उसे ड्रॉप करने के लिये ऑफर दिया, लेकिन उसने मना कर दिया।
इससे मेरा मन थोड़ा बोझिल हो गया और फिर मैं अपने काम से काम रखने लगा।
धीरे-धीरे एक साल बीतने लगा और मैं प्रिया से केवल काम की बात करता था। मुझे ऐसा लगने लगा कि वो मुझे इग्नोर कर रही थी क्योंकि उसने न तो मुझे अपना नम्बर दिया और न ही मेरा नम्बर लिया।
खैर बात उसके बर्थ डे से शुरू होती है, उस दिन उसने मुझे जबरदस्ती अपनी बर्थ डे पार्टी पर बुलाया और अच्छे से बात करना शुरू की और उस दिन से वो मेरे पास ज्यादा समय बिता रही थी, अब मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी और मैं उसे छेड़ने लगा था, जिसका वो रिप्लाई भी मुस्कुरा कर देने लगी।
एक दिन मैंने हिम्मत करके पूछ ही लिया- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है या नहीं?
उसने बोला- ऑफिस के काम से फुर्सत नहीं मिलती तो बॉयफ्रेंड कहां से पालूँ?
तो मुझे लगा कि उसके करीबी होने का मुझे एक मौका मिल सकता है।
धीरे-धीरे मैं उससे खुल कर बात करने लगा, वो भी मुझे वैसा ही जवाब देने लगी, लेकिन बीच-बीच में वो ऐसी हरकत कर देती कि फिर मुझे वापस अपनी मांद में जाना पड़ता।
लेकिन ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं।
शुक्रवार का दिन था और शनिवार के दिन कुछ जरूरी कागज की जरूरत थी, ताकि उसको दूसरे ऑफिस में फारवर्ड किया जा सके, मुझे भी ऑफिस के काम से सुबह ही लखनऊ जाना था। तो हमारे बॉस ने तय किया कि चाहे जैसे हो उस काम को कम्पलीट करके प्रिया को सभी कागज हैण्ड ओवर आज ही कर देना है ताकि प्रिया उस पेपर को डिसपेच करने से पहले एक बार अच्छे से चेक कर ले।
प्रिया घर जा चुकी थी और बॉस भी घर जा चुके थे। मैंने अपना काम खत्म किया और पेपर लेकर प्रिया मैडम के घर आ गया।
मेरा पेट दर्द हो रहा था और मुझे प्रेशर भी बहुत मार रहा था। जैसे ही मैं प्रिया के घर पहुँचा और उसके घर की कॉल बेल बजाई, दरवाजे पर प्रिया ही थी, दरवाजे पर ही उसने वो पेपर लिये और वापस जाने लगी, तो मैंने अपनी प्रॉबल्म बताई, पहले तो वो न नुकुर करती रही, और बोली कि वो घर में अकेली है और उसके मम्मी पापा कभी भी आ सकते है, असामान्य स्थिति से बचने के लिये वो मना कर रही है।
लेकिन फिर मेरी हालत पर दया दिखाते हुए मुझे अन्दर बुला लिया और वाशरूम दिखाते हुए बोली- जाओ।
मैं बातों को ध्यान दिये बिना वाशरूम में घुसा और फ्रेश होने लगा। अब जैसे-जैसे मैं अपने पेट दर्द पर काबू पाने लगा, वैसे-वैसे मेरे दिमाग में खुरापात शुरू होने लगी, आज एक मौका है अगर वास्तव में मेरे लिये प्रिया के दिल के कोने में थोड़ी भी जगह होगी तो मेरी बात मानेगी, नहीं तो फिर जो मेरे साथ होगा, उसके लिये भी मैं तैयार था।
इसलिये फारिग होने पर मैंने अपने पूरे कपड़े उसी वाशरूम में उतारे और बाहर नंगा ही आ गया।
जैसे ही मैंने लैट्रिन का दरवाजा खोला, प्रिया सामने थी, मुझे नंगा देखकर बोली- शक्ति तुम नंगे क्यों हो?
आम तौर पर कोई भी लड़की किसी को नंगा देखे तो तुरन्त अपनी आँख बन्द कर लेती, पर प्रिया मुझे एकटक देख रही थी, मुझ उसकी इस बात से थोड़ा हौंसला मिला। तभी वो मुझसे बोली- जल्दी से अपने कपड़े पहनो और जाओ यहाँ से, मेरे मम्मी-पापा कभी भी आ सकते हैं।
‘यह तो कोई बात नहीं हुई कि तुम मुझे नंगा देखो।’ मैं अभी अपनी बात पूरी कर ही रहा था कि वो बोल पड़ी- मैंने तुमसे थोड़े ही कहा था कि पखाने से नंगे निकलो, अब जाओ यहाँ से1
मैं समझ रहा था कि थोड़ा और प्रयास करने से कम से कम मैं भी प्रिया को नंगी देख सकता था।
मैंने अपने कपड़े उठाये और गुसलखाने में घुस गया और वहीं से प्रिया को आवाज लगाई, मेरी आवाज सुनकर प्रिया गुसलखाने के पास आई और मुझे हल्के से झड़पते हुए बोली- अभी तक तुमने अपने कपड़े नहीं पहने, जल्दी करो, मम्मी-पापा आते ही होंगे।
मैंने उसकी इसी बात को पकड़ते हुए अपनी कपड़े को पानी से भरे हुए टब की तरफ करते हुए बोला- तुमने मुझे नंगा देखा है, मुझे भी तुम्हें नंगी देखना है।
‘यह नहीं हो सकता, तुम अपने कपड़े पहनो और अब चले जाओ। नहीं तो अब बुरा हो जायेगा।’
मैं थोड़ा डर गया, लेकिन मन ने कहा कि ‘एक अन्तिम कोशिश कर लो, शायद नजर को सकून मिल जाये।’
यह ख्याल आते ही मैंने चड्डी को टब में डाल दिया और प्रिया से बोला- अगर तुम नंगी नहीं होगी तो मैं अपने सब कपड़े पानी में डाल दूंगा और इसी तरह नंगा रहूँगा, फिर तुम जानो और तुम्हारा काम!
बनियान डालने वाला ही था कि प्रिया मुझे रोकते हुए बोली- रूको!
कहकर वो अपने एक-एक कपड़े उतारने लगी और पूरी तरह से नंगी हो गई।
क्या उजला शरीर थी प्रिया का… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं टकटकी लगा कर देखता ही रह गया! क्या छोटे-छोटे संतरे जैसी उसकी चुची थी, उन संतरों जैसी चुची पर काली छोटी मोटी सी निप्पल थी। उसकी योनि पर घने-घने गुच्छे रूपी बालों को पहरा था। वह अपने दोनों हाथों से अपनी बुर को छुपाने का अथक प्रयास कर रही थी। उसकी कांखों और टाँगों पर भी बाल थे, जैसे एक अनछुई नवयौवना के होते हों।
तभी वो मुझे झकझोरते हुए मुझसे बोली- शक्ति, अब तुमने मुझे नंगी देख लिया है, अब तुम जाओ प्लीज!
मैं तुरन्त अपने घुटने के बल पर उसके समीप बैठ गया और उसकी नाभि को चूमते हुए उसे थैंक्स बोला।
वो मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बोली- जाओ प्लीज, मम्मी-पापा कभी भी आ सकते हैं।
मैंने उसकी बात को सुना और खड़े होकर उसको अपने से चिपका लिया, वो भी मुझसे कस कर चिपक गई, वो बड़ी गहरी-गहरी सांसें ले रही थी और उसकी गर्म सांसें मुझसे टकरा रही थी।
फिर वो मुझसे अलग होते हुए बोली- अब जल्दी से जाओ, मैंने तुम्हारी बात मान ली, अब तुम भी मेरी बात मानो।
मैंने तुरन्त ही अपने कपड़े पहने और वहां से चला गया। वो मुझे नंगी ही दरवाजे तक छोड़ने आई।

शनिवार और रविवार का दिन मेरे लिये कैसा बीता, मैं खुद भी नहीं समझ पाया, मेरे मन में प्रिया की बुर की चुदाई का ख्याल आ रहा था… मैं उसको फोन करना चाह रहा था, पर हिम्मत नहीं पड़ रही थी।
खैर किसी तरह सोमवार को मैं ऑफिस पहुँचा, तो प्रिया वहां नहीं थी। ऑफिस से पता चला कि शनिवार को जो जरूरी काम था, उसको करके वो चली गई थी।
अब मुझे अपने किये पर अफसोस हो रहा था। मैं सोच रहा था कि सिर्फ एक बार प्रिया से मेरी बात हो जाये तो मैं उससे माफी मांग लूँ।
खैर उस दिन मैंने किसी तरह से अपना समय काटा और घर जाने को हुआ तो मेरे कदम खुद-ब-खुद प्रिया के घर की तरफ बढ़ गये।
घर के नीचे पहुँच कर मैं घंटी बजाने ही वाला था कि मेरे मन ने एक बार फिर ऐसा करने से रोक दिया।
मैं चुपचाप घर चला आया, लेकिन मैं पूरी रात इस बात का विचार करके नहीं सो पाया कि कहीं मैंने प्रिया को हर्ट तो नहीं कर दिया, मुझे लगा कि प्रिया की बुर की चुदाई के बारे में मेरी सोच अनुचित है। लेकिन प्रिया की चुप्पी ने भी तो मेरा हौंसला बढ़ाया था और वो खुद भी मुझसे लिपटी हुई थी, उसकी बातों में कहीं भी सख्ती नहीं थी।
खैर, मैं दूसरे दिन ऑफिस पहुँचा तो देखा तो प्रिया भी ऑफिस में थी। उसको देखकर मेरे मन भी खुश हुए बिना न रह सका, पर हम दोनों एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे। मैं उससे माफ़ी मांगना चाह रहा था, पर मौका हाथ नहीं आ रहा था।
खैर एक बजे के आस-पास जब हम दोनों को एकान्त मिला तो मैं तुरन्त प्रिया की तरफ घूमा और अपने हाथ जोड़कर उससे माफी मांगने लगा।
वो तुरन्त मेरे हाथ को पकड़कर बोली- इसकी कोई जरूरत नहीं है, जो होना था हो गया।
फिर हम दोनों अपना काम करने लगे।
मैं यह साफ महसूस कर सकता था कि प्रिया मुझसे कुछ कहना चाहती है, पर कह नहीं पा रही है।
इसी बीच लंच का समय हो गया और मैं बाकी स्टाफ के साथ लंच लेने चला गया। जब मैं लंच लेकर वापस केबिन में लौटा तो प्रिया वहाँ नहीं थी, चपरासी ने मुझे बताया कि प्रिया घर जा चुकी है। मैं अपनी कुर्सी पर बैठा था कि तभी मेरी नजर एक छोटी सी पर्ची पर पड़ी, जो मॉनीटर से दबी हुई थी। उसमें लिखा था कि क्या आज तुम ऑफिस के बाद मेरे घर आ सकते हो?
मेरी तो खुशी का ठिकाना न रहा।
मैं अब समय को किसी तरह से बिता रहा था और बार-बार मेरी नजर घड़ी पर जा रही थी।
किसी तरह ऑफिस खत्म होने को आया, मैं तुरन्त ही अपनी गाड़ी उठा कर प्रिया के घर की तरफ चल दिया, उसके घर पहुंचकर जब मैंने घंटी बजाई तो तुरन्त ही दरवाजा खुल गया, मुझे भी उसके अन्दर एक बैचेनी सी नजर आई, उसने मुझे बैठाया और चाय, नाशता और पानी को टेबिल पर रखकर बैठ गई.
मैं और प्रिया चुपचाप बैठे चाय पी रहे थे कि तभी मेरी नजर प्रिया के पैरों की तरफ गई, वो अपने अंगूठे से जमीन को खुरचने का प्रयास कर रही थी, ऐसा लग रहा था कि वो कुछ कहना चाह रही हो, लेकिन कह नहीं पा रही.
मैंने ही शुरूआत करने की सोची, मैंने उसकी तंद्रा को भंग करते हुए पूछा- प्रिया, आपने मुझे क्यों बुलाया?
उसने एकदम से चौंक कर मेरी तरफ देखा और फिर नजरें झुका कर बोली- शक्ति, मेरे घर में आज से तीन दिन तक कोई नहीं है। क्या तुम मेरे साथ रह सकते हो?
‘पर क्यों?’ मैंने पूछा।
वो थोड़ी देर तक चुप रही, मैंने एक बार फिर पूछा- आखिर तीन दिन तक मुझे तुम्हारे साथ क्यों रूकना है?
वो मेरे आँखों में आँखें डाल कर बोली- मुझे एक बार फिर से तुम्हें नंगा देखना है।
इतना कहकर वो चुप हो गई।
मेरे मन में एक अलग सी खुशी छा रही थी, जो लड़की किसी को अपने पुट्ठे पर हाथ नहीं रखने देती थी, वो मुझे खुद इनवाईट कर रही थी।



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इत्तेफाक था कि इन दिनों मेरा घर भी खाली पड़ा हुआ था और अगले 10 दिन तक कोई वापस भी नहीं आने वाला था, इसलिये मैंने प्रिया से पूछा कि क्या वो मेरे साथ मेरे घर चलेगी?
वो राजी भी हो गई।
उसने मुझे चौराहे पर वेट करने के लिये कहा, मैं चौराहे पर आकर उसका इंतजार करने लगा।
थोड़ी ही देर बाद प्रिया अपने हाथ में एक छोटी अटैची लेकर आ गई। मैं प्रिया को लेकर अपने घर आ गया।
थोड़ी देर तक वो चुपचाप मेरे घर को देख रही थी और मैं चाय बना रहा था, मैंने उसे चाय सर्व की और उसके बाद मैं खाना बनाने की तैयारी करने लगा.
इस बीच प्रिया ने मुझसे कोई बात नहीं की, बस मेरे साथ खाना बनाने में मेरी मदद कर रही थी।
उसके बाद हम दोनों ने साथ खाना खाया और फिर हम दोनों मेरे कमरे में आ गये।
बहुत देर की चुप्पी को मैंने तोड़ते हुए प्रिया से पूछा- अब क्या करना है?
वो बोली- जो मैंने तुमसे कहा था, वही करना है!
उसके अन्दर अभी भी एक झिझक थी।
मैंने कहा- ठीक है, लेकिन तुम्हें भी नंगी होना होगा।
इस पर वो बोली- मैं भी नंगी हो जाऊँगी, पर पहले तुम्हें नंगा होना होगा।
‘ठीक है!’ यह कहते हुए मैंने अपने कपड़े उतारना शुरू किया, जब मैं पूर्ण नंगा हो गया तो प्रिया मेरे पास आई और मेरे नंगे जिस्म पर अपने हाथ फेरने लगी। वो अपनी उंगलियों को मेरी एक-एक नाजुक जगह पर चला रही थी, कभी मेरे निप्पल पर तो कभी मेरी नाभि पर… तो कभी जांघ और अंडे पर या फिर लंड पर…
फिर मेरे पीछे आती और मेरे चूतड़ को सहलाती और एक उंगली चूतड़ के दरार में डालती।
बड़ी देर तक मैं यूं ही खड़ा रहा और वो मेरे बदन से खेलती रही।
फिर उसने अपने चुम्बनों की बौछार सी कर दी, मैं बुत की तरह खड़ा था और वो कभी मुझसे कस कर लिपट जाये तो कभी मेरे सभी अंगों को बेइन्तहा चूमे।
तब वो मुझसे अलग हुई और अपने चेहरे को हाथों में छुपाकर बिस्तर के कोने में जा कर दुबक गई।
मैं उसके इस व्यवहार को समझ नहीं पाया, मैं उसके पास गया और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए उसको पुचकारा, मैं बोला- प्रिया यह तो अनफेयर है। तुमने भी मेरे सामने नंगी होने का वायदा किया था, अब तुम्हारी बारी है।
वो मेरी तरफ घूमी, उसकी आँखों में आँसू थे।
मैंने उसके आंसू पोंछते हुए कहा- कोई बात नहीं, अगर तुम नंगी नहीं होना चाहती तो कोई बात नहीं, कोई जबरदस्ती नहीं है.
इतना कहकर मैं उठने लगा, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- आज पहली बार अपनी इच्छा से अपने लिये कुछ कर रही हूँ और मेरे परिवार में किसी को कुछ नहीं मालूम है।
मैंने कहा- कोई बात नहीं, अगर तुम वापस जाना चाहो तो मैं तुम्हें ले चलने के लिये तैयार हूँ।
‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है। आज मैं अपने सुख का अहसास करना चाहती हूँ।’ वो पलंग पर ही खड़ी हो गई और अपने जिस्म से अपने कपड़े अलग करने लगी।
जब उसने अपने पूरे कपड़े उतार लिये तो मैं उसे गौर से देखने लगा तो वो फिर शर्मा गई और अपने चेहरे को छुपा लिया।
क्या अंग थे उसके… दोनों जांघें आपस में चिपकी हुई थी, ऐसा लग रहा था कि दोनों जांघें मिलकर प्रिया की योनि को मुझसे छिपाने का अथक असफल प्रयास कर रही थी।
हालांकि उसकी योनि को बालों ने भी छिपा रखा था, बड़े-बड़े बाल उगे हुए थे।
धीरे-धीरे मेरी नजर ऊपर की तरफ जा रही थी, उसकी गहरी बड़ी सी नाभि भी बहुत ही आकर्षक लग रही थी। पेट उसका अन्दर की तरफ था।
मैंने धीरे से अपने होंठ नाभि के पास रख दिए और एक हल्का सा चुम्बन दे डाला।
अब मेरी नजर उसके उठे हुए स्तनों पर थी, जिनके बीच में काले रंग की छोटी बिन्दी जैसी निप्पल था। मेरे हाथ उन निप्पल को छूने लगे, मेरे दोनों चुटकी में उसके निप्पल फंस चुके थे।
प्रिया ने अभी भी अपना चेहरा छुपा रखा था, बीच बीच में वो अपनी उंगलियों के बीच से मुझे खेलते हुए देख लेती थी और जब मेरी नजर उस पर पड़ती थी तो वो फिर से अपने चेहरे को छुपा लेती थी।
इसी बीच मेरे हाथ उसके चूतड़ के उभारों पर टिक गये। उसके उभारों में बड़ा कसाव था, दबाने में बड़ा ही मजा आ रहा था, बीच-बीच में मेरे उंगली जैसे ही उसकी दरार के बीच घुस कर उस छेद के अन्दर जाने की कोशिश करती, वैसे ही वो आह बोल देती और मेरी उंगली बाहर निकल आती।
मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और लेकर गोल-गोल चक्कर काटने लगा, उसकी हंसी छूट पड़ी।
प्रिया के स्तन मेरे होंठों से छू रहे थे, मैं अपनी जीभ निकालकर उसके स्तनों के बीचों बीच लटके हुए काले अंगूर पर लगा देता। मैं बारी-बारी से दोनों निप्पल को चटकारे लेकर टच करता, मेरी इस अदा पर प्रिया ने अपने होंठों को गोल किया और मुझे फ्लाईंग किस दी.
जवाब में मैंने भी उसे फ्लाईंग किस दी।
प्रिया की टांगें मेरे लिंग से लड़ रही थी। उसकी कांख में भी बाल थे और पसीने की गंध मेरे नथूनों में धंसी जा रही थी, लेकिन मुझे बड़ा मजा आ रहा था।
फिर मैंने उसको अपनी गोद से उतारा और पलंग पर लेटाकर उसकी बगल में लेट गया और उसके ऊपर अपनी टांग चढ़ा दी।
मेरा लिंग उसके योनि से टच कर रहा था और इससे ही मुझे उसके अन्दर से निकलती हुई गर्मी का अहसास हो रहा था। मेरे लिये उसके कांख में बाल होने या उसके योनि के ऊपर बाल होने का कोई मतलब नहीं था।
मैंने उसके दोनों हाथों को पकड़ा और उसके सर के ऊपर ले जाकर सीधा कर दिया और अपनी नाक उसकी कांख से निकलती हुई गंध को सूंघने के लिये लगा दी।
मैं धीरे-धीरे उसके शरीर के हर हिस्से को अपने अन्दर महसूस करना चाहता था, मैंने प्रिया को सीधा लेटाया और उसके ऊपर अपनी टांग को एक बार फिर चढ़ाया और उसके गर्दन पर अपने होंठ रख दिये, उसके बाद मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया, वो भी मेरे होंठ को चूस रही थी।
उसके बाद मैं उसके दोनों स्तनों को बारी-बारी से अपने मुंह के अन्दर लिया, फिर प्रिया के पेट पर अपनी जीभ चलाते हुए उसके गहरी नाभि के पास पहुंच गया और अपनी जीभ मैंने उसकी नाभि के अन्दर घुसेड़ दी।
वो इधर-उधर उछलने लगी, बोली- शक्ति, प्लीज अपनी जीभ निकालो, मुझे गुदगुदी हो रही है।
मैंने अपनी जीभ निकाली और एक गहर चुम्बन जड़ दिया, मैं और नीचे उतरा योनि के पास पहुंचा और जांघों को चूमने लगा, हालांकि उसकी जांघ के आस पास भी बालों का जंगल था और वो टूट कर मेरे मुंह के अन्दर आ रहे थे, पर जैसे ही मैंने उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा, उसने तुरन्त ही मेरे सर को धक्का देकर अलग कर दिया और अपने हाथ से उस जगह को ढक लिया और बोली- इस जगह को रहने दो, मुझे यह पसन्द नहीं है।
मैंने धीरे से उसके हाथ को हटाया और बोला- तुम्हारे लिये यह जगह अच्छी नहीं है, पर मेरे लिये तो बहुत ही अच्छी जगह है।
इतना कहने के साथ ही जैसे मैंने एक बार फिर योनि के बीचों बीच चुम्बन जड़ने का प्रयास किया, प्रिया ने एक बार फिर अपने हाथ उस जगह पर रख लिया।
मैंने उसके हाथ को फिर से हटाया और खुद पलंग से नीचे उतरा और प्रिया की कमर को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचा और उसके दोनों पैरों को पैताने पर टिका दिया और प्रिया से बोला- मुझे दो मिनट का समय दो, अगर तुम्हें पसंद न आये तो फिर मैं नहीं करूंगा।
‘ठीक है!’ वो बोली.
मैंने उसकी जांघों को पकड़ा और उसके योनि के मुहाने पर अपने होंठ रख दिए, योनि के मुहाने से गर्म हवा निकल रही थी, मैंने अपनी जीभ निकाली और बस टच ही की थी कि प्रिया का जिस्म अकड़ने लगा और उसका पानी निकल गया, वो बस इतना ही बोल पाई थी- शक्ति, प्लीज अपना मुंह वहाँ से हटा लो, मेरे अन्दर से कुछ बाहर आ रहा है!
लेकिन तब तक उसके रस का स्वाद मेरे जीभ को टच कर चुका था। मैंने अपना मुंह हटाया और देखा तो सफेद तरह पदार्थ निकल रहा था।
मैंने उसके रस को एक उंगली में लिया और उसके पास पहुंचा और उसको दिखाते हुए बोला- प्रिया देखो, यह तुम्हारे अन्दर से निकला है.
उसने अपनी आँखें खोली, बोली- क्या है यह?
मैं बोला- तुम्हारा वीर्य है ये, लो इसे चखो!
‘छीः मैं नहीं चखती!’
‘क्यों?’ मैंने पूछा.
तो बोली- जहाँ से पेशाब निकलती है, वहीं से यह भी निकला है। मैं चखूँगी तो मुझे उल्टी हो जायेगी।
‘मुझे तो नहीं हुई, तुम्हारा रस मेरे जीभ को टच कर चुका है.’ कहते हुए मैं उसके बगल में लेट गया।
‘तो ठीक है, तो तुम्ही इसे चख लो।’
‘ओ.के.’ कहते हुए मैंने उस उंगली को अपने मुंह के अन्दर किया- उम्म्ह… अहह… हय… याह… 
‘छीः’ कहते हुए पल्टी और मेरे ऊपर अपनी टांग को चढ़ाकर बोली- यह तुमने क्या किया?
‘तुम्ही तो बोली थी।’
‘मैंने मजाक किया था.’
‘सेक्स में मजाक नहीं, मजा आना चाहिये। अभी जब तुम्हारी बुर चाट रहा था…’
‘बुर…’ मेरी बात को काटते हुए बोली।
‘हाँ बुर, मैंने अपनी हथेली उसकी बुर को सहलाते हुए बोला- इसी को बुर कहते हैं।
प्रिया ने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे समझने का प्रयास कर रही हो, मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि जो लड़की ऑफिस को डील कर रही हो उसे जिस्म के नाम न मालूम हो। फिर भी मैंने सोचा ‘हो सकता हो, कभी इसने ध्यान नहीं दिया हो।’
फिर मैंने अपनी बात को आगे बढ़ाया और उससे बोला- जब मैं तुम्हारी बुर चाट रहा था तो कैसा लगा?
एक बार फिर वो चुप हो गई और कुछ देर बाद बोली- शुरू में तो मजा नहीं आया लेकिन फिर बहुत मजा आ रहा था।
अभी तक उसके हाथ मेरे सीने के बालों से खेल रहे थे।
फिर वो मेरे ऊपर फ्लैट लेट गई और मेरा लंड उसकी चूत के पास जांघों के बीच फंसा हुआ था। मेरे हाथ उसकी पीठ को सहला रहे थे। फिर मेरा हाथ उसके पुट्ठे पर गया और उसको दबाते हुए बोला- तुम्हारा पुट्ठा बहुत टाईट है।
वो थोड़ा मुस्कुराई और मेरे गालों पर पप्पी ले ली, मैंने उसकी गांड के अन्दर उंगली डालते हुए कहा- जानेमन गाल पर पप्पी मत दो, मेरे होंठों को चूसो।
उसने मेरा हाथ पकड़ा और खींचते हुए बोली- अपनी उंगली पीछे से निकालो।
मैं हँसते हुए बोला- पीछे से नहीं, गांड बोलो गांड!
‘धत्त…’
मैंने उसके चेहरे को अपनी तरफ करते हुए कहा- देखो, अगर सेक्स का मजा लेना हो तो, खुल कर लो।
प्रिया मेरी तरफ अभी भी प्रश्न भरी निगाहों से देख रही थी।
मैंने उसकी लटों को एक तरफ करते हुए कहा- अच्छा अब तुम भी मुझे वैसे ही प्यार करो जैसे मैंने तुम्हें किया।
मेरी इस बात को सुनते ही वो तुरन्त ही मेरे होंठों को चूमने लगी, फिर नीचे उतरते हुए मेरे निप्पल को अपने होंठों का मजा देने लगी, फिर मेरी नाभि की तरफ ठीक उसी तरह कर रही थी, जैसे मैंने किया.
मेरा लंड हिचकोले खा रहा था।
जांघ के अगल बगल तक उसने अपनी जीभ चलाई और फिर नीचे पैरों की तरफ उतरने लगी, तब मैंने उसे टोकते हुए कहा- प्रिया यह फेयर नहीं है, मैंने तुम्हारी बुर को भी प्यार किया था, तो अब तुमको भी मेरे लंड को प्यार करना होगा!
उसने मेरी तरफ देखा और फिर अपने काम पर शुरू हो गई.

मैंने दो बार उससे प्लीज कहा तो वो बड़ी मुश्किल वो मेरे लिंग के अग्र भाग को अपने मुंह के अन्दर ले पाई थी। हाँ ये अलग बात थी कि वो मेरे बाल रहित लंड के आसपास की जगहों को बड़े ही प्यार से सहलाती और उन जगहों को चूम लेती थी.
इसी बीच मैंने सुपारे के खोल को नीचे किया और प्रिया से उस पर अपनी जीभ चलाने को कहा.
थोड़ा न नुकुर करने के बाद उसने अपनी जीभ चलाना शुरू की, मेरा लंड प्रिया के मुंह की चपेट में आने से तड़प सा गया था और वैसे भी काफी समय से बर्दाशत भी कर रहा था। इसलिये जैसे ही प्रिया ने जीभ चलाई मेरी रस मलाई फड़फड़ाते हुए निकल गई जो प्रिया के जीभ को टच करते हुए उसके मुंह के अन्दर और चेहरे पर गिर गई.
‘छीईईई ईईईई…’ कहकर वो बाथरूम की तरफ भागी, मैं भी उसके पीछे-पीछे बाथरूम की तरफ भागा और मेरा रस भी मेरे भागने के कारण यहाँ वहाँ गिर रहा था।
मैं बाथरूम के अन्दर पहुंचा तो प्रिया उल्टी करने का प्रयत्न कर रही थी, मैंने उसकी पीठ सहलाते हुए कहा- परेशान मत हो, उल्टी नहीं होगी!
लेकिन वो मुंह के अन्दर उंगली डाल कर उल्टी करने का प्रयास कर रही थी.


RE: Antarvasna दर्द तो होना ही था - sexstories - 06-30-2017

बेसिन से झुके होने के कारण उसका गुदा (गांड) द्वार थोड़ा सा खुल गया था और मैंने प्रिया के दोनों कूल्हों को कस कर दबा दिया.
‘उईईई ईईई…’ करके एकदम से पल्टी और मेरे मुंह पर एक झापड़ रसीद कर दिया उसने!
मैं अपना गाल मलता रह गया और वो भाग के बिस्तर पर पेट के बल लेट गई।
मैं भी अपने गाल को सहलाते हुए पीछे पीछे कमरे में आ गया, वो दोनों हाथों के अन्दर अपना मुंह छुपा कर लेटी हुई थी, मैं उसकी पीठ सहलाने लगा लेकिन वो कोई रिस्पॉन्स नहीं दे रही थी।
मैं एक जवान बुर की चुदाई कर भी पाऊँगा या नहीं?
मेरी मलाई प्रिया के मुंह के अन्दर और चेहरे पर गिर गई. वो बाथरूम की तरफ भागी, मैं उसके पीछे बाथरूम में गया, मैंने प्रिया के दोनों कूल्हों को कस कर दबा दिया. ‘उईई ईई…’ करके वो पलटी और उसने मेरे गाल पर एक झापड़ जड़ दिया!
मैं अपना गाल मलता रह गया… अब मुझे लगा कि अभी तक ये ओरल सेक्स था, तो मैं एक तमाचा खा गया, कहीं अगर बुर छेदन पर बात आ गई और वो तड़प उठी तो वो मेरा तो कत्ल ही कर देगी।
फिर भी मैं उसकी पीठ सहलाते सहलाते चूमने लगा लेकिन फिर भी उसने कोई रिऐक्ट नहीं किया, मैं चुपचाप उसकी पीठ चूमते-चूमते नीचे की तरफ बढ़ने लगा, मैंने उसके कूल्हे को चूमा, अब जाकर उसके जिस्म में कुछ कसमसाहट सी आई कि तभी मेरे दांत उसके कूल्हे में गड़ गये।
‘उईईईई मां…’ कहकर फिर वो उसी पोजिशन में लेट गई।
मैंने दोनों कूल्हे को मसलना शुरू कर दिया और उसकी गांड के अन्दर थूक दिया और फिर धीरे से अपनी जीभ लगा दी.
बस… वो फिर झटके से उठी और अपने को मुझसे अलग किया और बोली- क्या शक्ति, क्या है ये सब? गन्दी जगह को चाटना ही सेक्स है?
पता नहीं वो क्या-क्या बड़बड़ाये जा रही थी.
मैं उसे चुप कराते हुए बोला- सेक्स का मजा लेना हो तो खुल कर लो। नखरे करने से बस मेरा डंडा तुम्हारे होल के अन्दर जायेगा, टहलेगा और घर्षण करेगा, अपना रस तुम्हारी गुफा में डालकर चला आयेगा, और ये सभी क्रियायें 8-10 मिनट में हो जाएंगी, और तुम एक किनारे करवट लेकर सो जाओगी और मैं एक किनारे… लेकिन शर्म लिहाज छोड़ दो, केवल बिस्तर पर हर जगह नहीं, और खुलकर मजा लो तो खूब मजा भी आयेगा। अब एक बात बताओ, जब मैं तुम्हारी बुर चाट रहा था, तो तुम कसमसाई थी और तुम्हारा रस निकल गया था, और वो रस निकलकर मेरे मुंह से चला गया था तो मैंने कुछ कहा था? बस एक बात मुझे नहीं पसंद है और वो यह कि किसी लड़की या औरत के शरीर के किसी अंग पर बाल हों। अब ये खुद देखो कि तुम्हारी बुर झांटों से ढकी पड़ी है।
वो मेरी तरफ एकटक देखती रही और मैं उसको बताता रहा।
फिर जब मैं चुप हो गया तो वो बोली- शक्ति, मैं इस कम ऐज में बहुत काम कर चुकी हूँ, लेकिन और लोगों को जब जिदंगी के मजे लेते हुए देखती हूँ तो मन मेरा बहुत दुखी हो जाता था। लेकिन उस रात तुमने जो मेरे साथ किया, उस समय जरूर बुरा लगा, लेकिन जब मैं तुम्हारे बारे में सोचने लगी तो मुझे बहुत अचछा लगने लगा। इसलिये मैं तुम्हारी बांहों में आकर खोना चाहती हूँ। अब तुम जो कहोगे वो मैं सब करूंगी।
इतना कहने के साथ ही प्रिया एक बार फिर पेट के बल लेट गई, मैं भी उसी अवस्था में उसके ऊपर लेट गया। थोड़ी देर तक तो उसने मेरा वजन बर्दाश्त किया, फिर जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो बोली- ओफओ… हटो ऊपर से!
मैं उसको चिढ़ाने की नीयत से बोला- हट तो जाऊंगा, लेकिन अपनी गांड का मजा लेने दो।
‘लो जितना मजा लेना है लो, लेकिन मेरे ऊपर से हटो, दम घुट रहा है।’
‘ऐसे नहीं, प्यार से बोलो, मेरी जान, तुम मेरी गांड से मजा लो।’
‘ठीक है, मैं बोलने को तैयार हूँ, लेकिन मेरे ऊपर से हटकर मेरे बगल में आओ।’
मैंने उसकी बात मान ली, वो मेरे तरफ घूमी और अपने सर को अपने हाथ से टिका कर बोली- मेरी जान, तुम मेरी गांड से मजा लो ना।
‘ओह ओ… पहले एक वादा करो जानेमन!’
‘वादा? बोलो?’
मुझे लगा अब प्रिया भी मेरे रंग में रंगने को तैयार है, मैंने उसकी आँखों में देखा और बोला- जैसे मैं तुम्हारी गांड के साथ मजा लूंगा, वैसे ही तुमको भी मेरे साथ मजा लेना होगा।
‘हाँ बाबा… मैं भी तुम्हारी गांड के साथ वैसा ही करूंगी, जैसा तुम मेरी गांड के साथ करोगे। आज से पहले मैं कभी किसी के सामने नंगी नहीं रही और न कोई मर्द मेरे साथ नंगा रहा। अब और क्या चाहिये?’
‘ठीक है बाबा, नाराज मत हो, चलो लेट जाओ।’
फिर वो पट लेट गई, और मैं उसके जिस्म से खेलने लगा, मैंने उसके कूल्हे को पकड़कर फैलाया और लंड को उसकी गांड से सटाने लगा, लेकिन जब मैं ऐसा नहीं कर पाया तो मैंने प्रिया से कूल्हे को फैलाने के लिये बोला, उसने अपनी गांड जितना वो कर सकती थी उतना उसने फैलाया और मैं फिर अपने लंड को उसकी छेद में सहलाने लगा- कैसा लग रहा है?
बोली- सुरसुराहट सी लग रही है।
उसके बाद मैंने उसको चित किया और उसकी नाभि में जीभ चलाने के बाद बोला- अगर तुमने वैक्स किया होता तो तुम और सेक्सी लगती!
‘हाँ यार, आज के पहले मुझे इसकी जरूरत नहीं पड़ी।’
‘चलो कोई बात नहीं…’ मैंने यह कहते हुए उसको बड़े ही प्यार से देखा और नीचे झुक कर उसकी बालों से घिरी हुई चूत को चूमा।
जितनी बार मैं उसकी चूत को चूमता, उतनी ही बार वहाँ का बाल टूटकर मुंह में आ जाता।
फिर मैंने एक तकिया प्रिया की कमर के नीचे लगाते हुए कहा- डार्लिंग अपनी असली मजा पाने के लिये तैयार हो जाओ, थोड़ा सा दर्द होगा, और तुम चाहो तो खुल कर चिल्ला सकती हो, क्योंकि घर में कोई नहीं है।
उसके बाद मैंने उसकी टांगों को फैलाया और लंड से उसकी चूत के सेन्टर को सहलाने लगा.
क्या भभके मार रही थी उसकी चूत!
तभी वो बोल पड़ी- तुम्हारा बहुत गर्म लग रहा है।
मैं फिर उसको छेड़ते हुए बोला- क्या गर्म लग रहा है?
‘वही जो तुम मेरे इसमें (बुर की ओर इशारा करते हुए) सटाये हो।’
‘अरे यार, खुल कर बोल, मेरा लंड तुमको तुम्हारी चूत में गर्म लग रहा है।’
‘हाँ-हाँ तुम्हारा लललंड गर्म लग रहा है।’
‘कहाँ पर?’
‘मेरी बूऊऊऊऊउर में…’
मैं उसको बातों में उलझाये रहा और धीरे-धीरे लंड को अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। मेरा सुपारा अन्दर जाने की कोशिश करता कि प्रिया हिल डुल जाती तो सुपारा बाहर आ जाता।
बुर की गर्माहट के आगे कब मेरा लंड पिघल जाये, इसलिये मुझे जो करना था, इस तरह करना था कि काम जल्दी हो जाये।
मैंने थोड़ा सा प्रिया को दर्द देने की ठानी और मैंने एक हल्का धक्का लगाया, मेरा सुपारा प्रिया की चूत में फंस चुका था और प्रिया के हलक से चीख भी निकल चुकी थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
तुरन्त मैंने अपने हाथों को बिस्तर पर टिकाया और प्रिया के ऊपर इस तरह लेट गया कि वो मेरे वजन से दब ना जाये। मेरी नजर प्रिया के चेहरे पर थी, उसने अपने दांतों के बीच अपने होंठों को दबाया हुआ था, और चेहरे पर उसके दर्द सा दिख रहा था।
मैंने सांत्वना देते हुए कहा- प्रिया थोड़ा दर्द झेल लो, फिर मजा ही मजा!
उसने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों से आंसू टपक रहा था, फिर भी प्रिया ने मुझे अपनी पलक झपका कर सहमति दी।
मैंने भी अब ज्यादा ताकत दिखाने की कोशिश नहीं की और उसके बाद धीरे-धीरे मैं अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर ही थोड़ा सा अन्दर बाहर करके लंड को हिलाता डुलाता रहा। मेरे इस प्रयास से लंड ने उसकी चूत के अन्दर जगह बनानी शुरू कर दी।
यह अलग बात थी कि उसकी सील फटने के कारण और मेरा लगातार एक ही जगह पर घर्षण करते रहने से वो वास्तव में दर्द बर्दाश्त कर रही थी।
और अन्त में दोनों की मेहनत और धैर्य की सफलता मिली। लंड ने प्रिया की चूत के अन्दर जगह बना ली थी। पर प्रिया मुझे मेरा लंड निकालने के लिये लगातार बोले जा रही थी, कह रही थी- शक्ति, प्लीज मेरे अंदर बहुत जलन हो रही है। निकालो!
मैं समझ चुका था कि सील फट गई है इसलिये जलन हो रही है, लेकिन फिर भी मैंने उसकी बात को अनसुना करते हुए अपने काम को करना चालू रखा, बस हल्के-हल्के मैं अपने लंड को अन्दर बाहर कर रहा था, दोनों हाथ मेरे पूरे जिस्म का बोझ उठाये हुए थे और वो भी दर्द करने लगे थे, तो मैंने अपना पूरा बोझ प्रिया के ऊपर दे दिया और उसके होंठों को चूसने लगा.
धीरे-धीरे मेरी मेहनत रंग लाने लगी और अब प्रिया अपनी कमर भी उचकाने लगी, मैंने अपने को रोका और प्रिया की तरफ देखते हुए बोला- तुम अपनी कमर को क्यों उचका रही हो?
तो बड़ी ही साफगोई से बोली- मेरी बुर के अन्दर जहाँ-जहाँ खुजली हो रही है, तुम्हारे लंड से खुजलाने का मन कर रहा है। कितनी मीठी… यार ये बहुत ही मीठी-मीठी खुजली है, जितनी मिटाने की कोशिश कर रही हूँ, उतनी ही बढ़ती जा रही है।
‘अपना दूध पिलाओगी?’
‘अब मैं तुमको कुछ मना नहीं कर रही हूँ अब मैं तुम्हारी हूँ जो पीना हो, पी लो।’
‘मजा आ रहा है?’
‘बहुत मजा आ रहा है!’ प्रिया बोली- मैं चाहती हूँ कि तुम अपना लंड मेरी बुर के अन्दर डाले ही रहो।

उसके इतना कहने के साथ ही मैं रूक गया और उसके छोटे-छोटे संतरेनुमा चूची को गोलगप्पा समझ कर मैं अपने मुंह के अन्दर भर लेता तो कभी उसके दाने पर अपनी जीभ चलाता या फिर उन दानों को बोतल में भरे हुए माजा के अन्तिम बूंद समझ कर चूसता।
मुझे बहुत मजा आ रहा था कि प्रिया एक बार फिर बोली- शक्ति, खुजली और बढ़ रही है।
मैं समझ चुका था, अब उसे मेरे लंड के धक्के चाहिये थे, इसलिये मैं एक बार फिर पहली वाली पोजिशन में आया और अपने दोनों हाथों को एक बार फिर बिस्तर पर टिकाया और इस बार थोड़ा तेज धक्के लगाने लगा,
प्रिया भी अपनी कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी, करीब 10 मिनट तक दोनों एक दूसरे से दंगल लड़ रहे थे कि प्रिया ढीली और सुस्त हो गई और अब उसने अपनी कमर उचकाना बंद कर दिया था.
पहले से उसकी चूत से निकलते हुए खून से मेरा लंड सना हुआ था इसलिये मैं समझ नहीं पाया, लेकिन उसके सुस्त और ढीले पड़ जाने से मैं समझ चुका था कि उसकी बुर ने रस छोड़ दिया था।
इधर मैं भी 20-25 धक्के और लगा पाया था कि मुझे लगा कि मैं भी खलास होने वाला हूँ, मैंने तुरन्त ही अपने लंड को बाहर निकाला और उसकी बुर के ऊपर अपना पानी गिरा दिया और औंधे मुंह उसके ऊपर गिर गया.
जब थोड़ा जान आई तो उसके बगल में लेट गया।
मेरे हटते ही प्रिया का हाथ अपनी बुर के ऊपर चलने लगा। उसकी उंगलियों में उसका खून और मेरा वीर्य लगा हुआ था.
और जब उसकी नजर अपनी उंगलियों पर पड़ी तो वो चीख कर बैठ गई और मुझे दिखाते हुये बोली- ये खून?
‘अरे ये खून!?!’ मैंने भी मजा लेने के लिये चौंकते हुए पूछा।
फिर उसकी उंगली अपनी चूत के अन्दर गई, जहाँ गीला होने के कारण खून अभी सूखा नहीं था, उसकी उंगली में फिर खून आ गया, उसकी आँखें फट सी गई और उसी फटी आंखों से मेरी तरफ देखा और फिर अचकचा कर बेहोश हो गई।
मैं अपनी जगह से उठा और सेवलोन, कॉटन और एक दवा की ट्यूब जो अकसर करके कटी-फटी जगह पर लगाया जाता है, लेकर आया और कॉटन और सेवलोन से उसके चूत के अन्दर और आस पास की जगह को अच्छे से साफ किया और फिर वो क्रीम लगा दी, फिर गोदी में उठाकर उसको सोफे में लेटाया, चादर बदल कर एक बार फिर उसको बिस्तर पर लेटा कर चादर उढ़ा दी और फिर प्रिया को बेहोशी से बाहर लाने की कोशिश करने लगा.


RE: Antarvasna दर्द तो होना ही था - sexstories - 06-30-2017

कोई पांच मिनट बाद ही वो होश में आ गई, मुझे देखते ही वो उठ कर बैठ गई।
मैंने प्यार से उसके सर को सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ जो तुम बेहोश हो गई?
उसने मेरे कंधे पर अपना सर रखा लेकिन मेरे किसी बात का जवाब नहीं दिया, बस एक ही शब्द बोली- यह खून कैसा?
‘तुम्हारा कुंवारापन खत्म हो गया है।’
फिर हम दोनों काफी देर तक चुप बैठे रहे, बुर की चुदाई में काफी समय बीत चुका था, लगभग आधी रात हो चुकी थी, इसलिये दोनों एक दूसरे से चिपक कर सो गये।
रात की खून भरी बुर की चुदाई के बाद दूसरे दिन मेरी नींद उसकी मधुर आवाज से खुली, वो मेरे लिये चाय बना कर लाई थी। इस समय उसने कपड़े पहन रखे थे।
मैं उसकी आवाज सुनकर उठा और बेड टी का मजा लिया।
मैं चाय पीकर यह सोचकर लेटने लगा कि तीन दिन तक अब मौज ही मौज होगी, क्योंकि प्रिया ऑफिस नहीं जायेगी और मुझे भी रूकने के लिये बोलेगी.
पर यहाँ तो उल्टा ही हो गया, जैसे मैं वापस लेटने लगा, उसने मुझे तुरन्त ही झिड़क दिया और तैयार होकर ऑफिस जाने के लिये बोली.
और वो भी खुद लंगड़ाते हुए रसोई की तरफ चल दी।
मैं उठा और उसके पीछे रसोई आ गया और दर्द के बारे में पूछा तो बोली- मजा लेने के लिये कुछ तो चुकाना ही पड़ेगा।
‘तुम ऑफिस जाओगी?’
‘हाँ बिल्कुल!’ वो बोली.
‘तो तुम भी तैयार हो जाओ, हम दोनों ही साथ चलते हैं।’
‘नहीं, तुम अकेले जाओगे और मैं अकेली!’
मैं उसकी बात समझ गया था। मैं तैयार हो गया, प्रिया ने मुझे नाशता करा दिया और टिफिन भी दे दिया।
मैं टिफिन लेकर निकल पड़ा.
करीब 1 घंटे के बाद प्रिया भी ऑफिस आ गई, हम दोनों की फॉर्मल बात चीत हुई और फिर दिन भर हम लोग अपना काम करते रहे। आज मुझे प्रिया और भी सेक्सी लग रही थी। मेरा मन काम में नहीं लग रहा था। पर मुझे किसी तरह समय बिताना था.
ऑफिस छूटने के एक घंटे पहले प्रिया अपनी किसी सहेली या फिर बहन से बात कर रही थी और उसके बाद बिना किसी को बताये ऑफिस से निकल गई।
ऑफिस छूटने के बाद जब मैं घर पहुंचा, लेकिन प्रिया घर नहीं आई थी, मेरे पास उसका नम्बर भी नहीं था।
मैं क्या करूँ?
मैं इसी उधेड़बुन में था कि प्रिया ने मुझसे बोला था कि तीन दिन तक वो घर में अकेली है और वो इसीलिये मेरे साथ मेरे घर आई थी, लेकिन क्या मेरे से कोई गलती हो गई कि वो बिना मुझे बताये कहाँ चली गई?
मेरे दिमाग में उसके घर जाने की बात आने लगी कि तभी डोर बेल बजी, दरवाजा खोला तो प्रिया बाहर खड़ी थी। उसे देखते ही मेरे मुंह से निकला- कहाँ थी तुम?
‘क्यों बहुत बैचेन हो रहे हो मेरे बिना?’ वो बोली।
‘तुम कुछ बता कर नहीं गई थी न इसलिये!’
अन्दर आकर कुर्सी पर बैठते हुए बोली- बस मैं अपनी बहन के यहाँ गई थी।
‘कोई खास कारण से गई थी वहाँ पर?’ मैंने पूछा तो उसने हाँ में सर हिलाया.
मैं उससे बात करते हुए चाय बना रहा था, मैंने उसे चाय सर्व करते हुए उसके दर्द के बारे में पूछा तो बोली- हल्की जलन सी है।
फिर हम लोग चाय पीते हुए बात करने लगे.
तभी मेरा ध्यान उसके चेहरे पर गया, काफी चिकना था और जो उसकी हल्की-हल्की मूँछें थी, वो भी बिल्कुल साफ थी और सबसे बड़ी उसके जिस्म से बहुत ही सेक्सी सुंगध आ रही थी तो मैं उसके और करीब गया और एक कुत्ते जैसे सूंघने लगा.
वो बोली- क्या कर रहे हो?
‘कुछ नहीं, तुम्हारे जिस्म से बहुत ही सेक्सी खुशबू आ रही है, इसलिये कुत्ते जैसा सूंघ रहा हूँ।’
इस समय प्रिया सफेद रंग का बॉटम और सफेद रंग की शर्ट पहनी थी और सफेद रंग की हील भी पहने हुए थी, मैंने उसके हाथ को पकड़ा और खड़े होने का इशारा किया, वो समझ गई और कुर्सी से उठ कर खड़ी हो गई, इस समय उसकी लम्बाई और मेरी लम्बाई के बराबर थी.
मैं घूमते हुए उसके पीछे गया और उसके कंधे पर अपनी ठोढ़ी टिकाकर उसके गाल से अपने गाल सटाकर बोला- प्रिया, तुम बहुत सुन्दर लग रही हो और तुम्हारे अन्दर से आती हुई महक मुझे और मदहोश करते हुए तुम्हारा दीवाना बना रही है।
प्रिया भी मेरे गालों को सहला रही थी।
मैंने उसकी कमीज के बटन खोलना शुरू किया, उसने झट से मेरा हाथ पकड़ा और बोली- ये क्या अभी से? रात में करना।
‘प्रिया मेरी गलती नहीं है, तेरे इस सेक्सी रूप ने मुझे बेकाबू कर दिया है, इसलिये… मत रोको मुझे!’
और फिर मैंने कमीज के बटन को खोलकर उसके जिस्म से अलग कर दिया और उसकी चुची ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.
उसने अपने दोनों हाथ की माला बनाकर मेरी गर्दन पर डाल दी, मेरे हाथ जब उसकी चुची को सहलाते हुए उसकी बगल में गये तो वहां बिल्कुल भी बाल नहीं थे, मुझे उसकी बगल को सहलाने में बड़ा मजा आ रहा था।
कहाँ कल रात में झंगाड़ था बालों को, आज वो जंगल पूरी तरह से साफ था। मैंने उसकी बगल को सहलाते हुए पूछा- प्रिया, कहाँ से बनवाकर आ रही हो?
‘अपनी दीदी के यहाँ!’
मेरी मदहोशी तुरन्त ही खत्म हो गई, ‘क्या?’ मैं चौंक कर पूछा।
‘हाँ!’
‘तो उनको पता लग गया है कि तुम यहाँ पर हो?’
‘नहीं, बस कल रात जब तुम मुझसे प्यार कर रहे थे तो मुझे बड़ा अजीब लग रहा था, कि मेरे पूरे जिस्म में बाल ही बाल थे फिर भी तुम मुझे प्यार कर रहे थे, इसलिये मैंने सोचा कि आज मैं तुम्हारे लिये अच्छे से तैयार होकर आऊँगी।’
‘एक बात और बताऊँ?’ उसने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए कहा- जब दीदी मेरी वैक्सिंग कर रही थी, तो मैं सिर्फ तुम्हारे बारे में सोच रही थी और पता नहीं कब मेरा पानी छुट गया, दीदी ने तुरन्त पूछा कि मेरी जिंदगी में कौन है?
‘तो तुमने क्या बताया?’
‘कुछ नहीं!’
अब मुझे प्रिया को देखने की बड़ी इच्छा हो रही थी, मैंने प्रिया की ब्रा को उससे अलग किया, फिर उसकी बॉटम और पेंटी को उससे अलग किया, मेरी नजर जब उसकी चिकनी चूत पर पड़ी तो मुझे लगा कि वास्तविक खजाना तो अब दिखाई पड़ रहा है।
क्या उभारदार गुलाबी रंग की चूत थी उसकी!
मैं अपने घुटने पर आ गया और मेरी उंगलियाँ उसकी चिकनी और सफाचट चूत को केवल सहला रही थी। अब बाल का नामोनिशान नहीं था… क्या मुलायम चूत लग रही थी!
मैंने प्रिया से कुर्सी पर बैठने के लिये कहा, मैं उसकी चूत को अच्छे से देखना चाहता था, कल रात तो कुछ समझ में भी नहीं आया था।
मैंने उसकी चूत की फांकों को फैलाया, उसकी लाल-लाल गहराई में उसकी चॉकलेटी कलर की पुतिया छुपी हुई थी। मैंने एक बार प्रशंसा भरी नजर से प्रिया को देखा और फिर बिना उसके उत्तर के इंतजार के मेरे होंठ उस महहोश कर देने वाली चूत से टच हो गये।
शुरू में तो मैं चूम रहा था, लेकिन कब मेरी जीभ उसकी चूत पर चलने लगी, उसकी पुतिया को होंठों के बीच फंसा कर लॉलीपॉप की तरह चूस रहा था।
मुझे तो पता ही नहीं चला कि कब मेरे दांत उसकी चूत के उभारों को काटने लगे, वासना इतनी प्रबल हो रही थी कि मैं उसकी चूत को खा जाना चाहता था.
वो मेरे बालो को सहला रही थी, लेकिन वो जल्दी ही खलास हो गई और उसका पानी मेरे मुंह में गिर रहा था।
वो शायद संकोचवश मेरे मुंह को अपनी चूत से अलग करना चाह रही थी, लेकिन वो असफल हो रही थी और फिर उसने प्रयास करना बंद कर दिया।
उसकी चूत के रस को चाटते हुए, नाभि से होते हुए उसके दूध को पीते हुए मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया.
मैंने होंठ चूमने के बाद पूछा- प्रिया मैंने तुम्हारी मलाई चखी, मुझे बहुत पसंद आई, क्या तुम मेरी मलाई चखोगी?
वो खड़ी हुई और मेरे एक-एक कपड़े उतार कर मुझे अपनी जगह बैठाकर खुद नीचे बैठ गई और मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया। बहुत प्यार से वो मेरे लंड को चूस रही थी, उम्म्ह… अहह… हय… याह… कभी वो लंड को पूरा मुंह में भर लेती तो कभी सुपारे के खोल को खीचकर अग्रभाग पर अपनी जीभ चलाती तो कभी टट्टों को भी बारी-बारी से मुंह में भर लेती।
इधर मैं भी उसकी दोनों चुची से खेल रहा था।
जब उसने काफी देर मेरा लंड चूस लिया, तो मैंने उसे अपनी गोदी में उठाया और बेड पर लेटा दिया और उसकी दोनों जांघों के बीच बैठकर उसकी चूत पर लंड सेट किया, उसकी चूत अभी भी धधक रही थी, मैंने एक जोर का झटका दिया.
‘आह…’ बस उसके मुंह से निकला।
मैंने तुरन्त ही अपने आपको काबू में किया और रूक गया और फिर धीरे-धीरे करके लंड को उसकी चूत के अन्दर पेबस्त किया।
मैं उसके ऊपर लेट गया और उसकी चुची को अपने मुंह में भर लिया।
‘शक्ति, तुम बहुत अच्छे हो। मैं आज दुनिया के सब सुख पा गई!’
मुझे लगा कि ये उसके इमोशन हैं. मैंने अपना काम चालू रखा। अब मैं धीरे-धीरे अपने लंड को आगे पीछे करने लगा और धक्के की स्पीड भी धीरे-धीरे बढ़ाने लगा। एक जैसी पोजिशन में धक्के मारते मारते मैं थकने लगा तो मैं चित लेट गया और प्रिया को अपने ऊपर कर लिया और फिर उसकी चूत में लंड डालकर नीचे से अपनी कमर उठा-उठाकर उसको चोदने लगा।
प्रिया भी अब समझ चुकी थी, वो भी मुझे चोदने की कोशिश कर रही थी, हालांकि उसके इस प्रयास से उसकी चूत से लंड बाहर आ जा रहा था।
लेकिन एक बार जब वो समझ गई तो एक एक्सपर्ट की तरह वो भी मुझसे खेलने लगी।

फिर मेरे कहने से वो सीधी बैठ गई, उसके इस तरह के थोड़े प्रयास में ही मेरा लंड जवाब देने लगा था, मैंने प्रिया को अपने से नीचे उतारा और उससे बोला- अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी चूत के बाहर अपना पानी निकाल सकता हूँ और अगर तुम चाहो तो मेरी मलाई को अपने मुंह में ले सकती हो!
मेरी बात सुनने के बाद उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और जब तक कि मेरी मलाई की एक एक बूंद को चाट नहीं ली तब तक उसने मेरे लंड को अपने मुंह से अलग नहीं किया।
थोड़ी देर हम दोनों चिपक कर लेटे रहे।
अब दूसरी बार प्रिया की बुर की चुदाई करके मुझे और शायद उसे भी काफी सुकून मिला.
साढ़े सात का टाईम हो रहा था, दोनों उठे, बारी-बारी से नहाने गये और फिर तैयार होने लगे, खाना खाने के हमारे पास दो विकल्प थे, एक घर में बना कर खाने का और दूसरे होटल में जाकर खाने का… मैंने प्रिया से पूछा तो होटल का तो उसने मना कर दिया, फिर हम दोनों ने मिलकर खाना बनाया और खाना खाकर छत पर चले गये।
गर्मी बहुत पड़ रही थी, हवा नहीं चल रही थी, मैंने कई बार प्रिया से वापस नीचे चलने के लिये बोला, लेकिन ‘थोड़ी देर रूको, थोड़ी देर रूको’ कह कर वो बात टाल देती थी।
मुझे गर्मी बहुत लग रही थी, तो मैंने अपनी लोअर और गंजी को उतार दिया, और एक टेबल फेन ऑन करके उसके सामने बैठ गया।
प्रिया का ध्यान जब मेरी ओर गया और उसने मुझे केवल अंडरवियर में देखा तो वो भी अपनी कुर्ती और बॉटम को उतारकर पेंटी और ब्रा में बैठ गई।
मेरे मन में मजा लेने की बात आई, मैंने प्रिया से कहा- देखो, मैं केवल जांघिये में हूँ और जबकि तुमने ऊपर और नीचे दोनों पहन रखे हैं।
वो उठी और मेरी तरफ पीठ करके बोली- लो ब्रा की हुक खोल दो, मैं भी केवल पेंटी में आ जाती हूँ।
मैंने उसकी ब्रा उतार दी और वो मेरे सामने पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोली- लो, अब ठीक है?
मैं अपने पैर को उसकी जांघों के बीच में रखकर अंगूठे से उसकी बुर को कुरदते हुए बोला- हाँ अब ठीक है!
उसकी छोटी-छोटी तनी हुई चुची मुझे आमंत्रण दे रही थी कि ‘आओ और मुझे पियो।’
तभी प्रिया भी अपने अंगूठे से मेरे लंड को सहलाने का प्रयास कर रही थी। धीरे-धीरे उसके द्वारा मेरे लंड को सहलाये जाने से लंड महाराज अकड़ने लगे। इधर मैं भी उसकी बुर पर लगातार अपने अंगूठे से आक्रमण कर रहा था, जिसके ऐवज में प्रिया अपनी आँखें बन्द किये अपने होंठों को चबाने में विवश हो गई।
मेरा लंड तन चुका था, मैंने अपनी चड्डी उतारी और लंड को आजाद कर दिया, उसके बाद मैं उठकर प्रिया के पास गया, मेरे अंगूठे का टच हटने से उसने अपनी आँखें अचकचा कर खोल दी।
मेरी उंगलियां अब प्रिया की पेंटी की इलास्टिक पर फंस चुकी थी, प्रिया ने भी अपनी कमर उचका कर पेंटी उतरवाने में मेरी मदद की।
फिर हम दोनों छत पर पड़े गद्दे पर लेटे, मैं 69 की अवस्था में आना चाहता था, मैंने प्रिया के मुंह के पास अपने लंड को टिका दिया और लेटकर उसकी बुर को चूमने लगा। प्रिया मेरे लंड को चूसने लगी.
कुछ देर के बाद मैं नीचे लेट गया और प्रिया को उसी तरह से मेरे ऊपर आने को कहा, अब प्रिया की बुर मेरी तरफ थी और मुंह मेरे लंड पर था, प्रिया ने पानी छोड़ दिया था, मेरी जीभ लपलापाती हुई अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच गई, इधर प्रिया भी मेरे लंड से खेल रही थी, पूरा का पूरा लंड वो मुंह के अन्दर भर लेती, और फिर अन्दर अपनी जीभ फिराती, कभी मेरी जांघ को चाटती और अंडे को मुंह में भरती और जब लंड को वापस चूसती तो अंडे को खूब अच्छे से मलती।

काफी देर तक यह चलता रहा, फिर मैंने प्रिया को जमीन पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़कर लंड को बुर में डाल दिया और फिर चोदा चोदी शुरू हो गई, प्रिया उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाज के साथ हिलती रहती और बीच-बीच में अपनी कमर को उठाती जाती और लंड को अपनी बुर के और भी अन्दर लेने का प्रयास करती।
अब कभी मैं उसके ऊपर चढ़कर चुदाई करता तो कभी वो मेरे ऊपर चढ़कर मेरा बाजा बजाती, इसी तरह अगले दस मिनट तक गुत्थमगुत्थी होती रही और फिर अन्त में एक बार फिर 69 की अवस्था में आकर दोनों ने एक दूसरे के रस का आनन्द लिया।
फिर वो मेरे बगल में आकर लेट गई, शायद उसका अभी मन नहीं भरा था कि वो मेरे मुंह में अपनी चूची को ठूंसती हुई बोली- शक्ति मेरा दूध पियो!
वो बारी-बारी से अपने स्तन को मेरे मुंह में भरती और मैं उसको चूसता। उसके बाद वो मेरे बगल में आकर लेट गई, हम दोनों के चेहरे एक दूसरे के सामने थे, वो बहुत खुश नजर आ रही थी, मैंने उसके गालो को सहलाना जारी रखा और वो मेरे मुरझाये हुए लंड को अपने हाथों में लेकर खेल रही थी।
तभी मैंने उसकी एक टांग को अपने कमर के ऊपर चढ़ाया और अपनी एक उंगली को उसकी गांड के अन्दर डालने का प्रयास करने लगा तो वह मेरा हाथ पकड़कर बाहर निकालते हुए बोली- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं, तुम्हारी गांड के छेद को ढीला कर रहा हूँ, ताकि लंड को उसके अन्दर डालूं।
तब वो कुछ नहीं बोली और मैं धीरे-धीरे उसकी गांड में उंगली डालने लगा और वो मुझसे कस कर चिपकी हुई थी। मैं पूरी स्वंतत्रता के साथ उसकी गांड में उंगली अन्दर डाले जा रहा था, बीच-बीच में वो अपने दर्द का अहसास मुझे कराती जाती थी लेकिन उसने मुझे अपनी गांड में उंगली करने से नहीं रोका, हालांकि वो भी मेरे गांड में उंगली करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसका हाथ मेरे कूल्हे तक ही आ पा रहा था।
इस तरह से काफी देर तक लगातार प्रयास करते रहने से मेरी दो उंगलियाँ उसकी गांड के अन्दर आसानी से आने जाने लगी। इधर मेरा लंड भी तैयार हो गया था, मैंने प्रिया को पट लेटने को कहा और बोला- हो सकता है कि जितना दर्द तुम्हारी बुर को हुआ था, उससे ज्यादा गांड में हो, लेकिन एक बार दर्द सहने के बाद जैसे तुम बुर का मजा पा रही हो, गांड का भी मजा पाओगी.
फिर मैंने प्रिया से उसकी गांड फैलाने को बोला, उसने अपने कूल्हे को पकड़कर गांड को फैला दिया, मैंने अच्छे से थूक उड़ेल कर उसकी गांड को गीला किया और लंड को उसकी गांड में डालने का प्रयास किया। करीब सात आठ बार टच करके निकालना और फिर अन्दर डालने की कोशिश में सुपारा भर अन्दर जा पाया था कि प्रिया बोली- काफी दर्द हो रहा है.
मेरे भी सुपारे में जलन हो रही थी तो भी मैं प्रिया को ढांढस बंधाते हुए थोड़ा बर्दाश्त करने की सलाह दे रहा था। मैं सुपारे को बाहर नहीं निकालना चाह रहा था तो थोड़ा और जोर लगाते मेरा लंड करीब एक सेंटीमीटर और अन्दर गया.
प्रिया बोली- शक्ति निकाल लो!
‘बस हो गया!’ मैं भी उसको ढांढस बंधाते हुए बोला.
अब जितना लंड अन्दर गया था उसी को मैं थोड़ा-थोड़ अन्दर बाहर करने लगा, इसी बीच उसने अपना हाथ कूल्हे से हटा लिया.
चूंकि वो विवश थी, पर थोड़ा और प्रयास करने पर लंड आधा जा चुका था और लंड ने बड़े प्यार से गांड के अन्दर अपनी जगह बना ली थी। इस तरह करते-करते मेरा पूरा लंड प्रिया की गांड के अन्दर धंस चुका था।
मैं प्रिया की पीठ पर लेट गया और उससे बोला- कैसा लग रहा है?
वो बोली- अगर निकाल लो तो मेरा दर्द खत्म हो जायेगा।
‘जान चिन्ता मत करो, जिस तरह तुम्हें बुर की चुदाई का मजा मिला है, उसी तरह तुम्हें गांड चुदाई का मजा मिलेगा।
और वास्तव में जब लंड ने पूरे गांड में जगह बना ली और आसानी से अन्दर बाहर होने लगा, तो प्रिया को भी मजा आने लगा। अब वो दर्द से चिल्लाने के बजाये आह-ओह, आह-ओह करने लगी और तब तक करती रही जब तक कि मैं उसकी गांड में झड़ नहीं गया। 
उसके बाद प्रिया मुझसे चिपक गई, उसकी गांड मेरे लंड से टच कर रही थी, उसकी पीठ मेरे सीने से और मेरे दोनों हथेलियां उसकी चूचियों पर थी.
पता नहीं कब नींद आ गई, लेकिन आधी रात को प्रिया की सिसकी और रोने की आवाज से मेरी नींद टूट गई, देखा कि प्रिया अपने घुटने को अपनी छाती से चिपकाये हुए कराह रही थी और बार बार अपनी गांड को सहला रही थी।


RE: Antarvasna दर्द तो होना ही था - sexstories - 06-30-2017

मैंने प्रिया को अपनी तरफ करते हुए कहा- क्या हुआ?
‘मेरे पीछे बहुत जलन हो रही है।’
मैं समझ चुका था कि मामला क्या है, मैं नीचे गया, सोफ्रामाईसिन की ट्यूब और हल्का कुनकुना पानी और सेवीलॉन तथा कुछ कॉटन लाकर प्रिया की गांड को सेविलॉन और कुनकुने पानी से साफ किया और फिर सोफ्रामाईसिन लगाकर उसको अपने सीने से चिपका लिया।
थोड़ी देर तक तो वो सुबकती रही, फिर वो नींद के आगोश में समा गई और मैं भी सो गया।
पहले बुर की चुदाई… फिर गांड की चुदाई… दर्द तो होना ही था
सुबह जब मेरी नींद खुली तो प्रिया रसोई में थी और लंगड़ाकर चल रही थी, मैंने शरारत में पूछा- क्या हुआ?
तो उसने जोर से चिकुटी काटते हुए कहा- रात में (अपनी गांड की तरफ इशारा करते हुए) जो तुमने अपने इसको (मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए) डाला है, उसी का नतीजा है।
मैंने उसे पीछे से चिपकाया और गर्दन को चूमते हुए कहा- डार्लिंग, बस पहली बार ही दर्द होता है, उसके बाद बहुत मजा आता है।
अपनी कोहनी को मेरे पेट पर मारते हुए बोली- मैं ही पागल थी कि तुम्हारी बातों में आ गई और अब दर्द बर्दाश्त कर रही हूँ।
मैंने नीचे बैठते हुए बोला- लाओ देखूं तो अब क्या हालत है।
हालांकि वो इस समय गाउन पहने हुए थी लेकिन अन्दर कुछ भी नहीं पहने थी, मैंने उसके गाउन उठाते हुए और उसके कूल्हे को फैलाते हुए देखा- अरे अब तो सही हो रहा है। बहुत ज्यादा समय तक तुम नहीं लंगड़ाओगी।
तब तक चाय तैयार हो गई थी और हम दोनों ने चाय साथ पी, चाय पीने के बाद मैं उठा और बाथरूम की तरफ चलने लगा तो प्रिया बोली- कहाँ?
मैंने उसे घड़ी दिखाते हुए कहा- देखो, जल्दी नहा धोकर तैयार होना है, नहीं तो ऑफिस की देर हो जायेगी।
‘मतलब मैं यहाँ चल नहीं पा रही हूँ और तुम्हें ऑफिस जाने की पड़ी है?’
मैंने उसके गालों को अपने हाथों के बीच लेते हुए कहा- नहीं जान, मैं तो नहीं जाना चाहता लेकिन अभी तुम ही कहती, इसलिये मैं तैयार होने जा रहा था, अब तुम मना करती हो तो नहीं जाता।
‘हाँ मत जाओ, आज तीसरा दिन है, मेरे घर के सभी लोग शाम तक आ जायेंगे और मैं चाहती हूँ कि भले ही कुछ घंटे और ही सही मैं तुम्हारी बांहों में बिताना चाहती हूँ।’
मैं खड़ा हो गया और अपनी बाहों को फैलाते हुए कहा- आओ, मैं भी बड़ी ही बेसब्री से अपनी बांहों में तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।
प्रिया मेरे से चिपक गई और थोड़ा इमोशनल होते हुए बोली- भले ही मुझे थोड़ा दर्द हुआ हो, लेकिन तुमने मुझे खुशियां बहुत दी हैं। तुमने तो मेरी भी बात मानी है।
मैं तो नंगा था ही, मैंने कहा- मेरे साथ नहाओगी?
उसने सर हिलाकर सहमति दी।
‘ठीक है मैं पॉटी होकर आ रहा हूँ जब मैं आवाज दूं तो तुम आ जाना।’
‘ठीक है।’
मैं चलने लगा तो उसके जिस्म पर पड़े हुए गाउन की तरफ मेरी नजर गई तो मैंने बोला- आज कपड़े कोई नहीं पहनेगा!
उसने मुस्कुराते हुए अपना गाउन उतार दिया।
मेरे मुंह से निकल पड़ा- हाय रे, मार डाला तुमने!
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा- मार-मार कर मेरा कचूमर तुमने निकाल दिया और इल्जाम भी हमी पर लगा रहे हो?
फ्रेश होने के बाद मैंने प्रिया को आवाज दी, फिर हम दोनों मिलकर नहाने लगे, मैंने उसे नहलाया और उसने मुझे नहलाया।
हालांकि उसकी लम्बाई काफी छोटी थी, इसलिये मेरा लंड उसके पेट में लड़ रहा था और वो आसानी से मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर मसल रही थी।
मैंने प्रिया को गोद में उठाया उसने अपने पैरों की कैंची मेरी कमर पर लगा दी और अपनी बांहों का हार मुझे पहना दिया.
शॉवर का पानी हम दोनों के ऊपर गिर रहा था… मेरे होंठ प्रिया के होंठों से मिल रहे थे, दोनों जोर-जोर से एक दूसरे के होंठ को चूम रहे थे, मैं अपनी जीभ उसके मुंह में डाल रहा था और वो बड़े ही प्यार से मेरी जीभ को लॉली पॉप समझ कर चूसती और फिर वो अपनी जीभ मेरे मुंह के अन्दर भर देती।
मैंने इसी बीच पूछ लिया- अब तुम्हें उल्टी तो नहीं होती?
वो बोली- मतलब?
मैंने कहा- मेरा रस पीने के बाद जो तुम्हें उल्टी महसूस होती है वो अब होती है या नहीं?
बड़ी ही मासूमियत से वो बोली- अब चाहे रस किसी का भी हो, अब मुझे मजा आता है।
हम लोग नहा चुके थे, प्रिया और मैं रसोई में नाश्ता कर रहे थे। अभी भी हम दोनों नंगे थे और एक-दूसरे में समा जाना चाहते थे।
प्रिया कमरे में आकर जमीन पर पाल्थी मार कर बैठ गई और मैंने उसकी गोदी पर सर रख दिया, प्रिया मेरे बाल सहलाने लगी, लेकिन मेरे नथूने में उसकी बुर की महक घुसती जा रही थी, मेरे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, मैं पट लेट गया और उसकी बुर पर अपनी लपलपाती हुई जीभ को चलाने लगा।
थोड़ी देर तो प्रिया इसी तरह से अपनी बुर चटवाती रही, लेकिन कुछ देर बाद ही उसने अपने पैरों को फैला दिया। मैं बुर चाट रहा था और वो मेरी पीठ और बालों को सहला रही थी।
थोड़ी देर बाद हम दोनों एक बार 69 की अवस्था में आ गये।
69 वाली अवस्था निपटाने के बाद मैंने प्रिया से सेन्डिल पहनने को कहा, उसने सेन्डिल पहनी और मेरे बताने के अनुसार उसने अपने दोनों हाथ को बेड के पायदान पर टिका दिया, लेकिन पूछ ही बैठी- अब क्या करने वाले हो?
‘अब तुम्हारी बुर की चुदाई पीछे से करूंगा।’
इतना कहने के बाद मैंने प्रिया की टांगों को हल्का सा फैलाया और अपने लंड पर थूक लपेटने के बाद उसकी बुर पर भी थूक लपेट दिया और एक हल्का सा धक्का दिया, लंड मेरा उसकी बुर को आधा कवर कर चुका था।
चूंकि लगातार चुदाई चलने से उसकी बुर खुल चुकी थी, इसलिये ज्यादा कोई परेशानी नहीं हुई।
मैंने एक बार लंड को थोड़ा बाहर निकाला और दूसरा झटका दिया, उम्म्ह… अहह… हय… याह… इस बार मेरा पूरा लंड अन्दर जा चुका था।
प्रिया के दोनों सन्तरे मेरे हाथ में थे। उसकी बुर को चोदने के साथ-साथ उसकी चूची को दबाने का मजा भी आ रहा था। प्रिया भी मजे से आह-ओह करके चुदाई का आनन्द ले रही थी।
अब उसकी बुर ढीली पड़ रही थी और थोड़ा बहुत गीलापन लेने लगी थी, क्योंकि अब लंड और बुर के मिलन से फच-फच की आवाज आ रही थी। थोड़ी देर इस अवस्था में करने के बाद, मैंने प्रिया को पलंग पर चित किया और उसकी टांगों को हवा में उठाकर अपनी तरफ खींचा, प्रिया का जिस्म आधा हवा में लटक गया और उसकी बुर मेरे लंड से टकराने लगी, अब लंड उसकी बुर में आसानी से जा रहा था।
एक बार मेरा लंड फिर युद्ध भूमि में चला गया था।
उसका जिस्म आधा हवा में था, उसने अपने दोनों हाथ गद्दे पर टिका दिये और ओह-ओह करके मजा लेने लगी.
मैंने प्रिया से कहा- चिल्लाना हो तो खुलकर चिल्ला सकती हो।
करीब 20-25 धक्के इस तरह मारने के बाद मैंने प्रिया को पूरी तरह से हवा में कर दिया, मतलब मैंने प्रिया के आधे लटके हुए जिस्म को बहुत ही प्यार से पलंग से हटाकर हवा में लटका दिया, और उसके बाद अपने जिस्म से चिपका लिया।
उसके बाद प्रिया ने मुझे पलंग पर लेटने को कहा और खुद मेरे लंड की सवारी करने लगी। वो उछल रही थी, उसकी चूची भी उछल रही थी। प्रिया अपनी आँखें बन्द किये हुए उछालें भर रही थी।
मैंने प्रिया से कहा- प्रिया, एक बार फिर पहले वाली अवस्था में आ जाओ!
‘क्यों?’ उसने हाथ मटका कर प्रश्न पूछा.
‘तुम्हारी गांड मारनी है।’
बिना कुछ कहे वो मेरे ऊपर से उतर गई और उसी तरह खड़ी हो गई। मैंने अपनी हथेली प्रिया की तरफ करके उस पर थूकने उड़ेलने के लिये कहा, उसने मेरे कहे अनुसार किया, फिर मैंने भी उस थूक में अपने थूक को मिलाया और प्रिया की गांड में लगा दिया और फिर थोड़ा बहुत मेरी जीभ ने उसकी गांड को गीला कर दिया, उसके बाद उंगली अन्दर डालकर उसे खोलने का प्रयास कर रहा था, जब समझ में आ गया कि अब लंड अन्दर जा सकता है तो मैंने अपना सुपारा प्रिया की गांड में सेट किया और हल्का सा धक्का दिया.
‘आह…’ बस इतना ही बोल पाई थी.
दो-तीन बार ऐसा दोहराने के बाद लंड करीब आधा से ज्यादा अन्दर चला गया था, मैं अब धीरे-धीरे अन्दर बाहर कर रहा था। इस तरह करते-करते लंड अपनी जगह बना चुका था, प्रिया को भी मजा आने लगा था, वो एक हाथ से अपनी बुर को सहलाती जाती और बीच-बीच में थूक भी अपनी बुर में लगाती जाती, शायद उसकी बुर में खुजली बढ़ रही थी.
मैंने भी उसकी बुर और गांड की खुजली एक साथ मिटाने की तैयारी की और उसकी बुर और गांड को एक साथ चोदने लगा।
अब मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी और उधर प्रिया भी अपने एक्शन से बता रही थी कि वो भी चरम पर पहुंच चुकी है।
इधर मुझे भी एहसास हो रहा था कि मेरा माल भी बाहर आने को तैयार है, मैंने प्रिया की बुर से लंड निकाला और लंड को उसके मुंह की तरफ ले गया, प्रिया किसी मंझे हुए खिलाड़ी की तरह मेरे लंड को चूसने लगी और लंड से निकलते हुए रस को पीने लगी.
जब उसने मेरे लंड का रस पूरी तरह से पी लिया तो मैंने प्रिया को एक बार फिर पलंग पर लेटाया और उसकी टांग को हवा में उठाकर उसकी बुर पर अपनी जीभ लगा दी और उसके बुर से बहते हुए रस का सेवन करने लगा।
एक दौर खत्म हो चुका था… मेरा लंड मुरझा चुका था और प्रिया भी सुस्त हो चुकी थी।

प्रिया उठकर बैठ चुकी थी लेकिन इतनी सुस्ती छाने के बाद भी मुझे उसके मम्मे आकर्षित कर रहे थे, खासतौर पर उसके मम्मों के बीचोबीच भूरे-काले रंग के बिन्दी, जो तने हुए थे और मुझे बताने की कोशिश कर रहे थे कि प्रिया अभी भी चाह रही है कि मैं उसके मम्मो को पियूं।
प्रिया शायद मेरे मन के भाव को समझ गई थी, इसलिये अपने मम्मे को पकड़कर मेरे मुंह में डालते हुए बोली- मेरे प्रियतम, लो इसको पियो!
मैं बारी-बारी से उसके दोनों निप्पल को चूसने लगा। मैं उसके दूध को पीने का मजा ले रहा था और प्रिया अपने कोमल हाथों से मेरे जिस्म को सहला रही थी खासतौर से जांघ और लंड के आस पास की जगह को!
लेकिन लंड महराज अभी मूड में नहीं थे.
तभी प्रिया ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर लेट गई और मेरे हाथों को पकड़ कर अपने मम्मों के ऊपर रख दिए।
मेरे लिये आसान था, वो ऊपर से मेरे लंड को किसी तरह से अपनी बुर पर टच करने की कोशिश करती, इधर मैं उसकी चूची को मसलने के साथ-साथ उसके मुलायम बुर को भी सहला रहा था, उसकी दोनों फांकों को मल रहा था और दाने को अपनी उंगलियों के बीच लेकर उसे बड़ी ही बेदर्दी के साथ मसल रहा था। जबकि प्रिया मेरे लंड के सुपारे को अपने नाखून से रगड़ रही थी.
धीरे धीरे लंड टाइट होने लगा और उसकी बुर से टकराने लगा।
अब प्रिया एकदम से पल्टी और मेरे जिस्म से खेलने लगी, वो मेरे निप्पल को अपने दांतों से काट रही थी तो कभी उसके ऊपर अपनी जीभ चला रही थी। धीरे-धीरे वो अपनी जीभ को मेरे पूरे जिस्म पर चलाती जा रही थी, वो नाभि तक पहुंच चुकी थी, मेरे दोनों पैरों के एड़ी कूल्हों से टच करने लगी।
प्रिया अब मेरे पैरों के बीच में आ चुकी थी और वो मेरे लंड को अपने मुंह के अन्दर लेकर मेरे अंडों के मसल रही थी, हालांकि अंडे दबने के कारण मुझे कुछ दर्द से महसूस होने लगा था, लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था.
फिर वो मेरे अण्डों को अपने मुंह में भरकर अपनी एक उंगली को मेरे गांड के अन्दर डालने लगी.
मैं कुछ चिहुंका, लेकिन सोचकर कि मैंने भी इसकी गांड में उंगली भी की थी और गांड मारी भी थी, मैंने अपनी कमर थोड़ा सा हवा में उठा लिया ताकि उसको आसानी हो जाये।
फिर प्रिया ने मेरे कूल्हे को अच्छे से फैलाया और अपनी जीभ लगा दी।
मैंने पूछा- प्रिया यह क्या कर रही हो?
वो कुछ बोली नहीं और अपना काम जारी रखा.
जब फोर प्ले से वो फुर्सत पा गई तो वो नीचे से ऊपर की तरफ बड़े ही अदा से आने लगी और एक बार फिर मेरे ऊपर चढ़ गई और इस बार मेरे लंड को अपनी बुर के अन्दर भर लिया और लेटे ही लेटे वो अपनी कमर चलाने लगी, मेरा लंड उसकी बुर के अन्दर इधर से उधर टहलने लगा।
वो लगातार ऐसा ही करती जा रही थी, मैंने पूछा- अगर थक गई हो तो नीचे आ जाओ?
वो बोली- नहीं, मुझे बहुत मजा आ रहा है।
मैं बोला- जब मेरा निकलने वाला होगा और तुम समय से नहीं हटी तो मेरा पूरा माल तुम्हारे अन्दर ही चला जायेगा।
‘नहीं, मैं समय से हट जाऊंगी।’
काफी देर तक वो इस अवस्था में करती रही, मेरा माल निकलने को था, मैंने प्रिया को बताया तो वाकयी में वो हट गई और उसके हटते ही मेरा माल मेरे जांघ के आसपास गिरने लगा।
प्रिया निःसंकोच उस वीर्य को चाटने लगी।
वास्तव में हम दोनों थक चुके थे। प्रिया मेरे सीने से लगकर लेट गई, थोड़ी देर तक वो मेरे सीने के बालों से खेलती रही और मैं उसके सर को सहलाता रहा।
फिर वो उठी और टॉयलेट चली गई, उसके लौटने के बाद मैं भी फ्रेश होने चल दिया।
अब भूख लगने लगी थी, ऑर्डर पर खाना मँगाया गया। खाना खत्म-खत्म होने तक प्रिया के जाने का टाईम हो चला था, वो जाने की तैयारी कर रही थी, हालांकि वो अभी पेंटी और ब्रा में ही थी और वो मुझे इतनी सेक्सी लग रही थी, खासतौर से उसकी गांड कि मेरा लंड एक बार फिर टनटना गया और मैंने पीछे से उसको कस कर जकड़ लिया, उसके गालों और गले को बेतहाशा चूमने लगा.
वो मेरे गालों को सहलाते हुए बोली- क्या हुआ?
‘कुछ नहीं, इस ब्रा और पेंटी में तुम मुझे बहुत सेक्सी लग रही हो, इन कपड़ों में तुम्हारा जिस्म मेरे दिमाग में हावी होता जा रहा था और मेरा लंड भी टनटना गया।’ मैंने सोच लिया था कि मैं इन शब्दों को खुलकर बोलूंगा इसलिये मैं बिना रूके प्रिया से बोलता जा रहा था कि और सोच रहा हूँ कि तुम्हारी गांड और बुर की चुदाई एक बार और कर लूं।
वो मेरी तरफ घूमी और मेरी आंखों में आंखें डालकर देखते हुए बोली- तो साहब आपको मैं पेंटी और ब्रा में गजब की सेक्सी दिख रही हूँ और आपका लंड टनटना गया है, इसलिये आप मेरे गांड और बुर में अपना लंड डालना चाहते है। देखूं तो मैं भी जरा आपके लंड को?
कह कर नीचे बैठ गई और मेरे टनटनाये हुए लंड पर अपनी उंगलियों को नचाते हुए बोली- वास्तव में मेरे साहब का लंड टनटना गया है।
अपनी उंगली मेरे लंड पर चलाते हुए बोली- मेरी बुर और गांड में आपको तभी जाने दूंगी, जब आप मेरी शर्त मानेंगे?
मैंने पूछा- क्या?
तो मुझे चुप कराते हुए बोली- मैं आपसे नहीं, आपके लंड से बात कर रही हूँ।
मेरा लंड तो टाईट था ही और झटके भी खा रहा था। मेरा लंड प्रिया की बात पर ऊपर नीचे की ओर झटका खा रहा था, ऐसा लगा कि वो अपनी सहमति दे रहा हो।
प्रिया बोली- हाँ ये हुई न बात! तो शर्त यह है कि इसके बाद आप मुझसे मेरी बुर और गांड की डिमांड नहीं करेंगे।
लंड ने एक बार फिर अपनी सहमति दे दी।
प्यार से लंड को चपत लगाते हुए बोली- ये हुई न बात!
कहकर लंड को अपने मुंह में भर लिया और आईसक्रीम की तरह चूसने लगी।
कुछ देर चूसने के बाद प्रिया खड़ी हुई और अपनी पेंटी उतारने लगी, मैंने उसे रोकते हुए कहा- नहीं इस बार तुम पेंटी पहने ही रहो, बस थोड़ा झुक जाओ!
वो झुक गई।
मैंने उसकी पेंटी को एक किनारे किया और उसकी गांड और बुर को थोड़ा सा चाटकर गीला किया। उसके बाद लंड महराज को अन्दर प्रवेश करा दिया।
चुदाई का दौर शुरू हो चुका था। मैं उसकी गांड और बुर को बारी-बारी से चोद रहा था और वो भी आह-ओह करके मेरा उत्साह बढ़ा रही थी।
8-10 मिनट तक मेरे लंड और उसकी बुर और गांड के बीच चोदा चोदी होती रही कि अचानक प्रिया चिल्लाई- शक्ति, मेरे अन्दर से कुछ निकल रहा है!
इतना कहकर वो ढीली पड़ गई।
अंत में मैं जब झड़ने को हुआ तो एक बार फिर प्रिया ने अपने मुंह में मेरा पूरा माल ले लिया। फिर दोनों लोग अपने आपको साफ किये और प्रिया घर जाने के लिये तैयार हुई।
मेरे होंठों को चूमते हुए बोली- इन तीन दिनों को मैं भूल नहीं सकती। जिन्दगी भर मेरे अहसास में यह दिन रहेगा।
उसके बाद वो चली गई।
हालांकि उसके बाद प्रिया से मिलना केवल ऑफिस में होता है। अब प्रिया में इतना बदलाव मेरे प्रति आया है कि वो अब मेरा ध्यान ऑफिस में रखती है और मैं यह ध्यान रखता हूँ कि मेरी वजह से वो दूसरों के सामने रूसवा न हो।
दोस्तो नई बुर की चुदाई की कहानी कैसी लगी।


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